लुका छुपी
Update 25
इधर गिरिजा अपने घर वालो से कुछ सलाह मशविरा कर रही थी उसी दौरान उसने ऊपरी मन से कहा की आप सभी लोग बहुभोज में शामिल हो जाना , मैं नहीं जा पाऊंगी, इतना सुनते ही सोनू सबसे पहले कुछ बोलने ही वाला था की माला बोल पड़ी: दीदी , आप घर की सबसे बड़ी हैं, आपका जाना वहां काफी आवश्यक है क्योंकि उन्हें बुरा लगेगा। इसलिए आप भी चलिए।
कुछ और बात चीत होने के उपरांत गिरिजा ने जाने के लिए हामी भर दी।
कुछ देर के बाद शेखर और सोनू को उसके चाचा ने बुलाया और सोनू को बोला की सोनू तुम चाची और मां को लेकर हमारे गांव के अंतिम छोर पर बने एक देवता का स्थान है जहां किसी भी मांगलिक कार्यों के उपरांत प्रसाद वगैरा चढ़ाना रिवाज होता है, वहां लेकर जाओ और तुम्हारी चाची के पूजा पाठ करने तक वही रहना और लगे हाथ खेतों में भी टहल लगा कर देख लेना की गन्ना की कटाई सही से हो रही है या नहीं। इतने में ब्यूटी भी जिद्द करने लगी की मैं भी जाऊंगी तो अखिलन्द्र ने कहा ठीक है तुम भी चले जाना ।
सोनू : जी चाचा जी, और माला के तरफ नज़रे करता हुआ कहता है , चाची आप तैयार हो जाइए। माला की नजरे सोनू से मिलते ही अपने आप उसकी नजर खुद ब खुद झुक गई।
और शेखर को बोला की :” शेखर जल्द से तैयार हो जाओ क्योंकि तुम्हे सपना दीदी के ससुराल जाना है। वहां जाकर उसकी खैरियत जानो क्योंकि शादी के कुछ दिनो तक लड़की को अपनी घर की याद काफी सताती है इसलिए हमारा आना जाना लगा रहेगा कुछ दिन । तुम वहां अभी इस वक्त जाकर अपनी दीदी के साथ रहना और शाम तक हम सभी लोग बहुभोज में आएंगे तब हमारे साथ वापस आ जाना।
शेखर और सोनू दोनो तैयार हो जाते हैं।
शेखर तैयार हो गाड़ी किराए पर कर अपनी बहन की खैरियत लेने उसके सुसराल जाने लगा।
सपना को पता चला की उसका शेखर आ रहा है। तो वह काफी खुश हुई । सपना की जिंदगी मानो एक बुरे ख्वाब की तरह लगने लगी थी। कल तक वह खुद को सबसे भाग्यशाली मानती थी । इतना अच्छा लड़का और इतने समृद्ध परिवार में उसकी शादी हुई जहां धन दौलत की कोई कमी नहीं थी, परंतु सपना को जैसे ही कल पता चला की उसका पति में वो सामर्थ्य नहीं है जिससे की उसकी आग को ठंडक मिले तब से रात की उस घटना को याद कर कर रो रही थी और सभी को यही लग रहा था की घर की याद में रो रही है।
ऐसा न था की उसके पति का लिंग एकदम नाकाम था परंतु काफी छोटा , मारियल और कमजोर शिथिल सा जान पड़ता था । और सबसे ताज्जुब की बात यह थी की उस बात से उसके पति को कोई मलाल नहीं मानो यह कोई बड़ी बात नहीं थी उसके लिए और सपना को जैसे यह बात जान काफी सदमा और धक्का लगा था उसके लिए यह बात ऐसी ज्वलंत थी जिससे मानो उसकी जिन्दगी और मौत की तरह गंभीर मसला था, हालांकि सपना ने अपने पति को अपना दिल दे दिया था और उसके प्यार में भी थी और उसका अपने पति से इतना जुडाव हो चुका था जैसे इसके बिना वह नहीं रह पाएगी क्योंकि उसका पति बाकी सारे सद्गुणों से युक्त था और एक आदर्श पति की सारी निशानी मौजूद थी। परंतु सपना खुद को और खुद की जवानी के उमड़ते उस लहर को भी जानती है जिसमे उसका पति उसके साथ गोते लगाना तो दूर सही से खड़ा भी नहीं हो पाएगा । कहानी में पहले ही बताया गया था की वह एक ऐसा लड़का था जिसके लिए सेक्स और रोमांस की चीज जिंदगी में कोई खास स्थान नहीं रहता और वह सदैव अपने काम और अपने ब्यवस्याय में लगा रहता था। कुल मिला कर एक अखंड चुतीया किस्म का बंदा था। परंतु काफी सज्जन और केयरिंग था । सपना को काफी प्यार और केयर करता था , सपना भी उसे काफी प्यार करती थी लेकिन सपना एक काम देवी थी उसे सेक्स की अनंत प्यास थी ऐसी लड़कियों की प्रजाति को गजकमिनी कहते हैं उन्हें संसार की कोई वस्तु तृप्त नहीं कर सकता सिवाय एक मजबूत और दमदार लिंग के ।
क्योंकि सपना दिखने में जरूर छुईमुई और नाजुक जान पड़ती थी परंतु उसकी चूत एक गहरा समंदर था जिसे तृप्त कोई मरद का बच्चा ही कर सकता था।
शेखर पहुंचा और सपना ने जैसे ही उसे देखा जोर से दौड़ के गले लगा ली, यह बिलकुल वात्सल्य पूर्वक था। सपना तो गले लगा ली परंतु शेखर की हालत पतली होने लगी क्योंकि एक तो पहले से सपना दीदी उसके सपनो की रानी थी दूसरा शादी के बाद सपना का यौवन और भी ज्यादा मादक हो गया था ।
सपना अपने भावना में लीन होकर अपने भाई को गले लगाया था परंतु उसके नरम नरम चूची और उसकी सिल्क साड़ी के रगड़ने से शेखर गरम होने लगा और उसका लंड जो एक असामान्य लंड था उसकी छुवन सपना को महसूस हुआ और सपना गले लगाए लगाए ही चौंक कर आंखे चौड़ी कर दी क्योंकि वह समझ गई थी की यह व्यक्ति उसके खानदान का उसका भाई है तभी तो एक तगड़े लिंग का मालिक है और सच पूछे तो भाई ही बहन के लिए असली जोड़ीदार होनी चाहिए ।
वह अखिलेंद्र के लंड का स्वाद तो जानती थी परंतु शेखर का लंड अखिलंद्र से भी डेढ़ गुना जान पड़ा।
आह्ह्हह्ह्ह सपना तो अभी भी एक असंतुष्ट सुहागरात वाली खुमारी में थी , और उसने गले लगाते हुए अपने भाई से कहा : तू बहुत अच्छा किया जो आ गया, मेरा मन बिलकुल भी नहीं लग रहा था और एक बार जोर से अपने भाई को अपने बाहों में भींच कर उसके लंड के अहसास को अपने कमर और अपने नाभी के आसपास महसूस की।
शेखर को यह सब काफी आश्चर्य जनक लगा , वह चौंक गया क्योंकि उसकी दीदी से उसका ऐसे कभी शारीरिक मिलान और छूवन नहीं होता था। उसने ऐसे स्थिति की कल्पना भी नहीं थी की उसकी दीदी ऐसे उसका स्वागत करेगी ,और अब कुछ 2 मिनिट हो गए थे एक दूसरे से गले लगे हुए अब कुछ सामान्य से ज्यादा गले मिलन हो रहा था, शेखर को अजीब लगने लगा और मन ही मन सोचता की यह क्या है ??
सपना का मन टूट चुका था और वह अपनी किस्मत को स्वीकार कर उदास एवम स्वीकार भाव से यूं ही जिंदगी बिताने की सोच ली थी लेकिन उसकी घोड़ीचूत उसे शांत बैठने दे तब न ।
उसका मन तो कर रहा था की शेखर को यूं ही गले लगाए रहे।
कुछ देर के बाद दोनो अलग हुए शेखर को थोड़ा ग्लानि भाव हुआ जब उसे अहसास हुआ की उसका लिंग बिलकुल तैनात हो गया था और वो भी अपनी सगी बड़ी बहन के छुने पर जिसकी एक दिन पहले शादी भी हो चुकी है।
फिर सपना ने अपने भाई शेखर को नाश्ता वगैरा करवा आराम करने को कहा परंतु शेखर का मन विचलित हो उठा था और वह आराम करते हुए अपना मोबाइल निकाल चलाने लगा। और सपना मन में सोचने लगी की वाकई शेखर कितना बड़ा हो गया है और कितना क्यूट और हैंडसम भी दिखता है। और ऊपरी सुंदरता के साथ साथ भीतर से भी काफी सख्त और मोटा लंबा हथियार वाला है और यह सोच सोच फिर उसकी चूत में पानी आ जाति है और अचानक उसे अफसोस होने लगता है , आखिर वह क्या करे वह एक काम पिपासी लड़की बन चुकी थी और उसकी प्यास बुझाना उसके पति के बस के बाहर की बात थी। यह सोच अकेले में रोने लगी।
शेखर भी खुद को कमरे ने अकेला पाकर बहकने सा होने लगा था , उसने कमरा बंद किया और कुछ पोर्न वेबसाइट्स पर incest की सामग्री देख खुद को जलते हुये अंगारे के भांति गरम कर लिया और फिर क्या था शुरू हो गया उसका वासना का वह शैतानी तिलिस्म खेल जिसमे अपनी ही मां और बहन पर गंदी नियत रख उसके साथ संभोग की क्रिया की कल्पना करते हुए अपने लिंग को आगे पीछे करने का।
वह अपने लंड को आगे पीछे करते हुए निरंतर अभी बीते हुए कुछ पल पहले की घटना को बिलकुल धीरे धीरे 1x की स्पीड से रिप्ले करते हुए सोचने लगा और आहिस्ता आहिस्ता अपना लिंग आगे पीछे करने लगा
सहसा उसकी बयाभिचारी मन ने उसे सपना की फोटो देख के हिलाने को बाध्य किया और उसमे अपने व्हाट्स ऐप निकाला और उसमे “दीदी” नाम सर्च किया फिर उसे उसकी सपना दीदी की व्हाट्स app दिखाई दिया और वह देखता है की उसके DP पर दो महिला की फोटो लगी हुई है , वह इस प्रोफाइल फोटो को बड़ा करता है , अचानक से उसके सामने कामदेवीं की साक्षात अवतार जैसे कोई स्वर्ग से अप्सरा रंभा और मेनका की युगल जोड़ी लिए तस्वीर पर प्रकट हो गई । जी हां यह सपना ने अपने व्हट्स DP में अपनी खुद की और अपनी मां की एक साथ की अदंभ्य कामुक चेहरे की तस्वीर लगाई हुई थी। जो शायद शादी के दौरान के ही फंक्शन में लगी थी क्योंकि चेहरे पर मेकअप का ज्यादा प्रभाव दिखाई दे रहा था । लेकिन उस कामुक चेहरों को देख कर बुड्ढा भी अपना लंड सहलाए बिना नहीं रह सकते थे
एक तो पहले ही सोनू ने लंड हिलाने की वजह से दिमाग से सोचना बंद कर अपने लिंग से सोच रहा था उपर से यह मां बेटी की यह जानलेवा तस्वीर एक साथ दिखाई दे दिया।
नियमत: शेखर को उस फोटो को लिंग हिलाते क्रम में नहीं देखनी चाहिए परंतु शेखर ने अपने आंखो में एक तिलिस्मी चमक लाते हुए एक अजीब बेअदबी के साथ पहले अपनी बहन के चेहरे पर नजर डाल कर उसकी आंखो में झांकते हुए उसके होंठो पर पप्पी दे डाली उसकी नाकों के नथनों को देख अपना लंड एकदम जोर जोर से हिलाने लगा लेकिन ज्यों ही उसकी नजर अपनी सगी मम्मी माला पर गया और साथ ही माला की कामुक फूले हुए होंठ अनुभवी नाक और नाक के अगल बगल एक गंभीर अनुभव भाव और आंखो में एक प्यास दिखी उसका लंड ने जोर से अपना पिचकारी छोड़ने लगा और और शेखर तस्वीर में ही अपनी आंख से अपनी अपनी मां की आंखो मे झांकते हुए एक बदतमीजी के साथ अपना वीर्य छोड़ने लगा और कुछ देर बाद शांत पड़ के सोने लगा।
सपना की व्हाट्स एप की DP

शेखर झड़ते हुए

इधर सोनू ने भी अपने चाचा के कहे अनुसार सबको पूजा के लिए गया था , तभी ब्यूटी और सोनू खेत में चले गए की गन्ने की कटाई सही से चल रही है या नहीं इसकी जायजा लेने ।
ब्यूटी 16 साल की मस्त कुंवारी खिली हुई फूल थी , उसके लाल लाल सुर्ख होंठ और खिली हुई त्वचा देख सोनू पहले भी मोहित हो चुका था और इस वक्त अकेला उसके साथ होकर उसके अरमानों ने हवा देना शुरू हो गया था और उसका मन कर रहा था की ब्यूटी की होंठो को अपने मुंह में भर के चूस जाऊ लेकिन ब्यूटी को इस बात की भनक नहीं थी की सोनू भैया एक ठरकी किस्म के आदमी हैं और वह अपनी मस्ती के धुन में आगे आगे चली जा रही थी और इसके मस्त हल्के फूले हुए गांड़ की थिरक देख सोनू लंड मसल रहा था । परंतु उसकी हिम्मत नहीं हुई कुछ करने की , खैर खेतो की कटाई देख वह वापस आ गए और पूजा खत्म होते ही सभी घर को आ गए ।
शाम के वक्त सभी बहुभोज में जाने की तैयारी कर रहे थे तभी सोनू ने फिर से गिरिजा के नंबर पर मैसेज किया ।
Hi , आज का इंतजार है आपका ।
गिरिजा : अपने अरमान में काबू में रखो और मैं किसी से मिलना जुलना नहीं करती हू, समझे tum
Sonu : sad इमोजी भेजते हुए लिखता है ठीक है लेकिन आपको अगर शर्म आ रही हो तो हम एक दूसरे को बिना देखे ही मिल लेंगे
गिरिजा : मन में मुस्कराने लगती है और लिखती है , कोई जरूरत नहीं है। एक काम करो तुम अपनी फोटो भेजो , देखू तो सही मैं जिससे बात करती हूं वह दिखता कैसा है।
सोनू बिलकुल अपने माफिक एक किसी दूसरे लड़के का नग्न फोटो भेज देता है जो बिलकुल सोनू की तरह रंग रूप हाइट, बॉडी शेप रहती है ।
गिरिजा की तो उसकी फोटो देख हक्का बक्का रह गई और सोचने लगी यह तो बिलकुल मेरे बेटे सगे बेटे सोनू की तरह ही है , वही हाइट वही चौड़ा सीना वही गोरा बदन वही नाक नक्श वैसे ही आंखे और मन में सोनू की परिकल्पना करने लगी और सोचने लगी वाकई में मै जिस लड़के से बात करती हूं वह भी तो किसी का बेटा हो होगा जिसकी मेरी उमर की मां होगी और यह सब सोच उसने पहली दफा अपने बेटे को एक मर्द की भांति एक औरत की नजर से देखने का हिमाकत किया । Uffffff इस सोच के आने मात्र से ही पहले ही क्षण में उसक चूत एक ऑटोमैटिक इलेक्ट्रिक आयरन की तरह दो सेकंड में गरम होने लगी और वह यंत्रवत अपने बाएं हाथ के तर्जनी और मध्यमा दो अंगुलियों की मदद से हल्का सा अपने चूत पर अपनी दोनो अंगुलियों से एक बार दबाव बनाई और फिर वापस अपनी दोनो उनगुलियो को चूत पर हटाया मात्र था परंतु उसकी उनगुलिया एक ऐसी तैयार अवस्था में ज्यों का त्यो बनी रही ।
और फिर उसने मैसेज किया : तुम्हारे मम्मी पापा कैसे हैं और घर में कौन कौन है।
सोनू एकदम सच सच रिप्लाई देता है : घर में मैं सिर्फ अपनी विधवा मां के साथ रहता हूं और एक बहन है जिसकी शादी हो गई है।
गिरिजा बिलकुल अवाक रह जाती है : क्योंकि यह सारी घटना उसे अपने बेटे सोनू की याद करने पर विवश करता है।
गिरिजा बहकी हुई दशा में अश्लीलता लिए हुए सोनू को एक मैसेज कर दी ।
मां के साथ अकेले रहते हो और इतने बिगड़े हो शादी कर लो अब।
सोनू : नहीं , मुझे तो सिर्फ अपनी मां के साथ ही रहना है।
गिरिजा : हा, वो तो ठीक है लेकिन क्या जिंदगी भर अपनी ठरक wrong number पर ही निकाला करोगे ??
सोनू : कुछ भी हो, लेकिन मुझे अपनी प्यारी मां से अच्छा कोई नहीं लगता। ( यह मैसेज खुद में अजीबो गरीब था , क्योंकि इसका भाव बिलकुल समझ के परे था और गिरिजा और सोनू के बीच की वार्तालाप में सोनू के इस रिप्लाई का कोई औचित्य नहीं था, परंतु सोनू ने जान बुझ कर बातों में मां का जिक्र लाने का प्रयास किया था)
गिरिजा भी सोच में पड़ गई की यह लड़का कहना क्या चाहता है क्योंकि कोई कितना भी ठरकी इंसान हो परंतु अपनी मां बहनों के प्रति तो ईमानदार तो रहता ही है।
तभी उसे याद आता है की सोनू ने ही यह बताया था की आजकल इंटरनेट पर लोग ऐसे भी होते है जिन्हे अपने ही परिवार की औरतों में मजा मिलता है ।
वह मन में सोचती है : कहीं ये लड़का भी तो ऐसाही नहीं है , हे भगवान आजकल के लडको का कोई भरोसा नहीं है , कुछ भी हो इस लड़के से बात करने का एक अलग ही नशा है ।
सोनू की वह अनजान बन चैट करने की करतूत गिरिजा के लिए एक आदत बनती जा रही थी , एक बुरी आदत जो एक लत बनते जा रही थी और गिरिजा भ्याभिचार की दलदल में रोजाना अंदर धंसते जा रही थी और उसे उस दलदल में एक अजीब सन्नाटा एक अजीब आनंद मिल रहा था।
तभी सोनू का मैसेज फिर से आया : क्या सोच रही हो जानू,मेरी फोटो पसंद नहीं आया क्या ?
गिरिजा कामावेश में थी : उसने एक चुम्मी की इमोजी भेज दी
सोनू गरम होते हुए एक कामुक कल्पनाओं का वीडियो भेज दिया जिसके एक जवान लड़के के साथ एक अधेड़ उम्र की महिला संभोग कर रही थी।
इस वीडियो को उसने ध्यान से देखा और तरह तरह के ख्यालात उसके दिमाग में आने लगे ।

गिरिजा फिर से सोच में पड़ गई इस वीडियो को देखने के बाद उसने दिमाग में यह विचार आने लगा की यह अधेड़ सी महिला एक कुंवारे जवान किशोर उमर के लड़के के साथ कैसे अश्लीलता के साथ मजे ले रही है और दिल के एक गहरे कोने में गिरिजा को जवान चिकने लड़के पसंद आने लगे ।
गिरिजा ने सोचा की इस लड़के का भी जरूर कोई n कोई चक्कर है तभी अपनी ये ऐसी video भेज रहा है।
सोनू रिप्लाई किया : आज हरी साड़ी और हरी ब्लाउज पहनना काफी सेक्सी लगोगी।
सोनू जानता था की गिरिजा के पास एक हरी साड़ी थी जिसमे वह काम की साक्षात देवी लगती थी।सोनू को वह हरी साड़ी और हरी ब्लाउज काफी पसंद था।
गिरिजा की आंखे शर्म से लाल नशीली हो गई और उसने रिप्लाई किया : “Ok”
तब तक उसकी बेटी आ गई और जो खुद एक मदमस्त जवानी लिए हुए थी। मानो गिरिजा की पूरी जवानी अंजू में झलक रही थी, अंधेरे में अगर किसी ने देख लिया तो वह असमंजस में पड़ जायेगा की कौन मां है कौन बेटी है।
और अंजू ने अपनी मां को तैयार करना शुरू कर दिया क्योंकि रिसेप्शन में जाना था ।
और वह अपने साथ एक गुलाबी साड़ी लाई थी जिसे अंजू ने खुद अपने पसंद से अपनी मां के लिए लाई थी , क्योंकि अंजु हमेशा से चाहती है की उसकी मां हमेशा यूं विधवा बन कर रूखी सूखी साधारण से नहीं बल्कि सज धज कर एक रूपवती स्मार्ट महिला बन कर रहें।
इतने में गिरिजा कहती है की : अंजू बेटा , आज मैं सोच रही थी की वो हरी वाली साड़ी पहनु , सोनू भी यही कह रहा था की “मां आज तुम यही पहनो”
गिरिजा ने बड़ी बेशर्मी से झूठी कहानी बना कर अंजू के सामने पेश कर दी ताकि अंजू को पता चले की वो हरी साड़ी क्यों पहने इस बात की पुष्टि हो जाए।
और इतना बोलकर वह वाशरूम जाने के लिए कमरे से निकल जाती है। अंजू सोचती है की ” अरे वाह , सोनू इतना समझदार हो गया की मां की पसंद नापसंद का ख्याल रखने लगा । वह यह सोच काफी प्रसन्न हो जाति है तभी सोनू कमरे में आता है , और अंजू ने उसका कान पकड़ते हुए थोड़ी मसखरी अंदाज में पूछा “क्यों जनाब कहां थे सुबह से , तैयार नहीं होना तुम्हे और क्या साड़ी पसंद किया है तूने मां के पहनने के लिए , वाह हीरो वाह!!!
सोनू ने जैसे यह सुना उसे समझते देर न लगी की उसकी मां गिरिजा भले ही दिखने ने एक सीधी साधी महिला लगती हो परंतु वह भीतर से कई गुना ज्यादा धूर्त और चालू किस्म की महिला है। और साथ ही यह सोच प्रसन्न भी हो गया था की चलो मां इतना तो खुल गई ।
गिरिजा वाशरूम से वापस आ गई और अपनी हरी साड़ी पहन तैयार होकर नीचे के तरफ आने लगी । प्राय: सभी लोग तैयार हो चुके थे लेकिन गिरिजा उन सबमें आज कहर ढा रही थी।
सोनू ने जैसे छत के कमरे से बाहर अपनी मां को देखा उसके मन मस्तिष्क पर नशा सा छा गया और अपना हाथ अपने लंड पर ले जाकर जोर जोर से पैंट के ऊपर से ही मसल कर मन में कहता है की आज तो इस मस्त मादक माल को जरूर भोगूंगा।


