Update 17
दोनों पर शराब पूरी तरह से चढ़ चुकी थी
समीर : “यार, तेरा टेस्ट न बकवास होता जा रहा है आजकल, कहा से तुझे वो सेक्सी लगती है, बिखरे हुए बाल, कपडे पहनने कि समझ नहीं, सुखा हुआ शरीर, जिसपर पता नहीं कोई फल लगेगा भी या नहीं, और ऊपर से उसकी हरकतें , सिर्फ रश्मि कि वजह से वो मेरे घर पर है, वर्ना …….”और इतना कहकर उसने एक और नीट पेग एक ही बार में निगल लिया.
लोकेश : “अरे , छोड़ न यार, तू भी कौन सी बात लेकर बैठ गया , अच्छा तूने भाभी से बात कि थी या नहीं, हनीमून पर जाने वाली, जो मैंने कही थी तुझे ”..
समीर : “यार, ये भी कोई उम्र है मेरी हनीमून पर जाने कि … वैसे भी टाइम ही नहीं मिला रश्मि से पूछने का , आज पूछता हु ”
लोकेश : “देख, हनीमून कि कोई उम्र नहीं होती … मेरा लोनावला में जो लेक के किनारे रिसोर्ट है, तू वहाँ चला जा भाभी को लेकर ”
समीर : “और साथ में उसका दहेज़ भी तो जायेगा, मुझे याद है, हमारी कोई बात हो रही थी बाहर जाने कि तो रश्मि ने पहले ही बोल दिया था कि जहाँ भी जायेंगे काव्या साथ ही चलेगी, उसे अकेला छोड़कर वो कहीं भी घूमने नहीं जायेगी ”
लोकेश : “अरे, तो ले जा न उसे भी साथ में, वैसे भी हनीमून में तुझे जो भी करना है वो बंद कमरे में करेगा, वो तो दूसरे कमरे में रहेगी न ”
समीर सोचने लग गया और फिर कुछ देर बाद बोला : “तो फिर एक काम कर , तू भी साथ चल, मुझे कौन सा सारा दिन बंद कमरे में रहना है, शाम को तो पेग चाहिए होता है मुझे, और अकेले पीने में वो मजा नहीं है जो तेरे साथ बैठकर पीने में है”..
लोकेश : “अच्छा, अब तेरे साथ दारु पीने के लिए मैं तेरे हनीमून पर भी साथ चलु”.
समीर : “तू अपने रिसोर्ट के एकाउंट्स चेक कर लियो ,इतने महीनो से गया भी तो नहीं है न वहाँ ”..
समीर कि बात में दम था , लोकेश ने वहाँ कि जिम्मेदारी अपने साले को सोंप रखी थी , जो सारा हिसाब किताब रखता था वहाँ का.
लोकेश : “बात तो तू सही कह रहा है, चल ठीक है, तू रश्मि भाभी से बात कर और प्रोग्राम पक्का कर ले, मैं चलने के लिए तैयार हु”.
समीर : “इसमें रश्मि से पूछने वाली क्या बात है, वो मना नहीं करेगी, उसे सिर्फ अपनी बेटी कि चिंता होती है, वो अगर साथ है तो उसे चाँद पर भी ले चलो, वो वहाँ भी चल पड़ेगी … हा हा हा ”
और फिर दोनों दोस्तों ने एक-२ पेग और पीया और इधर-उधर कि बातें करते रहे.
उनकी बाते सुनकर काव्या को बहुत गुस्सा आया था, जब समीर ने उसके बारे में वो सब बोला जो वो उसके बारे में सोचता था.
क्या वो सच में ऐसी है..
वो शीशे के सामने जाकर खड़ी हुई और अपने आप को देखने लगी.
वैसे समीर सच ही तो कह रहा था..
उसके बाल बिखरे से रहते थे हमेशा, अपने शरीर में होने वाले बदलाव के बारे में वो चिंता भी नहीं करती थी , उसके हाथ अपने आप अपनी छातियों पर चले गए , और उसने अपनी शर्ट के बटन खोलकर अपनी शर्ट उतार दी, अन्दर उसने सिर्फ एक शमीज ही पहनी हुई थी क्योंकि ब्रा पहनने में उसे परेशानी होती थी, वैसे भी उसके अभी इतने बड़े नहीं हुए थे जो वो रोज ब्रा पहना करे.. उसने अपने सारे कपडे उतार दिए और नंगी होकर सोफे पर बैठ गयी, और अपने शरीर को निहारने लगी
फिर उसने अपना फ़ोन उठाया और श्वेता को फ़ोन लगाया और हाय हेल्लो के बाद वो बोली : “एक बात बता मुझे, क्या मैं अट्रेक्टिव नहीं लगती ”..
श्वेता भी उसकी बात सुनकर हैरान हो गयी और बोली : “नहीं बैबी , ऐसा नहीं है, किसने कहा कि तू अट्रेक्टिव नहीं है ”.
उसके बाद काव्या ने वो सारी बाते श्वेता को बता दी जो उसने छुप कर सुनी थी..

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