लुका छुपी
Update 1
सभी पाठकों को मेरा अभिवादन , मैं काफी दिनों से इस अहसास से पीड़ित हू। मेरा मानना है की ,दरअसल incest एक बागी तेवर है। जिसमें व्यक्ति वही करना चाहता है जिस चीज की उसे मनाही होती है।
लगभग 90 प्रतिशत लोगों के अवचेतन मन में उस काम को करने का उन्माद होता है जिसे करने से किसी प्रकार का डर होता है। चाहे वो सामाजिक, धार्मिक या अन्य किसी भी तरह के बंधन की वजह से व्यक्ति उस काम को नहीं कर पाता है। अगर सभी बंधनों और डर को हटा दिया जाए तो और अपने मन के घोड़ों को मुक्त कर दिया जाए तो आप देखेंगे कि सबसे ज्यादा मजा उसी कार्य में आयेगा जिसे आप वर्षों से किसी कारण से नहिं कर पाए हों। हर व्यक्ति को अपने घर के किसी विपरीत लिंगी के प्रति कुछ खास अहसास होता है, किसी को अपनी दीदी काफी अच्छी लगती है किसी को चाची तो किसी को अपनी सगी मां में कुछ अनोखा स्वाद मिलता है तो किसी लड़की को अपने भाई या पिता में अपने अहसास का पहला पन्ना समाया होता है।
इसी तर्ज पर एक कहानी को लेकर पेश हूं , उम्मीद है की आप लोग मुझे अपना साथ और प्यार देंगे।
यह कहानी एक ऐसे ही मजबूर परिवार की है जिनके ऊपर मुसीबतों के जंजाल तो है परंतु एक दूसरे से काफी प्यार है साथ ही भीतर की हवस भी अंदर ही अंदर सभी सदस्यों को परेशान किए हुआ है।
परिवार के सदस्यों में एक पिता अखिलेंद्र पांडेय परिवार का मुखिया और उनकी धर्मपत्नी माला देवी तथा उनकी दो बेटियां सपना और ब्यूटी थी और एक छोटा बेटा शेखर है।
अखिलेंद्र एक साधारण निम्न मध्यम वर्ग के व्यक्ति थे और किसी तरह अपने इलाकों के बच्चो को ट्यूशन पढ़ा कर और खेती बाड़ी कर अपने परिवार का गुजारा कर रहे थे, धर्मपत्नी माला की तबियत हमेशा खराब रहती थी इसे लेकर अखिलेंद्र पांडेय काफी परेशान रहते थे। इसी बीच उनकी जवान हो रही बड़ी बेटी का भविष्य सोच कर चिंतित थे। उसके लिए उन्हें सुयोग्य वर की भी तलाश थी , कुछ भी हो लेकिन अखिलेंद्र पांडेय अपने परिवार को अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करते थे और अपने परिवार के लिए वो कुछ भी कर सकते थे। इसके साथ ही अखिलेंद्र पंडित भीतर से एक बेहद ही कामी पुरुष तथा असंतुष्ट थे। बदन काफी बलिष्ट और यौवन झलकता था, चौड़ा सीना और सीने पे घनघोर काले चूंकि घर गृहस्थी में अनवरत रहते अत्यधिक श्रम करते थे जिसकी वजह से पेट सपाट मजबूत जांघें और कठोर हाथ । उम्र के 50 वे साल पर भी वो निहायत युवा सा जान पड़ते थे। हालांकि उनकी धर्मपत्नी एक बेहद आकर्षक महिला थी लेकिन उनकी तबियत (भूत बाधा) खराब होने की वज़ह से वो ज्यादा संभोग नहीं कर पाते थे या यूं कहें कि अपनी बीबी की जो की शरीर से काफी कामुक थी उन्हे नंगी देख देख कर बस हिलाना ही आदत हो गया था क्योंकि उनकी धर्मपत्नी को सेक्स करने वर्जित था।
दिन बीतते गए और यह क्रम ऐसा ही चलता रहा इस अगस्त में सपना उनकी बड़ी बेटी 26 की हो जायेगी । सपना एक बेहद शांत शुशील, शर्मीली और समझदार एवम बला सी खूबसूरत किशोरी थी। 5 फुट 4 इंच की हाइट बड़े मदमस्त नाक और नयन , शरीर हल्का गदराता हुआ पीछे के उभारे उसे विरासत में अपनी मां से मिला था । और गोरा रंग लिए एक गेंहुवा मिश्रण सा बदन था चूंकि अखिलेंद्र सांवले मर्द थे इसलिए उसके कामुक बदन में हल्का पिता सा रंगत भी था ।
सपना की खूबसूरती और चाल चलन की तारीफ पूरे घर परिवार रिश्तेदारों तक था। लेकिन सपना ज्यों ज्यों बड़ी हो रही थी उसके भीतर एक अजीब खामोशी एक अनंत सन्नाटा पसर रहा था और शरीर के अंगों और आंखों में भी वह गंभीरता उतरने लगा था।
स्नातक की पढ़ाई का अंतिम सत्र चल रहा था और परीक्षा की तिथि भी घोषित हो चुकी थी, लेकिन समस्या यह थी कि परीक्षा केंद्र घर से 50 किलोमीटर दूर पास के शहर में पड़ा था और रोज आना जाना संभव नहीं था या जवान बिटिया को किसी रिश्तेदारों के यहां अकेला छोड़ना भी अखिलेंद्र पांडेय को नागवार गुजर रहा था। इसी ऊहा पोह में पड़े अखिलेंद्र ने अपनी धर्मपत्नी की राय से 10 दिनों के लिए कमरा किराए पे लेकर रहने का विचार किया गया। अब सवाल यह था कि सपना के साथ जायेगा कौन क्योंकि वहां अकेले तो छोड़ नहीं सकते तो अखिलेंद्र खुद ही जाने का निश्चय किया । और अपनी छोटी बेटी जो एक काफी मुंहफट और चालाक धूर्त तरह की लड़की थी, हालांकि वो अभी 19 साल की थी लेकिन काफी समझदार थी। अखिलेंद्र ने ब्यूटी को समझा दिया की मां का ख्याल अच्छे से रखना है और सबसे छोटा बेटा शेखर 18 जो काफी खामोश और चुप रहने वाला मंदबुद्धि लड़का था उसे अच्छे से हिदायत देकर अखिलेंद्र ने समझा दिया की परिवार का ख्याल रखेगा। शेखर को कसरत और खेलने का शौक था उसे अपने बॉडी का ही ख्याल हमेशा रहता था ।
सपना



