लुका छुपी – Pariwarik Chudai Ki Gatha – Update 11

लुका छुपी - Kamuk Pariwar Ki Chudai Ki Gatha
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लुका छुपी

Update 11

उसने झांक कर देखने का प्रयास किया तो रिमझिम कहीं दिख नहीं रही थी। फिर उसने अपने मन को समझाया और वापस कमरे में आकर अपने बिस्तर पर लेट गया, और अपना नया मोबाइल निकाल कर कुछ कुछ देखने लगा , तभी उसके व्हाट्स एप पर एक मैसेज आया था ।

जिसमे उसके प्रोफाइल पर रिमझिम के चेहरे की एक हॉट फोटो लगी थी।

उसने मैसेज खोला तो उसमे लिखा था की ” अंकल , मै रिमझिम हूं और आज मैं नीचे ही सोऊंगी । आप संभल कर रहिएगा , चोरों का काफी खतरा है” और इस मैसेज के साथ एक स्माइली की emoji थी।

यह पहले का मैसेज था जो रात को 9 बजे किया था रिमझिम ने । अभी जो मैसेज आया उसमें लिखा था की ” हेलो अंकल ” आपको डरने की जरूरत नहीं है मैं ऊपर आ जाऊंगी और जब कमरे की लाइट बंद हो जाए तब समझना की मैं आ चुकी हूं।

ये मेसेज पढ़ के तो अखिलेंद्र का मानो बैचनी और बढ़ने लगी। और फिर से देखा तो लाइट अभी जल ही रही थी। इसी तरह काफी देर तक इंतजार करता रहा और फिर सो गया ।

अगले दिन सुबह हुई , सपना का आज अंतिम पेपर था । और कल तक रुक के परसो दोनो बाप बेटी को घर चले जाना था ।

इसी तरह सपना और अखिलेंद्र दोनो तैयार हो कर पेपर देने चले गए। जब सपना पेपर देने एक्जाम हाल में चली गई। तब आज अखोलंद्र को एक शरारत सूझी,
उसने सोचा अब तो आखिरी दिन ही चल रहे है , कितनी सौभाग्य से एक जवान लड़की चोदने को मिल रहा है। पता नहीं किस पुण्य का नतीजा है। वरना मुझ जैसों को लड़की तो क्या कोई बूढ़ी औरत भी न चुदवाए। अभी सपना का एग्जाम 3 घंटे चलेंगे , क्यों न घर में अकेले रिमझिम होगी वहां चलता हूं , शायद कुछ हो जाए या अगर नहीं हो तो वही आराम करूंगा, फिर वापस आ सपना को लेने आ जाऊंगा एग्जाम सेंटर पर।

यही सोच के वो फटाफट घर आया , तब देखता है की रिमझिम और उसकी सास बैठी थी और रिमझिम अपने आस की बालो मे मेंहदी लगा रही थी।

जैसे ही अखिलेंद्र घर पहुंचता है रिमझिम की सास उससे कहती है की “अरे पांडे जी, आप अकेले , बिटिया कहां है। इस पर अखिलेंद्र ने बताया कि उसकी तबियत कुछ खराब लग रही थी और अभी सपना के पेपर में 3 घंटे का वक्त है तो सोचा घर पे ही चल के आराम करू”

रिमझिम की सास :” बिलकुल ठीक किया अपने, चलो, जाओ आप आराम करो, आपके लिए चाय भिजवाती हूं, अरे रिमझिम बेटा –जल्दी से मेहंदी लगाओ और चाचा जी को चाय दे आवो झट पट बना के”

रिमझिम को सारा माजरा समझ में आ गया था और वह मन ही मन उछल पड़ी थी क्योंकि वो बीते 13 दिनो से अखिलेंद्र को फ्लर्ट कर रही थी और चुदाने को बैचेन थी परंतु कभी अखिलेंद्र की सद्बुद्धि जग जाती और वह ध्यान नहीं देता तो कभी सही मौका नहीं मिलता।
लेकिन इस वक्त वो अखिलेंद्र को जाहिर नहीं होने देती है की वह खुश है या कोई ऐसा रिएक्शन नहीं देना चाहती थी।

जब उसकी सास ने उसे चाय देने को कहा ” तब अखिलेंद्र सामने ही खड़े थे और रिमझिम की सास का चेहरा बालो में मेहंदी लगाने की वजह से नीचे के तरफ झुका हुआ था। रिमझिम ने एक मादक अंदाज में अखिलेंद्र के तरफ नजर डाली

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और इस बार पहली बार था की अखिलेंद्र भी उसके नजरो का भरपूर सामना किया। इससे पहले वो हमेशा रिमझिम की छीछोरी हरकतों से खुद को बचाते आया था , परंतु कल के रिमझिम के बर्ताव के बाद मानो अखिलेंद्र परम ठरकी बन चुका था और रिमझिम को एक बाजारू राण्ड की नजर से देखने लगा था ।

कुछ इस तरह रिमझिम के कामुक नजरों का सामना करते हुए
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इस पर एक हल्का और बेहद आकर्षक अंदाज में हल्का सा आंख ऊपर कर के रिमझिम ने इशारा किया की ऊपर चलें

कुछ इस तरह
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अखिलेंद्र का लंड मानो फड़फड़ा उठा इस अंदाज से और वह वहां से चला गया ।

काफी देर हुआ अभी तक रिमझिम नहीं आई क्योंकि कमबख्त उसकी सास का मेहंदी लगाना अभी बाकी रह गया था । रिमझिम की सास का बर्ताव टिपिकल भारतीय सास की तरह खंडूस ही था , इसलिए रिमझिम मन ही मन बुढ़िया को भला बुरा कहते जल्दी जल्दी मेहंदी लगा रही थी। फिर अचानक उसने कहा की ” मां जी आपने चाचा जी को चाय देने तो कह दिया वो इंतजार करते होंगे , मैं उन्हे चाय देकर आती हूं तो बचा हुआ मेहंदी लगा दूंगी।

बुढिया ने कहा :”ठीक है, जाओ चाय देकर आवो”

रिमझिम झट पट चाय बनाने लगी और ऊपर अखिलेंद्र के कमरे में गई ।

अखिलन्द्र पहले से बरामदा लॉक कर के नंगा बैठा हुआ था

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रिमझिम अंदर आते ही जो एक अखिलेंद्र का एक कामुक रूप देखा , उसे तो पहले यकीन नहीं हो रहा था की वाकई में मेरे सपनो का साथी ये प्रौढ़ मरद जो बाबूजी जैसे पवित्र रिश्ते वाले होते हैं जिनके संसर्ग मात्र से incest जैसी असीम आनंद की अनुभूति होती है।

अंदर आते ही जैसे वो मानो पहले से ही भट्टी में जल रही थी अब तो पिघलने लगी और अपने बाप समान आदमी के बांहों में अपनी जकड़न शांत करनी चाहती थी। दरअसल वो चूदाई से ज्यादा यह असीमो पारिवारिक दुष्कर्म और पारिवारिक व्याभिचार वाली फीलिंग लेना चाहती थी।।

तभी उसकी नजर अखिलंद् के लंड पर गया , उसकी आंखे एक पल के लिए थम गई, सांसे लंबी हो गई और अपने गले में थूक घोंटते एकदम आंखो में बिजली सा चमक आने लगी, क्योंकि उसने सिर्फ अभी तक अपने हसबैंड का लंड देखा था जो लंड नही सिर्फ लुल्ली होता है। रिमझिम को यही यकिन था की भारतीय मर्दों का लिंग की साइज सामान्य अपने पति जैसा ही प्राय: सबका समझती थी। उसे तो बिल्कुल यकीन न था की बूढ़े दिखने वाले इस मर्द का लंड इतना तगड़ा और जानदार !!!!

तभी वो ऐसे खड़े हो गई जैसे अखिलनेद को बुला रही हो परंतु बोलने में शरमा रही थी क्योंकि भले ही कहानी और पोर्न की वजह से वह इस घटिया कृत्य को कर गई परंतु पहले से वो एक शरीफ लड़की ही थी हसबैंड के अलाव किसी अन्य से कभी अपने बदन को छुने नहीं ।दिया।।

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उसकी स्थिति देख अल्हीलेंद समझ गया की पूरा माजरा क्या है क्योंकि अनुभवी मरद शरीफ और रंड औरतों में विभेद कर लेता है। वह समझ गया की ये पहले की ठरकी नहीं है ये जस्ट नई नई बदचलनी पर उतरी है।

अब अखिलेंद्र पंडित जी काफी दिनों से काम की ज्वाला में जल रहे थे परंतु लोक लाज की वजह से मन मारे हुए बैठे थे लेकिन इनके अंदर की गरमी कभी इन्हे शांत बैठने ही नहीं देती और हमेशा इनके लंड के सुपाड़े में गरम लावा फूटता रहता था।

ये पूरी दुनिया में अपनी धर्म पत्नी माला के अंग अंग से काफी मोहित था लेकिन अफसोस की वह उसे भोग नहीं पाता था। माला जैसी अल्हड़ मजेदार औरत जैसी बीबी रहते हुए भी पिछले कुछ वर्षो से उसे उपवास रहते हुए अपने हाथ से काम चलाना पड़ता था । माला एक घनघोर सेक्सी औरत है। लेकिन वह काम की आग में वो जलने को बेताब होने लगती है और जब उसने देखा की काम की आग को जितना हवा दूंगी उतना ही वो बढ़ेगा , क्योंकि इस आग की वजह माला ने एक बार अपनी मर्यादा लांगने की सोची मात्र थी। तभी से उसने प्रतिज्ञा ली की अब मैं कभी संभोग नहीं करूंगी और परिवार और खुद की शांति और स्थिरता के लिए ब्रह्मचर्य व्रत की तरह रहते हुए पूजा पाठ में ही अपना ध्यान लगाऊंगी। इसी कारणों से अखिलंद्र को भी अपनी वासना और हवस को मारे हुए अपने हाथ से ही काम चलाना पड़ता था। मोबाइल से दूर थे और आजकल की कलयुगी बातो में ज्यादा नहीं रहने की वजह से वो incest जैसी फीलिंग या ऐसा कुछ पहले कभी नहीं आया था , परंतु जब से अकेले में अपनी बेटी का संग कुछ दिनों का मिला और रिमझिम का उनकी जिंदगी में आना उनके मन में व्याभिचार को हवा देने के लिए आग में घी डालने वाली बात हो गई थी।

अब जब उनके सामने एक युवती की जवानी नंगी होने के लिए खड़ी थी, तब वो यही सोच रहे थे की यह लड़की मेरी बेटी की उमर की है और मुझसे कितनी छोटी है, इसके हाथ पैर सब कुछ तो ऐसा लगता है मेरी सपना बिटिया की तरह ही है।

इस पर एक झलक उसे अपनी रिमझिम को देखते हुए अपनी बिटिया के बदन को भी याद आया तो उसे एक अजीब कामुक धक्का एक लंड पर लगा क्योंकि काम की दृष्टि से उसकी बेटी सपना , रिमझिम से भी ज्यादा गदराई और आकर्षक लगती है।

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अब तो मानो उनके रगों का सारा मर्दानगी बाहर निकलने लगी और दिमाग काम करना बंद कर दिया इतने में वह जोर से उठा और रिमझिम को खींच कर अपने उसे आगे के तरफ कर पीछे से उसके गांड़ के दरार में अपना लंड धंसाते हुए उसके कंधो से बाल हटा कर उसके कंधो पर अपने जीभ लगाकर ऐसा चाटा जैसे कोई नमकीन चीज या अचार खा कर चाटने का टेस्ट लेता है।

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और फिर अपने रिमझिम को एक वैश्या की भांति जोर से आगे की तरफ किया जिससे रिमझिम को काफी दर्द हुआ और वो shhhhhhhhhh अह्ह्ह्ह की आवाजे निकाली, इस आवाज ने अखिलेंद्र को मदहोश कर दिया और तभी रिमझिम की भी वासना हिलोरे मरने लगा और यही सही वक्त था एक बाप के मन में अपनी बेटी के लिए काम भाव का बीज डालने का ।

उसने अखिलेंद्र के होंठो पर अंगुली रखते हुए कहा ” क्या आप मेरे रिश्ते में चाचा जी लगते हो ”
इस तरह मैं तो आपकी बेटी हुई , सपना की तरह और ऐसा कहते अखिलेंद्र की आंखो में वासना की लेकर तैरने लगी क्योंकि वह बखूबी समझ रहा था की रिमझिम क्या इशारा कर रही है।

और अखिलेंद्र ने वासना भरे स्वर में कहने लगा” हा तुम मेरी बेटी लगती हो” और ऐसा कहते हुए अपनी बेटी सी जवान लड़की रिमझिम के होंठो को पी जाने की ललक से आगे बढ़ता है और उसके होंठो को अपने मुंह में भर लेता है।

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करीब 5 मिनट दोनो एक दूसरे के चुम्बन में खो गए थे और रिमझिम पूरी तरह आग की भट्टी की तरह जलने लगी , उसे आज तक ऐसी गरमी नहीं चढ़ी थी। वह तुरंत दूर होते हुए अखिलेंद्र के लंड पर हाथ रख जोर से दबाते हुए बिस्तर पर बैठ जाती है।

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इसका मतलब कुछ इशारा था जो अखिलंद्र समझ गया कि रिमझिम को अब लंड का दर्शन करना है।

इस पर उसने तुरंत अपना लंड निकाल कर उसके मुंह के ऊपर फनफनता नाग की तरह जो काफी विशाल और डरवाना लग रहा था । और रिमझिम ने सहमते हुए अपनी जीभ हल्का निकाल लंड पर फिराने लगी ,

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परंतु अभी मस्ती की नैया पर बैठी ही थी की नीचे से उसकी सास ने आवाज लगाया क्योंकि वह काफी देर से बैठी थी बालों में मेहंदी लगवाने के लिए ।

रिमझिम और अखिलेंद्र तुरंत सकपका गए और दोनो का नशा हल्का टूटा और सतर्क हो गए । रिमझिम तुरंत अलग होते हुए कपड़े ठीक करने लगी , इस पर अखिलेंद्र उसका हाथ पकड़ लिया ” मर्द तो आखिर मर्द होता है , उसे कमपूर्ति में खलल पसंद नहीं आया।

इस पर रिमझिम ने कहा की रात को मैं आऊंगी लेकिन ध्यान रहे, में कुछ बोलूंगी नहीं और न ही आपको अपने मुंह से कोई आवाज निकलना है क्योंकि आवाज काफी गूंजेगी। और कहीं किसी को पता न लग जाए।

इस पर अखिलेंद्र ने चिंता जाहिर किया की ” सपना ने देख लिया तो फिर मैं कहीं का नहीं रहूंगा और खुदकुशी कर लूंगा”

इस पर रिमझिम के शैतानी दिमाग में एक शानदार आइडिया आया और उसे अपनी मंजिल नजर आने लगी। और उसने अखिलेंद्र से कहा ” आप चिंता न करो मैं सपना के सोने का प्रबंध नीचे अपने कमरे में कर दूंगी आज और कोई पूछेगा तो बोल दूंगी की आपके कमरे का बिजली खराब हो गया है। और ऐसा बोलते हुए उसने उस कमरे का फ्यूज निकाल लिया। और नीचे चली गई।

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