लुका छुपी
Update 24
सुबह हुई, आज शादी का दिन था और काफी हलचल भरा हुआ दिन था । सभी अपने अपने कामों में व्यस्त थे । दोपहर का वक्त था और सोनू थके हारे अपने कमरे में आराम फरमा रहा था तब तक गिरिजा आती है और उसकी नजर सीधे अपने सोनू पर पड़ती है जो बेसुध होकर सोया हुआ था और आजकल की गलत आचरण की वजह से उसका लिंग तना हुआ था ।
गिरिजा को प्रथम दृष्टि उसके तने हुए पैंट के अग्र भाग में जाता है और वह चौंक उठती है। क्योंकि उसके आजकल के बहके बहके आचरण से उसका मन और नजर भी दूषित होने लगा था और जैसी दृष्टि वैसी श्रृष्टि होती है। उसके दृष्टि में आजकल बस वह अजनबी नवजवान और उसके गंदे हरकतों का ही याद रहता था।
इसी क्रम में उसने उसके लिंग का तस्वीर में दर्शन भी कर चुकी थी तब से एक अनचाहा खिंचाव लिंग के प्रति उसकी होने लगी थी और जाने अनजाने में वह शादी में आए मेहमानों , घर में काम करते मजदूरों इत्यादि के पैंट के निचले भाग पे अवश्य नजर फेर लेती थी और उनके मजबूती का आंकलन करती रहती थी।
अपने सोए बेटे के लंड के तरफ देखने से इसके मानो होश उड़ गए। ऐसा नहीं था की पहले गिरिजा ने सोनू को ऐसे सोए हुए न देखा हो परंतु आज की जो नजर थी वह दूषित हो चुकी थी और मन जिस चीज के तरफ आकर्षित होता है वह चीज उसे और अत्यधिक लुभाती जाति है , इसी तरह सोनू के पैंट के अंदर से उठा हुआ एक बिकराल सा आकार बनाए पैंट के उभार पर गिरिजा भी हल्का मोहित होने लगी और मन में सोचती है ” इसका तो उस नवजवान से भी बड़ा तगड़ा लगता है”।
और फिर एक जगह वही बैठ जाती है और उसका मन कहीं खो जाता है। कभी खुद को शीशे में देखती है और एक नजर कभी अपने सोए हुए बेटे को देख लेती है। वो ऐसा क्यों कर रही थी उसे भी नहीं पता , तभी सोनू करवट लेता है और उसकी पीठ दिखने लगती है, गिरिजा देखती है क्या चौड़े मंसल पीठ और मजबूत हाथ और नसबंद कलाई है सोनू की।
तभी उसे याद आता है उसके नवजवान अजनबी दोस्त ने मैसेज में कहा था “मैं भी तो 24 का ही हूं।”
और फिर उसके लिंग की फोटो याद आ जाती है तभी उसे याद आया की उसे बहुत तेज बाथरूम लगी थी।
वह भागे भागे बाहर बने बाथरूम में चली जाती है , और एक जोरदार आवाज के साथ अपने पेट को हल्का करते हुए आह्ह्ह्ह्ह् की आवाज करती है और फिर उसके बायां हाथ यंत्रवत उसके पिछवाड़े को सहलाने लगती है और पिछवाड़े से होते हुए अपनी चूत पर सहलाती हुई अपनी चूत देखती है – hyiii क्या सेक्सी चूत है मेरी , एकदम गोरी और पाव रोटी की तरह फूली फूली हल्के हल्के बालों के साथ और सबसे बड़ी बात एक तपस्वनी की चूत की नूर ही अलग होती है। और गिरिजा ने अपने जीवन काल के लगभग 30 वर्ष एक योगिनी एक तपस्वनी की जिंदगी जिया था।
अपने मन और अरमानों का जबरन गला घोंटने वालों का अंजाम भी यही होता है।
एक समय आता है जब सारी जमा की हुई पूंजी में ऐसी आग लगती है की सब जल कर राख होने लगता है।
यही हाल सोनू की मां गिरिजा के साथ भी हो रहा था।
वाह जल्द से फारिग होकर नए नए कपड़े पहन तैयार होना था क्योंकि आज शाम को ही शादी थी बारात आने वाली थी।
उसने अपने कमरे को लॉक कर अपने ऊपर के ब्लाउज खोल कुछ देर यूं ही बैठी रही
और फिर वह कपड़े पहन तैयार हो गई , समाज में विधवा को सजने संवरने की इज्जाजत नहीं है परंतु गिरिजा बिना साजो श्रृंगार के ही अपनी नूर की वजह से विधवा नारी काम की एक ऐसी प्यासी रूप दिखाई जान पड़ती है जिससे जो न देखने वाला हो वह भी एक झलक जरूर गिरिजा पर नजरें फेर लेता है।
रात के वक्त था , घर और द्वार पर काफी भीड़ भाड़ थी। अखिलंद्र और घर के सभी सदस्य अपने अपने कामों में व्यस्त थी और बारात आने को ही था ।
बारात आ चुकी थी बारातियों में काफी ज्यादा भीड़ भाड़ भी थी। काफी सारी महिलाएं एक जगह खड़ा होकर दूल्हा को देखने के लिए बेसब्र हो रही थी।
गिरिजा सामान्यत: मांगलिक कार्यों में सबसे पीछे रहती थी , कारण यह था की विधवा महिला को मांगलिक कार्यों में संलिप्त होने की प्रथा नहीं थी।
इसलिए वह अपनी रूप का छटा बिखेरते एक कोने में दीवाल के सहारे लग के खड़ी थी और काफी भीड़ भाड़ होने की वजह से कभी कभी धक्का मुक्की भी होने लग रही थी, तभी उसे अपने पिछवाड़े पर किसी के हाथ का स्पर्श मिला जो काफी कामुक छुअन था, वह समझ सकती थी की यह गलती से किसी ने नहीं वरन जान बुझ कर किसी ने छुआ है। वह चौंकते हुए पीछे मुड़ कर देखा परंतु वहां कोई नहीं था।
फिर जैसे के तैसे वैसे ही वही पर खड़ी रही और जब भीड़ ज्यादा हुई तब उसके दाहिने गांड़ को किसी ने अपनी मजबूत मुठ्ठी में दबोच कर मसल दिया, वह मचल उठी और गुस्से में पीछे देख कर उस बदतमीज को खोजने लगी परंतु वहां काफी सारे अनजान लोग शायद बारातियों में से थे । शराब की गंध उसके नाक पर गई और वह वहां से भागते हुए अपने परिवार के महिला सदस्यों के बीच जाकर खड़ी हो गई। और मन ही मन सोचने लगी की “hye मैं खांमखा खुद को एक बूढ़ी रिटायर औरत समझने लगी थी यहां तो मेरे कई दीवाने पड़े हैं। परंतु वह नहीं जानती थी वह हरकत दरअसल उसके खुद के सगे बेटा का था को incest पुस्तिका और कहानी , वीडियो देख ऐसा बिगड़ चुका था की incest की कल्पना करते करते उसने अपनी मां को चोदने का मूर्त रूप योजना बना ली थी।
बारातियों का स्वागत हुआ और विवाह कार्य सम्पन्न होने का कार्यक्रम होने लगा।
अगले दिन विदाई का रस्म था और सभी घर वाले काफी गमगीन माहौल में डूबे हुए थे।
खैर घर में सन्नाटा पसर गया , जिसे जहां जगह मिला सभी अपने अपने जगह पर थकान की वजह से आराम फरमाने लगे ।
अखिलंद्र और माला काफी संतुष्ट और खुश थे की उनकी एक बड़ी जिम्मेदारी बखूबी पूरा हुआ और चैन की सांस लेते हुए सभी ने ईश्वर का शुक्रिया अदा किया ।
अगले दिन बहू भोज निश्चित था तो परिवार के सभी लोग बहुभोज में जाने की तैयारी करने लगा।
इधर सपना रूप की रानी, काम की देवी और अपनी समस्त कला लिए वह बला की लड़की अब नारी रूप ले चुकी थी। उसका हसबैंड एक बेहद सुशील, सज्जन और तेज तर्रार और सेक्स उसके लिए कुछ खास चीज नहीं थी , वह सारा ध्यान अपने बिजनेस और काम में लगाता था।
सपना उसपे पूरी तरह मोहित हो चुकी थी और आज सुहागरात का दिन था , जिसके लिए वह कई साल इंतजार की , सहसा उसी रात सपना को वह सारे दृश्य सामने आने लगे जो उसने अपने पापा के साथ लुका छुपी में अंतरंग समय बिताए थे।
उसके मन में भयंकर अपराध बोध और हीन भावना आने लगती है लेकिन साथ ही उसे सुहागरात की याद आते ही वह सारी एहसास गुदगुदाने लगती है।
वह बिस्तर पर बैठे अपने पति का इंतजार करती है।
आज वह पहली बार किसी को अपनी सम्पूर्ण यौवन न्योछावर करने वाली थी।इससे पहले उसने यौवन सुख लिया था लेकिन अपनी चूत के कौमार्य भंग नहीं होने दी थी।
उसका पति उसके पास आता है और काफी सारी बाते होती है, और इस क्रम में रात के 1 बज जाते हैं।
और फिर उसका पति उसको गले लगाता है , सपना को मानो उसकी जिन्दगी मिल गई और वह काफी भावुक होती गई , उसके पति ने उसके सर पर एक प्यारा सा अहसास वाला चुम्बन दिया , सपना थोड़ा कसमसा गई और फिर उसका पति उसके लिप्स के तरफ अपने लिप्स ले जाकर उसके होंठो को चूमने लगा, सपना गरम होने लगी और उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी, काफी देर तक वो और उसके पति में मुख चुम्बन होता गया। सपना का धैर्य अब टूटने लगा और वह खुद ही बिस्तर पर सीधा लेट गई और हांफने लगी , यौवन का यह रूप देख कर मुर्दे भी खड़ा होकर उठ जाए।
उसके पति ने उसके पूरे बदन पर एक नज़र डाली और भीतर ही भीतर खुश होता है की क्या खूबसूरत और सेक्सी पत्नी मिली है उसे।
उसने सपना के अंग अंग पर चुंबनो की बौछार लगा दिया और अंत में उसने उसके दोनो वक्षों से कपड़ा हटा कर उसे नंगा कर दिया और दोनो हाथों से उसका जयेजा लेने लगा। इसी बीच उसने दो अंगुलियों में उसके निपल को फंसाकर कस के दबा दिया।
सपना सिसकार उठी और अपने दोनो हाथ बिस्तर पर जोर से मारने लगी , जैसे वो कह रही हो की अब देर ना करो और जल्द से अपने लिंग का दर्शन करवाओ।
इतने में इसके पति ने उसे पूरी तरह नंगा कर दिया और उसके दूध के निपल को पकड़ अपने जीभ उसपे फिराने लगा, सपना तो जैसे पहले से ही बारूद की ढेर थी और उसपे आग उसके पति ने लगा दिया वह धू धू कर जलने लगी और उसका रोम रोम चूदाई के लिए मचल उठा , उसके पति ने उसका दूध जम कर पीने के बाद अपना मुंह सीधे उसके चूत पर रख दिया उसकी पूरी चूत गीली हुई पड़ी थी उसके पति ने गीली हो चुकी चूत को छोड़ दिया, बस यहीं उसके पति ने अपना सारा पोल दे दिया। इससे साबित हो गया की सपना जैसी घोड़ी उसके संभाल में नहीं आ पाएगी।
कोई और भिसंड मर्द होता तो उसके चूत के पूरे बाढ़ के एक एक बूंद को चाट चाट खत्म कर देता।
सपना से अब बर्दाश्त न हो रहा था और वह खुद अपनी कमर उछालने लगी । और फिर उसके पति ने अन्तत: अपना पजामा नीचे किया और उसमे से एक औसत दर्जे का साधारण और दुर्बल तरह का दिखने वाला लिंग निकाला और सपना के चूत से रगड़ देते हुए अन्दर डालने लगा।
सपना को हल्का कुछ राहत हुआ और बिना दर्द के आराम से अपने पति के लंड को अपने चूत में खा गई और धक्के लगाना चालू कर दी , सपना की चूत आग की गरम भट्टी बन चुकी थी जिसमे उसके पति का लंड जाकर महज 2 मिनिट में झड़ गया और ढीला पड़ने लगा, सपना तो तड़प कर रह गई और उसका ध्यान अपने पति के लिंग के तरफ गया और उसके दिल को जोर से धक्का लगा , उसे लंड नहीं नूनी कहते हैं। और काम के उस गरमी में उसे अपने पापा अखिलेंद्र का मुसलदार लंड की याद आने लगी और फिर से गरम हो कर अपनी कमर उछाल उछाल पागलों सी हरकत करने लगी, मानो उसे histriyaa का दौरा पड़ गया हो।
यह देख उसके पति ने उसकी गर्मी शांत करने के लिए अपनी दो अंगुली उसके चूत में डाल उसकी चूत में अंदर बाहर करने लगा , और कुछ देर के बाद सपना अपने पिता का लंड याद करते करते झड़ गई ।
और फिर एक गहरी उदासी, और अवसाद में चली गई। और फिर एक नजर बगल में बेसुध होकर सोए अपने पति को देखती और उसका छोटा सा नूनी देखती है और उसके आंखो से आंसू आने लगती है, क्योंकि वह समझ गई की उसको उसके पति कभी शारीरिक सुख नहीं दे सकते हैं, वह रात भर आंखे ऊपर किए छत के तरफ देखती रही , सपना के अंदर एक गजब की काम ऊर्जा थी जिसे वह निकाल कर अपने पार्टनर के साथ सेक्स का एक ऐसा अध्याय लिख देना चाहती थी जिसे उसके अंदर की सारी ठरक उतर जाए, परंतु इसे अफसोस कहे या संजोग कहें सुहागरात वाले दिन पर भी सपना ने अपने बाबूजी के लंड को याद करते स्खलन को प्राप्त हुई।
और रात भर वह बिकराल लंड की याद में अपने अतृप्त योनि को सहलाते रही और फिर उसे एक बार गर्मी चढ़ी और इस बार पता न क्यों अपने आंखो से आंसू की धारा गिराते गिराते और अपने बाबूजी का वह विशाल लंड को याद करते हुए अपनी चूत में अंगुली करते करते झड़ने लगी




