साला बहन्चोद कहीं का – Erotic Incest Story | Update 12

साला बहन्चोद कहीं का - Bhai Behan Ki Kamuk Kahani
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अशोक अपनी बहन का रियेक्शन जानना चाहता था…. क्यू कि अभी अभी उसने उसके मुँह मे अपने लंड का पानी छोड़ा था…..

मनीषा भी ऑक्वर्ड सिचुयेशन मे थी वो अपने भाई को डायरेक्ट फेस टू फेस केसे जता ती कि वो अभी अभी लंड चूस कर बैठी है……

अशोक भी कुछ पूछ नही सकता था क्यू कि उसने लोलिगम का बहाना कर के लंड चूसने के बाद उसके मुँह मे झड के ग़लती कर दी थी…. अगर वो पूछता कि लोलिगम केसा लगा तो ये बात ज़रूर पैदा होती कि लास्ट मे जो नमकीन नमकीन उसके मुँह मे गिरा वो क्या था… तो अशोक उसका जवाब नही दे पाता……..

खेर दोनो फिर यहाँ वहाँ की बाते करने लगे….

इन दोनो की शरम कुछ हद तक कम हो चुकी थी… भाई बहन की रिश्ते की मारियादा को तोड़ कर वो थोड़ा आगे निकल चुके थे…..

हज़्बेंड वाइफ की तरह बर्ताव करने लगे थे… बस वो चुदाई नही कर रहे थे लेकिन एकदुसरे से चिपकना ऑर गले मिलना ऑर एकदुसरे के बहुत पास रहना…..

काफ़ी देर मूवी देखने के बाद मनीषा सोफे पर ही सो जाती है…. दोनो एकदुसरे से चिपके हुए लेटे थे……

रात को 1:30 के करीब मनीषा सोफे पे हिल डुल कर अपनी गान्ड को उसके लंड पे रगड़ देती…. 2-3 बार ऐसा हुआ अशोक ने अच्छा मोका पा कर उसने अपने दिल की तमन्ना जाहिर करना सुरू कर दिया…. उसने अपनी बहन को बाहों मे भर कर तो रखा था पर अब उसने अपने हाथ को सरका कर उसकी बूब्स पे रख के दबाने लगा हल्के हल्के मसल्ते हुए उसकी कमीज़ के उपेर से उसके निपल को अपनी उंगलियो मे पकड़ के धीरे धीरे मसल्ने लगा ऑर उसकी फटी हुई सलवार मे से अपना लंड उसमे डालने लगा पर सफल नही हुआ तो उसने अपनी दीदी की गान्ड की चिक को फेला कर अपने लंड को तानते हुए सीधा अंदर घुसा दिया…. ऑर फिर अपना हाथ वापिस उसकी बूब्स पे रख के उसको अपनी बाहों मे जाकड़ लिया ऑर थोड़ा ज़ोर ज़ोर से झटके मार कर अपनी बहन को चोदने लगा ऑर कहने लगा कि…..

अशोक- देखो दीदी मेरा लंड कितना तड़प रहा है तुम्हारी चूत मे जाने के लिए… तुम्हारी चूत की दीवारो से रगड़ खाने के लिए मर रहा है….. इसका कठोर पन ऑर इसकी उत्तेजना तुम्हारी चूत मे इतनी महसूस नही हो रही होगी जितनी तब होगी जब तुम्हारी चूत खुद इसको अपने अंदर समा लेगी….. जब तुम खुद अपनी चूत खोल कर मेरा लंड अपनी चूत मे लोगि तब इसकी तमन्ना ऑर इसकी इच्छा पूरी होगी…. ऑर तुम्हे भी मेरे लंड का इससे कठोर पन ऑर उतेज्ना ज़्यादा महसूस होगी….. प्लीज़ दीदी कुछ जुगाड़ लगाओ कि मे तुम्हे चोद भी दूं ऑर हमें शर्मिंदगी भी महसूस ना हो……. ऑर हमारा भाई बहन का रिश्ता भी बना रहे…….

इतना कह के अशोक ने अपना लंड एक झटका ऑर मार के ऑर बूब्स को दबा के बाहर निकाल दिया ऑर वापिस पाजामे मे डाल कर सोने लगा…

उसने अपने दिल की बात कर के अपने लिए लाइन क्लियर कर दी थी ताकि सिचुयेशन पड़ने पर दोनो तैयार रहे चुदाई के लिए या फिर इन दोनो मे से कोई एक ऐसी सिचुयेशन पैदा कर दे ताकि चुदाई हो सके……

अब तो हालत ऐसे हो गये थे कि वो एकदुसरे को हिंट दे रहे थे…..
उसकी बहन उसे बार बार हिंट देती थी कि वो उससे चुदना चाहती है…. ऑर अशोक भी उससे हिंट देने लगा था कि वो उसे चोदना चाहता है…..
अपने भाई के मुँह से उसकी तड़प सुनने के बाद मनीषा को चुदने से ज़्यादा मज़ा आ रहा था……

आज मनीषा को उसके भाई के लंड से ज़्यादा उसके मुँह से निकले शब्द उसको ललचा रहे थे……

अब मनीषा ने भी सोच लिया था कि मुझे भी कुछ करना पड़ेगा वरना हमारा कुछ नही होगा……

वो भी बिचारी क्या करती….? कोई भी बेहन डाइरेक्ट कपड़े उतार कर अपने भाई के सामने नंगी खड़ी हो कर ये तो नही बोल सकती ना…. भैया मुझे चोद डालो…. या भैया मे तुम्हारा लंड लेना चाहती हूँ अपनी चूत मे…..

मान मारियादा भी कोई चीज़ होती है हम इंसान है जानवर नही…. जानवर की तरह बड़े हो जाने पर बिना शर्मो हया के अपनी ही माँ बेहन को चोद दे…….

ऐसे रिश्तो से उबर कर चुदाई के रिश्ते बनाना बहुत मुस्किल होता है…. खास कर वो रिश्ता बहुत करीबी या नज़दीकी होता है तब….. कज़िन ब्रदर होता तो मनीषा को चुदाई करवाने मे इतना टाइम नही लगता……

खेर वो भी समझ रही थी कि मे सोफे पे उसके साथ कितना भी सोऊ या उसके लंड पे अपनी गान्ड रागड़ूं उसका कुछ मतलब नही है….. अशोक की बात मे भी दम है….. जो मज़ा खुल के चुदने मे है वेसा मज़ा नींद मे चुद के नही आएगा…..

मनीषा- अपने मन मे ( अब साला क्या करूँ जो बात आगे बढ़े….? )

अब मनीषा ने भी अपना दिमाग़ लगाना सुरू कर दिया…… उसको कुछ सूझा पर वो तोड़ा चिंतित हो गयी…. आइडिया तो ठीक ठाक था पर उसको डाइरेक्ट्ली अमल करने से थोड़ा शर्मा रही थी….
अब इसकी चिंता बस ये थी कि वो इसको अमल केसे करे….?

सोचते सोचते कब वो सो गयी उसे पता ही नही चला……

नेक्स्ट डे सुबह उठ कर उसने दिमाग़ लगाना सुरू कर दिया…

सनडे का दिन था अशोक भी घर पर ही था…. लगबग 12 बजे मनीषा को कुछ सूझा ऑर उसने अशोक के सामने अपनी बात छेड़ दी… आइ मीन अपना आइडिया को अमल करना सुरू कर दिया……

मनीषा- (अफ़सोस जताते हुए ) मेरी सब नाइटी गंदी हो गयी है कल पहन ने के लिए कुछ भी नही था इसलिए सलवार कमीज़ मे ही सो गयी…. एक नाइटी बची है पर…….

अशोक- पर क्या….?

मनीषा- इधर आ दिखाती हूँ तेरे को….

मनीषा अपने रूम मे ले जा कर उसको अपनी नाइटी दिखाती है…. अशोक नाइटी देख के हँसते हुए बोलता है……

अशोक- इसमे तुम पक्की भिखारन लगोगी…..

ऑर फिर हँसने लग जाता है……..
चूहो (रॅट) ने पूरा गाउन को कतर दिया था……

मनीषा- हसो मत…. मुझे सलवार कमीज़ मे उलझन होती है सोने मे…. इतने सारे कपड़ों की वजह से मे सो नही पाती ठीक से……

अशोक- हाँ बाबा मालूम है…. ये सिर्फ़ तेरी नही सभी प्राब्लम है…. रुक मे इसको पहनने लायक बनाता हूँ……

अशोक ने अपनी सुविधा के हिसाब से उसको नीचे से काट दिया ऑर दोनो साइड मे सिलाई (स्टिच) कर दी ओर कर्व शेप दे दिया… मनीषा ने देख के कहा….

मनीषा- मेने गाउन बोला था ड्रेस नही…. ये क्या बना दिया है…… अब इसको रख दो कही घूमने या शादी मे जाना होगा तब पहनुगी…..

अशोक-अरे ट्राइ तो करो….. इतनी मेहनत की है मेने… पहले मालूम होता तो इतनी मेहनत नही करता ना

मनीषा- लेकिन मुझे गाउन चाहिए था ड्रेस नही…..

अशोक- फालतू मे मेरा टाइम वेस्ट किया ना…..

मनीषा- तू क्यू दिमाग़ खराब कर रहा है….? मेने कब मना किया पहनने से…? मे तो ये बोली कि मुझे गाउन चाहिए था ड्रेस नही…

अशोक- अब मेने तो चूहो को नही बोला था ना कि यहाँ यहाँ से खा जाओ गाउन को…. अब उसको जहाँ जहाँ से चूहो ने काटा था वहाँ वहाँ सिलाई कर के मेने इसको बना दिया…….

फिर मनीषा ने गाउन लिया ओर पहनने चली गयी…….
इससे पहले भी उसने ऐसी ड्रेस पहनी थी पर किसी फंक्षन मे जाने के लिए घर मे वो ये सब नही पहनती थी…..

मनीषा ने अपनी सलवार कमीज़ उतार दी अब वो पूरी नंगी थी…. जबसे उसको अपने भाई के लंड का चस्का लगा था तबसे उसने ब्रा पेंटी पहनना छोड़ दिया था……

गाउन पहनने के बाद वो उसके बदन से एकदम चिपक गया ऑर वो उसकी गान्ड से बस थोड़ा ही नीचे था…. मनीषा भी समझ गयी कि वो अगर झुकी तो उसका भाई उसकी नंगी चूत के दर्शन आराम से कर पाएगा……. ऑर अगर सामने रहेगा तो उसके तने हुए मोटे निपल भी दिखेगे उसको….. ऑर फिर जब उसने मूड के देखा तो उसको एहसास हुआ कि गान्ड पर भी एकदम कसी हुई है….. जब बाथरूम का डोर खोल कर उसके पास जा रही थी तो उसकी गान्ड के लेफ्ट ऑर राइट साइड के चिक्स झटके मार कर उछल कर कभी उपेर जाते कभी नीचे आते….. ऑर उसकी गान्ड की इस उछाल के वक्त जो लहर उसकी गान्ड पर दिख रही थी मानो हर लंड फिदा हो गया हो उसकी गान्ड पर………

जिस तरह एक मॉडेल रॅंप वॉक करती है ना बिल्कुल उसी तरह….. बस फरक ये था कि उन मॉडेल ने पेंटी पहनी होती है जिसकी वजह से उनकी गान्ड उतनी नही उछलती……….

वो अपने भाई को गाउन दिखाती है ऑर मॉडेल की तरह गोल घूम कर ऑर अपने हाथो को खोल कर इशारे से कहती है केसी लग रही हूँ मे….?

अशोक- एकदम मक्खन लग रही हो दीदी……

मनीषा- तो फिर चाट लो ना…… :-)

अशोक- कहाँ चाटू….?

मनीषा- ये भी बताना पड़ेगा क्या…? चल अभी छोड़ जाने दे मे जा के कपड़े चेंज कर लेती हूँ…..

अशोक- अरे रहने दो ना…. सही तो है

मनीषा- लेकिन इन कपड़ो मे घर काम केसे करूगी……..?

अशोक- अरे बड़ी मेहनत की है मेने…. अगर अनकंफर्टबल लगे तो उतार देना…..

मनीषा- ओके ठीक है….

अबतक दुपेहर का एक बज चुका था….. मनीषा किचन मे रोटी बना रही थी ऑर साथ ही साथ भाजी भी बना रही थी….. ऑर अशोक किचन मे आ कर खड़ा हो गया ऑर बाते करने लगा……

मनीषा भी बार बार मिर्च मसाला ऑर आयिल धनिया लाल मिर्च ये सब मसले एक एक कर के थोड़ी थोड़ी देर मे झुक कर उठाने लगी….. ताकि उसका भाई उसकी नंगी गान्ड के दर्शन कर सके…….

पता नही फिर क्या हुआ कि मनीषा ने जो लहसुन छील के रखे थे वो कटोरे मे से गिर गये…. मनीषा उसको उठाने मे काफ़ी टाइम लगा रही थी…. ऑर अपनी गान्ड को भी चोडा कर दिया था…. उसकी गान्ड के चिक्स एकदम फेल चुके थे ऑर उसकी गान्ड की दरार के बीच मे उसकी गान्ड का होल क्लियर नज़र आ रहा था……….

अशोक ने कुछ देर देखता रहा ऑर उसके मन मे एक सवाल आया कि वो बस दिखाना चाहती है या फिर वो चाहती है कि मे कुछ हरकत करूँ….?

अशोक कुछ देर उसकी गान्ड की दरारो के बीच मे उसके छेद को देखता रहा…….
उसने अपना लंड बाहर निकाला ऑर उसको हाथ मे लेकर सहलाने लगा…..

अब काफ़ी देर हो चुकी थी मनीषा को अपनी गान्ड ऐसे फेला कर ऑर झुक के खड़ी हो कर…..

अशोक उसके पास जा कर खड़ा हो गया….

जब वो उठने लगी तो उसने उसकी गान्ड की दरार मे अपना लंड घुसा दिया….. उसका लंड सीधा मनीषा की गान्ड के होल पे दबाव देने लग गया….. मनीषा की तो मानो हालत खराब होने लगी….. उसने अपनी गान्ड को ऑर अपने छेद को ज़ोर्से दबा दिया ऑर टाइट कर लिया…….

लंड के सुपाडे की पॉइंट उसके होल को थोड़ा सा खोल चुकी थी……

मनीषा ने ये एक्सपेक्ट नही किया था उसे लगा था कि वो चूत मे डालेगा पर ऐसा नही हुआ वो कुछ कहती इससे पहले अशोक ने उसे कहा…..

अशोक- दीदी मुझे रोटी बनाना सिख़ाओ ना……..

मनीषा उसे रोटी बनाना सिखाने लगी…. ऑर उसने अपनी गान्ड को इतना कस कर दबा रखा था उसके लंड को ताकि वो उसकी गान्ड मे ना घुस जाए……

मनीषा को थोड़ा सा डर लगने लग गया था… क्यू कि जिस तरह से उसने अपनी गान्ड से लंड को दबा रखा था उससे उसकी मोटाई उसे मालूम पड़ रही थी…. वो समझ रही थी कि अगर मेने अपनी गान्ड को ढीला छोड़ा तो ये मोटा लंड मेरी गान्ड मे घुस जाएगा…….

मनीषा ने बोहोत ज़ोर लगा कर अपने गान्ड के छेद को बंद करने की कोशिश की पर उसके लंड के सुपाडे की पॉइंट उसके छेद से बाहर नही निकली……

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