लुका छुपी
Update 15
आज दोनो बाप बेटी अनजाने में एक दूसरे को भोगने वाले थे और इस अहसास को रिमझिम भी अपने आंखो से छुप कर देखना चाहती थी । वह इस तैयारी में थी की जब इनकी कामलीला शुरू होगी , में चुपके से बरामदे के बाहर वाले खिड़की से देखूंगी।
अखिलंद्द ने जैसे देखा की रिमझिम वहां आ चुकी है वह मोबाइल वही रख भागते हुए रिमझिम के कमरे में पहुंचा , जहां सपना सेक्स की मूरत बने बैठी थी, अल्हिंद्र्स को आज रिमझिम काफी कामुक लग रही थी , उसने सोचा की आज ये लड़की तो एकदम बम लग रही है।
सपना को भी एहसास हो गया की रिमझिम के ससुर उसके कमरे में आ गए हैं और वह खुद को रिमझिम की तरह सोच बैठी थी , कमरे में घुप अंधेरा फैला हुआ था । जिसकी वजह से कोई किसी का चेहरा नहीं देख सकता था ।
अल्हीलंद बेड के सामने जाकर खड़ा हो गया और सपना को रिमझिम समझ कर उसके पीठ पर अपना हाथ फिराने लगा , सपना तो मानो बेहाल बेकाबू होने लगी , फिर अखिलेंद्र अपने होंठो से उसके पीठ पर चूमने चाटने लगा । फिर उसे आगे कर उसके होंठो को अपने होंठ में भर कर चूसने लगा
और सपना भी एक प्यासी हिरण की भांति उसके होंठो में खो गई। अद्भुत कामुक नजारा था जिसमे एक बाप और बेटी एक दूसरे के होंठो में खोए हुए थे।
फिर सपना वही बिस्तर पर उल्टे होकर लेटने लगी , और अखिलेंद्र अपना लूंगी उतार अपने लंड को आजाद कर दिया
और सपना के पीछे के हर भाग में अपने लंड से रगड़ने लगा , सपना के मुंह से सिसकारी निकलने ही वाली थी की उसने खुद को जोर से चींटी काट कर खुद को शांत रखने का नाकाम कोशिश करने लगी, और तभी अखिलंद्द ने नाइटी को सपना के जिस्म से उतार दिया और और उसकी पैंटी नीचे सरका दिया । सपना यंत्रवत वैसे ही लेटी रही, उसके तरफ से कोई हरकत नहीं हो रही थी। जब अखिकंद्र ने उसकी नंगी गांड़ को देखा उसके शरीर के सारे नसों का खून उसके लंड की तरफ दौड़ने लगा। और वह इस भारी भरकम गांड़ को हल्का सा देख पा रहा था क्योंकि कमरे में बस ना मात्र का प्रकाश था। या यूं कहे बिलकुल अंधेरा था , काफी कोशिश के बाद हल्का सा कुछ आभास हो रहा था ।
लेकिन अखिलंद्र के पारखी हाथो और नजरो ने यह ताड़ लिया था की गांड़ काफी मस्त और चर्बीदार है।
उसने हाथ से सपना के गांड़ को खूब मसलने लगा और उसके कान में जाकर फुसफुसाते हुए कहा की ” क्या मस्त गांड़ है तेरी” सपना तो अखिलेंद्र के इस अंदाज से पानी पानी होने लगी और कसमसाते हुए उलटे लेटे हुए अपना एक हाथ पीछे के तरफ लाकर उसके लंड के तरफ बढ़ाने लगी।
और फिर उसके हाथ में आता है एक विशाल फनफनाता हुआ हथियार के माफिक अखिलन्र का लंड । सपना को तो जैसे शॉक लगा और वह सोचने लगी ” रिमझिम ने तो कहा था की उसके ससुर का छोटा सा है, तब ये क्या है , इतने बड़े लंड को कोई गलती से भी छोटा नहीं कह सकता, यह क्या मजरा है ” कुछ भी इस लंड को तो मैं मुंह में जरूर लूंगी परंतु अगर चूत में ले लिया तो मेरी चूत फट सकती जिससे के शादी के बाद मैं अपने हसबैंड को मुंह नही दिखा पाऊंगी।
लेकिन यह सारी बाते सोच तो रही थी लेकिन उसका हाथ अखिलेंद्र के लंड को बड़े शिद्दत से पकड़ रखी थी और हल्का धीरे धीरे आगे पीछे भी कर रही रही। उसके बदन का एक एक अंग कहने लगा था की इस लंड से अपनी चूत की आग ठंडा करवा लो। और वाकई में सपना जैसी गदराई माल के लिए ठीक वैसा ही लंड उपयुक्त था जैसा उसके बाबूजी के पास था । सपना के अवचेतन मन में भी ऐसे ही लंड की परिकल्पना थी क्योंकि कोई भी लड़की और महिला अपने बदन के अनुसार ही लंड की चाहत रखती है। और सपना का तो पूछना ही क्या , वह तो इतनी जबराट लड़की थी की उसे तो कोई भीसंड लंड से शांत कर सकता था
इसी कश्मोंकस में वह सोचती हुई लेटी रही ,लेकिन अखिलनेदे की ठरक अपने चरम पर पहुंचने लगी थी और ऐसी गांड़ देख किसी का भी यही हाल होगा।
उसने तुरंत सपना के बाल को बेदर्दी से खींचते हुए उसका मुंह अपने लंड पे रखने लगा , सपना मानो अबला नारी की तरह उसके इशारों को अपना कर्तव्य समझते हुए अपना मुंह उसके लंड पर रख दिया।
अल्हीलंद तो मानो उसे कोई rand समझते हुए उसके साथ कुछ ऐसा ब्याहवार कर रहा था मानो आज वह उसे कुतिया बना बना के चोदेगा । उसे जरा सा भी इस बात की ज्ञात नहीं था की जिसे वो एक बाजारू रांडुकी तरह रौंद रहा है वह उसकी अपनी लाडली सपना बेटी है।
और सपना तो जैसे पूरी तरह मदहोश हो चुकी थी उसे किसी बात का भान नहीं उसकी असलियत अगर सामने आ भी जाती तब भी उसको इस बात का कोई परवाह नहीं था क्योंकि वह काम की ज्वाला में जलने लगी थी और सहसा उसने अपनी मस्ती की आवेग में आकर अपना दुपट्टा अपने चेहरे से हटाया और अखिलेंद्र का लंड एक अनुभवी महिला की तरह भांति भांति के अदाएं बना कर शिद्दत से चूसने चाटने लगी।
इधर रिमझिम खिड़की पर खड़े होकर काफी देर से उनके दृश्यों को देखने का एक नाकाम कोशिश करने लगी , परंतु अंदर कुछ भी नहीं दिख रहा था , बस कभी कभी रह रह के कुछ हलचल की आवाजे आ रही थी जिससे की ऐसा लग रहा था की दोनो चुप चाप एक दूसरे के बदन को भोगने में मगन है।
उफफ्फ क्या कामुक नजारा था , अंदर एक काम से पीड़ित बाप और बेटी लुका छुपी में एक दूसरे के बदन के साथ खेल रहे थे और रह रह कर आअह्ह्ह्हह isshhhhhhh जैसी कामुक आवाजे भी निकाल रहे थे।
सपना, अखिलेंद्र के लंड को काफी देर तक यूं ही अपनी मस्ती में चूसती रही , अखिलेंद्र अपनी मस्ती में अपना सर ऊपर किए अपने लंड को चुसवाने का आनंद ले रहा था , ऐसी मस्त लंड चूसने वाली महिला उसने जिंदगी में नही देखी थी ,और वह बोल उठता है की वाह रिमझिम रानी वाह ” क्या मस्त रांड़ है तू”
सपना को कुछ अजीब सा महसूस तो हुआ परंतु वह इस आवाज को इग्नोर करते हुए अपने लंड चूसने में मगन थी।
और कुछ मिनटों के बाद अखिलेंद्र का पानी छुट ता है और आह्ह्हह्ह रिमझिम बेटी अह्ह्ह मेरी जान करते हुए अपना सारा पानी अपनी बेटी सपना के मुंह के ऊपर छोड़ने लगता है। अखिलेंद्र अपनी मदहोशी में झड़ रहा था तब उसकी आंखे बंद थी , तभी सपना अपनी नजरे उठा कर उस व्यक्ति का चेहरा देखती है ,सपना को अचानक 10 हजार वोल्ट का से एकदम तेज करेंट लगा , उसे काफी देर से ऐसा लग ही रहा था की दाल में कुछ काला है। जब वह देखती है की जिसका लंड वह काफी देर से चूसे जा रही थी और जो व्यक्ति काफी देर से मेरे अंगो के साथ खेल रहा था वो दूसरा अन्य कोई नहीं उसके बाबूजी अखिलेंद्र ही हैं।
और तुरंत वह उलटे होकर बिस्तर पर लेट जाती है और अपना मुंह दोनों हाथो से ढक लेती है। और मन में सोचती है ” ये क्या हो गया, ये कैसा अनर्थ मैने कर दिया” अब मैं क्या करू ? आदि इत्यादि सोच में पड़ी रही तभी उसके चूत के दरार में कुछ महसूस होता है और उसे फिर झटका लगता है की वह उसके बाबूजी का लंड था जो उसके चूत में घुसने का रास्ता बना रहा था । सपना फिर से बहकने लगी और मन ही मन फिर से उस तगड़े लंड के प्रभाव में आने लगी , क्योंकि मजबूत और तगड़ा लंड ही सपना जैसी छुपी रुस्तम रंडियों की कमजोरी होती है।
उसने अपना बदन आगे की ओर किया और चूत के मुंह को आगे के ओर कर उसे दोनो जांघो से भींच लिया जिससे की अखिलेंद्र का लंड उसके चूत में न जा पाए।
अखिलेंद्र को इस खलल पर काफी क्रोध आया और पीछे से उसके बालो को पकड़ अपने मुंह उसके गर्दन में सटा कर उसके कानों को अपने जीभ से चाटते हुए कहता है” आज तू मेरे गिरफ्त में आई है मेरी प्यारी रण्डी रिमझिम आज तो चूत और गांड़ दोनो की प्यास बुझा कर तुम्हारे कोख में अपना बीज डाल दूंगा।
अल्हिंद्र का यूं चूमना चाटना और और उसके जीभ का फिराना सपना को उत्तेजित कर देता है और वह रोते हुए सोचती है की ” उसके बाबूजी कितने बड़े वाले कमिना किस्म के आदमी हैं, दरअसल सपना के आंखो से आंसू दुख के नहीं थे , वह एक काम पीड़ा की अभिव्यक्ति थी जो आंसू से निकल रहे थे , उसकी मनोभाव में हुए अचानक से बदलवा और अपने बाबूजी के लंड के तरफ का आकर्षण दोनों से वह पीड़ित थी और साथ में भरपूर मजा भी लेना चाहती थी परंतु लुका छुपी में ही वो मजा करना चाहती थी।
इतने में अखिंदे ने फिर से उसके चूत का द्वार ढूढने लगता है और अपने हाथो से उसके चूत को सहलाने लगता है। बिलकुल कुंवारी चूत , पानी पानी हुए थी , अखिलंद्र की मस्ती का कोई आरा पारा नहीं था उस वक्त।
उसकी बेटी उससे छुटने का नाकाम कोशिश करने लगी क्योंकि वह सोच रही थी की उसके बाबूजी को क्या पता है वह जिसे रिमझिम समझ रहे है दरअसल वो खुद अपनी बेटी के चूत को सहला रहे है।
अखिलंद्र ने सपना के चूत को सहलाना रोका और उसने कान में फिर से कहा ” क्यों री साली छीनल अब क्या हुआ , निकल गई तेरी गर्मी, चल ठीक है चूत नहीं तो तेरी गांड़ जरूर मरूंगा आज”
इधर रिमझिम ने भी यह बात सुन ली और कामोतेजना में बाहर ही अपनी चूत में अंगुली करने लगी।
और फिर अचानक अखिलंद्र ने सपना के चूत और गांड़ के बीचों बीच अपना मुंह रखकर ऐसा चाटने लगा जैसे कोई अमृत रस मिल रहा हो, सपना तो मानो बेकाबू हुए जा रही थी और आंख बंद किए ही उसने धीरे से कसमसाते हुए कहा ” ohhhhhhh पापा ” ये इतने धीरे से उसने बोला फिर भी अखिलेंद्र ने सुन लिया और फिर उसे लगा रिमझिम एक raand लड़की है वो कुछ भी बडबडा सकती है और फिर अखिलंद्र को भी अपनी बेटी की सेक्सी चेहरा अपने आंखो के सामने नाचने लगा , वास्तव में उसे अपनी बेटी का नाक नक्श काफी लुभाता था और उसे खूब चुम्बन करना चाहता था । वो इतना उत्तेजित हो उठा था की चूत चाटना छोड़ गांड़ भी चाटने लगा फिर क्या था काम की अग्नि में जल रहे है दोनो बाप बेटी एक दूसरे में खो गए।
फिर अखिलेंद्र झट से गांड़ छोड़कर अपना लंड उसकी चूत में घुसाने लगा , इस पर सपना को होश आया और वो तुरंत उठ के खड़ी हो गई इस पर अखिलेंद्र ने उसके कान में फुसफुसा कर कहा ” आज चूत या gand कोई एक तो मरूंगा तुम्हारी मेरी जान”
Uffff जाने अनजाने में एक बाप बेटी लुका छुपी के माध्यम से संभोग क्रिया करने लगे थे और एक सगा बाप अपनी बेटी से गांड़ मरने की अनुरोध करता है। यह सोच और अखिलेंद्र जैसी हवसी की हरकत देख सपना के अंदर का भी raand जग चुकी थी, उसने बिना बोले अपना एक हाथ से अखिलेंद्र का हाथ अपने गांड़ के द्वार पर रख दिया , यह एक इशारा था की गांड़ में घुसावो l”
यह देख अल्हिंद्र्स तो वासना में पागल हो गया और उसकी गांड़ के दरारों में अंगुली फिराते हुए मस्त अपनी बेटी की बदन की खुशबू लेते हुए उसके आर्मपिट सूंघने लगता है और धीरे धीरे अपना लंड अपनी बेटी के गुदा द्वार में घुसाने लगता है, धरती फट जाए , आसमान गिर जाए , ऐसा कुछ होने जा रहा था और सपना अपने मजे के चरम शीर्ष पर पहुंचने लगी , उसे काफी दर्द तो हो रहा था लेकिन, मानना पड़ेगा उस मजबूत गांड़ की मालकिन सपना को, इतने मोटे लंड अंदर गांड़ में डलवाते जरा से भी न झिझकी और अपने बदन के सारी शक्ति लगा कर अपने पापा का लंड अंदर ऐसे ले रही थी जैसे वो किसी पूर्व जन्म की एक मशहूर गणिका हो ।
जी हां , सपना भले ही पहली बार लंड का एहसास अपने गांड़ में कर रही थी लेकिन इसकी भाव भंगिमा कुछ ऐसी थी जैसे एकदम अनुभवी महिला हो। और खुद अपनी गांड़ उछाल उछाल अखिलेंद्र का लंड अपने गांड़ में लेने लगी और अपने एक हाथ से अखिलेंद्र का हाथ पकड़ कर अपने चूत पे रख सहलाने लगी
अखिलेंद्र अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंचने वाला था , उसकी बेटी चुदाने में उसे हराने लगी थी क्योंकि पहले स्खलान के तरफ अखिलंद्र जाने लगा , हालांकि वो इससे पहले मुंह में लंड देकर फारिग हो गया था और यह दूसरा दौर की चूदाई थी परंतु अपनी बेटी की गर्मी के आगे अभी फीका जान पड़ रहा था , तभी अखिलेंद्र खुद को साध कर , पेलाई का ऐसा अध्याय चालू किया जिसमे सपना जैसी भीतर–रांड लड़की की आन्हे निकलना चालू हो गया और सपना उत्तेजना की शिखर पर पहुंच कर जोर जोर से आवाजे निकलने लगी, अखिलेंद्र की मानसिकता यह थी की वह रिमझिम को चोद रहा है इसलिए सपना की उन वास्तविक आवाजे जो चूदाई और उन्माद की अनंत गहराई से निकल रही थी , सपना की वैसी आवजे उसने कभी सुने नहीं इसलिए उसका शक या ध्यान इस बात पर नहीं जा रहा था , हालांकि उसे कभी कभी कुछ कुछ अजीब सा लग रहा था , और रह रह के अपनी बेटी प्रतिछवी उस लड़की में दिखाई दे रहा था लेकिन वो इससे और अत्यधिक उत्तेजित हो कर अपने मस्ती में खो जाता था। और अपनी खुद की फूल सी बच्ची को रिमझिम समझ कर रौंद रहा था। तभी सपना का शरीर अकड़ने लगा और उसे जोर से चीखने का मन हो रहा था लेकिन उसने अपनी चीख दबा कर अपनी गांड़ सिकुड़ा ली जिसकी वजह से अखिलेंद्र का लंड भी अब छुटने का हो रहा था और तभी सपना जोर जोर से हांफते हुए सिसकारियां भरने लगी और झड़ते हुए नीचे के तरफ गिरने लगी।
अखिलेंद्र का स्खलन अभी तक हुआ नहीं था और वह और जोर जोर से गांड़ चोदने लगा , जिसकी वजह से सपना की गांड़ से खून निकलना भी चालू हो गया था और फिर सपना दर्द से तड़पने लगी,
सच में अखिलेंद्र जैसा मरद ही सपना जैसी गज कामिनी को संतुष्ट कर सकता था । और उस काम देवी की रूप लिए उसके बेटी के रूप में अवतार ली हुई उस मस्त हस्तिनि के वासना को ठंडक दे पाया।
फिर दोनों कुछ देर के लिए वही निढ़ाल हो गए और कुछ देर में सपना को ऐसी पीड़ा और संतुष्टि का भाव मिला जिसे वो शब्दो में नहीं कह सकती। उसने जाने अनजाने में अपने चूत रूपी हृदय में उस लंड को जगह दी दी थी।
फिर उसे होश आता है और वह जल्दी से भागते हुए नीचे जाती है । और देखती है की रिमझिम अपने बिस्तर पर सो रही है ।











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