शाम हो गई थी, सभी तैयार होकर सपना के यहां जाने लगे थे।
गिरिजा के मन में एक डर और रोमांच दोनो घर कर गए थे।
इधर सपना के यहां सभी तैयारियां हो चुकी थी , सपना और उसका पति दोनो तैयार होकर स्टेज पर बैठ गए थे और आते जाते हुए अतिथियों का स्वागत कर रहे थे।
जो भी सपना को देखता वाह वाह कर उठता , दुल्हन का ड्रेस उसकी खूबसूरती पर चार चांद लगा रहा था ।
तभी सपना के सारे घरवाले भी आ चुके थे और सपना और उसके पति ने एकदम प्रसन्न मुद्रा में सबका स्वागत किए , सपना अपनी मां से गले मिली और फिर अपने पापा से जब मिलने की बारी आती है तो उसके कदम रुक जाते है , विदाई के समय भी वह अपने पापा के गले नहीं लग पाई थी , जिसका कारण एक अपराध बोध था जो अनजाने में रिमझिम की करतूतों की वजह से हो गया था ।
लेकिन सपना ने आज पहले अपने बाबूजी की नजरों में जैसे देखी उसके बाबूजी भी अपनी बेटी की नजरों में नजर मिलाया बस दो क्षण में सपना की आंखे उसके बाबूजी से मिली होंगी और उतने में ही सपना की नजरे स्वत: नीचे शर्म से झुक गई, ठरकी अखिलेंद्र उस आंखो की शर्म को समझ सकता था लेकिन उसे ताज्जुब हुआ की सपना की यह दशा क्यों है, खैर सपना आगे बढ़ी और अपने पापा को पकड़ कर गले लगने की कोशिश करने लगी, यह देख सब हंसने मुस्कराने लगे , अखिलंद्र एकदम हक्का बक्का होते हुए इधर उधर करता हुआ बड़ी मुश्किल से गले लगता है और तभी उसे एक झटका लगता है क्योंकि अखिलंद्र सपना के बदन की कंपन महसूस कर रहा था और जाने अनजाने में कहे या जान बुझ कर कहे सपना का एक हाथ अखिलेंद्र के लिंग से हल्का छूते हुए निकल गया । अल्हिंद्र कांप गया और स्वयं अपनी बेटी की रिसेप्सेन पार्टी में उसके गले लगने पर उत्तेजित होने लगा ।
इधर गिरिजा और माला सभी नाश्ता कर रहे थे , शेखर उनके साथ ही था वह बार बार चोर नज़रों से अपनी मां की जवानी को ताड़ रहा था उसे आज काफी सुकून और आनद की अनुभूति हुई थी जब वह अपनी मां की तस्वीर को देख कर फारिग हुआ था , और मन ही मन अब माला को चोदने का निश्चित भी करने लगा था ।
दोस्तों , शरीफों के बस्ती सबसे जघन्य अपराध हो जाते हैं।
ठीक इसी तरह अखिलेंद्र का एक संस्कारी और सभ्य परिवार अपने ही परिवार के बीच एक दूसरे के साथ लुका छुपा का खेल खेलते व्याभिचार करने लगे थे।
सबने खाना वाना खाया फिर सोनू नीचे जिस होटल में पार्टी चल रही थी वहां गया कुछ पैसे वैसे की सेटिंग कर एक कमरा बुक कर लिया था और फिर गिरिजा को मेसेज किया।
इधर गिरिजा भी पार्टी और शादी में आए मेहमानों और उनके चुहलबाज़ी से थोड़ा रोमांटिक हो ही चुकी थी ।
सोनू ने मैसेज किया : Hi Jan
गिरिजा ने मैसेज देखा और कोई रिप्लाई नहीं दिया ।
फिर सोनू ने मैसेज किया: “डार्लिंग , मैं आ चुका हूं और मैं अंदाजा लगा कर आपको देख सकता हू, कसम खुदा की करोड़ों जवानी आप पर कुर्बान हो जाए , ऐसी बला हो तुम”
गिरिजा ने सबसे नज़रे बचाते मैसेज पढ़ा और उत्तेजना की हल्की लहर में उतरने लगी , किसी महिला की तारीफ ही उसके मन में घुसने की कुंजी होती है।
सोनू ने फिर मैसेज किया : और वह बगल में खड़ी जो आपकी बहन है न वह हुबहु आपकी तरह ही दिखाई देती है , कसम से आप कुछ दिन पहले उसी की तरह लगती होंगी । क्या माल है वो भी।
गिरिजा : ” धत्त बेवकूफ, यह मेरी बेटी है” और तुम जिसे मुझे समझ रहे हो वो मैं नहीं हू , इस पार्टी में हरे रंग की साड़ी बहुतो ने पहन रखी है, खैर सामने तो आवो, में भी देखूं जरा।
सोनू: “फोटो तो देख ही लिया है आपने, अब देखा देखी नहीं होगी , सिर्फ हम और तुम एक दूसरे मिलन जुलन करेंगे।
और मन में ( चोदा चोदी होगी )
यह सब लिखते सोनू की हांथ कांप रही थी क्योंकि उसे यकीन हो चला था की आज जो होने वाला है वह एक ऐसी घटना होगी जो शायद दुनिया में पहले कभी न हुई हो।
एक बेटा अपनी मां की भावना को भड़का कर लुका छुपी में उसके बदन के साथ खेलने वाला था ।
गिरिजा : कहां ??
यह मैसेज पढ़ सोनू का लंड एकदम अकड़ गया और रिप्लाई दिया :” जहां पार्टी चल रही है उसी होटल के ग्राउंड फ्लोर के सबसे कोने वाले कमरे में जो महिला बाथरूम के बगल में है। कमरा का दरवाजा खुला होगा और लाइट ऑफ होगी आपको बस अंदर आ जाना है ।बाद बाकी मैं देख लूंगा ।
गिरिजा शरारती अंदाज में : बाद बाकी क्या देखोगे , अंधेरे में कैसे देखोगे ?
सोनू : अजी आपको तो देख देख ही तो मसल रहा हूं अपना , मिलने के बाद देखता कौन है कमबख्त।
गिरिजा का मन पूरी तरह से कमावेष में आ चुका था और उसने रिप्लाई दिया : ” कोशिश करती हूं, अगर मौका मिला तो मैसेज कर दूंगी तुम्हे “
सोनू : okay meri Ravina Tandon![]()
गिरिजा : हंसते हुए , अपनी मां को बोला है कभी रवीना टंडन
सोनू : वह मुझे रवीना टंडन नहीं मनीषा कोइराला जैसी लगती है।
गिरिजा चौंकते हुए : क्या ??? तुम अपनी मां को भी ऐसी नजरो से ??
सोनू : इसमें नजर की क्या दोष , कोई खूबसूरत है तो उसे खूबसूरत कहना गुनाह है क्या।
गिरिजा : पागल
सोनू : तुम्हारे खूबसूरती में तो पागल हो ही गया हूं।
गिरिजा : अपनी मनीषा कोइराला की खुबसुरती क्यों नहीं देख लेते । (गिरिजा भी गरम होकर incest फीलिंग की चपेट में आने लगी थी, उसे लग रहा था की सिर्फ वही ऐसी फीलिंग की पहल कर रही है , उसे नहीं पता था की वह अजनबी उसका स्वयं का बेटा उसी फीलिंग से पीड़ित होकर अपनी सगी मां से ही गंदी चैट कर रहा है)
सोनू : अजी देख लेंगे अगर आप कह रही हैं तो लेकिन पहले तो अपनी रवीना को देखेंगे आज।
गिरिजा : नो, पहले मनीषा कोइराला
सोनू : पहले रवीना
गिरिजा : तब मैं नहीं आऊंगी
सोनू : चलो आज आपको ही मेरी मनीषा कोइराला मान लेता हूं, आवो तो सही
गिरिजा की सांसे तेज होने लगी ,वह सारी दुनिया से बेखबर अपनी चैट की मस्ती के धुन में थी और सोनू भी कही सबसे दूर बैठ कर चैट कर रहा था ।
अंजू देखती है की उसकी मां मोबाइल पर क्या किए जा रही है और फिर वह थोड़ा सोचते हुए मन में कहती है की मां आजकल मोबाइल देखने भी नहीं देती किसी को, खैर उसने इग्नोर कर दिया ।
सोनू रिप्लाई करता है : जल्दी आ जाओ।
तभी गिरिजा सोचती है की क्या करूं सबको कैसे कोई बहाना बता कर यहां से निकलूं।
इसी बीच उसे एक तरकीब सूझी और वह चाय का पूरा प्याला अपने साड़ी के ऊपर जान बुझ कर गिरा लि जिससे औरों को लगे की गलती से हुई है।
और फिर माला इत्यादि महिलाएं वहां खड़ी थी उन्होंने कहा की आप नीचे इसी होटल में बने नीचे वाले वाशरूम में चले जाओ वहां जाकर साफ कर लीजिए।
गिरिजा का प्लान सफल हुआ और सबसे नज़रे बचते बचाती नीचे की तरफ जाने लगी, उसकी धड़कने तेज होने लगे , सोनू जब यह देखा की उसकी मां वाकई में नीचे वाले कमरे के तरफ जाने लगी तो वह दूसरी तरफ से दौड़ कर पहले ही उस कमरे में पहुंच कर कमरे की लाइट ऑफ कर दिया और दरवाजा खुला छोड़ दिया ।
गिरिजा आते ही उस कमरे के तरफ झांक कर देखा तो सच में उस कमरे का लाइट बंद था और दरवाजा खुला हुआ था।
सबसे पहले वह बाथरूम में गई और उसने मोबाइल निकाल मैसेज किया,
गिरिजा : “Hello Hero “
Sonu : yes meri Raveena tondon
गिरिजा : एक शर्त है।
सोनू : आदेश करिए।
गिरिजा : तुम अपने आंखो पर पट्टी बंधोगे और जब तक मैं कमरे से बाहर न निकल जाऊं तब तक तुम इसे न उतारोगे।
सोनू : फिर मेरी भी यही शर्त है और जब आप आओगे तब आपको भी अपनी आंखों पर पट्टी बांधना होगा। और हम दोनो में से कोई भी एक दूसरे से बात नहीं करना है वरना , इस जगह पर आवाज काफी गूंज रही है तो हमलोग पर किसी का भी शक जा सकता है।
गिरिजा: ओके, और मुस्कुराती हुई सोचती है , की ये लड़का तो मुझसे ज्यादा सुरक्षा की चिंता करता है, चलो जाने अनजाने सही साथी मिल गया है मुझे।
गिरिजा बिलकुल दबे पांव कमरे के अंदर प्रवेश करती है, करीब 32 वर्षों के बाद आज वह फिर से किसी पुरुष के संसर्ग को लालायित होकर काम के आवेग में एक अंधी वासना के भंवर में गिरिजा गुम हो गई थी , और जैसे ही वह इस कमरे में दाखिल हुई उसके अंदर के रोम रोम रोमांचित हो उठा। कुछ ऐसा मादक अंधेरा और उसके अंदर उसका खुद का सगा बेटा एक अजनबी 24 साल के जवान लड़के के रूप में मौजूद था।
तभी पीछे से किसी ने कमरा बंद कर दिया और गिरिजा ने जैसे ही पलट कर देखना चाहा एक मजबूत हाथ से किसी ने उसके आंखो पर पट्टी बांधने लगा,
गिरिजा हल्का प्रतिक्रिया देनी चाही क्योंकि वह जिस तरीके से किया गया हरकत था वह एक बेअदबी था।
लेकिन गिरिजा ने मन में सोचा : अब बहुत इज्जत और सम्मान पा ली तूने गिरिजा, चल आज बेइज्जती का मजा लेकर देख। और यह सोच वह गरम होने लगती है और बिलकुल बुत की तरह वहीं जमी रहती है।
गिरिजा को कोई परवाह नही था की वह लड़का खुद के आंखो पर पट्टी बांधे या देख ले , कमरे की लाइट जली या बुझी रहे, क्योंकि गिरिजा ने अपना बदन और अपना प्रेम उस बांके जवान के हाथ में दे दी थी।
तभी सोनू गिरिजा को पीछे से एक प्यार और एहसास वाला आलिंगन करता है और हल्का सा अपने बदन का भार गिरिजा के बदन पर देने लगता है।
सोनू और गिरिजा दोनो आनंद की गहन मुद्रा में आने लगे।
अद्भुत था वह नजारा एक अधेड़ जवान कामुक लंबी चौड़ी अक्खड़ महिला और एक तरफ गोरा चिट्ठा मस्कुलर बॉडी वाला बिगड़ा हुआ सांड की जोड़ी लग रही थी।
तभी सोनू गिरिजा को आगे की तरफ करता है और उसके कान के पास अपनी होंठो को ले जाकर अपनी जीभ फिराने लगता है।
गिरिजा उसकी मां मचल उठी और मुंह से गरम गरम सांसे छोड़ते हुए सिसकारी भरने लगी।
सोनू अब जाकर अपनी मां की मुंह से सिसकारी सुना तब उसे सहसा याद आया की यह तो उसकी अपनी गिरिजा मां है जो एक काफी सख्त, गुस्सैल, धार्मिक , संसाकारों वाली महिला है , या मानो ऐसा बनने का ढोंग करती हो । और इस वक्त जो उसका यह कामुक वैश्या का रूप इस लुका छुपी के माध्यम से देख रहा वही इसकी असलियत है।
यह सोच सोनू गरम होते हुए अपने होंठो से गिरिजा के होंठो को चाटते हुए उसके होंठो को अपनी होंठो में भर कर चूसने लगा, पहली , दूसरी बार गिरिजा के तरफ से कोई हरकत नहीं हुई परंतु तीसरी बार में गिरिजा खुद ही अपना होंठ उसे सौंप कर उसके होंठो को अपने होंठो से खींचने लगी और अपने मुंह जीभ में भर भर कर अपने बेटे के साथ मुख से मुख का चुम्बन का आनंद लेने लगी
Sonu aur Girija

करीब 10 मिनट तक दोनो मां बेटे एक दूसरे के जीभ से खेलते रहें दोनो को ही एक दूसरे का मुख रस लुभाने लगा था और एक किसिंग का एक मजेदार अंतराल के उपरांत सोनू ने उसके कपड़े एक भूखे भेड़िए की तरह उतारने लगा था, दरअसल इस अंधेरे और अकेलापन का फायदा उठा कर सोनू के अंदर का वहशी को उसे अपनी धार्मिक और पूजा पाठ करने वाली मां को जलील करने की इच्छा हुई।
गिरिजा इस हरकत से घबड़ा गई और खुद को उसके बांहों से छूटने का प्रयास करने लगी परंतु सोने के अंदर का जानवर उसे अजीब तरह घसीटते हुए उसको पीछे से नंगा कर दिया और खुद भी नंगा हो गया।

गिरिजा की सारा प्रतिकार एक मिनट में गायब हो गया और अचानक वह जड़वत जहां थी वही खड़ी हो गई क्योंकि उसके हाथो पर एक मजबूत लोहे का डंडा की तरह कुछ महसूस हुआ तब उसने अपने हाथ से अंधेरे में टटोला तब उसे सोनू का एक बिकराल मोटा सा फनफनाता हुआ मूसल लन्ड उसके हाथो में आते ही गिरिजा के तो जैसे दिमाग सातवें असमान में घूमने लगा और वह बिलकुल चौंक गई की किसी का इतना भी मोटा और लंबा तगड़ा लंड होता है ?
गिरिजा समझ गई की उसकी जैसी घोड़ी को अगर कोई काबू में कर सकता है तो इसी लंड से हो सकता है वरना गिरिजा को खुद पे और खुद की लंबाई चौड़ाई और मजबूती पर इतना गुरूर था जैसे देसी मर्दों से उसे कुछ असर ही न हो , इस एटीट्यूड में रहती थी वो, उसके मर्द ने भी उसे आजतक सम्पूर्ण संतुष्टि नहीं दे पाया था।
अब वह खुद सोनू की रण्डी बन कुतिया की माफिक चुद्ना चाहती थी। और अपनी सहमति उसने अपने हाथो से उसके लंड को हिलाते हुए देने लगी। और साथ ही दोनो एक दूसरे से मुंह से मुंह सटा कर होंठो का रसवादन भी करने लगे ।
गिरिजा और सोनू की बेसुध संभोग

अब सोनू का लंड मानो फट जाएगा उसने तुरंत अपना लंड अपनी मां की हाथों से निकाल कर उसके चुचियके फांकों में घिसने लगा, गिरिजा तो पुराने ख्यालात्तो वाली महिला जब यह पोजीशन देखी तब तो उत्तेजना की शीर्ष पर पहुंच खुद ही अपनी दो तीन अंगुलीयों से अपने चूत को सहलाने लगी थी।
और फिर अपना दूध पकड़ सोनू के मुंह में देकर मानो कह रही हू की मेरे स्तनों में पड़ी गांठे खोल दो मेरे बेटे और इसे पीकर मुझे हल्का करो।

काफी देर तक अपनी मां की स्तनों को चूसने के बाद वह सीधे नीचे के तरफ सरका और गिरिजा की चूत को अपने हाथ में दबा कर उसपे आधिकारिक घोषणा करता हुआ महसूस करने लगा


Uffff गिरिजा मचलते हुए अपनी हाथ पैर इधर उधर मरने लगी , वर्षो सुखी पड़े बारूद के ढेर में उसके बेटे ने माचिस जला दी थी अब उसके वेग को सहन कर पाना किसी मरद के बच्चे का ही काम था । गिरिजा बदहवास होने लगी और और बिस्तर पर वही उल्टा लेट गई
सोनू तुरंत उसकी गांड़ को नंगी करता हुआ मस्त गदराया हुआ गांड़ देख उसके मुंह में पानी आने लगा और मन में सोचने लगा : हाय! इसी गांड़ का दीवाना था मैं , और रोज दूर दूर से देख के आने भरता था , आज तो मैं इसे चाट के खा जाऊंगा ।
सोनू धीरे से गिरिजा के कान में फुसफुसाते हुए पहली बार कहा : तुम तो बिल्कुल मेरी मनीषा कोइराला की तरह हो ( यहां सोनू का आशय उसकी सगी मां से था
गिरिजा समझ गई और यह उसके मुंह से इतनी उत्तेजित हो गई की खुद ही अपनी गांड़ उठा कर उसे निमंत्रण देने लगी।
गिरिजा की नंगी gand

फिर सोनू पागल दीवानों की भांति गिरिजा की दोनो चूतड को चाटने लगा और अपनी जीभ से उसके चूतड के छेद को साफ करने लगा , गिरिजा के मुंह से खुले आम निरंतर : ahmmmmmm आआह्ह्ह्ह ऊएफएफएफ निकल रहा था और उसकी यह मादक सिसकारी सुन के सोनू और मचल मचल के उसके बदन को भोग रहा था ।
पूरे कमरे में एक व्यभिचार का गजब दौर चल गया था ।
इधर गिरिजा की बेटी अंजू अपनी मां को ढूढने लगी और काफी देर होने की वजह से वह चिंतित होने लगी।
उसको फिर ध्यान आता है की परिवार के सारे लोग तो दिख रहे हैं बस उसकी मां और उसका भाई काफी देर से गायब हैं। और किसी से पता चलता है की साड़ी खराब होने की वजह से नीचे वाशरूम के तरफ गई है।
तब वह जल्दी से अपनी मां को ढूढने नीचे की तरफ जाने लगती है ।
इधर सोनू अपनी मां की गांड़ को बिलकुल नंगा कर उसे इस कदर चाट रहा हो जैसे कोई स्वादिष्ट पदार्थ मिल गया हो

गिरिजा आनंद के सागर में गोते लगाने लगी थी और मन में सोचती है हाय यह लड़का कितना रोमांटिक है इसकी तो अब मुझे आदत लग जायेगी इतना सुख और इतना आनंद शायद ही किसी को कोई दे पाता है, सहसा तभी उसके मूसल लन्ड की याद आती है और उसकी चूत तो कब से बेकरार थी की वह लड़का जल्द से उसके चूत में अपना मोटा लंड डाल कर बेदर्दी से उसे चोदे परंतु कहने में शरमा रही थी।
गिरिजा अचानक उठ खड़ी हुई और सोनू का लिंग पकड़ उसको सहलाते हुए अपने मुंह में लेने लगी
सोनू इस अदा पर ऐसा जोश में आया की उसके मुंह से आह्ह्हह्ह् निकल गया , गिरिजा उस आवाज से थोड़ा सहम गई क्योंकि वह कुछ जाना पहचाना लग रहा था लेकिन अभी लंड के नशे में चूर वह अपना काम जारी रखते हुए उसके लिंग को अपने मुंह में भर भर कर चूसने लगी

गिरिजा को ऐसे रंडियों की भांति लंड चूसते हुए देख सोनू इतना गरम हो गया था की जैसे अब वह छूट जायेगा।
उसके भीतर के शैतान ने फिर अपनी मां को जलील करने का प्रोत्साहन दिया और वह अपनी मां के चेहरे को अपने लंड से हटा कर उसके पूरे चेहरे पर एक बदतमीजी अंदाज में अपनी अंगुलियों को फिरते हुए उसके गाल पर एक चपत लगा देता है।

सोनू के इस हरकत से गिरिजा के अंदर के भ्याभिचारणी नारी खुल कर सामने आ गई और वह वही जमीन पर लेट कर कसमसाने लगी

तभी बाहर से अंजू की आवाज सुनाई देती है जो काफी देर से चिल्ला रही थी , अचानक दोनो को होश आता है और दोनो सतर्क हो जाते हैं।
गिरिजा की तो जैसे सिट्टी pitti गुम हो जाति है और वह उठ के खड़ा होती है और अपनी साड़ी पहनने लगती है , इधर सोनू का लिंग अभी भी तना हुआ था और वह फिर से गिरिजा को अपने आलिंगन में लेता हुआ अपना लंड उसके गांड़ के दरारों में धंसा कर इसके गर्दन को और इसके मुंह को पीछे कर उसके होंठो पर अपना जीभ रख कर चूसने लगता है।
गिरिजा कसमसाते हुए खुद को छुटाने का प्रयत्न करती है, हालांकि उसका मन बिलकुल न था की वहा से आधा अधूरा रोमांस कर के जाए, वह तो सोचने लगी थी की किस भाग्य से यह लड़का उसकी जिंदगी में आया और ऐसा असीम जिस्मानी सुख दे रहा था , गिरिजा के मन में तो ऐसा आ रहा था की सारी दुनिया छोड़ कर उस लड़के के साथ कही भाग के दूसरी दुनिया में घर बसा ले, लेकिन यह सब मात्र ख्याली पुलाव था।
वह जल्द से खुद को दूर करती है और सोनू के कान में कहती है की अब नहीं, बाहर मेरी बेटी आ चुकी है अगर उसे पता चल गया तो मुझे खुदकुशी के अलावा और कोई रास्ता नहीं रहेगा ।
सोनू यह सुन सहम जाता है और उसे छोड़ देता है
गिरिजा साड़ी पहन लेती है और कपड़े ठीक करते हुए वही कुछ देर खड़ी होकर बाहर देखने लगती है और कुछ देर आवाज लगाने के बाद जब अंजू वहां से जाने लगती है तभी चुपके से गिरिजा निकलने लगती है लेकिन निकलने के पहले उस लड़के के तरफ मुड़ कर अंधेरे में ही उसे अपने तरफ खींचते हुए उसके कान को अपने मुंह में भर अपनी जीभ गिराते हुए अपने दोनो नाक के नथुनों से गरम गरम सांसे उसके मुंह पर छोड़ कहती है की : ” तू बड़ा मस्त लड़का है, अफसोस की मैं पूरा सुख न ले सकी लेकिन तु ही मेरे चूत की अधिकारी है” ऐसा कहते हुए उसके मोटे लंड को अपने हाथो से बड़े बेदर्दी से मसलती है और फिर चली जाती है।
वह जैसे ही कमरे से बाहर निकलती है और कुछ देर जाती है तभी अंजू सामने से आती दिखाई देती और गिरिजा जैसे हक्का बक्का होते हुए कुछ घबड़ाए हुए कहती है अरे बेटी तू यहां , मेरी साड़ी पर चाय गिर जाने की वजह से मैं वाशरूम आ गई थी तभी जोरों की बाथरूम आई थी तो यही फ्रेश होने लगी।
अंजू को यकीन हो गया परंतु वह देखती है की उसकी मां की बाल बिखरे हुए चेहरे पर लालिमा और आंखो में वासना का एक दुर्लभ छबि दिखाई दे रहे है जो पहले कभी ऐसी अवस्था में उसने अपनी मां को नही देखा था ।
वह अपने कश्मश में पड़ी हुई सोच ही रही थी तभी उसे बाथरूम लगा था और वह बाथरूम जा कर फ्रेश होकर जैसे निकलती है वह देखती है की बगल वाले कमरे में से सोनू निकल कर इधर उधर झांकते हुए काफी तेजी से वहां से निकला।
अंजू का माथा ठनका और उसने उस कमरे के भीतर जाने का निश्चय किया की वह इस कमरे में क्या कर रहा था और वो भी पूरी तरह अंधेरे कमरे में , क्योंकि कुछ देर पहले अंजू वहां आई थी तो कमरा बाहर से भी अंधेरा ही दिखाई दे रहा था ।
अंजू जैसे कमरे में घुसती है उसे अजीब से अहसास होने लगता है पूरा कमरा अस्त व्यस्त पड़ा था बिस्तर के सिलवट बिखरे पड़े थे जैसे उस बिस्तर पर किसी ने खूब धमा चौकड़ी मचाई हो।
अजीब तरह का एक मादक दुर्गन्ध भी आ रहा था जो उसके भाई और उसकी मां के मिश्रित वीर्य और रज से निकला हुआ दुर्गंध था।
अंजू ने मन में सोचा : ” कुछ तो गड़बड़ है “
इधर सोनू जिस कमरे से निकला है वहां जरूर कुछ व्याभिचार हुआ है। और उसकी मां भी काफी देर से इधर ही थी और दूसरी कोई लड़की या महिला इधर दिखाई नही दे रही थी ,
अचानक अंजू का माथा ठनका जब उस कमरे में उसने अपनी मां के ब्लाउज का वह पिन दिखाई दिया जो आज अंजू ने हो खुद अपना पिन निकाल कर अपनी मां को साड़ी पहनने के दौरान लगाया था।
अंजू : oo my God !!! तो क्या ये दोनो मां बेटे अकेले में सबसे छुप कर ऐसा कुछ कर रहे थे।
तभी उसके मन में आता है : छी छी मैं ये सोच भी कैसे सकती हूं, हो सकता है की कोई और बात हो।
और वह जाने लगती है परंतु वहां उस कमरे से सोनू का निकलना , उस कमरे से अजीब मादक सेक्सी दुर्गन्ध का आना और उसके मां की साड़ी का वह पिन दिखाई देना । यह सब किसी ओर इशारा कर रही है।
अंजू तो यह सोच सोच दिमाग भारी कर ली थी और उसके दिमाग में एक अजीब शैतानी ख्वाहिश जाने अनजाने में पनपने लगती है।
अंजू


