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update 24

लोकेश : “हाँ हाँ , क्यों नहीं, भरोसा रखो मुझपर ……”
और फिर उसकी छातियों को अपनी नजरों से भेदता हुआ वो नाव चलाने लगा..
पर उसे क्या पता था कि ये तो बस शुरुवात है, काव्या ने उसकी तरफ चेहरा करते हुए अपनी निक्कर के बटन खोले और उसे उतारने लगी, जैसे -२ उसकी निक्कर नीचे आ रही थी, लोकेश कि आँखे फ़ैल कर फटने को तैयार हो रही थी , उसने निक्कर के नीचे लाल रंग कि ही एक छोटी सी पेंटी पहनी हुई थी , जिसके अंदर उसकी फूली हुई सी चूत वो साफ़ देख पा रहा था.
नाव छोटी थी, और काव्या के पैर लगभग लोकेश को टच ही कर रहे थे जब वो अपनी टाँगे फेला कर अपनी निक्कर को बाहर खींच रही थी, उसके नरम पैरों के स्पर्श से उसके शरीर में तरंगे उठने लगी..
उसके बाद काव्या वहीँ टावल पर बैठ कर क्रीम लगाने लगी, उसने ढेर सारी क्रीम निकालकर अपने पैरों, हाथों पर मल ली और फिर अपनी ब्रैस्ट पर भी काफी क्रीम लगाकर उन्हें मसलने लगी..
ऐसा करने में काव्या को काफी मजा भी आ रहा था, उसके लम्बे निप्पल ऐसी क्रिया से बुरी तरह से खड़े होकर लहराने लगे थे, उसके नन्हे और सफ़ेद मुम्मों में एक अलग तरह कि लालिमा उतर आयी थी, जो लगातार मर्दन से और भी बढ़ती जा रही थी …
काव्या : “उम्म्म्म … ऐसा मौका कभी-२ ही मिलता है ”
वो शायद लोकेश को अपना तर्क दे रही थी
पर लोकेश तो उसकी सुंदरता में ऐसा खोया हुआ था कि उसे वो सुनायी ही नहीं दिया
लोकेश : “अन्न। …क्या …क्या कहा तुमने ??”
काव्या हंसने लगी, और लोकेश बेचारा शर्मिंदा सा होकर फिर से चप्पू चलाने लगा
अब काव्या ने भी बात थोडा और आगे बढ़ाने कि सोची..
काव्या : “अंकल आप ठीक तो है न , लगता है आप कम्फर्टेबल नहीं हो मेरे ऐसा करने से ”..
लोकेश (हकलाते हुए) : “वो वो … दरअसल … ऐसा अगर आँखों के बिलकुल सामने हो तो थोडा हो ही जाता है …. ”
काव्या : “हम्म्म्म दिख रहा है मुझे भी ”..
उसकी नजरें लोकेश के लंड को घूर रही थी जो बुरी तरह से फड़फड़ा कर बाहर निकलने के लिए छटपटा रहा था
लोकेश ने झट से अपने लंड को अपनी टांगो के बीच छुपा कर उसकी भूखी नजरों से छुपा लिया..
काव्या ने एक और बम्ब फोड़ा
काव्या : ”अच्छा अंकल , एक बात बताओ, क्या आपने आज तक अपनी इस नाव पर मास्टरबेट किया है ”
उसकी बात सुनकर लोकेश नाव से गिरते-२ बचा..
“क्याआअ ???? क्या कहा तुमने “..
उसने उतनी ही मासूमियत से कहा : “मेरा मतलब है आपने अपना कम कभी इस नाव पर निकाला है , सेक्स करते हुए या मास्टरबेट करते हुए ”..
उसकी इतनी एडवांस बातें लोकेश के सर के ऊपर निकल रही थी.
उसके मुंह से बस इतना ही निकला : “उम्म्म नहीं …यहाँ कभी नहीं ”.

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