वो अपने रूम मे जा कर दरवाजा बंद कर देता है ओर टेन्षन मे आ जाता है कि अब क्या होगा…? अगर मनीषा को पता चल गया कि मेने अपना लंड उसकी गान्ड मे घुसाने की कोशिश की थी तो क्या होगा…?
पर यहाँ मनीषा यही सोच रही थी कि साला वो क्या चीज़ थी… पर उसने जबतक रिक्ट करना चाहा ऑर अपने भाई को रंगे हाथो पकड़ने का मोका भी नही मिला उसको… वो समझ तो गयी थी कि जो उसने अपनी गान्ड पे महसूस किया वो उसकी उंगली तो बिल्कुल नही थी वो तो एक मोटा तगड़ा लंड ही होगा क्यू कि उंगली इतनी मोटी नही होती ऑर उसकी पॉकेट मे ऐसा कोई समान नही था जो गोल ऑर मोटा हो…. मनीषा कोई प्रतिक्रिया नही करना चाहती थी क्यू कि अगर उसका अंदाज़ा ग़लत निकला तो वो बोहोत शर्मिंदा हो जाएगी ओर अपने भाई से कभी आख नही मिला पाएगी…
अशोक अपने रूम मे बैठे बैठे टेन्षन ले रहा था काफ़ी देर तक उसने दिमाग़ लगाया
फिर अशोक को एक आइडिया आया कि क्यू ना मे अपना मोबाइल पाजामे की जेब मे डाल लूँ वो समझेगी कि मेरा मोबाइल ही था जो उसकी गान्ड मे धसा था…
एक घंटे बाद मनीषा ने उसे खाना खाने के लिए बुलाया वो बाहर निकला तो मनीषा की नज़र सबसे पहले उसके पाजामे मे पड़ी ऑर उसे महसूस हुआ कि वो अपने भाई के लिए ग़लत सोच रही थी वो ऐसा बिल्कुल नही है… ओर फिर मनीषा के चेहरे पे फिरसे वोही रोनक आ गयी जो पिछले एक घंटे से टेन्षन मे थी… ये देख कर अशोक को भी थोड़ा रिलीफ हुआ कि चलो टेन्षन दूर हो गयी…
फिर करीब 10:30 डोर बेल बजी मनीषा ने डोर खोला तो माँ आ गयी थी नानी के घर से… फिर कुछ देर बाद हम सब अपने अपने रूम मे चले गये….
मनीषा करवट पे करवट बदल रही थी पर उसे नींद नही आ रही थी… आख बंद कर के सोने की कोशिश करती पर उसे नींद ही नई आ रही थी…
मनीषा- अपने मन मे.. अरे यार क्या हो रहा है साला नींद क्यू नही आ रही….
अपना मोबाइल उठा कर अपने फ्रेंड के मेसेज देखने बैठ जाती है कि किसने क्या मेसेज किया… तब एक लड़के का मेसेज आता है उसको… हेलो डार्लिंग अबतक जाग रही हो आओ मैं तुम्हे अपना लौडा चूसा के सुला देता हूँ…..
मसेज पढ़ के उसे गुस्सा बोहोत आता है वो उस लड़के को ब्लॉक कर के लॉगआउट हो जाती है ऑर फिरसे सोने की कोशिश करती है.. मेसेज की बात से उसे कुछ घंटे पहले की घटना याद आ जाती है ऑर वो फिरसे शर्मिंदा होने लगती है ऑर सोचती है कि मेने बिना वजह अपने भाई पे शक किया…
फिर शर्मिंदगी कब लुस्ट मे बदल जाती है पता ही नही चलता… वो उस घटना के बारे मे सोच ही रही थी तब उसके मन मे हलचल होती है कि अगर वो सचमुच लंड होता तो…..
ये सोचते ही उसका मन मचल जाता है म्म्म्ममममममम हाए क्या मोटाई थी उसकी जब गान्ड मे चुभा तब कुछ हुआ नही पर अब मेरी चूत फुदक रही है कि उसे गान्ड मे नही चूत पे टकराना चाहिए था… उस मोबाइल के स्पर्श को लंड की कल्पना कर के वो अपनी चूत को सहलाने लगी ऑर पाजामे के उपेर से ही उसे रगड़ने लगी म्म्म्ममममममम आआआआआआहह फिर अपनी चूत मे उंगली डाल कर फिंगरिंग करने लगी ऑर कुछ देर बाद उसकी पेंटी भीग गयी उसके पानी से….
नेक्स्ट डे से कुछ दिन तक अशोक नज़रे बचा बचा कर अपनी बेहन को हवस की निगाहो से देखता था
आज मनीषा फुल सेक्सी मूड मे थी कल रात को एक लड़के से सेक्सी बाते कर रही थी नेट पे अपनी फेक प्रोफाइल से उसकी चूत कल रात की बाते याद कर के फिरसे गीली हो गयी थी… ओर वो बाल्कनी मे कपड़े सुखाने को डाल कर वही खड़ी हो कर कल की बाते याद कर रही थी
ऑर यहा अशोक कुछ दिनो तक बर्दाश्त करता
रहा ऑर बस देख देख कर अपनी आखे ठंडी करता रहा फिर एक दिन उसने हिम्मत की क चलो जो होगा देखा जाएगा…. उसे अपने लंड पे दीदी की चूत या गान्ड का स्पर्श महसूस करना था वो बस मोका ढूँढ रहा था फिर एक दिन उसे मोका मिला उसकी बेहन बाल्कनी मे खड़ी थी ऑर मम्मी नहाने गयी थी… उसने पहले अपनी बेहन का पूरा बदन गोर से देखा वो झुकी हुई खड़ी थी बाल्कनी मे ऑर उसकी गान्ड का उभार देख कर उसका लंड खड़ा हो रहा था फिर उसने गोर किया कि उसके पाजामे के उपेर से उसकी पैंटी की लाइन्स नही नज़र आ रही वो समझ गया कि दीदी ने आज पैंटी नही पहनी है…. वो धीरे धीरे उसके करीब गया ऑर अपना लंड पाजामा ऑर अंडरवेर के अंदर हाथ डाल कर अपना लंड बाहर निकाला ऑर जा कर सीधा लंड उसकी बेहन की गान्ड की गॅप मे घुसा डाला ऑर अपने दोनो हाथो से उसकी आखे बंद कर दी… मनीषा पहले तो होश ही खो बैठी जब कोई मोटी चीज़ सीधा उसकी गान्ड मे धसि तो… जेसे तेसे वो हाथ हटाने की कोशिश कर रही थी ऑर यहाँ अशोक बेफिकर हो कर अपना लंड अपनी बेहन की गान्ड की दरार मे धसाए हुए था क्यूंकी इस बार उसने पहले से ही पॉकेट मे मोबाइल रख दिया था ऑर अपने लंड को मस्ती मे बड़े प्यार से अपनी बेहन की गान्ड की दरार मे रगड़ रहा था मनीषा को इस बार पूरा यकीन हो गया कि ये जो मेरी गान्ड मे धस रहा है वो कोई मोबाइल वॉबाइल नही है ये तो 100% लंड ही है फिर मनीषा को भी हल्की हल्की चूत मे खुजली होने लगी थी वो भी जानती थी कि पीछे उसका भाई अशोक खड़ा है अपना मोटा लंड उसकी गान्ड मे धसाए हुए वो भी जानबूझ के अपनी सहेलियो का नाम लेने लगी कुछ देर तक दोनो भाई बेहन अपने अपने मज़े ले रहे थे अशोक थोड़ा झुका ऑर उसका लंड सरक के मनीषा की चूत पे जा कर रुक गया ऑर फिर अशोक ने अपने लंड को बढ़ाया तो उसके लंड का सुपाडा मनीषा की चूत पे दबाव देता हुआ अंदर घुसने की कोशिश कर रहा था मनीषा भी अपने पैरो को फैलाए उसके लंड के स्पर्श का भरपूर मज़ा ले रही थी… फिर कुछ देर बाद मनीषा ने कहा…
मनीषा- मे हार गयी बताओ तुम कॉन हो…? दिव्या हो….?
अशोक ने एक हाथ उसकी आखो पे रखा ऑर थोड़ा पीछे हो कर अपना लंड वापिस अंदर डाल लिया ऑर हाथ हटाते हुवे कहा
अशोक- मे हूँ दीदी.
मनीषा- मुझे लगा मेरी सहेली दिव्या है वो मुझे सर्प्राइज़ दे रही है…
फिर मनीषा ने पूछा क्या रखा है जेब मे मुझे लग रहा था…?
अशोक- मन मे कहता है मेरा काला मोटा लंड था… मोबाइल है दीदी
मनीषा- मन मे साला बेहन्चोद मोबाइल की आड़ मे अपना लंड रगड़ रहा था मेरी गान्ड ऑर चूत मे तो धसा ही दिया था ये तो साला अच्छा हुआ कि मेने पाजामा पहना था वरना पूरा लंड घुसा देता मेरी चूत मे…. हाए साले का लंड तो मस्त मोटा ऑर तगड़ा है चूत मे घुसेगा तो मज़ा आ जाएगा……..
अशोक- क्या सोच रही हो दीदी…

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