Update 33
”ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह समीर स्स्स्स्स्स्स्स्स ……”
वो इतनी तेज चीखी थी की उनकी आवाज वापिस आ रहे काव्या और लोकेश को भी सुनाई दे गयी, दोनों ने एक दूसरे के चेहरे की तरफ देखा और रहस्यमयी हंसी हँसते हुए जल्दी से किनारा आने की प्रतीक्षा करने लगे..
रश्मि ने समीर के लंड के ऊपर नाचते हुए पीछे मुड़कर देखा , अपनी चूत के अंदर बाहर होता हुआ समीर का लंड इतना प्यारा लग रहा था उसे की उसका मन हुआ की अभी नीचे उतरे और उसे कचर कचर करते हुए पूरा खा जाए …..
ऐसा सोचते ही उसकी चूत के अंदर अजीब सी बेचैनी होने लगी, उसे पता चल गया की उसकी चूत का ज्वालामुखी कभी भी फट सकता है , वो और तेजी से उसके ऊपर कूदने लगी, अपने मुम्मे अपने ही हाथों से मसलते हुए, उन्हें समीर के मुंह के आगे परोसते हुए, अपनी चूत मरवाते हुए, पागलो की तरह चिल्लाते हुए, वो अपनी चूत बुरी तरह से मरवा रही थी…
अचानक वो पलट कर उसके पैरों की तरफ मुंह करके बैठ गयी, क्योंकि इस एंगल में समीर का लंड पूरा अंदर तक जा रहा था..
उसके लंड को अपनी चूत की दीवारों पर रगड़ खाता पाकर, अपने मुम्मों को अपने हाथों से मसलकर वो जोर-२ से चिल्लाने लगी..
और एक जोरदार झटके के उसके अंदर का ज्वालामुखी फट गया और वो नीचे गिर पड़ी..
”अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मैं तो गयी अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह समीर उम्म्म्म्म्म्म………मैं तो गयी ”
समीर अभी थोड़ी देर पहले ही झड़ा था, इसलिए उसे अभी बहुत टाइम लगने वाला था..
और वो इस टाइम का फायदा उठा कर रश्मि को हर एंगल में चोदना चाहता था..
उसने रश्मि को नीचे उतारा और उसे वहीँ गीली मिटटी पर घोड़ी बना दिया और उसके पीछे खड़ा होकर उसने उसकी उभरी हुई गांड के अंदर अपना लंड पेल दिया..
रश्मि को वो सब सिर्फ महसूस ही हो रहा था, कोई मजा नहीं मिल रहा था, वो तो बस अपनी गांड ऊँची किये, किसी गली की कुतिया की तरह अपनी गांड मरवा रही थी..
अगले पांच मिनट तक उसकी गांड के सारे पेंच ढीले कर दिए समीर ने, अब तो वो अपने पूरे लंड को बाहर खींचता और फिर से अंदर डालता, और वो भी बिना हाथ लगाये, उसे ख़ुशी हो रही थी की एक ही दिन में रश्मि की गांड ने उसे पहचानना शुरू कर दिया है, इसलिए बिना रोक टोक उसे अंदर ले रही है.
उसने फिर से एंगल बदला और खुद को नीचे बिठा कर उसे अपनी गॉड में बिठा लिया और उसकी गांड मारने लगा.
ऐसा करते हुए वो उसके होंठों को भी चूस पा रहा था और उसके हिलते हुए मोटे मुम्मों को भी देख पा रहा था…
समीर ने उसकी गर्दन को चूसते हुए पूछा : “अह्ह्हह्ह रश्मि , कैसा लग रहा है ”
अब रश्मि का तो काम पहले ही हो चूका था, इसलिए उसे सिर्फ समीर का लंड अंदर बाहर आता हुआ महसूस हो रहा था, फिर भी समीर को बुरा न लगे, और उसका साथ देने के लिए वो कंपकंपाती हुई आवाज में बोली : “उम्म्म्म्म्म इतना लम्बा लंड है तुम्हारा, इसे अंदर लेकर तो सिर्फ मस्ती ही आती है, बहुत मजा आ रहा है डार्लिंग, यू आर फकिंग में रियली वेल्ल ”
अपनी और अपने शागिर्द की तारीफ सुनकर समीर और भी ज्यादा उत्तेजित हो गया और किसी ड्रेकुला की तरह अपने दांतों को उसकी गर्दन में गाड़कर उसकी नरम खाल पर अपने दांतों के निशान छोड़ने लगा…
और ऐसा करते हुए उत्तेजना के मारे समीर के मुंह से गलियों की बौछार सी होने लगी
”अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह साली कुतिया, भेन चोद ,ले मेरा लंड अपनी गांड में, साली रंडी , तेरे अंदर कितनी आग है, भेन की लोड़ी, हमेशा तैयार रहती है मेरा लंड लेने के लिए, तुझे तो गली के कुत्तों से चुदवाऊँगा एक दिन , तेरी चूत की सारी खुजली मिटवा दूंगा अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ”

Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.