मासी के ऐसे रिएक्सन से अशोक के मन मे जो चल रहा था वो कुछ ऐसा था जैसे किसी की शादी हुई ऑर दूल्हा सुहाग रात को दुल्हन को चोदने के लिए मर रहा था ऑर फटाफट रूम मे जा कर दुल्हन का घाघरा उठता है तो उसे पता चलता है कि चूत की जगह पे लंड है… उसने एक गे से शादी की है…. अब दूल्हे को चूत से नही गान्ड से काम चलाना पड़ेगा…
वैसे ही अशोक को महसूस हो रहा था… कहाँ वो 20-22 साल का कहाँ उसकी मासी 46-48 की
उसको इंटेरेस्ट ही नही था अपनी मासी मे उसको तो कढ़क ऑर तने हुए बूब्स चाहिए थे ना कि झूलते हुए बूब ऑर उसको चूत पसंद थी भोशड़ा नही…..
वो उसके जिसम को देख भी नही रहा था ऑर जो भी उसने देखा उसपे उसने ध्यान भी नही दिया….
हाला कि उसकी मासी इतनी भी गयी गुज़री नही थी जितना वो समझ रहा था…. उसने तो अपने मन मे मानो ठान लिया था कि हर मेच्यूर औरत के बूब्स पिल पिलाए हुए आम की तरह होते है ऑर चूत तो मानो पूरी झुर्रियों से भरी होती है जैसे 90 साल की किसी भी बूढ़ी के चेहरे पे होती है वैसे ही…..
इस वजह से अशोक उनसे दूर भाग रहा था ऑर शरमाने का नाटक कर रहा था…. उसकी मासी के छुने से या उसका लंड अपने हाथ मे पकड़ने से खड़ा नही होगा…. चलो एक बार मान लेते है कि छुने से या लंड को हाथ मे पकड़ के मसल्ने से खड़ा हो भी गया तो तुम्हारी चूत देख के फिर सो जाएगा…..
अशोक अपना मुँह घुमा देता है ऑर टीवी देखने लगता है…
मासी गुस्से मे आ जाती है ऑर कहती है…
दीपा- देख लेना एक दिन ऐसा आएगा जब तू ऐसे ही चेयर पे बैठा होगा ऑर तेरी बीवी चीनी चाइ पत्ति या मसाला लेने के बहाने पड़ोसी के घर जाएगी ऑर चुदवा के आएगी… ऑर फिर वो अशोक के रूम मे सोने चली जाती है
अशोक को भी गुस्सा आ जाता है ये बात सुन के पर वो कुछ नही बोलता…..
दूसरे दिन सुबह अशोक काम पे जाने के लिए निकल रहा था कि मनीषा ने कहा कि मासी को आज कुछ काम है तुमसे उसने कहा था कि आज तुम काम पे मत जाना…..
अशोक अपनी बहन से कहने वाला ही था कि दीदी मासी को बोलना कि मेरे कहने से पहले ही वो चला गया था……. कि तभी सामने से दीपा आ कर उसको बोलती है
दीपा- किधर जा रहा है….? आज छुट्टी कर ले मुझे काम है तेरे से….. 5 बजे हमे बाज़ार जाना है ऑर तू मेरी मदद करना सामान उठाने मे….
अशोक का पहले तो मूड खराब हो जाता है वो सोचता है और कहता है
अशोक- अपने मन मे (साली फिर पीछे पड़ जाएगी ऑर दिमाग़ खाएगी कि तेरा उठता नही तू ऐसा है तू वैसा है…. अब इस साली मे इतना दम नही है कि इसको देख के मेरा खड़ा हो जाए…. साली अगर तू जवान होती थी तो तेरे को दिखा देता कि मेरी बीवी पड़ोसियों से चुदवायेगि या पड़ोसी की बीविया मुझसे चुदवायेगि…..)
फिर सोचता है कि चलो पूरे दिन मे कभी ना कभी तो मोका मिलेगा मनीषा के साथ मज़ा लेने का….
ये सोच कर अपने मन को दिलासा दे रहा था…..
दुपेहर के 2:30 बज रहे थे सब लोग ने खाना खा लिया था ऑर सब हॉल मे बैठे थे ऑर तीनो लॅडीस गॉसिप करने लग गयी अशोक वहाँ बैठा बैठा बोर हो रहा था…. वो अपने रूम मे चला जाता है ऑर बेड पे लेट के अपनी बहन को चोदने का कोई तरकीब सोचता है….
बहुत दिमाग़ लगाने के बाद भी उसको कुछ सूझता नही है ऑर वो पक्क जाता है सोच सोच के…..
फिर वो टाइम देखता है तो 3बज रहे थे… वो सोचता है चलो आखे बंद कर के अपनी बहन को इमॅजिन कर के अपना टाइम पास कर लेता हूँ…..
ऑर फिर सोचने लगता है कि उसकी बहन उसके रूम मे आ कर उसके पैरो के पास खड़ी हो कर उसे देख रही है ऑर फिर झुक के उसके घुटनो के अगाल बगल अपने दोनो हाथ को रख देती है ऑर फिर अपने घुटने उसके पैरो के अगल बगल से रख के बेड पे चढ़ जाती है ऑर बिल्ली ( कॅट ) की तरह चलते हुए उसके लंड पर जा कर धीरे से अपनी चूत उसके उपेर रख देती है ऑर फिर अपने हाथ उसकी छाति ( चेस्ट ) पे हाथ रख देती है ऑर अपनी चूत को उसके लंड पे रगड़ने लगती है ऑर फिर थोड़ा झुक कर उसके कानो मे कहती है भैया आज बहुत मन कर रहा है हॉर्स राइडिंग का.. अपनी छोटी बहन की तमन्ना पूरी करोगे ना…? ऑर फिर अशोक क दोनो हाथो को जाकड़ के उसकी फेली हुई गान्ड पे रख देती है अपने हाथो से उसके हाथो को दबाती हुई कहती है भैया कस के पकडो अपनी बहन को कहीं मे गिर ना जाउ…..
अशोक- दीदी तुम राइडिंग करते हुए गिर ना जाओ इसलिए मेने एक डंडा लगवाया है तुम उसको डलवा लो ऑर फिर जितनी राइडिंग करनी है करो तुम गिरोगी नही…. मनीषा नीचे हाथ डाल के कहती है मनीषा- कहाँ है डंडा… ऑर उसका तना हुआ लंड पकड़ के कहती है…
मनीषा- मिल गया…. लेकिन भैया मुझे शरम आ रही है आप आखे बंद करो मे जल्दी से अपना पाजामा उतार के डंडा उंधर ले लेती हूँ….
ऑर फिर मनीषा अपना पाजामा उतार कर फिर उसके लंड को ज़िप खोल के बाहर निकालती है ऑर उसके लंड की स्किन को नीचे करती हुई उसके सुपाडे को बाहर कर के अपनी चूत मे घुसाने लगती है….. पर वो अंदर नही घुस रहा था…..
मनीषा- भैया तुम्हारा डंडा कहीं फस रहा है अंदर नही जा रहा है….. :-(
अशोक- डंडे को अंदर लेने का भी एक तरीका होता है… पहले उसे मुँह मे लो फिर अपनी जीब को गोल गोल घुमा के उसको गीला करो फिर अंदर लेना……
अशोक का लंड तो खड़ा हो चुका था इतना सब सोच सोच के ऑर वो अब सोच रहा था कि बहुत हुआ अब मुट्ठी मार कर अपने लंड को शांत कर दूं….. जैसे ही वो आख खोलने वाला था कि उसके लंड पे किसिके हाथ को महसूस करता है अशोक….
अशोक समझ गया था कि ये हाथ किसका हो सकता है….
इतने मे उसको आवाज़ आती है….
दीपा- दम है तेरे लंड मे .
ऑर फिर उसके लंड को मसल कर कहती है… आख़िर तू है किस खानदान का..? हमारे कोहरी ( फेक सरनेम ) खानदान का इतना बड़ा ऑर मोटा तो होना चाहिए तेरे लंड को…..
अशोक कोई प्रतिक्रिया नही करता है क्यू कि वो चाहता था कि उसकी मासी एक बार ये समझ जाए कि वो ना मर्द नही है उसके लंड मे भी दम है…
उसकी मासी ये जान कर खुश हुई कि अशोक एक नॉर्मल लड़का है…..
क्यू कि भोले पन की वजह से उसका आटिट्यूड ऑर उसका नेचर ऐसा था वरना वो भी बाकी औरतो की तरह होती थी…. सिंपल सीधी सादी…..
जब उसका बाप आइ मीन अशोक का नाना मरा था तो घर का खर्च इन दोनो माँ बेटी पे आ गया था माँ तो उस वक्त कपड़े सिल के या गेहू छान क महीने का 100-150 कमा लेती थी पर घर का खर्च तो 250-300 था उस वक्त जब मंजू 13 की थी ऑर दीपा का 16 वाँ साल चल रहा था….. बड़े पापा ने आइ मीन आड्वोकेट रतन लाल जो दीपा के पापा के बड़े भाई थे उनकी एज लगबग 50 के उपेर ही थी रतन लाल सबसे बड़ा भाई था इन 8 लोगो मे ऑर दीपा के पापा यानी (बीमा रामलाल कोहरी ) सबसे छोटा बेटा था…. सब लोग अलग अलग हो गये थे 8 के 8 अलग अलग रहते थे लेकिन बीमा अपने बड़े भाई से अच्छे से रहता था क्यू कि रतन लाल उसके छोटे भाई को हमेशा से सपोर्ट करता था….. तो उसके भाई के मर जाने के बाद उसने सोचा कि वो अब उनके परिवार की जितनी हो सके उतनी मदद करेगा….. पर कमला यानी कि दीपा की मम्मी को ठीक नही लग रहा था ऐसे मुफ़्त के पैसे लेते हुए तो उसने अपनी बेटी दीपा को अपने बड़े पापा के पास काम पे लगा दिया ये सोच कर कि उसके साथ रह कर वो कुछ वकालत भी सिख जाएगी ऑर काम भी करती रहेगी ऐसे मे सब खुश रहेगे… रतन को भी ऐसा नही लगेगा कि ये परिवार उनके उपेर बोझ है ओर इनको भी पैसे लेते हुए शर्मिंदगी महसूस नही होगी……..
रतन लाल ने दीपा को अपने यहाँ टाइपिंग वपिंग के लिए काम पर रख लिया 100 पर मंत पे…. कुछ महीने हो गये वो भी अच्छा काम कर रही थी…. पर रतन लाल पता नही क्यू हमेशा चिढ़े हुए रहते थे….
आक्च्युयली वो फ्रस्टरेटेड हो गये थे अपनी सेक्षुयल लाइफ से…. उसकी बीवी को जब वो लाया था तो वो एकदम दुबली पतली थी अब लंड खा खा कर एकदम मोटी ऑर झड़ी हो गयी थी… उसके फिगर की तो पूरी वॉट लग गयी थी… रतन लाल को जब बिल्कुल बर्दाश्त नही होता था तब वो अपनी बीवी का पेटिकोर्ट उपेर कर के बिना अंदर देखे लंड घुसा कर अपनी आखे बंद कर के किसी ऑर के हॉट फिगर को इमॅजिन कर के चोद देता…
उस समय दीपा भी एकदम बोली थी… वैसे आज से 30-31 साल पहले कोई भी कुवारि लड़की भोली ही होती थी शादी के पहले दिन हर लड़की को पता चलता है कि शादी के बाद रात को पति अपनी कोई चीज़ उसके पैरो के बीच मे डाल के उसको गुदगुदी करता है…. शादी के एक मंत बाद उसे पता चलता है कि वो कोई चीज़ नही लंड है ऑर वो गुदगुदी नही करता वो उसे चोद्ता है…..
रतन लाल को उसके भोले पन ऑर फ्रॅंक बिहेवियर से थोड़ी चिंता हो रही थी… वो पहले ही सेक्स क लिए मर रहा था ऑर ये बेवकूफ़ उसके हमेशा नज़दीक ही रहा करती थी…. ऑर उसकी डेस्क के सामने ही दीपा की डेस्क थी वो जब भी अपनी नज़र डेस्क से हटा कर सामने देखता तो दीपा की साइड से कसी हुई सलवार मे उसकी थाइस ही दिखती थी कभी कभी उसकी काली या सफेद कलर की पेंटी भी दिख जाती थी… वो जानबूज के ऐसा नही करता था पर ग़लती से ऐसा हो जाता था उससे…..
रतन लाल की सिचुयेशन ऐसी थी कि वो 10-15 दिन मे वो एक बार सेक्स करता था…. उसका मन तो रोज सेक्स करने को करता पर उसकी बीवी का फिगर उसके खड़े लंड को फिरसे सुला देता था
सेक्स उसपे हावी हो गया था वो बस अपनी भूख मिटाना चाहता था उसने शाम को घर पहुँच कर अपनी बीवी का पेटिकोट उपेर किया ऑर लंड डाल के किसी हॉट लड़की को इमॅजिन कर रहा था पर कोई लड़की उसको सूझ नही रही थी ऑर यहाँ उसका लंड चूत के अंदर ढीला पड़ रहा था… फिर उसको एक लड़की उसके डेस्क पे पूरी नंगी डेस्क की किनारे बैठी थी अपने दोनो पैरो को फेलाए हुए ऑर अपनी चूत का छेद खोलते हुए दिखाई दी वो कह रही थी
लड़की- आओ रतन मेरी चूत की आगोश मे अपने लंड को खो जाने दो…. रतन को वो आवाज़ जानी पहचानी लग रही थी…..
रतन का लंड अब धीरे धीरे फिर खड़ा हो रहा था….. ऑर वो अपनी बीवी को चोदते हुए इमॅजिन कर रहा था कि वो अपनी ज़िप खोल कर अपना तना हुआ लंड बाहर निकाल के उस लड़की के पास जाता है जो डेस्क पे अपने पैरो को फेला कर नंगी बैठी थी… रतन की नज़रें उसकी चूत के अंदर के गुलाबी छेद पर ही थी ऑर रतन लाल अपने हाथ मे थूक ले कर अपने सुपाडे पे लगा कर उसकी चूत मे लंड डाल कर चोदने लगता है… ऑर उसका पानी झड़ने वाला ही होता है कि तब वो लड़की कहती है…….
लड़की- ऊओह बड़े पापा आआआआआआहह ऑर चोदो ऑर अंदर तक घुसाओ अपने लंड को….. तब रतन लाल उस लड़की का चेहरा गोर से देखता है तो उसे पता चलता है कि वो जिसको इमॅजिन कर रहा था वो दीपा थी…. तब उसका लंड जो उसकी बीवी की चूत मे था अचानक एकदम तन जाता है.. रतन की बीवी को अपनी चूत मे पति के लंड को एकदम जोश मे आ कर खड़ा होते हुए महसूस कर लेती है…. उसके लंड का कठोर पन ऑर उसके लंड का जोश काफ़ी सालो बाद उसने ऐसा महसूस किया था…. जब नयी नयी शादी हुई थी तब उसके लंड मे यही कठोर पन ऑर यही जोश था…
रतन लाल का जोश देख के उसकी बीवी के मुँह से निकल ही जाता है…. आए जी ऐसा क्या देख के आए हो कि पप्पू इतने जोश मे है….?
रतन लाल पहले ही अपनी उलजान मे फसा हुआ था वो कहाँ उसकी उलझन सुलझा पाएगा….
रतन लाल का पानी निकलने वाला ही था कि वो अपनी भतीजीी को हटा के किसी ऑर को इमॅजिन करने की कोशिश करने लगा पर उसको कोई ऑर लड़की सूझ ही नही रही थी ऑर यहाँ उसका लंड अब ढीला पड़ने ही वाला था…..
अब उसको कुछ समझ ही नही आ रहा था कि वो क्या करे…..?
उसको अपनी हवस तो मिटानी ही थी केसे भी कर के… उसने सोचा कि इतनी देर से मे भतीजी को इमॅजिन कर के चोद रहा था अब 2 सेकेंड मे मेरा पानी गिरने वाला है… 2 सेकेंड ऑर इमॅजिन कर लेता हूँ किसको पता चलेगा कि मे भतीजी को इमॅजिन कर के अपनी बीवी को चोदता हूँ……
फिर रतन लाल इस बार बेशार्मो की तरह अपनी भतीजी को इमॅजिन करने लगा ऑर उसकी चूत पे थूक लगा कर अपने दोनो अंगूठो से उसकी चूत को फेला रहा था… ऑर दीपा अपने बड़े पापा का लंड पकड़ के अपनी चूत के छेद पे रख के मदहोशी भरी आवाज़ मे कहती है….
दीपा- ऊओह बड़े पापा आपके लंड की गर्माहट को मे अपनी पूरी चूत के अंदर महसूस करना चाहती हूँ इसे मेरी चूत की जड़ों तक घुसा दो ना…… ऑर रतन लाल अपना पूरा लंड अंदर घुसा देता है ऑर लंड से एक तेज़ धार पानी की निकलती है ऑर दीपा अपने नीचे के होंठो को अपने दातों मे दबाए हुए मदहोशी से रतन लाल को देखती हुई उसके पानी की गर्माहट को महसूस करते हुए आआआआआआहह की आवाज़ कर रही थी………
अब रतन लाल अपनी आखे खोल देता है ऑर अपना लंड अपनी बीवी की चूत से निकालता है…..
रतन लाल की बीवी- आज तो बड़े जोश मे थे आप….?
रतन लाल- बहुत दिनो बाद आज की हवस आज निकाल ली ना इसलिए…. अब कुछ महीने ना भी करूँ तो भी चलेगा……..
रतन लाल फिरसे अपने काम काज मे बिज़ी हो जाता है ऑर इस बार के सेक्स की वजह से वो थोड़ा रिलीफ भी महसूस करता है ऑर दीपा के कुछ पूछने या ना समझमे आने वाली बातों पे वो चिडता नही है…. कुछ दिन तक उसका मूड ठीक रहता है…. आख़िर क्यू ना रहेगा उसने बहुत सालो बाद ऐसी चुदाई की थी……
दीपा भी अपने बड़े पापा का फ्रॅंक नेचर देख कर वो भी ऑर फ्रॅंक हो गयी थी……

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