लुका छुपी
Update 6
सपना यह देखकर एकदम से आवाक रह गई और कुछ देर तक बुत की तरह खड़ी सिर्फ और सिर्फ अखिलेंद्र के लन्ड के तरफ निहारती रही।
तभी अचानक उसे होश आया और उसने सोचा छी ! क्या मेरे पापा इतने घटिया इंसान हैं। तो क्या वो ऊपर से पाखंड करते हैं की वो काफी अच्छे , भले और नेक इंसान हैं। तो क्या सारा पूजा पाठ और एक शिक्षक की भूमिका सिर्फ एक झूठ है। क्या दुनिया ऐसी हो गई है। यह सारे सवाल एक साथ उसके मन में आने लगे ।
तभी अखिलेंद्र के तरफ से कुछ हरकत हुई और सपना दौड़कर वापस अपने कमरे में आकर भीतर वाले कमरे में आकर चादर ओढ़ के सो गई।
कुछ देर बाद अखिलेंद्र वापस आएं और सपना को आवाज लगाया लेकिन सपना सोने की नाटक करने लगी और कुछ न बोली, दरअसल उस समय वो कुछ बोलने की स्थिति में ही न थी।
अल्हीलंद्र को लगा की उसकी बेटी दिन भर के इम्तिहान और दौड़ भाग की वजह से थक के सो गई है। लेकिन सच तो यह था की सपना ने जब से कुत्ते और कुतिया तथा अपने बाप का भीषण लन्ड देखी है तब से वो काफी विचलित हो गई है।
इधर बरामदे में अखिलन्द चुप चाप लेते हुए छत की तरफ देखने लगे और उन्होंने सोचा की घर पे माला से फोन पे बात कर लूं , तभी उन्होंने घर पे फोन लगाया और कॉल शेखर ने उठाया
अखिलेंद्र : हैलो
शेखर : हा बेटा, कैसे हो , वहां पर सब कैसा है । मम्मी से बात करावो।
शेखर: सब हालचाल के बस कॉल अपनी मां माला को दे दिया और फिर माला ने कहा
माला : हेल्लो , हां जी बोलिए , कैसे हैं आप लोग, सपना pa परीक्षा कैसा गया।
शेखर : यहां सब बढ़िया से है हमलोग ठीक से सेटल हो गए हैं।
माला : अजी सुनते हैं, मेरी जौनपुर वाली बहन का कॉल आया था उसने सपना के लिए एक बेहद ही बढ़िया रिश्ता बताया है और सबसे खुशी की बात तो यह है की लड़के वालों को हमारी सपना काफी पसंद आई है । और लड़का भी काफी सज्जन और सुंदर और अच्छा कमाता है। सबसे बड़ी बात इकलौता है।
ऐसा सुनते ही शेखर को जैसे काफी सुकून मिला , एक बाप के लिए इससे बड़ा और और राहत की बात नहीं हो सकती । ऊपरवाले का बड़ा रहम है की ऐसा खुशखबरी सुनने को मिला । मानो दिन भर की थकान और मानसिक तनाव उतर गए। ऐसा कह कर अखिलेंद्र ने फोन रख दिया ।
और फिर से छत की तरफ देखने लगा और कुछ सोचने लगा । उसके मन में काफी ग्लानि और हीन भाव से जकड़ा हुआ था । ऐसा कुछ सोचते सोचते वो काफी गहरी नींद में सो गया।
इधर सपना को मानो आंखो से नींद उड़ गई है , एक तरफ उसे परीक्षा का टेंशन दूसरा उसकी गदरायी जवानी में अंगारे फूटने लगे थे जब से उसने शहर में अकेले अपने बाबूजी के साथ आई है तब से मानो अजीबो गरीब स्थिती का सामना करना पड़ रहा है और जीवन की नंगी वास्तविकता से सामना करना पड़ रहा है। इसी उधेड़बुन में वो दिन भर की घटनाओं के बारे में सोचने लगी कि कैसे उसे ऑटो वाले रिक्शा वाले घूर घूर के देखे जा रहे थे , एक दुकान पर वो पानी की बॉटल लेने गई थी एक दादाजी की तरह बूढ़े अंकल ने कैसे उसके उभारों पर खा जाने वाली नजरों से देखे जा था था । वह सोच में पड़ी थी क्या सभी मरद ऐसे ही होते हैं। तभी अचानक उसे कुत्ते कुतिया वाली दृश्य याद आ गया की कुत्ता जिस कुतिया को चोद रहा था वो एक पिल्लि थी जैसे की उस कुतिया की बच्ची हो। क्या जानवरो में इतना सेंस होता होगा की परिवार में सेक्स नहीं करना चाहिए , आदि ,इत्यादि उसके मन में कई तरह के तामसिक और ब्याभिचार वाली बाते आना शुरू हो गया था । और नई जगह पर उसे नींद भी नहीं आ रही थी , तभी उसने सोचा की चलो पापा को देख आऊ कही जग तो नहीं रहे हैं ।
जब सपना को प्यास लगा और पानी का जार बाहर बरामदे में रखा हुआ था , जहां अखिलेंद्र सो रहे थे। सपना जाना नहीं चाहती थी लेकिन एक बेहोशी और मदहोशी में सपना ने वहां जाने को व्याकुल होने लगी और पानी से ज्यादा प्यास उसे एक झलक किसी मरद को देखने का हो रहा था , इस समय वह अपने पापा की हरकत को देख कर यह भूल गई थी की वह उसके बाबूजी हैं, सिर्फ एक मर्द की झलक को आतुर होते ही वह झट से उठ बरामदे में जाकर चुपके से पानी निकाल पीने लगी , अभी उसका जमीर और अंतरात्मा उसे अपने बाबूजी के तरफ देखने से रोक रहा था तभी पानी पीते पीते एक नजर उसने उसके बाबूजी के बिस्तर पर घुमाई और उसने देखा की एक अक्खड़ मरद मदमस्त घोड़े की तरह सो रहा था ।
उसने पहली बार अपने पापा को एक मर्द की नजर से देख रही थी और सोचने लगी कि मेरे बाबूजी अभी भी कितने जवान और बोल्ड दिखते हैं , तभी उसे बाथरूम वाली घटना याद आई और अपने पापा को निहारते हुए उनके लन्ड का परिकल्पना अपने मन मस्तिष्क में करने लगी । अखिलेंद्र पांडे गहरी नींद में सो रहे थे और अपने ऊपर का कुर्ता उन्होंने निकाल रखा था ।
इस क्रम में सपना को एहसास हुआ की उसके नीचे योनि में कुछ चिपचिपा सा लग रहा है। वह उसकी कामरस था । वह काफी ताज्जुब और ग्लानि से भर गई और जल्दी से भाग कर अपने रूम में आकर रोने लगी। और परेशान होकर सोचने लगी कि ” मैं क्या करू, मैने यह क्या कर दिया अपने ही बाबूजी के बारे में सोच ऐसी गन्दी सोच, छी: मैं जीने के लायक नहीं हू।
इसी उधेड़बुन में फंसी कुछ देर सोचते रहने के बाद वह सो गई।
रात को करीब 3 बजे की बात है, अखिलेंद्र बिलकुल गहरे नींद में सो रहा था और एक कामुक स्वप्न में खोया हुआ था जिसमे एक सुनसान जंगल में एक लड़की जो दिखने में एक तेज नाक नक्श वाली तथा हल्की चर्बीदार गुदाज बदन की थी और वह आगे आगे चल रही थी उसे उसके पीछे पीछे अखिलेंद्र गया लेकिन फिर वो ओझल हो गई।
तब सहसा उसकी बीबी उसके बेड पर उसके सामने उसके चेहरे को लाल लाल आंखों से घूरे जा रही थी, बिल्कुल नंगी मादरजात जबराट माल की भांति आंखो मे जैसे जन्मों की हवस की प्यास लिए हो, अखिलेंद्र को खा जाने वाली नजरों से देख रही थी।
ऐसा देख अखिलेंद्र पहले तो घबरा गया फिर उसकी आंखो मे चमक और लन्ड में तनाव आ गई फिर अचानक उसकी बीबी माला ने अपनी निचले होंठ के कोने में अपना दांत गड़ा कर काटने लगी
कुछ ऐसे

अखिलनेद्र की तो मानो लौटरी लग गई वह मस्त होकर शरीर ऐंठने लगा, लेकिन अचानक उसके सामने से बीबी का पूरा चेहरा थोड़ा धुंधला हो जाता है और सिर्फ एक कामुक और रसदार जीभ से लपालप गिले होंठ दिखाई देने लगा और और वह लप्लापति जीभ और होंठ उसके होंठो के समीप आने लगा
अहिलेंद्र तो मानो पागल सा हो गया और जब उसके होंठ और लप्लापति जीभ एक होने ही वाली थी, तब वह अपने लंड को पेट के बल लेट कर बेड के सहारे ऊपर नीचे करते हुए मजा ले रहा था, और इतने में वह स्खलन को प्राप्त होने ही वाला था तभी वो खुद को रोक लिया, अचानक उसे लगा की अब कोई पूरा चेहरा दिखा हल्का सा, और वह चेहरा थोड़ा धुंधली है, हल्का स्पष्ट दिखने में समझ में नहीं आ रही थी लेकिन उस चेहरे में ऐसी खुमारी थी की मानी अखिलेंद्र उस धुंधले चेहरे में किसी को ढूंढ रहा हो जाने अनजाने में,
अखिलेंद्र इतना बला की सेक्सी नारी जिंदगी में नही देखा था, जितना अभी सपने में महसूस कर रहा था, उस चेहरे को काफी अच्छे से समझता था , जानता था परंतु सपने में उसे बोध नहीं हो रहा था की यह कौन है और सपने में ही अपने हाथ से अपना लंड जोर जोर से ऊपर नीचे कर उस छबि को पहचानने को कोसिस करने लगा, हालांकि वह सपने में था लेकिन अपना लन्ड जो है वो पेट के बल लेटकर बिस्तर पर ऊपर नीचे काफी समय से रगड़ रहा था , और तभी वही होता है जो हम सब समझ रहे है, जो छबि अखिलेंद्र के अवचेतन मन में समा चुका था वो कोई और नहीं उसकी बड़ी बेटी जो काफी घरेलू , संस्कारी , शुशील और सुंदर थी, अब जाकर उस लड़की का चेहरा सामने आता है और सपने की वह छवी इस अदा और इस कदर से अखिलेंद्र को दिखता है की जिसे शब्दों में बता पाना नामुमकिन है और अखिलेंद्र ने जैसे सपना का यह मादक रूप देखा तो उससे सहन न हो सका और अपनी लुंगी अंडरपैंट और बिछावन सब पर अपना वीर्य की धार अपनी बेटी के चेहरे को सपने में स्पष्ट देखते हुए छोड़ दिया और गिला कर दिया। , अब आप सोच रहे होंगे की अखिलेंद्र ने ऐसी कौन सी छवी देख की होगी जो लेखक बता पाने में असमर्थ है “तो दोस्तों, स्वप्न शास्त्र एक बेहद व्यापक विषय है और मैं उसे चंद लाइनों में नहीं बता सकता” हां कुछ सपने हमे भविष्य का इशारा दे जाते हैं।
उसी तरह सपना का यह दृश्य अखिलेंद्र को दिखा , हो न हो कहीं उसमें भविष्य की ओर कोई इशारा भी हो सकता है।
बाल बिखरे पड़े, बिलकुल अस्त व्यस्त, माथे पर सिंदूर लपेटा हुआ , जीभ निकले हुए जैसे सदियों चाटने को बेकरार जीभ को उसे उसका उचित मिठाई नहीं मिला , उस जीभ की बिबशता ऐसी थी जैसे उसकी जीभ ने अभी तक वो नमक चखा ही नहीं जो उस जीभ का वास्तविक हकदार है।
जवानी में ऐंठे हुए बदन मानो अभी तक कई गांठों को किसी ने खोला ही नहीं और काम की अग्नि में जल रही एक कामातुर स्त्री सपना का चेहरा लिए उस छवि में अखिलेंद्र ने देखा था। लेकिन माजरा यह था की सपना की मांग में सिंदूर था।






