लुका छुपी
Update 12
इधर अखिलेंद्र के साथ खड़े लंड पे हुए धोखा कि वजह से खिन्न मन से वापस exam center चले जाता है , थोड़ी देर में सपना बाहर आती है।
अखिलेंद्र तो मानोंअभी तक रिमझिम के साथ बिताए पल के प्रभावमें था। इतने में कामदेवी का रूप लिए सपना उसकी बेटी पेपर देकर बाहर निकली । 
अखिलेंद्र तो देखता ही रह गया कुछ देर फिर सहसा उसे झटका लगा यह सोच की ये मैं क्या कर रहा हूं। ये मेरी बेटी जिसकी अगले महीने शादी होने वाली है , मैं कैसी गंदी सोच रखने लगा हू इसके प्रति।।
और फिर सारे बुरे ख्यालातो को हटा कर पुन: पवित्र पिता के रूप में खुद को ढाल लेता है। और इस तरह सपना और उसके बाबूजी घर आ जाते हैं।
इधर घर पर रिमझिम का व्याकुल मन काफी हिलोरे मार रहा था , आज तो उसने अपने गंदे विचारो को मूर्त रूप भी दे डाला था और हल्का सा ही सही लेकिन अपने बाप के उमर के व्यक्ति के साथ बदन रगवड्वा ली थी।
जैसे ही दोनो बाप बेटी घर पर पहुंचते है।
सपना की दृष्टि रिमझिम के ससुर पे अनायास ही चली जाती है जो नीचे बैठे अखबार पढ़ रहे थे।
रिमझिम के ससुर ने भी उन्हें देखा , सपना और रिमझिम के ससुर के नजर एक दूसरे से टकराई और पता न क्यूं शर्म और लज्जत की एक कसक की वजह से सपना ने अपनी आंखे नीचे कर ली। इस पर रिमझिम के ससुर थोड़ा झेंप गए और उन्हें कुछ अजीब लगा । खैर दोनो बाप बेटी ऊपर वाले कमरे में चले गए क्योंकि रिमझिम ने सपना को यही व्हाट्स ऐप मैसेज किया था की “hi darling सपना मेरे ससुर आज रात को कमरे में आने वाले हैं, और उन्हें ये लगेगा की वो मैं हूं , लेकिन मेरी जगह तुम चले जाना, ससुर जी का थोड़ा छोटा है इसलिए तुम्हे कोई तकलीफ नहीं होगी, enjoy your बैचलर पार्टी”
दरअसल रिमझिम ने यह मैसेज कल रात को किया था और तब उसे अखिलन्द्र के लंड का साइज का अंदाज नहीं था और उसने सोचा की बूढ़े हैं , देसी लोग हैं तो लंड का साइज भी छोटा ही होगा ।
तभी रिमझिम की सास और रिमझिम ऊपर आती है और रिमझिम की सास अखिलेंद्र और सपना से कहती हैं। की आप लोग तो अब चले ही जाओगे । सपना बिटिया का इम्तिहान भी खत्म हो गया , रिमझिम का मन है की हम कहीं घूमने चलते हैं । और शहर में एक महीने से डिजनी मेला भी लगा है और हम लोग आज तक नहीं गए। रिमझिम के ससुर कहीं घूमने फिरने के शौकीन नहीं थे परंतु उसकी सास और रिमझिम घूमने फिरने में काफी चाहत रखती थी। इसीलिए उन्होंने सोचा की अल्हिंद्र एक अभिभावक के रूप में है और हम सभी लोग घूम भी आयेंगे और मेला इत्यादि का आनंद भी ले पाएंगे।
अखिलंद्र का मन ना होते हुए भी उसने रिमझिम की सास और बच्चों के मासूम आग्रह पर हामी भर दिया की “ठीक है हम चलते हैं।”
सपना को बहुत खुशी मिली क्योंकि उसका पेपर खत्म होने से वो काफी रिलैक्स हो गई थी । रिमझिम ने भी कहा ” हा चाचाजी हमलोग पहले डिजनी मेला चलेंगे और वहां मैंने सुना है थियेटर में जानवरो का डिस्कवरी show चलता है। वो जरूर देखेंगे ।
इस पर सभी लोग तैयार हो गए , और ऑटो में बैठ मेला के लिए निकल गए।
रास्ते भर सपना सबसे ज्यादा एक्साइटेड थी और घूमते बात करते और शहर में इधर उधर के नजर देखते चली जा रही थी। तभी उसने देखा की उसके बाबूजी रिमझिम को एक अजीब सी तिरछी नज़रों से देख रहे थे। और अचानक रिमझिम ने भी उसके पापा के तरफ आकर्षित नजरों से देखा और दोनो के नजरों में एक दूसरे के प्रति नंगी हवस दिखाई दे रही थी।
सपना को यह जानकर काफी धक्का लगा और उसको पूरा माजरा समझ में आ गया की जरूर मेरे पीठ पीछे इस कुतिया रिमझिम ने मेरे पापा को उकसाया है और अपने जाल में फंसाया है , क्योंकि रिमझिम के हरकतों से वो समझ गई थी की ,पहल इसी हरामजादी ने की होगी।
इसका भान होते ही “सपना उन दोनो के प्रति चौकना हो गई और उनके प्रत्येक हरकतों पर ध्यान देने लगी।
और मन ही मन रिमझिम के ऊपर काफी क्रोध में आग बबूला होने लगी और सोचने लगी “छी , ये कैसे हो सकता है, रिमझिम तो मेरे उमर की ही लड़की है और अपने बाप के उमर के व्यक्ति से ऐसा कैसे कोई कर सकता है। और एक पल के लिए उसके मन में रिमझिम और उसके बाप के अश्लील चित्र घूमने लगा।
उन दोनो के संभोग की कल्पना में अपने बाबूजी को एक ठरकी इंसान के रूप में देख सपना उत्तेजित हो उठती है। तभी अखिलेंद्र के तरफ एक मरद के नजर से सोचती है
इस दृश्य की कल्पना के बाद सपना का एहसास उसके बापू के प्रति बदलने लगती है और वह मन ही मन अपने बाबूजी के विशाल छाती चौड़ा और बलिष्ट बदन तथा एक मजबूत और शक्तिशाली लंड सोच अपने भीतर उसके बाबूजी के प्रति एक तीव्र कामोंतेजना का अहसास करते हुए अपने चूत के ऊपर थोड़ा अपने हाथ से दबाते हुए अह्ह्ह्ह्ह की आवाज निकलती है। ऑटो अपने गंतव्य तक पहुंच गया ।
वहां मेला में काफी भीड़ भाड़ थी और उसमे हर तरह के लोग घूम रहे थे और मेले जैसी जगह में ठरकी स्वभाव खुद ब खुद जग जाती है। एक दूसरे के बदन को छूते रगड़ते सारे मर्द और औरत इधर उधर घूम रहे थे । काफी भीड़ भाड़ होने की वजह से अखिलेंद्र और रिमझिम आगे की ओर चल रहे थे और सपना और रिमझिम की सास एक साथ चल रहे थे , तभी अखिलेंद्र और रिमझिम ओझल हो जाते हैं, इतने में सपना की बैचैनी बढ़ जाती है , उसे लगता है की उसका हक कोई और छीन रहा है और बड़े बेसर्बी से उन्हें खोजने में लग जाती हैऔर एक दुकान पर खड़े मिलते है, जहां रिमझिम आगे की तरफ झुंक के खड़ी थी और पीछे से उसके बाबूजी अपना लंड सटाए खड़े थे। वो इतने सामान्य ढंग से खड़े थे की किसी को शक न हो , लेकिन सपना इस हरकत को जान गई थी की वाकई में ये दोनो कर क्या रहे हैं। तभी महिलाओं का एक भीड़ का झोंका आया और सपना को धक्केलते हुए आगे निकलने लगी उसी में सपना को धक्का लगा और सीधे वो अपने बाबूजी के पीठ पर जा गिरी, अखिलेंद्र को अपने पीठ पर एक सुखद गुदे दार चीज की अनुभूति हुई, और उसने सोचा की महिलाओ में से कोई उसके पीठ पर गिरी है, उसने बिना पीछे देखे और पीछे के तरफ अपने बदन को रगड़ते हुए एक हाथ से सपना की एक अंगुली पकड़ कर अपने नाखून से हल्का खरोंच दिया , इस कामुक अंदाज से तो मानो सपना की चूत गीली हो गई और यह सोचने लगी की वाकई में बाबूजी एक बेहद ठरकी किस्म के आदमी हैं।
और इस बात से उसके मन में एक खुशी की लहर भी दौड़ जाती है।
तभी वो बिना कुछ किए चुपके से वहां से निकल आगे की तरफ हो जाति है और अपने बाबूजी के सामने आकर खड़ी हो जाति है। इस पर अखिलेंद्र सकपका कर रिमझिम से अलग होते हुए कहता है ” बेटी , रिमझिम अपने लिए कुछ खरीद रही है तुम भी देख लो , दरअसल वहां महिलाओ के कॉस्मेटिक का सामान नीचे बिछा कर बेचा जा रहा था ।
सपना को भी एक शरारत सूझी और अनजान बनते हुए उसने अपने बाबूजी के आगे आकर नीचे झुक कर रिमझिम के साथ समान देखने लगी और जान बुझ कर अपनी गांड़ अपने बाबूजी के सामने करने लगी।
अखिलेंद्र की तो यह देख सांसे रुक गई, क्योंकि जिस लज्जत से सपना ने अपनी गांड़ पीछे किया था वो जान बुझ कर अपनी गांड़ और पीछे के तरफ निकाली हुई थी। अखिलेंद्र ने रिमझिम और अपनी बेटी की गांड़ को एक साथ देखा तो यह पाया की उसकी बेटी की गांड़ के सामने तो रिमझिम कुछ भी नहीं है।
सपना की गांड़ की दोनो फांके थोड़े चर्बीदार और एक भारीपन लिए हुए था।
अखिलंद्र इन्ही ख्यालों में ही था और उसका लन्ड अपने वास्तविक साइज में आ चुका था की पीछे से उसे धक्का लगा और उसका लन्ड ठीक अपनी बेटी के गांडुके फांकों के बीच गहरी लकीर में धंस गया और सपना आगे की तरफ थोड़ा सा गिर गई और उसका मुंह खुला का खुला रह गया , उसके लिए ऐसे भीसड़ गुदेदार , कठोर मांसल लिंग का पहला स्पर्श था।
उसने बिना पीछे देखे अपनी गांड़ अनायास ही पीछे की तरफ धकेल दी और साइड में देखते हुए रिमझिम से पूछने लगी ” अरे पापा कहां चले गए”
अखिलेंद्र को झटका लगा उसे समझ में नहीं आया की उसकी बेटी जान बुझ कर उसके लंड का स्पर्श ले रही है या पीछे खड़ा मुझको कोई अनजान व्यक्ति समझ रही है, लेकिन सपना को सब ज्ञात था बस वह नाटक कर रही थी की पीछे खड़ा व्यक्ति उसके पापा हैं ये वह नहीं जानती और अब खेल शुरू होता है वासना और ठरक का, जो एक बेटी अपने बाप को उकसाने पर मजबूर करने लगी और लुका छुपी में ही दोनो खुद में मजे लेने लगे ।
अखिलेंद्र भी उतावला हो उठा और जोर एक और झटका देते हुए अपना लंड उसके गांड़ के बीचों बीच रगड़ने लगा। रिमझिम इन सारी बातों से अनजान थी, और वह अपना काम में काम व्यस्त थी, उसे नहीं पता था की जो आग उसने लगाई थी वह इस वक्त धू धू कर के जल रहा है दोनो बाप बेटी के भीतर।
सपना भी बेकाबू होने लगी और कही बात सामने से खुल ना जाए यह सोचते हुए आगे के तरफ सरक गई और ” इधर उधर अपने बापू को खोजने का स्वांग करने लगी”
अखिलेंद्र ने भी मामला समझते हुए वहा से दबे पांव पीछे के तरफ सरकते हुए भीड़ की मदद से आगे निकल कर आ गया।
और फिर सभी लोग एक होटल में खाना खाने चले गए और फिर प्लान हुआ की जानवरों के थिएटर चलते हैं। और वहां कुछ देर देख कर घर चल देंगे।





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