Update 41
काव्या ने वहां छुपना सही नहीं समझा , वो चुपके से वहां से निकल कर वापिस अपने कमरे मे चली गयी.
और उसने रूम मे पहुँचते ही सबसे पहले फोन निकाला और अपनी सहेली श्वेता को फोन लगाकर उसे अभी तक कि सारी बाते सुना डाली..
श्वेता उसकी बाते सुनकर काफी हैरान हुई, और नाव वाला किस्सा सुनकर खुश भी हुई, उसने आने वाले दिनो के बारे मे काव्या को कुछ समझाया और फ़िर उसने फ़ोन रख दिया.
अब अपने बेड पर लेटकर काव्या अभी तक कि सारी बाते सोच रही थी.
समीर ने उसकी माँ से शादी तो कर ली, पर एक पति कि तरह वो पोसेसिव बिल्कुल भी नहीं है, उसे अपनी बीबी को अपने दोस्त के साथ शेयर करने मे कोई परेशानी नहीं है, और जब वो अपनी बीबी के साथ ये कर सकते है तो एक दिन उसके साथ भी वो सब करेगा..
नहीं , वो अपने सौतेले बाप कि साजिश का हिस्सा कभी नहीं बनेगी, वो ऐसा कभी नहीं चाहेगी कि वो और उसकी माँ समीर की गुलामी करते हुए अपनी जिंदगी गुजारे..
उसे ही कुछ करना होगा, ताकि समीर के सामने वो और उसकी माँ लाचार बनकर ना रहे, बल्कि समीर उनके इशारों पर नाचे और इसकी लिये उसकी पास सिर्फ़ एक ही हथियार था..
उसका योवन, उसकी जवानी..
और जैसा की प्लान था, उसे सबसे पहले लोकेश को आपने बस मे करना होगा , क्योंकि जो काम वो करना चाहती थी, वो सिर्फ़ और सिर्फ़ लोकेश की मदद से ही हो सकता था.
शाम को काव्या टहलती हुई होटल के रिसेप्शन वाले एरिया मे जा पहुंची , जहां रितु तीन चार लड़कियों के साथ खड़ी थी. वो रीतु को देखकर मुस्कुराई, रीतु ने भी उसे देख और मुस्कुरा कर उसके पास आ गयी
रितु : “हाय , मेर नाम रितु है, मैं यहॉँ फ्रंट ऑफिस मैनेजर हु , ”
काव्या : “यस, पता है मुझे, लोकेश अंकल के साथ देखा था तुम्हे ”
उसकी बात सुनकर रितु एकदम से सकपका सी गयी
रितु :” तुमने …. तुमने कब देख मुझे ”
काव्या मन ही मन हंस रही थी, चोर कि दाड़ी मे तिनका
काव्या : “वो, कल जब हम आये थे यहाँ, तो तुम लोकेश अंकल से बात कर रही थी न अलग से जाकर, मैँ समझ गयी थी कि तुम यहाँ होटल कि मैनेज़र हो ”
रितु (थोड़ा मायूसी से बोली ) : “होटल कि नहीं , सिर्फ़ फ़्रंट ऑफिस कि , बस अपने प्रोमोशन के बारे मे ही बात कर रही थीं उस वक़्त , जब तुमने मुझे सर के साथ देखा था ”
काव्या समझ गयी कि क्यो वो अपने सर कि “हर” बात मान रही थी
तभी रिसेप्शन पर एक नया गेस्ट आया तो रितु उसे अटेंड करने के लिये वहां चली गई
और अटेंड करते-२ उसने अपनी शर्ट के दो बटन खोल दिये, काव्या दूर खड़ी होकर उसकि हरक़तें देख रही थी, और सीख रही थी कि कैसे मर्दों को आपने काबू मे लाया जाता है
वो वापिस अपने कमरे मे आयी और अपने कपड़ो मे से एक हॉट पेंट (छोटी सी निक्कर) निकाल कर पहन ली और उसके उपर एक कसी हुई सी टी शर्ट
उस ड्रेस मे वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी
उसे पता था कि जब उसकी माँ ऎसी ड्रेस यहाँ देखेगी तो जरूर गुस्सा करेगी , घर कि अलग बात है , पर बाहर ऐसी ड्रेस मे वो कभी नहीं निकली थी
उसकी माँ अभी-२ सोकर उठी थी और समीर के साथ बालकनी मे बेठ कर चाय पी रही थी
उसे ऐसे कपड़ो मे देखते ही वो उठ खड़ी हुई और शुरु हो गयी : “काव्या , ये क्य पहन रख है, तुझे शर्म नहि है, जगह देख ले पहले, ”
तभी समीर बोल पड़ा : “अरे, क्या प्राब्लम है इसमे, इतनी अच्छि तो लग रही है …”
उसकी नज़रें काव्या की मांसल जांघों को घूर रही थी, जैसे उनका टँगड़ी कबाब बना कर खा जायेगा वो ..

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