Update 43
फिर अपने गीले अंगूठे को वो रश्मि के मुम्मों तक ले गया और उसके निप्पल को अंगूठे और उंगली के बीच फँसा कर नीचे की तरफ खींच दिया.
रश्मि दर्द से कराह उठी : “अहह उम्म्म्मममम ”..
पर साथ ही उसकी चूत से भी गर्म हवा के भभके निकलने लगे..
समीर का लॅंड उसके पेट पर ठोकरे मार रहा था, समीर ने उसे आँखो से इशारा किया तो वो झपटकर उपर आई और उसके लॅंड को अपने मुँह मे लेकर उसका रस पीने लगी.
आज तो वो ऐसे बिहएव कर रही थी जैसे वो उसके लॅंड को उखाड़ कर खा जाएगी
झटके लगने से उसका पेग भी छलक रहा था
उसने गिलास और सिगरेट को साईड मे रखा और फिर दोनो हाथों से उसके बालों को पकड़कर ज़ोर-2 से अपने लॅंड के उपर मारने लगा
और जब उसे लगने लगा की अब ज़्यादा नही रोक पाएगा तो उसने अपना लॅंड छुड़ा लिया और रश्मि को अपनी गोद मे खींच कर उसकी चूत के अंदर अपना लॅंड पेल दिया
वहीं सोफे पर बैठे -2 वो रश्मि को अपनी गोद मे बिठा कर चोदने लगा
और यही वो समय था जब काव्या अपने कमरे से निकल कर नीचे जा रही थी, लोकेश के पास, अपने मा बाप के कमरे से आ रही उत्तेजना से भरी चुदाई की आवाज़ों को सुनकर वो समझ गयी की ये उसके जलवे का ही कमाल है जो समीर उसकी मा को ऐसे चोद रहा है
वो मुस्कुराती हुई नीचे उतर आई, क्योंकि अब खुजली उसकी चूत मे भी हो रही थी
इसी बीच, समीर ने रश्मि को बेड पर लेजाकर घोड़ी बना दिया और पीछे से उसकी चूत मे दाखिल हो गया
और अगले दस मिनट तक वो उसे बुरि तरह चोदता रहा
और जैसे ही उसके लॅंड का पानी निकल कर रश्मि की चूत मे जाने लगा, उसके मुँह से अनायास ही निकल गया : “ओह काव्य्ाआआआअ”..
वैसे तो उसने सिर्फ़ बुदबुड़ाए थे वो शब्द पर रश्मि के तेज कानो ने उन्हे सुन ही लिया..
और उन्हे सुनते ही उसके पुर शरीर मे एक सनसनाहट सी दौड़ गयी…
उसे समझते देर नही लगी की समीर की गंदी नज़रें उसकी जवान बेटी पर है, इसलिए वो उसे चोदते हुए अपनी आँखे बंद करके उसकी बेटी का नाम ले रहा है…पर वो कर भी क्या सकती थी…उसने मन ही मन निश्चय कर लिया की वो अपनी बेटी को जितना हो सकेगा , समीर से दूर रखेगी..अभी उसे पता चल गया है, ऐसा उसने शो ही नही किया..
चुदाई के बाद समीर ने अपना जाम ख़त्म किया और दस मिनट मे ही गहरी नींद के आगोश मे चला गया, और पीछे रह गयी अपनी बेटी की चिंता मे उसकी माँ रश्मि, जिसकी आँखो से नींद कोसो दूर थी.
पर उस बेचारी को ये पता नही था की जिस बेटी को बचाने के लिए वो अपनी नींद खराब कर रही है वो खुद इस समय क्या करने गयी हुई है..
लोकेश के कमरे के बाहर पहुँचकर काव्या ने धीरे से दरवाजा खड़काया.
लोकेश अपने बाथरूम मे था , अपने शरीर कि गर्मी को वो नहा कर निकाल रहा था
उसने टॉवल लपेटा और दरवाजा खोलने के लिये बाहर आया
दरवाजा खोलते ही काव्या जल्दी से लोकेश को धक्के देते हुए अन्दर आ गयी और दरवाजा बंद कर दिया
लोकेश का टॉवल गिरते-2 बचा.…
लोकेश : “क्या हुआ, इतनी जल्दी किस बात की है ”
काव्या : “वो…..मुझे लगा की शायद कोई मुझे यहा आते हुए देख रहा है”.

