लुका छुपी
Update 16
इधर गांव के बड़े से खानदानी घर में सिर्फ माला और उसके दो बच्चे ब्यूटी और शेखर तथा अखिलंद्र के बड़े भाई की विधवा पत्नी और उसका एक बेटा सोनू था , वैसे गिरिजा की एक बेटी थी मंजू उसकी शादी हो गई थी परंतु वो बला की नूरानी और खूबसूरत लड़की है और चरित्र में सपना की बिलकुल कॉपी है। गिरिजा और माला काफी दिनों से परेशान थे । कारण यह था की उन्हें कम समय में शादी की काफी सारी तैयारियां करनी थी। वैसे गिरिजा सिर्फ अपने पूजा पाठ में व्यस्त रहती थी और हमेशा अपनी पवित्रता बनाए रखती थी। पेशे से सरकारी प्राइमरी विधालय की शिक्षिका थी और गांव मोहल्ले के सभी लोग उसकी पवित्रता और शालीनता के आगे नतमस्तक रहता था और उसे काफी इज्जत की दृष्टि से सभी देखा करते थे लेकिन शोभा एक विधवा होने की वजह से हमेशा अखोलंदे और माला के साथ मेलजोल और प्यार से रहती थी। लेकिन कभी कभी मौसम की बदलाहट कहें या मानव शरीर की मजबूरी कहें अक्सर भीतर ही भीतर एक सूनापन और कुछ उसके मन की अनजानी ख्वाहिश उछाल मारती थी परंतु अपने भावनाओं पर उसका पूरा नियंत्रण था क्योंकि उसे भी इज्जत मान मर्यादा का काफी चिंता रहती थी। हमेशा अखिलेंद्र और माला के सामंजस्य से ही परिवार का ख्याल रखती थी। आखिर उसका इस जमाने ने उसके देवर अखिलब्द्र और उनके परिवार के अलावा और कोई था भी नहीं, मायके में एक भाई था जो बेईमान किस्म का था इसलिए वह अपने मायके से आशा छोड़ कर सदैव अपने देवर देवरानी के साथ ही घुल मिल के रहती थी। हालांकि पैसों और आर्थिक रूप से वह संपन्न थी क्योंकि उसकी सरकारी नौकरी की वजह से वेतन ठीक मिलता था। यूं तो वह हमेशा ही अपना मन पूजा पाठ इत्यादि में मजबूती से लगाए रखती थी परंतु इन कुछ दिनों से वह बला की मादकता लिए हुए थी।
ऐसा ही होता है जब कोई ब्रह्मचर्य नियम से रहता है तो स्वत: उसके चेहरे और प्रभा में एक नूर आने लगता है।
इसी तरह माला भी एक मदमस्त हथिनी की भांति अपने बदन पर एक अनुभव की गंभीरता लिए हुए, चेहरे पर एक कामुक वृति जो छुपाने का भरपूर प्रयत्न करती है, प्रत्येक अंग पर एक कामुक झलक छोड़ते रहती है। लंबी, चौड़ी, मदमस्त गडरायी बदन, उभरे एवम फूले हुए स्तन ऐसे की आज तक इसे किसी ने दबाया ही न हो, उठा हुआ नितंब मानो साइड और पीछे से अगर उसे कोई देखता है तो पहली दृष्टि उसके चूतड पर ही जाति है उसमे इतना आकर्षण था की भले ही गांव के बच्चे बूढ़े उसे इज्जत और सम्मान की दृष्टि से देखते हो लेकिन अपने मैथुन के चरम पर उसे ही याद कर काफी युवक , वृद्ध स्खलित होते थे।
उसके वजह से विधवा होते हुए भी पूरे घर में एक अलग नूर झलकता था । , अखिलेंद्र इसके देवर थे परंतु मजाल नहीं की कभी भी लेश मात्र इन्होंने देवर भाभी जैसे रिश्तों में आजकल की तरह हंसी ठिठोली करते हों, घर की संस्कार ही कुछ अलग थी।
लेकिन कलयुगी परभाव इस घर में अपना बीज बोने लगा था , उधर जाने अनजाने में लुका छुपी में ही अखिलेंद्र और उसकी बेटी सपना एक दूसरे के बदन के साथ गुथम्म गुथाई कर चुके थे।
और इधर गिरिजा का बेटा सोनू अपने मोबाइल , पोर्न और incest की कहानियां पढ़ पढ़ कर खुद को भ्याभीचार के दलदल में ढकलने का प्रयास करने लगा था।


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