लुका छुपी – Pariwarik Chudai Ki Gatha – Update 14

लुका छुपी - Kamuk Pariwar Ki Chudai Ki Gatha
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लुका छुपी

Update 14

 

फिर सभी घर आ जाते हैं और जैसा की पहले से ही रिमझिम का प्लान था की और उसने ऊपर वाले कमरे का फ्यूज निकाल कर पहले से रख लिया था ताकि ऊपर बिजली न जा सके और सपना को नीचे सुलाने का प्रबंध किया था , परंतु रिमझिम का प्लान ही कुछ और था ।

घर आने के बाद ठीक वैसा ही हुआ जैसा रिमझिम चाहती थी और सपना को अपने कमरे में सुलाने के लिए राजी कर ली, सपना तो आज जैसे पहले से चूत की आग की वजह से कामातुर हुई पड़ी थी तो उसने आज ज्यादा आपत्ति जाहिर न करते हुए नीचे सोने को राजी हो गई और अखिलेंद्र को वही ऊपर वाल कमरे के बरामदे में सोने का प्रबंध कर दिया गया। क्योंकि वहां बरामदे में बिना लाइट के कोई भी रह सकता था।

जब अखिलेंद्र खाना वाना खाने के वह ऊपर के कमरे के बरामदे में गया , जहां आज रात को उसे सोना था , तभी उसने रिमझिम के नंबर पर मैसेज किया और रिमझिम ने जैसा मैसेज खोला उसमे कुछ नहीं लिखा था बस एकाध word लिखा था , दरअसल अखिलेंद्र ने कुछ भी टाइप कर के भेज दिया था ।

रिमझिम के लिए यह संकेत था की अखिलंद्र रात के बारे में पूछ रहा है की कब तक अवोगी,

रिमझिम ने रिप्लाई किया ” आप आराम करो , मुझे फुरसत मिलेगी तब मैं खुद आऊंगी और आपको एक मैसेज करूंगी तो आप सीधे मेरे अंदर वाले कमरे में आ जाना और मैं अपने मुंह से कोई आवाज नहीं निकाल पाऊंगी क्योंकि रात में काफी सन्नाटा होता है।” आप को जो भी करना है चुप चाप कर लेना”

और रिमझिम मोबाइल रखते हुए सपना के कान में फुसफुसाते हुए कहा ” बाबूजी का मैसेज आया है” रात को 12 बजे कमरे में मै जाऊंगी। तुम आराम से यही रहना। मैं कुछ देर ने वापस आ जाऊंगी, इस पर सपना थोड़ी विचलित और परेशान होते हुए उससे कहती है ” मेरी बैचलर पार्टी ???

रिमझिम की तो जैसे बांछे खिल गई , क्योंकि उसे ज्ञात हो गया की आज मैं अपने कुकृत्य में कामयाब हो गई और आज इन बाप बेटी को मिलाने में सफल हो जाऊंगी और आज मैने बाप बेटी को चुदवाने की उपलब्धि प्राप्त कर ली।

और पलट कर बनावटी अंदाज में कुछ सोचते हुए का नाटक करते हुए बोलती है “देख ! सपना मैं नहीं चाहती की तुम्हारी शादी के पहले तुम्हारा कौमार्य भंग करूं, इसलिए तू कुछ दिन और बर्दाश्त कर ले” रिमझिम देखना चाहती थी की सपना के दिल में कितनी बैचैनी है। इस पर सपना ने कहा ” उसकी फिकर ना करो रिमझिम रानी, अभी तुमने शायद मुझे ठीक से पहचाना नहीं और वैसे भी अंकल के छोटे लंड से मेरा कुछ होने वाला नहीं, और वैसे भी मैं चुदूंगी नहीं , बस आज मैं तुम्हारे कपड़े पहन उनके पास जाऊंगी और अंधेरे में कुछ देर तक उन्हें ससुर समझ के मुझे भी देखना है की ये बहु ससुर का कैसा मजरा होता है ” रिमझिम सोचती है की यह तो मुझसे भी बड़ी rand निकली, और मैंने तो बस अंदाज लगाकर इस से बोल दी थी की ससुर जी का लंड छोटा है क्योंकि रिमझिम तो झूठ बोली थी की ससुर जी के साथ करती हूं। जबकि वो जिसके साथ करने वाली है वो उसका बाप अखिंद्र है ,परंतु अखिलंदे का लंड तो काफी बड़ा है। अब क्या होगा मन में सोचती है ” फिर सोचती है की जो होगा सो होगा, खमखा इतना क्या सोचना”

फिर रात होती है और 12 बजे के लगभग सपना अपने मोबाइल में कुछ करते रहती है और रिमझिम अपने हसबैंड से फोन पर बार करते रहती है , फिर रिमझिम उठी और सपना को अपनी एक नाइटी देकर बोली चल तैयार हो जा। सपना तो इसी व्याकुलता में थी , क्योंकि आज वह पहली बार किसी मरद के हाथो अकेले अंधेरे कमरे में खुद को मसवालने जाना चाहती थी। और उस पर रिमझिम के ससुर जो एक बूढ़े इंसान परंतु ठरकी और कामुक लगते है उनकी प्रतिछ्वी अपने मन में संजोए सपना आज मजे लेने के फिराक में थी।

वह रिमझिम के नाइटी पहन कर आती है और अपने चेहरे को दुपट्टा से ढक लेती है सेफ्टी के लिए।

क्योंकि सपना जैसी छुपा रुस्तम लड़किया खुद की पहचान छुपाते हुए अपनी गांड़ भी मरवा सकती हैं, लेकिन जहां बात उनकी छवि की आती है , ऐसी लड़कियां खुद को सती सावित्री से भी बढ़ कर जताने लगती हैं।

रिमझिम की नाइटी पहनने के बाद वो सच में एक काम की देवी लगने लगती है। और फिर रिमझिम ने अखिलेंद्र को मेसेज किया की और हल्की शरारत करने के उद्देश्य से लिखा “मैं आज नहीं आ पाऊंगी , क्योंकि सपना अभी तक जग रही है, मुझे डर लग रहा है की किसी को पता न लग जाए इस भरे सन्नाटे में”

अखिलंद्र तो मानो पहले से ही बैचैन हुए मैसेज का इंतजार कर रहा था , जैसे ही उसने यह मैसेज पढ़ा उसका मूड ऑफ हो गया। मोबाइल को एक तरफ रख अब कुछ सोचने लगा और भीतर ही भीतर एक क्रोध में जलने लगा। अगर अभी सामने रिमझिम मिल जाती तो उसको वह पटक के एक रण्डी की तरह जलील करते हुए चूदाई करता क्यूंकि काम के बीच खलल पड़ने की वजह से क्रोध की उत्पति होती है

क्योंकि परमात्मा ने स्वयं कहा है।

काम एष क्रोध एष रजोगुणसमुद्भव: ||
महाशनो महापाप्मा विद्ध्येनमिह वैरिणम् ||

अर्थात –यह अकेले वासना है, जो जुनून की विधा के संपर्क से पैदा हुई है, और बाद में क्रोध में बदल गई। इसे संसार में पापी, सर्व-शत्रु के रूप में जानो।

खैर , कुछ देर यूं ही उदास होते हुए अखिलेंद्र अनायास ही सपना के भीतर वाले कमरे में चले जाता है और पता न कुछ ढूंढने लगता है , उसे खुद नहीं पता उसे क्या चाहिए । तभी उसकी नजर अपनी बेटी की पैंटी पर पड़ती है , और उस पैंटी को देखते ही उसकी आंखे चौड़ी हो जाती है क्योंकि यह वही पैंटी थी जिसपे अखिलंद्र मुठ मार चुका था । जो बाहर की तरफ सूखने को डाला गया था और अखिलेंद्र को लगा की यह पैंटी रिमझिम की थी ।
और फिर उस पैंटी को देख अपनी बेटी की कामुक हरकतों के बारे सोचने लगता है की कैसे थियेटर के लाइन में उस काले भैंसे जैसे मर्द के साथ अपनी बदन रगड़वा रही थी, क्या मेरी बेटी के अंदर इतनी हवस है, परंतु देखने में वो कितनी भोली भाली लगती है, उसे देख कोई सोच भी नही सकता की वो इतनी ठरकी भी है।

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इधर नीचे रिमझिम अखिलबंद्र के रिप्लाई का इंतजार करने लगी, लेकिन अखिलेंद्र को रिप्लाई में लिखने नहीं आता था वरन वॉइस मैसेज भेजना उसे ज्यादा आसान लगता था।
अखिलेंद्र बेकाबू हो रहा था और तभी उसने एक वाइस मैसेज करने की सोची ” वो मैसेज में कुछ नहीं बस हल्का खांसते हुए आवाज बदल कर उसने भेजा की आवो”

रिमझिम तुरंत उस मैसेज को खोली और जब वाइस मैसेज play की तब उसकी आवाज सपना के कानो में भी पड़ी , और वह आवाज सुनते ही उसकी चूत पनियाने लगी , उस आवाज में एक मैच्योर बूढ़े सा फीलिंग थी, सपना को समझ में नहीं आया की वह स्वयं उसके बाबूजी थे। लेकिन उस आवाज की बेकरारी वह समझ पा रही थी ।

इस पर रिमझिम ने सपना के तरफ देखते हुए कहा की जाओ मेरी जान, एंजॉय करो और पकड़े न जाना। अपना चेहरा न दिखाना”

सपना कांपते हुए आगे बढ़ने लगी और इधर रिमझिम ने भी मैसेज का रिप्लाई दिया ” आ रही हूं ”

अखिलेंद्र मैसेज देखते ही अपने बरामदे में चला गया और झांक के देखने लगा की कब तक आ रही है।

तभी सपना ऊपर आई उसने मुंह को हाथ और दुपट्टे से ढका हुआ था और काम की देवी बनी एक मस्त नाइटी पहनी छत पर आई और एक नजर सपना ने अपने कमरे के तरफ देख आश्वस्त किया की ” उसके बाबूजी कही जग तो नहीं रहे” और फिर रिमझिम वाले कमरे में जाकर भीतर बेड पर उल्टे मुंह किए बैठ गई ।

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