लंड के कारनामे – फॅमिली सागा – Update 6

लंड के कारनामे - फॅमिली सागा - Incest Sex Story
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उसकी ३४ब साइज़ की सफ़ेद रंग की चूचियां तन कर खड़ी थी, और उन स्तनों की शोभा बढ़ाते दो छोटे-२ निप्पल्स किसी हीरे की तरह चमक रहे थे.
फिर उसने अपने हाथ अपनी जांघो के बीच में डाला और अपनी चूत में से वो काला डिल्डो निकाला , वो पूरी तरह से गीला था, उसका रस डिल्डो से बहता हुआ ऋतू की उँगलियों तक जा रहा था, मैंने उसके हाथ से डिल्डो लिया और उसको चाटने लगा, गर्म और ताज़ा, मैं जल्द ही उसे पूरी तरह से चाट गया, वो ये देखकर खुश हो गई.
मैं : ” मुझे भी तुम्हारा रस अच्छा लगा”
ऋतू बोली “अब मुझे भी तुम्हारा थोडा रस और चखना है…अपना लंड अपने हाथ में पकड़ो…”
मेरे लंड के हाथ में पकड़ते ही वो झुकी और मेरे लंड के चारो तरफ अपने होंठो का फंदा बना कर उसमे बची हुई आखिरी बूँद को झट से चूस गई.. मैं तो सीधा स्वर्ग में ही पहुँच गया.
“वाउ …” मैंने कहा “ये तो और भी अच्छा है”
ऋतू बोली ” तुम्हारा लंड भी इस नकली से लाख गुना अच्छा है”
“क्या मैं भी तुम्हे टेस्ट कर सकता हूँ”…मैंने शर्माते हुए ऋतू से पुचा.
“तुम्हारा मतलब है जैसे मैंने किया….क्यों नहीं….ये लो.”
इतना कहकर वो मेरे बेड पर अपनी कोहनी के बल लेट गयी और चोडी करके अपनी टाँगे मोड़ ली, उसकी गीली चूत मेरे बिलकुल सामने थी.मैं अपने घुटनों के बल उसके सामने बैठ गया और उसकी जांघो को पकड़ कर अपनी जीभ उसकी चूत में डाल दी…वो सिसक पड़ी और अपना सर पीछे की तरफ गिरा दिया..
उसकी मादक खुशबु मेरे नथुनों में भर गयी …फिर तो जैसे मुझे कोई नशा सा चढ़ गया, मैं अपनी पूरी जीभ से उसकी चूत किसी आइसक्रीम की तरह चाटने लगा, ऋतू का तो बुरा हाल था, उसने अपने दोनों हांथो से मेरे बाल पकड़ लिए और खुद ही मेरे मुंह को ऊपर नीचे करके उसे कण्ट्रोल करने लगी, मेरी जीभ और होंठ उसकी चूत में रगड़कर एक घर्षण पैदा कर रहे थे और मुझे ऐसा लग रहा था की मैं किसी गरम मखमल के गीले कपडे पर अपना मुंह रगड़ रहा हूँ….उसकी सिस्कारियां पुरे कमरे में गूंज रही थी..और फिर वो एक झटके के साथ झड़ने लगी और उसकी चूत में से एक लावा सा बहकर बाहर आने लगा.
मैं जल्दी से उसे चाटने और पीने लगा, और जब पूरा चाटकर साफ़ कर दिया तो पीछे हटकर देखा, ऋतू का शारीर बेजान सा पड़ा था और उसकी अद्खुली ऑंखें और मुस्कुराता हुआ चेहरा हलकी रौशनी में गजब का लग रहा था.
मेरा पूरा चेहरा उसके रस से भीगा हुआ था.
वो हंसी और बोली “मुझे विश्वास नहीं होता की आज मुझमें से इतना रस निकला….ऐसा लग रहा था की आज तो मैं मर ही गई”
मैंने पूछा “तो तुम्हारा जवाब क्या है”?
“हाँ बाबा हाँ, मैं तैयार हूँ” वो हँसते हुए बोली.
वो आगे बोली “लेकिन वो भी पहली बार सिर्फ तुम्हारे लिए, तब तुम अपने दोस्तों को नहीं बुलाओगे….फिर बाद में हम डिसाईड करेंगे की आगे क्या करना है”
“ठीक है…मुझे मंजूर है” मैंने कहा.
मैंने उसे खड़ा किया और उसे नंगे ही गले से लगा लिया “तुम्हे ये सब करना काफी अच्छा लगेगा ”
वो कसमसाई और बोली “देखेंगे…”
और अपना गाउन पहन कर अपने डिल्डो को अंडर छुपा लिया और बोली “मुझे भी अपनी चूत पर तुम्हारे होंठो का स्पर्श काफी अच्छा लगा..ये एहसास बिलकुल अलग है…और मुझे इस बात की भी ख़ुशी है की मेरा अब कोई सिक्रेट भी नहीं है”
“हम दोनों मिलकर बहुत सारे पैसे कमाएंगे…” मैंने कहा…” और बहुत मज़ा भी करेंगे….”
“गुड नाईट ” मैंने बोला.
“गुड नाईट ” ये कहकर वो अपने रूम में चली गयी.
मैं भी ऋतू के बारे में और आने वाले समय के बारे में सोचता हुआ अपनी आगे की योजनायें बनाने लगा..

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