लुका छुपी
Update 5
फिर वो एक होटल में जाकर खाना खाए और घर वापस आए, घर वापस आने के क्रम में एक पतली गली पड़ती थी , जहां ऑटोरिक्शा इन दोनों को उतार दिया अब वहां से गली होते हुए अपने घर को पहुंचना होता है। रात के 8 बज रहे थे और और वहा कोई नही था , गली भी सुनसान थी। इसी बीच गली में एक कुत्ते और कुतिया का जोड़ा ठीक इन दोनो के सामने ही चूदाई क्रिया कर रहे थे । स्थिति काफी शर्मनाक होने लगी, अब करें तो क्या करें, दोनो काफी असहज होने लगे क्योंकि एक तो सुनसान गली और जिस पतली गली में कुत्ते और कुतिया सहवास कर रहे थे वहां से होकर दोनो को गुजरना ही था , करीबन 100 मीटर की वह गली थी और आखिरी छोर पर कुत्ते और कुतिया का कार्यक्रम चल रहा था। अखिलेंद्र तो सोच में पड़ गया की यह क्या हो रहा है उसके साथ एक तो सुबह से ठरक बनी पड़ी है , ऊपर से वह सेल्स गर्ल और यहां तक कि आज अपनी बेटी को भी कामुक नजरों से देखने का पाप कर चुका हू । और अब यह स्तिथि की दोनो सुनसान गली में हैं और कुत्ता और कुतिया अपनी चूदाई कर रहें है।
अखिलेंद्र और सपना दोनो किसी से कुछ बोल नहीं रहा था और ऐसे बर्ताव कर रहे थे जैसे कुछ नहीं हुआ , परंतु उनके ठीक सामने कुत्ते कुटिया का फिल्म चल रहा था
कुत्ते की उमर ज्यादा थी और कुतिया अभी पिल्ली थी ।
अचानक कुत्ते ने स्पीड बढ़ा दी और कुतिया के मुंह से आवाज निकल गई। यह देख सपना काफी व्याकुल और गंभीर हो गई थी , वो खुद पे कितना भी कंट्रोल करे लेकिन सच तो यही है की वो एक बेहद कामुक लड़की है। आखिर वो भी अखिलेंद्र का ही खून है ।
कुछ पल की यह चूदाई देख सपना की आंखे और चेहरा लाल पड़ने लगा और शरीर कुछ गरम हो गया ।
ऐसा कुछ दृश्य ही हो गया था की दोनो बाप बेटी कुछ नहीं कर सकते थे।
अब दोनो बाप बेटी कुता और कुतिया की चूदाई के ठीक सामने से गुजर रहे थे और दोनो की सांसे गंभीर हो चली थी। दोनो झटपट वहां से जल्द से जल्द निकल गए और घर पहुंच गए।
घर आते आते रात को 8 बज गए थे , आते ही सपना पहले बाथरूम के अंदर गई क्योंकि लड़किया बाहर बाथरूम नहीं करती , घर से बॉथरूम कर निकलती हैं और वापस घर आने के बाद ही उन्हें सुकून से मूतने का मौका मिलता है। और सपना पिछले 11 घंटे से अपनी मूत को रोक के रखी थी। जैसा की कहानी के बीच में ही बताया था की जिस दो कमरों के घर में दोनो बाप बेटी रहते थे उसमे एक भीतर का कमरा सपना का था और उस कमरे के कोने में ही अटैच्ड बाथरूम था और बाहर एक बरामदा था जिसमे अखिलेंद्र सोने वाले थे , हालांकि बाथरूम बाहर छत के प्रांगण में भी था लेकिन घर में सिर्फ वही बाथरूम था । अखिलेंद्र आते ही एक जगह बैठ गए और तभी कुछ आवाज सुना उन्होंने जैसे किसी बड़े ही फोर्स में नल से पानी गिर रहा है लेकिन ध्यान से सुना तो वो नल के पानी की आवाज नहीं थी क्योंकि उस धार में काफी तीव्रता थी जिसे लेखक बताने में असमर्थ है वो आप खुद सोच सकते हो। अखिलेंद्र समझ गया की यह सिटी सा धुन और कुछ नहीं उसकी प्यारी बेटी जो एक जवान और अल्हड़ बदन की मालकिन बन गई है अपनी मस्ती में मूत रही है। अखिलेंद्र समझ नहीं पा रहा था की यह कैसी कैसी घटनाएं अचानक से उसके साथ हो रही थी । लेकिन नियति जो है वो तय होती है , इंसान अपने किए कुछ नहीं होता । जो होना होता है उसका मार्ग स्वयं बनते चला जाता है।
अखिलेंद्र अब काम पीड़ित होकर विवश हो रहा था तभी उसे याद आया की बगल के पड़ोसी रिमझिम कहां है उसे देखा जाए और उसे देखने के बहाने बाहर वाले बाथरूम में जाने लगा और बाथरूम से सटे कमरे की खिड़की से हल्का झांक के देखा तो रिमझिम अभी अभी अपने बिस्तर पर लेटी हुई मोबाइल पर कुछ देख रही थी और उसके चेहरे का भाव कुछ ऐसा था
इससे अखिलेंद्र को देख मानो सांसे रुक गई क्योंकि रिमझिम के खुले स्तन भी दिख रहे थे, मानो वो कोई कुंवारी लड़की के स्तन हो। और हो भी क्यों न रिमझिम की शादी को अभी 8 महीने ही हुए थे और शादी के दो महीने के बाद ही उसका पति उसे छोड़ कर विदेश कमाने निकल गया था और रिमझिम इस भरी जवानी की कामाग्नी में जलने पर मजबूर हो गई थी। रिमझिम की उमर सपना के बराबर ही था , एक पल अखिलेंद्र को लगा की उसकी बेटी सपना भी ब्याह लायक हो गई है और आज उसका ब्याह हो गया होता तो वो बिलकुल रिमझिम की तरह ही दिखती। अखिलेंद्र को यह भी पूरा विस्वास हो गया की रिमझिम एक खेली खाई और कामातुर लड़की है। उसने कुछ देर तक उसे झांक के अपना लन्ड लूंगी में मसल रहा था और उसका लन्ड एकदम टाइट और खड़ा हो गया साथ ही उसे जोरो की पेशाब भी लगी थी , उसने झट से बॉथरूम में घुस पेशाब करने लगा और अपने दरवाजा को लेकर बेफिक्र था क्योंकि उसे लगा सपना तो अपने कमरे में है वो इधर आयेगी नहीं और मूतते हुए बार बार रिमझिम के खिड़की के तरफ इसे देखने का नाकाम कोशिश करने लगा ।
इधर जब सपना बाथरूम से निकल कर कपड़े चेंज कर चुकी थी और उसे लगा की उसके बाबूजी कहां गए उसे लगा की उसके बाबूजी कुछ परेशान है बेचारे मेरे चक्कर में अपना काम धाम छोड़ कर इतने दूर शहर आएं हैं , उसे अपने बाबूजी पर काफी ममता का भाव जागने लगा और सहसा उन्हें देखने बाहर निकलने लगी , सपना को यह ज्ञात नहीं था की बाहर भी बाथरूम है।
कुछ कदम इधर उधर देखने के बाद उसे बाथरूम दिखा वो उस तरफ जाने लगी तो देखी बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ है और नल चल रहा है कुछ आगे बढ़ी तो सपना को जो दृश्य दिखाई दिया उससे मानो उसके पैरो की जमीन खिसक गई क्योंकि अखिलेंद्र का पूरा शहरी दरवाजे से तो ढाका हुआ था परंतु उसका फनफनात हुआ लन्ड कुछ ऐसा दिख रहा था।
सपना की आंखों में अचानक चमक आ गई और उसने सोचा की इतना बड़ा भी होता है क्या किसी का , उसे उम्मीद भी नही थी की उसके भोले भाले बाबूजी के पास ऐसा बिकराल और तगड़ा सामान हो सकता है, उसे लगा की कोई और है ये बाबूजी नहीं हो सकते तभी अखिलेंद्र ने अपना चेहरा घुमाया और आगे की तरफ झुक कर फिर रिमझिम के खिड़की के तरफ झांकने लगा ।
सपना यह देखते ही उसकी सांसे अटक गई , उसे अपने में भी उम्मीद नहीं था की बाबूजी इतने ठरकी भी हो सकते हैं और उसका चेहरे का भाव ऐसा था जैसे किसी आश्चर्य में डूबी हो और उसका मुंह खुल गया





