लुका छुपी
Update 19
माला काफी दिनों से खुद की आग को बुझाए हुए थी लेकिन अपने ही परिवार में ऐसा अनाचार देख बहकने लगी । और रात के उस अंधेरे में घर के आंगन में ही अपने सगे भतीजे के सामने बैठे मूत रही थी और वह जानती थी की उसका भतीजा सोनू उसकी गांड़ को निहार रहा है और अवश्य अपने लंड को हिला रहा होगा । यह सब सोच सोच वो और अधिक कामुक हो रही थी। माला के अंदर कामुकता का वह बाढ़ था की पूछो मत !, जिसको खुद ही पूजा पाठ और अन्य चीजों में मन भटका कर उस कामरूपी बाढ़ को रोकने के लिए बांध बनाने का काम किया था।
परंतु जिस्म की गरमी और चूत की आग को कोई सहन नहीं कर पाता। और यही कारण था की उस रात माला खुद को रोक नहीं पा रही रही और वह बेकाबू होकर तड़पने लगी थी।
अखिलेंद्र आज सुबह ही कुछ दिनो के लिए रिशेदारो के बीच जाकर अपनी बेटी की शादी का न्योता देने गया था। और वह दो चार दिन के बाद ही लौटेगा।
रात के उस कामुक अंधेरे में घर के ही दो सदस्य चाची और सगे भतीजा कामग्नी में जल रहे थे। फर्क सिर्फ इतना था की चाची यह जानती थी भतीजा उसे देख रहा है और भतीजा यह नहीं जानता था की चाची ने उसे देख ली है।
अब पासा चाची के ऊपर था की वह अपनी चूत मरवाती है या नहीं।
खैर, सोनू अभी तक कुंवारा था और उसने आज तक किसी लड़की को चोदा नहीं था और incest की दीवानगी में अपनी मां , चाची और अपनी खुद की सगी बहन अंजू और चचेरी बहन सपना को अपने सपनो की रानी बना कर रोजाना मूठ मारा करता था।
24 साल का एक गबरू जवान बिना चूत चोदे हुए इतने दिनो से हवस की आग में जल रहा था , इस बात को आपलोज समझ सकते हैं की बेचारे पर क्या बीत रही थी।
इतने में माला का खुद पर से नियंत्रण खोता जा रहा था और उसने यह तय किया की अब खुद को बहुत रोक चुकी अब वह अपने भतीजे को उकसा कर अपनी चूत की आग को बुझायेगी, तभी उसे अपना खुद का बेटा शेखर की याद आती है और माला के सर पर चढ़ा सारा हवस काफुर हो जाता है और झट से उठ खड़ी होकर मन में अफसोस करने लगती है की “छी छी ये कैसा पाप मैं सोचे जा रही हूं” लेकिन फिर उसके मन में आता है की सोनू तो खुद की सगी मां के कमरे में झांक कर अपना लंड हिला रहा था , कितना बिगड़ चुका है है ये लड़का। कल इसकी शिकायत गिरिजा दीदी से करती हूं , फिर यह सोचती है की आखिर किस मुंह से कहूंगी और कही कोई मुझे ही गलत न समझ ले। “नहीं, बाबा, मैं यह बात किसी से भी कहूंगी, लेकिन सोनू को सही रास्ते पर लाना भी जरूरी है अन्यथा वह शेखर को भी खुद जैसा बना देगा ।
वह आंगन में से अचार सुखाने के लिए जो डाला गया था वह आंगन में ही बने मुंडेर पर रखा था जिसे उतरने लगी परंतु मुंडेर कुछ ऊंचाई पर था इसलिए माला को जरा उछल उछल के अचार का डब्बा उतारना पड़ रहा था।
सोनू फिर चौकन्ना हो गया और अपनी चाची को पीछे से उसके गेंद की तरह उछलते हुए नितम्ब और पूरे बदन पर फैली एक आकर्षक चर्बी एक लय में उछाल मार रहे थे । यह देख सोनू ने फिर अपना लंड खड़ा कर लिया ।
माला ने एक नजर सोनू पर डालने की कोशिश करने लगी की देखू की ” यह लड़का अभी तक मुझे घूर रहा है या चला गया क्योंकि अगर सोनू को वहां से भागना होता तो उसके पास काफी मौके और रास्ते थे जहां से बिना किसी दिक्कत को माला की जानकारी के बिना वहां से चुप चाप निकल जाता , परंतु माला अपने तिरछी नजरों से देखती है की यह तो अभी तक वहीं पर खड़ा अपने हाथ को अपने लिंग पर रखे हुए मेरी तरफ घूरे जा रहा है।
माला के अंदर अब वासना का कीड़ा जाग चुका था , पता न उसे क्या हुआ और अचानक उसने अपनी साड़ी ऊपर कर के अपनी चड्डी निकाली और उसे सूंघते हुए उसे वही नाली के पास बने नलके के पास रख दी। और आचार उतार कर वहां से जाने लगी।
वह जल्दी से घर के भीतर आई और पीछे के तरफ से भाग कर जल्दी से छत पर पहुंची जहां सिर्फ दो कमरे थे एक तरफ के कमरे में सोनू रहता था और दूसरे तरफ के कमरा में शेखर रहता था।
माला अपने घर के पीछे के तरफ वाली सीढ़ी से चढ़ कर वह छत पर आई क्योंकि वह लुका छुपी के साथ सोनू की हरकत देखना चाहती थी की सोनू उसकी चड्डी के साथ कुछ करता भी है नहीं।
वह जल्दी से शेखर के कमरे के तरफ जा कर वहां से नीचे एक छोटी से बाउंड्री से लग के बैठ गई जहां से आंगन का नजारा देखा जा सकता था वह देखने लगी।
उसे सोनू कहीं नहीं दिखता है। वह कुछ निराश होने लगी और सहसा तभी देखती है की नलके के पास उसकी चड्डी नहीं है , और तभी उसको बिलकुल ठीक अपने नीचे सोनू अपनी चाची की पहनी हुई कच्छी लेकर अपने मुंह में डाल कर उसके चूत की जगह पर जीभ लगाकर चाट रहा है , कभी सूंघ रहा है और फिर अपने लंड पे लगा कर उसको अपने लिंग के इर्द गिर्द लपेट कर अपनी लिंग को हिलाए जा रहा है। हिलाते हिलाते कुछ देर उसकी पैंटी की मदद से अपना पानी वहीं नीचे गिराने लगता है और अपने चरम पे जाकर वह सोचता है की आखिर क्यों चाची ने अपना पैंटी निकाल कर यहां रखा और वो अभी अभी, अमूमन उसके घर की औरते नहाने के वक्त अपनी अंत: वस्त्र निकालती थी परंतु चाची ने अभी क्यों निकाला और यही सब सोच उसके चरम बिंदु पर पहुंचने के साथ उसकी चाची की मस्त गांड़ जो अभी तुरंत देखा था उसे याद करने लगा और स्खलित होने लगा , स्खलन के दौरान अपने मुंह से ओह chachiiiiiiiiiii की मादक आवाज निकाल कर झड़ने लगा, और अंतिम में उसी चड्डी से अपने लिंग को पोंछ कर वही पूर्ववत उसी नलके के पास रख देता है। अंधेरे में माला ने सोनू के लंड को देख नही पा रही थी परंतु उसकी छाया उसे दिख रही थी जो काफी मादक अनुभूति दे रही थी माला को।
माला के सांसे ऊपर नीचे होने लगी थी और उसके पूरे बदन में बिजली सी करेंट दौड़ने लगी और अपने भतीजे की इस अनाचार भरे कृत्य को देखते हुए अपनी चूत को बिना पैंटी की थी इस वक्त अपने दो अंगुलियों से सहलाने लगी , ऐसा उसने काफी बरसो के बाद किया था तभी उसे ऐसा लगा की अब वह खुद पर नियंत्रण नहीं कर सकती और जा के सोनू का लंड लेकर खुद अपने चूत में डाल कर उसके लंड पर बैठ उसके लंड की सवारी करने लगे।
सोनू अपना पानी निकाल कर अपने कमरे में जाने लगा।
तभी माला को पता न क्या हुआ और पागलों की भांति हांफते हुए नीचे की ओर दौड़ पड़ी और आंगन में जा कर अपनी पैंटी को उठा कर उसे देखने लगी , फिर जहां सोनू ने अभी अभी पानी निकाला था वहा जा कर देखने लगी , वहां पर व्हाइट व्हाइट खूब सारा लंड का गाढ़ा पानी गिरा था , यह देख माला बावली हो गई और वह सोचने लगी भोला भाला मासूम सा दिखने वाला मेरे बेटे के समान मेरा भतीजा मुझे ही सोच कर यह अमृत रस छोड़ कर गया है, माला उसे अपने अंगुली से उठा कर देखते हुए अपने नाक के पास ले जाकर सूंघने लगी और फिर वह इतनी मदहोश हो गई की अपनी ही कच्छी को उठा कर उस पर लगा अपने बेटे समान भतीजे का वीर्य को अपने नाक से लगा कर सूंघ कर सोनू के बदन की गरमी का अंदाजा लगाने लगी और चूत मरवाने को बैचेन हो उठी।
इधर कमरे में सोनू सोच में पड़ा हुआ था की आखिर यह माजरा क्या था क्यों चाची अपनी कच्छी वहां खोल कर गई उसे तभी ऐसा फील हुआ की एक बार और आंगन से घूम के आया जाए ।
वह वापस आंगन में आता है और जो नजारा देखता है उसे देख कर सोनू के पैरो से जमीन खिसक गई।
माला पूरा बदहवाश होकर आंगन के कोने में एक दीवाल के सहारे लग कर अपने चूत पर साड़ी के ऊपर से भींच रही थी और एक हाथ से उस चड्डी को पकड़े अपने बूब मसल रही थी ।
इनके घर के पीछे कुछ नहीं था सिर्फ खेत ही खेत थे , यूं मानो सबसे आखिरी घर इन्ही का था । और इनका परिवार एक इज्जतदार परिवार के रूप में जाना जाता था इसलिए कभी इनके घर चोरी जैसी घटनाएं नहीं होती वरना गांव में अक्सर खेतों में जाने वाली महिलाओं के साथ दुर्ब्याहवार होता रहता था , कुछ औरतें तो घूंघट ओढ़ कर स्वयं खेतों में जाकर चुदवाने जाया करती थी , जिससे उनकी पहचान भी बच जाए और चूदाई भी हो जाए ।
माला इन सब बातो से अवगत थी परंतु आज उसे ऐसा लग रहा था की आज दहलीज लांघ कर खेतों के तरफ एक चक्कर लगा ही लू , घूंघट ओढ़ कर रहूंगी तो कोई पहचानेगा भी नहीं। तभी उसके मन में आवाज आता है क्या अनाप शनाप सोचते रहती है माला।
तभी माला खुद को संभालते हुए वहां से चली जाती है।
अगले दिन गांव के पड़ोस में ही शादी था । दिन भर खूब हल्ला हंगामा था और रात को घर के सारे सदस्य उस शादी वाले घर में शरीक होने गए थे क्योंकि जिसके यहां शादी हो रही थी तो वह घर भी कुल खानदान का ही था , इसलिए गांव में यह अड़ोस पड़ोस में यह रिवाज होता है की शादी के दिन सभी सदस्य एक दूसरे के घर आते जाते हैं।
घर में सिर्फ माला थी। क्योंकि उसकी तबियत कुछ ठीक नहीं लग रही थी इसलिए सपना, उसकी छोटी बहन ब्यूटी और गिरिजा शादी वाले घर गए हुए थे।
और माला अपने घर में अकेले सुन सान हुए अपने कमरे में कुछ कुछ काम कर रही थी।
इधर सोनू का कल से माला पर ही नजर था और जैसे उसे पता चला की माला शादी में नहीं गई है और घर पर अकेले है वैसे ही तुरंत घर पहुंचा ।
माला ने जैसे देखा की सोनू घर आ गया उसकी सांसे तेज होने लगी क्योंकि कल के घटना के बाद माला अपने भतीजे में अपना चड्डी सुंघने वाला आशिक नजर आने लगा और मन में सोचने लगी की अब क्या करूं उसके सामने जाने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी क्योंकि कल से माला को काम वासना की वजह से उसकी आंखे सुर्ख लाल हो गई थी और वह ईमानदारी से किसी के साथ eye contact नहीं कर पा रही थी । उसके अंदर एक अपराध बोध लिए वासना का एक सुखद गुदगुदा अनुभव हो रहा था।
तभी उसे पता चला की सोनू मेरे कमरे में ही आ रहा है, माला को पता नहीं किया हुआ वह पीछे के तरफ घूम गई और पूछा सोनू बेटा तुम शादी वाले घर में गए थे इतनी जल्दी आ गए और वहां कुछ खाया या भी यूं ही चला आया और भूखे ही है अब तक ।
सोनू ने पीछे से माला को देखा तो देखता ही रह गया क्या मस्त घोड़ी थी माला हर जगह एकदम मादकता लिए ढलती हुई उम्र की गंभीरता लिए हुए अंग अंग से नूर झलक रहा था
उसका मन किया जा के पीछे से पकड़ कर अपना लंड उसके गांड़ में सटा के उसके कमर पे किस कर दू।
माला को पता था की वह उसके पिछवाड़े खड़ा होकर उसकी गांड़ ही देख रहा होगा।
तभी उसने बाए हाथ से अपने गांड़ पे फिराते हुए खुजली करने लगी और यह जान बुझ कर किया उसने ।
सोनू को झटका लगा और उसका लन्ड पैंट में ही टाइट होने लगा फिर अचानक माला उसे मूड कर देखने लगी और सोनू का हाथ उसके लंड पर ही था । सोनू ने तुरंत अपना हाथ वहा से हटा कर बोला की ” मैने खाना खा लिया है चाची आप परेशान न हो।
फिर माला थोड़ा पिघल सी गई और अपने भतीजे को चोर नज़रों से एक मरद की भांति देखने लगी ।
उसके मजबूत हाथ लंबा कद , चौड़ी छाती गोरा रंग और तो और उसके लिंग को याद करते हुए उसका मुंह लाल होने लगा क्योंकि उसका लंड भी उसके बदन की तरह काफी गोरा था ।
फिर उसने सोनू से कहा की मुझे खेतों के तरफ जाना था । लेकिन अकेले हू इसीलिए जा नहीं पा रही हू। मुझे डर लगता है। (दरअसल गांव में महिलाएं शाम को खेती में हगने के लिए जाया करती थी, परंतु इन कुछ दिनो से खेतों में जाने का प्रचलन बंद होने लगा था)
सोनू सोचता है की आज खेतों में जाने का क्या मतलब हो सकता है। और उसने कहा ” कोई बात नहीं चाची, मैं कुछ देर तक चलता हूं” इस पर माला हंसते हुए उसने कहा की अरे बुद्धू तू वहां जाकर क्या करेगा ।
मैं तो सौच को जा रही हू । इस पर सोनू ने कहा की आपको पता है खेतों में जाना आजकल ठीक नहीं है गांव के लफंगे रात को खेतों में जाने वाले को परेशान करते हैं। इसलिए आप घर में ही चले जाइए।
इस पर माला सोनू के नजदीक आकर उसके सामने आंखो में झांकते हुए कहा ” तुझे बड़ा पता है आजकल के लफंगों के बारे में कहीं तू उनके संगत में तो नहीं पड़ गया। खैर मुझे कोई परवाह नहीं मैं जा रही हूं , तूम यही पर रहो और मेरे आने तक का इंतजार करो।
और माला जाने लगी , सोनू के दिमाग में एक शैतानी आइडिया आया और उसने कहा की ठीक है चाची आप चले जाओ मैं भी छत वाले कमरे में आराम करने जाता हूं।
इस पर माला का तो पाशा ही पलट गया क्योंकि उसने यह सोचा था की सोनू तो एक बिगड़ा हुआ ठरकी लड़का बन चुका है जो अपने ही मां और चाची को चोदना चाहता है इसलिए कहीं वो इस मौके का फायदा उठा कर मेरे साथ कुछ पहल करेगा , क्योंकि माला सारा पहल सोनू से करवा कर उसे डांट लगा कर उसकी मदद करने की सहानुभूति से उसके साथ कुछ फ्लर्ट करूंगी।
तभी वो जाने को मुड़ी और खेत की तरफ जाने वाली पीछे वाली दरवाजा का कुंडी खोलने लग गई , वह दरवाजा काफी मजबूती से खुलता था यह बात परिवार के प्रत्येक सदस्य जानते थे। तभी कामुक हो चुकी माला के दिमाग में एक मस्तीखोर विचार आया और उसने सोनू को आवाज लगा कर बुलाया और कहा सोनू “यह दरवाजा खोलने में मेरी मदद करो बेटा।”
सोनू वहां झट से पहुंचा और दरवाजे के पास जाकर रुक गया क्योंकि वहां माला पहले से ही खोलने की कोशिश कर रही थी, और फिर सोनू को आवाज लगा कर कहा ” आ न बेटा , मेरी मदद कर और वहां से हट नहीं रही थी, सोनू को जैसे लगा की चाची जान बुझ के ये करवा रही थी और दिखने से भी थोड़ी बहकी बहकी लग रही थी, तभी सोनू ने माला के पीछे आकर बिलकुल सट गया और माला के चारो तरफ से अपनी बांहे फैला कर कुंडी खोलने की कोशिश करने लगा ,
सोनू का बदन जैसे माला के पीछे आकर लगा माला का पूरा बदन मानो शोला बन दहकने लगा और उसकी गर्मी से सोनू का लंड भी अपने फैलाव में आने लगा और उसका आगे का हिस्सा जाकर माला के गांड़ पर फील हुआ और वह थोड़ा चिहक उठी, और फिर गरम होते हुए अपना गांड़ खुद उसके लंड पर भिड़ा कर कहने लगी अरे वो भी कुंडी पकड़ के खींचने लगी और सोनू के लंड पर पीछे के तरफ धक्का देकर कहती है अरे खोल न बेटा और इतने में उसकी सिसकारी निकल पड़ी इधर सोनू का लंड अकड़ता जा रहा था और उसने अपना लंड अपनी चाची के गांडो के बीचों बीच दरार में अपना लंड एडजस्ट ऐसे किया जैसे दोनो की सहमति हो और ये घटना कुछ इसी तरह हुई जैसा दोनो पहले से ही मूड बनाए हुए थे की एक दूसरे से गांड़ और लंड से इसी तरह एडजस्ट करना है और सोनू जोर से जोर से दरवाजे की कुंडी को खींचने लगता है और और एक हाथ अपनी चाची के नंगी गोरी कमर पर रख वहां के चर्बी को अपने मुठ्ठी में भर भर के सहलाने लगा , ऐसा बस उसने दो बार किया जैसे दोनो के बीच एक मूक सहमति बन चुकी थी और ऐसा महसूस हो गया दोनों को की कुछ होने जा रहा है।
तभी दरवाजे का कुंडी खुल जाता है और सोनू कहता है की चाची आप मत जाओ, सच में चोर लफंगों का बहुत ज्यादा हल्ला होने लगा है । कही आज ही कोई बड़ा चोर न मिल जाए , या फिर मुझे साथ में ले लो
इस माला कहती है की अच्छा तो तू जाकर क्या करेगा क्या तू उनसे बड़ा भी चोर है की तेरे से डर जायेंगे।
सोनू ” हा चाची , मैं काफी बड़ा चोर हू, और यह कहते हुए एक काम के नशे में चूर लाल आंखो से देखते हुए एक कामुक हंसी के साथ माला को ऐसा देखा जिससे की माला शर्मा गई और चेहरा नीचे कर , बुदबुदाते हुए कहती है “तो तू ही चोर क्यों नहीं बन जाता, इसमें भविष्य अच्छा है”
यह कह कर चली गई, और सोनू ने बुदबुदाते हुए उन शब्दों को सुन लिया था और वो समझ गया की चाची ने उसे इशारू किया है , जिससे की मैं चोर लफंगा बन के आ जाऊ जिससे की लुका छुपी में चूदाई भी हो जाए और सामने का रिश्ता चाची भतीजा का ही रहे।



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