लुका छुपी
Update 10
मैसेज मिलने के बाद सपना काफी कश्मशकस में थी और कुछ सोचते हुए फिर पढ़ाई बंद कर लेट गई और कुछ सोचने लगी।
वह सोचने लगी कि ऐसा मेरे साथ क्यों हो रहा है, जब मुझे पता चल गया है की मेरी शादी तय हो गई है वो भी एक सज्जन और सभ्य लड़के के साथ तब मुझमें इतने गंदे विचार क्यों आ रहे हैं। उसने आंखे बंद की और प्रभु को याद किया और सोचा की मैं अब ऐसा कभी नहीं करूंगी । कुछ भी हो जाए मैं खुद को बहकने नहीं दूंगी और अपनी कौमार्य भंग नहीं करूंगी शादी से पहले । काफी देर ऊहा पोह में रहने के बाद वैसे ही कुछ देर बिस्तर पर लेटे लेटे थोड़े देर के लिए सो गई और फिर बाद में उठ के रात के खाने का इंतजाम करने लगी।
इधर अखिलेंद्र भी उठा और शाम हो रहे थे , अभी तक उसे गांजे की हल्की खुमारी चढ़ी हुई थी , उसे भूख भी लगी थी , इस पर उसने देखा उसकी बेटी खाने का इतजाम कर रही है।
शर्म और जिल्लत की वजह से वो काफी खामोश था और कुछ देर के लिए बाहर निकल कर नीचे अपने रिश्तेदार जो की जिनके यहां वो ठहरा था उनके पास हाल चाल के लिए गया । वहां रिमझिम के सास ससुर और पड़ोस के एक अंकल बैठे थे और रिमझिम भी नीचे ही बने किचन में कुछ काम कर रही थी।
जैसे ही वो नीचे आया , उन्होंने अखिलेंद्र का स्वागत किया और बैठने को कहा और रिमझिम के सास ने रिमझिम को चाय लाने को कहा , इस पर रिमझिम आई और बड़े ही संस्कारी लहजे में उसने बोला ” जी मां जी अभी लाती हूं” अखिलेंद्र मन में सोचने लगा की यह लड़की कितनी मायावी है। अभी कुछ देर पहले कैसे एक टिपिकल बदचलन सा व्यवहार उसने किया और अभी कितनी सती सावित्री बनी हुई है।
खैर बात चीत के क्रम में पता चला कि बगल के अंकल के यहां कल रात चोरी हुई है। वहां चोरों का काफी आतंक था , और आस पास के लोगों में इसका काफी भय था , अक्सर रात को किसी न किसी के यहां चोरी होते रहती हैं।
इस पर अखिलेंद्र ने चिंता जाहिर की तभी रिमझिम के ससुर ने कहा की कोई चिंता की बात नहीं है मेरे यहां किसी चोर की हिम्मत नहीं होती है। दरअसल रिमझिम के ससुर पुलिस में थे और अभी रिटायर्ड हो चुके हैं, कहीं न कहीं यह भी कारण हो सकता है की उनके यहां कभी ऐसी घटनाएं नहीं होती।
रिमझिम के सास ने कहा ” अरे मैंने इन्हें कितने बार समझाया है की इतने लापरवाह न रहिए और बहु को नीचे ही शिफ्ट कर दीजिए , मुझे तो काफी डर लगता है ऐसी बातों से , कही हमारे यहां भी किसी दिन अनहोनी न हो जाए”
इस पर रिमझिम ने चाय लाते हुए कहा ” अरे चिंता न करें मां जी आपकी बहू भी जुड़ो कराटे सब जानती है , आने तो दीजिए कभी उन्हें सबकी धुलाई कर बाबूजी के थाने में बंद करवा दूंगी” इस बात से सभी लोग हंस पड़े और माहौल कुछ सामान्य हो गया।
रिमझिम ने सबको चाय दिया और जब अखिलेंद्र को चाय दे रही थी तभी घूंघट के भीतर से ही एक कुटिल और कामुक अंदाज में अपनी नजरों से अखिलेंद्र को देखा।

इस अदा पर अखिलेंद्र थोड़ा हिल गए । और तभी रिमझिम के ससुर ने कहा की ” बहु तुम्हारी सास ठीक कहती है , तुम आज से नीचे के कमरे में ही रहो, मैं तुम्हे अकेले ऊपर के कमरे में नहीं रख सकता , जब तक ऐसा चोर उच्चको का माहौल खत्म नहीं होता इस मोहल्ले में ।
तभी रिमझिम ने तपाक से कहा ” बाबूजी , अभी एकाध दिन तो चाचाजी और सपना भी हैं ऊपर तो मुझे किसी बात की कोई चिंता नहीं है। और फिर कुछ दिनों में मैं अपना सामान नीचे शिफ्ट कर लूंगी।
और अखिलेंद्र के तरफ देखते हुए रिमझिम ने कहा “चाचाजी, वैसे तो सपना का फोन नंबर मेरे पास है, आप भी अपना नंबर मुझे दे दीजिए कोई बात होगी तो मैं आपको फोन कर लूंगी। और आपके जाने के बाद मैं वाकई में ऊपर नहीं रहूंगी क्योंकि यहां का माहौल सच में ठीक नहीं है”
रिमझिम जैसी शातिर और धूर्त लड़की ने ऐसा सबको राजी किया , यह देख अखिलेंद्र काफी प्रसन्न हुए और मन में कहा” यह लड़की कितनी चालू है , काश मेरी बेटियां भी ऐसी ही होती जिससे की उन्हें ससुराल में कोई ज्यादा दिक्कत नहीं होती, क्योंकि आज के दुनिया में ऐसी चालू और तेज बहुओं का ही गुजारा है, वरना ससुराल में तो घर आई सीधी सादी बहु को सभी लोग दबा कर रखते हैं।
और फिर अखिलेंद्र ने कहा ” बहु, मुझे तो मोबाइल चलाना आता नहीं है, भले ही मैं मोबाइल रखता हू , लेकिन मुझे ज्यादा कुछ नहीं आता है आजकल ये टेक्नोलॉजी। ये लो मेरा मोबाइल और खुद ही उसमे से मेरा नंबर निकाल लो।
इस पर रिमझिम उनका नया मोबाइल लेकर नंबर निकाल ली और उनका व्हाट्स एप भी इंस्टॉल कर के व्हाट्सएप चालू कर दी। और उन्हें इस बारे में अच्छे से समझा दी। उस वक्त सभी उसके सामने थे इसलिए किसी को शक न हो इसलिए काफी सामान्य और शालीनता के साथ अखिलेंद्र को मोबाइल पर व्हाट्सएप चलाना सीखा दिया ।
यह देख रिमझिम के ससुर फूले न समाए की उनकी बहू कितनी तेज और बुद्धिमान है।
तभी रिमझिम ने सबसे नज़रे बचा कर ” अखिलंद को कहा ” चाचा जी मैने तो सब सिखा दिया और अगर कोई समस्या आए तो सपना आपको सब सिखा देगी।
यह बात सामान्य सी थी लेकिन इसे कहते रिमझिम ने फिर से सबसे नज़रे बचा कर एक कुटिल मुस्कान से अखिलेंद्र को देखा।
अखिलेंद्र को काफी अजीब लगा की यह रिमझिम ने ऐसा इस अंदाज से क्यों कहा।
खैर अब अखिलेंद्र ने सबसे इजाजत मांगी और वापस छत पर आ गए ।
दोनो बाप बेटी बिना एक दूसरे से बात किए खाना वगैरा खाने लगे। दोनो के बीच एक गहन खामोशी छा गई थी, कोई किसी से ज्यादा बात नहीं कर रहा था, और इसका कारण भी दोनो समझ नहीं पा रहे थे । दोनो का मन और शरीर काफी विचलित हो गया था और दोनों अपने इस कामुक सोच और व्यवहार की वजह से परेशान थे । जैसे कोई परा शक्ति इनको बलात इस परिस्थिति में धकेल रहा था।
दोनो बाप बेटी सोने लगे। रात को करीब 1 बजे अखिलेंद्र उठा और दिन में सोने की वजह से उसकी नींद पूरी हो गई थी और वह अनायास ही बाहर के तरफ छत पर ही टहल लगाने चला गया और एक सिगरेट जला कर पीने लगा । तभी देखता है की रिमझिम के कमरे की लाइट जल रही है।


