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ऋतू की चुदाई देखकर मेरा भी चूत मारने का मन कर रहा था. अगर अंकल ना होते तो किसी को भी पकड़ लेता और चोद देता घर में…पर अभी के लिए ये मुमकिन नहीं था.
मम्मी ने ऋतू की हालत देखी और वो समझ गयी की उनकी बेटी चुद चुकी है उनके प्यारे जीजू से. ये देखकर अब उनकी बुर में भी खुजली होने लगी थी. सभी ने टेबल पर बैठ कर खाना खाया और सुस्ताने लगे.
मैंने देखा की मम्मी दीपा आंटी से कुछ खुसर फुसर कर रही है, वो शायद अंकल से चुदने की योजना बना रही थी.अभी दोपहर के चार बजे थे, पापा लगभग 6 बजे तक आते थे ऑफिस से, अभी उन्हें आने में टाइम था.
मम्मी किचन में बर्तन समेटने लगी. अंकल ने उन्हें कहा “दीदी…आप कितना काम करती हैं…आप घर में नौकरानी क्यों नहीं रख लेती..”
मम्मी : “हाँ…मैं भी यही सोच रही थी..पर आजकल ढंग की नौकरानी मिलती कहाँ है.”
दीपा : “अरे.दीदी..मेरी एक सहेली रहती है यहाँ दिल्ली में…..जो डोमेस्टिक हेल्पर्स प्रोवाईड करवाते हैं…मैं उससे बात करती हूँ..”
मम्मी : “हाँ…ठीक है…”
दीपा आंटी फ़ोन पर अपनी सहेली से बात करने लगी और अंकल ने मौका देखकर उनसे बात करना शुरू कर दिया
अंकल : “दीदी सच में…आप की तो जवानी ढलने सी लगी है किचन में…आप को तो किसी रानी जैसे रहना चाहिए अपने कमरे में..और बाकी लोग आपके इर्द गिर्द नौकरों जैसे …” अंकल उनकी कुछ ज्यादा ही चापलूसी कर रहे थे.
ये सुनकर मम्मी मुस्कुराने लगी और बोली “क्या बात है छोटे जीजाजी…बड़ा माखन लगा रहे हो…क्या चाहते हो आखिर..” और उनकी आँखों में झांककर देखने लगी..
अंकल की नजर मम्मी से मिली और फिर फिसलकर नीचे उनके क्लीवेज पर जाकर रुक गयी…और फिर ऊपर नजर करके बोले…”जो चाहिए मिलेगा क्या….”
मम्मी उनकी बात सुनकर चोंक गयी, उन्होंने उम्मीद नहीं की थी की उनके भोले भाले छोटे जीजाजी ऐसे जवाब भी दे सकते हैं.. पर वो भी तो यही चाहती थी..उन्होंने अपनी छाती निकाल कर कहा “हाँ…आप हुक्म करो…क्या चाहिए…आखिर आप मेरे प्यारे से छोटे जीजा जो हो…” और ये कहकर वो हंसने लगी..
तभी दीपा आंटी ने आकर कहा “दीदी..मैंने बात कर ली है…कल वो कुछ लड़कियों को भेजेंगे…आप बात कर लेना अपने हिसाब से..”
थोड़ी देर बाते करने के बाद दीपा आंटी और हरीश अंकल गेस्ट रूम में चले गए, अंकल और आंटी को देखकर लगता था की आज कुछ करके रहेंगे वो.., अयान और सुरभि ऋतू के साथ ऊपर की तरफ चल दिए.
मैं बाहर निकल गया और गेस्ट रूम की खिड़की से अन्दर का नजारा देखने लगा.
आंटी : “बड़े मजे ले रहे हो आप इस बार दीदी से…क्या बात है…इरादे तो ठीक हैं न….”
अंकल ने आंटी को अपनी बाहों में भरकर कहा : “अरे मेरी जलेबी…मेरी रसमलाई…तुम दोनों बहने हो ही इतनी खुबसूरत की किसी का भी ईमान डोल जाए…” और उन्होंने दीपा आंटी को चूम लिया.
“आप तो रहने ही दो…मेरे पास आने का तो टाइम ही नहीं है आपके पास…और अभी भी पूर्णिमा दीदी के बारे में ही बात कर रहे हो.. अगर ज्यादा ही पसंद आ गयी है तो बुला लाती हूँ उन्हें अभी…” उन्होंने बाहर जाने का नाटक किया.
अंकल ने उनका हाथ पकड़ा और फिर से अपनी तरफ खींच लिया और उनके मोटे चुचे दबाकर बोले “बड़ा शौक आ रहा है तुम्हे अपनी बहन को अपने पति से चुदवाने का…हूँ…” और उन्होंने दीपा आंटी के होंठों को चूसना शुरू कर दिया..
आंटी की हालत खराब हो गयी…उन्होंने खड़े हुए ही मचलना शुरू कर दिया…और बोली “अरे…मेरे राजा…अभी तो तू मुझे चोद दे…और दीदी को चोदने का मन है तो उन्हें भी चोद लेना….”
मैं दीपा आंटी की बात सुनकर हैरान रह गया…पर तभी अंकल बोले… “और तू किससे चुदना चाहती है…ये भी तो बता…अपने जीजू से क्या…बोल साली…रंडी…अपने जीजा के ऊपर नजर है न तेरी… ” और उन्होंने दीपा आंटी के सूट को सामने से पकड़ा और फाड़ दिया..
मैं समझ गया की वो दोनों एक दुसरे से गन्दी-२ बाते करके एक दुसरे को उत्तेजित कर रहे हैं…और अपनी फेन्तासी एक दुसरे को बता कर सेक्स की गेम को रोचक बना रहे हैं…
दीपा आंटी का सूट आगे से पूरा फट गया था…आंटी ने शायद सोचा नहीं था की अंकल इतने ज्यादा उत्तेजित हो जायेंगे बाते करते हुए की वो उनके कपडे फाड़ने शुरू कर देंगे… पर अब जो हो गया सो हो गया..उनके ब्रा में फंसे हुए चुचे बाहर निकलने को तेय्यार थे..
आंटी ने अंकल को बेड की तरफ धक्का दिया और उनके ऊपर चढ़ गयी…और उनके होंठों को किसी पागल की तरह से चूसने लगी…उनके मुंह से लम्बी-२ लार निकल रही थी..जो अंकल के मुंह और गले पर गिर रही थी…
वो बोली “हां….चुदना है मुझे भी अपने जीजू से….और चुदना है मुझे आशु से….और चुदना है मुझे अयान से….”
उन्होंने एक तरह से इकबालिया जुर्म कबूल लिया था…पर अंकल सोच रहे थे की आंटी सेक्स को बढ़ाने के लिए ऐसी बाते कर रही है या शायद अपने दिल की बात कह रही है…सो उन्होंने भी गन्दी बातों को आगे बढ़ाते हुए कहना शुरू किया…
“बड़ी आग लगी हुई है तेरी चूत में साली…हरामजादी..अपने जीजे के साथ -२ अपने भांजे और बेटे का लंड भी लेने को तैयार है..बड़ी भेन की लोडी है तू तो…”
आंटी : “आप भी तो कल से ऋतू के साथ कुछ ज्यादा ही मजे ले रहे हो..मुझे सब मालुम है..उसके मोटे चुचे चुसना चाहते हो आप….आपका बस चले तो आप सुरभि की चूत भी मार लो…. ”
उनकी बात सुनकर जैसे अंकल के अन्दर का जानवर जाग उठा, अपनी बेटी को चोदने के ख़याल से ही उनके रोंगटे खड़े हो गए ..
अंकल ने झटके से उनकी ब्रा भी फाड़ दी और अपने पैने दांत गाड़ दिए उनके गोरे मुम्मों पर..वहां गहरा लाल निशान पड़ गया.
अंकल की इस वेह्शी हरकत को देखकर आंटी और जोर से तड़पने लगी और उनका मुंह पकड़कर अपने स्तन को उनके मुंह में ठूस दिया और चिल्लाई….
“अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह चुसे इन्हें…मेरे राजा…निचोड़ डालो…आज खा जाओ इन्हें..आआआज ”

पति-पत्नी का इतना गहरा प्यार मैंने आज तक नहीं देखा था. जो एक दुसरे से चुदाई के समय इस तरह की बात कर रहे थे, शायद इससे उनके अन्दर सेक्स करने के लिए उत्तेजना की भावना कुछ ज्यादा ही आ जाती थी..जिससे दोनों को ही मजा मिलने वाला था..
आंटी ने अपने फटे हुए कपडे उतार डाले और ऊपर से नंगी हो गयी…उन्होंने अंकल की पेंट और शर्ट को उतारा और उन्हें बेड पर लिटा दिया..
उन्होंने अपनी फटी हुई ब्रा उठाई और उसके स्ट्रेप से अंकल के हाथ बाँधने लगी बेड की रोड के साथ सर के ऊपर की तरफ…अंकल के साथ-२ मैं भी नहीं समझ पाया की आंटी ऐसा क्यों कर रही है..फिर सोचा शायद इसी तरह के खेल खेलने में इन्हें ज्यादा मजा आता होगा.. और फिर उन्होंने अंकल के पैर भी बाँध दिए..अंकल भी अपने हाथ पैर बंधवाकर मजे ले रहे थे..
आज तक शायद आंटी ने उन्हें इस तरह से मजे नहीं दिए थे, कुछ नया करने से सेक्स करने का मजा दोगुना हो जाता है..शायद यही वो भी कर रहे थे उस समय.
अंकल अब बेड पर नंगे बंधे लेटे थे और भूखी निगाहों से आंटी की तरफ देख रहे थे..आंटी ने अपनी सलवार उतारी..अन्दर उन्होंने चड्डी नहीं पहनी थी..और आज उनकी चूत देखकर लग रहा था की जैसे वहां किसी ने तेल से मालिश की हो, इतनी चमक रही थी, अपने ही रस में नहाकर वो.
आंटी उछल कर बेड पर चढ़ गयी..उन्होंने अंकल के पैरों को चूमना शुरू किया और धीरे-२ ऊपर आते हुए उनके लंड तक आई…पर उसे चूमा या चूसा नहीं..और फिर उनके पेट, छाती, निप्पलस और गर्दन को चूसते और चुमते हुए उनके होंठों के ऊपर अपनी जीभ फेरने लगी…
अंकल : “साली..कुतिया…क्यों तडपा रही है… तेरी चूत से भी पानी निकल रहा है…भेन की लोडी…बैठ जा मेरे लंड पर….जल्दी कर…”
“अभी नहीं मेरे राजा….जल्दी किस बात की है…पहले मेरी चूत के पानी को तो चखो…” और ये कहकर वो खड़ी हो गयी..और उनके सर के दोनों तरफ पैर रखकर धीरे-२ नीचे आने लगी…
उनकी फैली हुई गांड पीछे से देखकर मेरा मन कर रहा था की अभी जाऊं और साली आंटी की गांड में लंड ठूस दू.. आंटी की चूत से इतना रस निकल रहा था की जब तक आंटी की चूत अंकल के मुंह से टकराई, अंकल के मुंह में करीब तीन-चार बूंदे पहले ही गिर चुकी थी…उनके गाड़े रस की. और जैसे ही अंकल की लालायित सी जीभ ने आंटी की चूत को छुआ…आंटी की चीख ही निकल गयी…
“अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ओह मेरे राजा……..अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह…….मजा आ गया……ओफ्फ्फ्फ़……” और उन्होंने अपनी चूत के किवाड़ अपने हाथों से खोले और अंकल की जीभ को अन्दर का रसीला रास्ता दिखाया ..अंकल बड़े मजे से उनकी चूत को सुखाने में लग गए.
पर ये औरत की चूत भी बड़ी अजीब सी चीज है…जितना चुसो उतना ही रस निकालती है…इतना पानी आता कहाँ से है औरतों की चूत में. खेर…उनकी चुदाई देखकर मेरा लंड फटने को तैयार हो गया…
आंटी ने अपनी चूत को बड़ी ही बेदर्दी से अंकल के मुंह पर खुरचना शुरू कर दिया..उन्होंने बेड की रेलिंग पकड़ी हुई थी और अपनी चूत की रेलगाड़ी, अंकल की जीभ वाली पटरी पर दौड़ा रही थी…और उनके मुंह से आँहों का धुआं निकल रहा था..
“ओह्ह्ह्हह …फक्क……मेरे राजा…..तुमसे अच्छा कोई भी इस दुनिया में चूत नहीं चाटता…..अह्ह्ह्ह और चुसो….सारा रस पी जाओ….और अन्दर डालो….अपनी जीभ …हाँ यहाँ….काटो इसे…हां हाआआन हाआआअ…ओफ्फ्फ्फ़ फुचक्क्क्क अह्ह्हह्ह्ह्ह…..” और ये कहते हुए उन्होंने अपने पेट के अन्दर का सारा रस निकाल कर अंकल के मुंह को धो दिया.. और नीचे लेटकर हांफने लगी.
अंकल का लंड अभी तक खड़ा हुआ था.
आंटी ने अपना फटा हुआ सूट उठाया और उसकी पट्टी बनाकर अंकल की आँखों पर बाँध दी…
“साली…ये क्या कर रही है….जल्दी से मेरे लंड पर बैठ जा….मुझे तेरी चूत मारते हुए तुझे देखना है…खोलो इस पट्टी को…” पर आंटी ने कुछ जवाब नहीं दिया और बेड से उतर गयी…और जल्दी से दरवाजे के पास पहुँच कर उसे खोल दिया.. मैं हैरान रह गया….बाहर मम्मी खड़ी थी..
आंटी ने उन्हें आराम से अन्दर खींचा और दरवाजा बंद कर दिया…वो जल्दी से अन्दर आई और उन्होंने अपने कपडे एक झटके में उतार फेंके. मैं हैरान था की ये हो क्या रहा है..पर फिर समझा की शायद इसी बात की योजना बना रही थी ये दोनों बहने खाने के बाद…
अंकल : “साली…हरामजादी….कहाँ है तू…..जल्दी से आ और बैठ जा मेरे लंड पर….जल्दी कर…”
वो बेड पर लेटे हुए , बंधे हुए, तड़प रहे थे, आंटी को चोदने के लिए…पर उन्हें क्या मालुम था की उनकी किस्मत में आज उनकी बड़ी साली की चूत भी लिखी है…
वो दोनों नंगी बहने पलंग के पास आई और ऊपर चढ़ गयी…मम्मी ने जैसे ही अंकल के खड़े हुए लंड को देखा तो उनके मुंह में पानी आ गया वो झुकी और उन्होंने अंकल के लंड को अपने मुंह में ले लिया…
अंकल के मुंह से ठंडी सिसकारी निकल गयी….”स्स्सस्स्स्सस्स्स अह्ह्हह्ह्ह्ह ….साली…..कुतिया…..और जोर से चूस इसे….
ऐसे चूस जैसे अपने जीजे का लंड चूस रही हो….मैं भी अपने लंड पर तेरी दीदी के होंठों को महसूस करना चाहता हूँ…..चूस मेरे लंड को…भेन चोद…तुम साली दोनों बहनों को एक साथ नंगा करके….चोदुंगा किसी दिन….चीखे मारोगी…देखना..” उनकी जुबान पर ********** बैठी थी शायद…सच निकल रहा था, पर ऐसा सच जो उन्हें अभी मालुम नहीं था.
आंटी आगे आई और उन्होंने अंकल की आँखों की पट्टी खोल दी..

आँखें खुलते ही उकी नजर अपना लंड चूस रही अपनी बड़ी साली पर पड़ी…और साथ लेटी अपनी पत्नी दीपा की तरफ… उन्हें हैरान परेशान देखकर दीपा आंटी बोली “तो चोद दो न …हम दोनों बहनों को एक ही पलंग पर…और हमारी चीखें निकाल दो…”
आंटी की बात सुनकर उनके चेहरे पर ख़ुशी के भाव आ गए…उनकी पत्नी अपनी मर्जी से उन्हें अपनी बहन को चोदने के लिए बोल रही थी…ऐसा कितने लोगो की किस्मत में लिखा होता है…
उन्होंने आंटी को इशारे से अपने हाथ खोलने को कहा. आंटी ने उनके हाथ पाँव खोल दिए..
हाथ खुलते ही उन्होंने मम्मी को अपनी बाँहों में समेटा और उनपर टूट पड़े…मम्मी भी सेक्स के नशे में डूबी से अपना शरीर अपने जीजे से नुचवाने लगी…और लम्बी-२ सिस्कारियां लेने लगी…
“अह्ह्ह्हह्ह जीजू…….चाटो…आप यही चाहते थे न…..चाटो मेरे शरीर को….चोदो मुझे….फाड़ डालो मेरी चूत को….दाल दो अपना लंड मेरी चूत में….अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह…….”
अंकल : “मैं तो कब से तुम्हारी चूत मारना चाहता था….आज मौका मिला है…चोदने का….आज आपकी ऐसी चुदाई करूँगा की आप भी क्या याद करोगे….”
और ये कहते हुए उन्होंने अपना लंड सीधा मम्मी की चूत के ऊपर टिकाया और उनके मोटे-२ होर्न पकड़कर उन्हें दबाते हुए धक्का मारकर अपना लंड पेल दिया मम्मी की गीली चूत में… “अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह………येस्सस्सस्स…….आआअ जाओं ……मेरे प्यारे जीजू…………चोदो मेरी चूत को….”
और फिर तो जैसे अंकल के ऊपर कोई भूत सवार हो गया…उन्होंने मम्मी के हाथों को पकड़ा और उनके ऊपर झुक कर उनके मुम्मे चूसने लगे और धक्के मारने लगे…
उनके धक्के इतने तेज थे की उनके चुचे हर झटके से उनके मुंह से निकल जाते और वो उन्हें पकड़कर फिर से चूसने लगते और धक्के मारने लगते… आंटी भी अपनी चूत को मसल रही थी, अपने पति के द्वारा अपनी बहन को चुदते देखकर.. और बाहर खड़ा हुआ मैं अपने लंड को मसल रहा था, अपनी माँ को चुद्ता देखकर..
पुरे कमरे में मम्मी की चीखों का संगीत गूंज रहा था…
“अह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह ओफ्फ्फ्फ़ ओफ्फफ्फ्फ़ ओफ्फ्फ्फ़ अह्ह्हह्ह म्मम्मम्म अयूऊऊ ओये राजा…….अह्ह्हह्ह ….. म्मम्मम्मम हाआआन्न्न्न ऐसे.ही…..अह्ह्ह्हह्ह और तेज्ज…….और तेज्ज्ज्जज ……….फाड़ डालो……मेरी चूत को….”
अंकल ने अपना लंड बाहर खींचा और आंटी को एक झटके से मम्मी की बगल में लिटाया और अपना लंड घुसेड दिया उनकी चूत में…..आंटी की चीख निकल गयी… “अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ओफ्फ्फफ्फ्फ़ मर्र्र गयीई…..धीरे ….मेरे राजा…..हाआं…..”
अंकल के सामने वो दोनों बहने अपनी चूत फैलाये लेटी थी और अंकल बारी-२ से उन दोनों की चूत को मार रहे थे…और उनकी चीखें निकाल रहे थे… उनका लंड कहने को थोडा छोटा था…पर उसमे काफी दम था…लगभग बीस मिनट से वो दो बहनों की चूत मार रहे थे…पर झड़ने का नाम नहीं था…
जल्दी ही आंटी की चूत से उनके रस का सेलाब निकलने लगा…वो चिल्लाने लगी….. “अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ओफ्फ्फफ्फ्फ़ ………मजा आ गया…….म्मम्मम्मम्म ……ओह्ह्ह्हह्ह …..”
और अंकल ने अपना लंड उनकी रस से भरी हुई चूत से बाहर निकाला और नीचे झुककर उनका निकलता हुआ रस पीने लगे…
आंटी की चूत की फांके लाल हो चुकी थी चुदाई के बाद, बिलकुल लाल स्ट्रोबेरी की तरह और उसके बीच से निकलता हुआ उनका गाड़ा रस अंकल चपड़ -२ करके साफ़ करने में लग गए… और फिर उन्होंने अपना लंड मम्मी की चूत के अन्दर डाला और उन्हें जी जान से चोदने लगे….और जल्दी ही मम्मी के साथ-२ अंकल भी अपने आखिरी पड़ाव पर पहुँच गए और दोनों एक दुसरे के साथ-२ झड़ने लगे…
मम्मी चिल्लाई “अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ओफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ जीजू …….चोदो मुझे……हांन्न्न्नन्न दाल दो.अपना रस मेरी चूत में……निकालो……….अपना रस अन्दर …मेरी चूत के अन्दर……आआह्ह्ह्ह ” और अंकल ने उनकी बात का मान रखते हुए अपना सारा वीर्य मम्मी की चूत के अन्दर छोड़ दिया…
आंटी उठी और मम्मी की चूत पर अपना मुंह लगाकर वहां से अपने पति और बड़ी बहन का मिला जुला रस पीने लगी.. और फिर वो तीनो बेड पर नंगे लेट गए और एक दुसरे से छेड़ खानी करने लगे..
मैं अपना लंड पकडे अन्दर की तरफ चल दिया…और ऋतू या सुरभि की तलाश करने लगा….उनमे से किसी को भी चोदने के लिए. मैं सीधा ऊपर गया ऋतू के कमरे में…वहां तो सेक्स की कब्बड्डी चल रही थी…सुरभि की चूत उसका भाई अयान ऑंखें बंद करे ऐसे मार रहा था जैसे किसी लम्बे सफ़र का आनंद ले रहा हो..
सुरभि ने अपनी टाँगे ऊपर हवा में उठा रखी थी और अपने चोदु भाई के लम्बे लंड को अपनी चूत के अन्दर पिलवा रही थी…और चीख रही थी..
“अह्ह्हह्ह हाआआन्न भाईsssssssssssssss ….ऐसे ही….चोदो मुझेsssssssssssssss …अपनी बहन की चूत में अन्दर तक डालोsssssssssssssss….ये लम्बा लंडsssssssssssssss…चोदो न…..जोर से….अह्ह्हह्ह्ह्ह स्स्स्स…”

मैंने देखा ऋतू अपनी चूत को मसलते हुए उनकी चुदाई देख रही है… वो शायद पहले ही अयान से चुद चुकी थी…क्योंकि उसकी चूत काफी गीली थी उसके ही रस से… और उनकी चुदाई देखकर वो फिर से उत्तेजित हो रही थी…जैसे ही उसने मुझे देखा.. वो उछल कर मेरे पास आ गयी और मेरे कपडे नोचते हुए बोली…”आशु…भाई….कहाँ थे तुम इतनी देर से…हाँ….अपनी बहन की चूत मारने का मन नहीं करता अब क्या…
कल से मुझे नहीं चोदा तुमने…जल्दी निकालो…अपना लंड….अपना मोटा लंड…और डाल दो अपनी प्यारी ऋतू की चूत में….जल्दी करो न…..”
मैं : “हाँ ऋतू रुको….मेरा भी बुरा हाल है….अभी मैंने हरीश अंकल को मम्मी और दीपा आंटी को एक साथ चोदते हुए देखा है…इसलिए मेरा लंड फटा जा रहा है….”
मैंने जब ये बात कही तो ऋतू के साथ -२ अयान और सुरभि भी मेरी तरफ हैरानी से देखने लगे…
सुरभि बोली “सच में क्या…पापा ने मौसी की चूत मारी…और वो भी मम्मी के सामने…वाह….अब मजा आएगा…अब तो मैं भी पापा का लंड लेकर रहूंगी…”
ऋतू :”हाँ ….लेना जरुर तुम भी…मैंने लिया था..बड़ा मस्त चोदते है तेरे पापा….”
सुरभि : “हरामजादी कुतिया….तू पहले से ही ले चुकी है मेरे बाप का लंड….और बताया भी नहीं..अब तो मेरी चूत में जब तक पापा का लंड नहीं जाएगा मुझे चैन नहीं मिलेगा…”
अयान : “अरे…पहले जो तेरी चूत में है उसके मजे ले…पापा का लंड भी ले लेना..” और वो फिर से उसकी चूत के अन्दर दंगल खेलने लगा.
मैंने अपने पुरे कपडे उतारे और ऋतू की गीली चूत पर जैसे ही लंड टिकाया उसने जैसे अपनी चूत से सांस अन्दर खींची और मेरे लंड को अन्दर खींच लिया..मेरा लंड उसकी गीली चूत से फिसलता हुआ अन्दर तक जा पहुंचा..
“अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह …..सारे लंड एक तरफ….भाई का मुसल एक तरफ…..चोद मुझे भाई….आज मेरी चूत में आग लगी हुई है….चोद दे और बुझा दे अपने पानी से मेरी आग…..”
मैं : “तेरी चूत में कब आग नहीं लगती…मैंने तो जब भी देखा ये आग पहले से ज्यादा लगती है….ना जाने अभी और कितने लंडो को झुलसाएगी ये तेरी चूत की आग….” और फिर मैंने उसकी दोनों टाँगे उठा कर उसकी चूत का नाप लेना शुरू कर दिया अपने लंड से…मैं काफी देर से उत्तेजित था इसलिए ज्यादा देर तक नहीं खड़ा हो पाया ऋतू की चूत के मैदान में ..
पुरे कमरे में फचा फच की आवाजें आ रही थी…मैंने ऋतू के दोनों मुम्मे पकड़कर अपना वीर्य उसकी चूत में उड़ेल दिया…वो भी मेरे साथ ही झड़ने लगी… “अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ओह्ह्ह्ह भाई…….मजा आ गया……मन करता है पूरी जिन्दगी तुम्हारे लंड से अपनी चूत को सींचती रहूँ……..अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह……स्सस्सस्सस …..”
और फिर मैंने और ऋतू ने एक दुसरे के होंठों को चुसना शुरू कर दिया…
वहां सुरभि ने भी अपने भाई के लंड को ऐसा घिसा की उसके अन्दर का बाँध टूट गया और उसकी चूत के अन्दर सेलाब सा आ गया गाड़े पानी का… और वो गहरी साँसे लेती हुई उसके गले लग गयी और दोनों ने एक दुसरे के मुंह को चाटना और चूमना शुरू किया.
फिर मैं और अयान साइड में बैठ गए और सुरभि और ऋतू 69 के पोज़ में एक दुसरे की चूत से हमारे लंड से निकला खजाना खोजने लगे और चाटने लगे. फिर हम सभी ने अपने कपडे पहने और नीचे की तरफ चल दिए.
अब सुरभि के मन में सिर्फ एक ही लक्ष्य था..अपने पापा के लंड को अपनी चूत में डालना..उसने ऋतू से कहा तो वो उसकी हेल्प करने को तैयार हो गयी. नीचे मम्मी, आंटी और अंकल सोफे पर बैठे बातें कर रहे थे..
ऋतू ने अंकल के पास आकर कहा “ये क्या अंकल….आप यही बैठे हैं…आपने कहा था की मुझे प्रोजेक्ट को पूरा करने में हेल्प करेंगे….चलो मेरे साथ ऊपर…” अंकल ने आंटी और मम्मी की तरफ देखा और बोले “हाँ हाँ….चलो…मैं तुम्हारा प्रोजेक्ट पूरा करवाता हूँ…..” और वो ऋतू के साथ उठ खड़े हुए..
ऋतू और सुरभि में आपस में पहले से ही प्लानिंग बन चुकी थी.
ऋतू और अंकल ऊपर चले गए. प्लानिंग के अनुसार सुरभि को दस मिनट के बाद ऊपर जाना था…
तब तक मैं जल्दी से सुरभि को लेकर अपने कमरे में गया और उसके साथ दुसरे कमरे में क्या हो रहा है…ये देखने लगा.
कमरे में पहुँचते ही ऋतू ने अपनी और अंकल के कपडे नोच फेंके..और नंगे होकर एक दुसरे के शरीर से खेलने लगे.
अंकल का लंड फनफना रहा था, ऋतू जैसी कच्ची कलि की चूत जो उनके सामने थी, आज तक उन्होंने केवल आंटी की ही चूत मारी थी और उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की होगी की उन्हें ऐसी चिकनी, लड़की की चूत मारने को मिलेगी, और वो भी बार बार..जो उनकी बेटी की उम्र की थी और अपनी ही साली की बेटी थी, उन्होंने अपनी कुत्ते जैसी जीभ बाहर निकाली और ऋतू को कुर्सी पर बिठा कर उसकी आवभगत करने लगे..अपनी जीभ उसकी चूत में डालकर.
वो जीभ के नीचे से ले जाकर उसके नंगे पेट को भी चाट रहे थे. ऋतू का सपाट पेट जो अंकल की जीभ के खुरदुरेपन से गीला हो चूका था, थिरक सा रहा था, उसके अन्दर का गुदाज्पन कुछ ज्यादा हो बढ़ गया था पिछले कुछ दिनों में, कहीं वो प्रेग्नेंट तो नहीं है न…मैंने सोचा…
नहीं वो तो गोलियां लेती है, ऐसा केसे हो सकती है, पर आज के जमाने में कुछ भी हो सकता है, क्या पता गोलियां असर न कर पायी हो, वो प्रेग्नेंट हो, और क्या पता मेरे ही बच्चे की माँ बन्ने वाली हो, मेरे दिमाग में वायल्ड ख्याल आ रहे थे, जो सच थे भी या नहीं, मुझे नहीं पता.
पर अभी तो उसकी चूत की चटाई देखकर मेरे साथ खड़ी सुरभि की चूत में से लीकेज होने लगी थी, उसने मेरा हाथ पकड़कर अपनी रिसती हुई चूत पर टिकाया, उसकी आँखों में चुदने की बेकरारी साफ़ देखी जा सकती थी, पर अभी तो मेरा सारा ध्यान ऋतू और अंकल के ऊपर था.

मैं जानता था की अगर अभी मैंने सुरभि की चूत मारनी शुरू कर दी तो अंकल के साथ उसकी चुदाई अधूरी रह जायेगी. मैंने उसे समझाया की थोडा वेट कर ले…मेरा लंड तो यहीं है, अभी तो बस अपने बाप के लंड के बारे में सोच, वो समझ गयी और उसने अपनी चूत को थोडा और सब्र करने को कहा.
ऋतू चिल्ला रही थी “ओह्ह्हह्ह अंकल…..क्या चाटते हो….मजा आ गया…..आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह म्मम्मम्मम चाटो मेरी चूत का रस…..पी जाओ……ओह्ह्ह्हह्ह बड़ा स्वाद लग रहा है….है ना……”
अंकल :”हाँ….इतना मीठा रस तो मैंने आज तक नहीं पिया….सिर्फ गन्ने का रस ही तुम्हारे रस से मीठा होगा….इस दुनिया में….” वो कुछ ज्यादा ही तारीफ कर रहे थे…ऋतू की चूत के रस की..
ऋतू अब अपनी प्लानिंग पर आ गयी.
उसने अंकल के सर पर हाथ रखकर उनके बालों को सहलाते हुए प्यार से कहा….”अंकल….आपने कभी सुरभि की चूत मारने की भी सोची है क्या….”
सुरभि का नाम सुनकर वो ठिठक कर रुक गए, उनकी जीभ बाहर निकली रह गयी और उन्होंने अपनी नजरें ऊपर करके ऋतू की तरफ देखा “ये ये ….तुम ऐसा क्यों पूछ रही हो….”
ऋतू : “क्योंकि उसकी चूत भी इतनी ही मीठी है….जितनी की मेरी..”
अंकल : “क्या….तुमने..तुमने सुरभि की…च..चूत चखी है क क्या…”
ऋतू (मुस्कुराते हुए) : हाँ….चखी भी है और चुसी भी है…बड़ी ही मस्त है सुरभि की चूत…..”
ऋतू के ऐसा कहते ही अंकल का शरीर कांपने सा लगा, वो जैसे अपनी सोच में उस सीन को देखने लगे जिसमे ऋतू और सुरभि नंगे लेते हैं और ऋतू सुरभि की चूत को चाट रही है, चटखारे ले लेकर…
उन्होंने ऋतू की चूत की फांकों को फैलाया और अपना पूरा मुंह डाल दिया उस बेचारी की चूत के अन्दर, अब अंकल का नाक उसकी चूत की क्लिट को रगड़ रहा था.. और जीभ तो ना जाने कहाँ तक घुस गयी थी…ऋतू के लिए तब बड़ा मुश्किल हो गया जब अंकल ने अपने दांतों से उसकी चूत की अंदरूनी परतों पर प्रहार शुरू किया…
वो पछताने लगी की उसने ऐसे वक़्त में अंकल के सामने उनकी बेटी की बात क्यों करी जब उसकी चूत पर उनका मुंह था… पर जल्दी ही उनके क्रूर हमलों में भी उसे मजा आने लगा…और उसने अंकल के सर को पकड़कर और जोर से अपनी चूत के अन्दर धकेल दिया… आज तो अंकल की शामत आई समझो, अगर कुछ देर और अंकल का मुंह अन्दर रहा तो उनका दम घुट जाएगा…अंकल छटपटाते हुए उसकी चूत से बाहर निकले और गहरी सांस लेने लगे..
ऋतू : “सुरभि का नाम सुनकर ही अगर आपका ऐसा हाल हो रहा है तो जब वो नंगी आपके सामने खड़ी होगी तो क्या हाल होगा आपका…” ऐसा कहते हुए उसके मुंह से लार निकल कर उसके खुद के चुचों पर गिर रही थी…
अंकल कुछ नहीं बोले और वो किसी वेह्शी की तरह हुंकारते हुए ऋतू को उठाकर बेड तक ले गए उसकी गीली चूत पर थूक फेंककर अपने लंड को वहां टिकाया और एक ही वार में अपनी तलवार उतार दी उसकी चूत में..
वो कराह उठी…”अह्ह्ह अंकल…..बड़ा मजा देते हो आप तो….सुरभि को चोदना चाहते हो और गुस्सा मेरी चूत पर निकाल रहे हो….बोलो न….मारना चाहते हो न अपनी बेटी की चूत….हूँ….बोलो…चुप क्यों हो..”
अंकल ने उसके दोनों हाथों पर अपने हाथ रखे और तेज धक्के मारने लगे उसकी चूत के अन्दर और चिल्लाये “हान्न्न्न…..मारना चाहता हूँ…मैं अपनी बेटी की चूत….
कई सालों से मैं उसके बारे में सोचकर अपनी बीबी को चोदा है…उसे अपनी गोद में खिलाया है, मेरे सामने बड़ी हुई है वो…. और कई बार मैंने उसे नहाते हुए भी देखा है…पर डरता हूँ की वो क्या सोचेगी…अगर मैंने उसे कुछ कहा तो…” वो थोडा संजीदा से हो गए थे…पर अपनी स्पीड को कम नहीं किया उन्होंने..
मैंने सुरभि की तरफ देखा तो वो वहां नहीं थी, उसके कपडे पड़े थे जमीन पर, अपने पापा की बात सुनकर वो नंगी होकर चल दी थी दुसरे कमरे की तरफ..चुदने के लिए…
मैंने छेद से देखा की दरवाजा खुला और उसने बड़े प्यार से अंकल को पुकारा…”पापा………….”
अंकल का लंड ऋतू की चूत में था, और जैसे ही उनकी नजर दरवाजे पर गयी, वो रुक गए, उनकी बेटी, जिसकी बात वो अभी-२ ऋतू से कर रहे थे, उनके सामने खड़ी थी, बिलकुल नंगी, सपाट छाती लिए, मोटे निप्पल वाली, पतली कमर, और नीचे से उसकी बहती हुई चूत को देखकर उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ की वो उनके सामने है, वो भी नंगी.
उन्होंने अपना लंड ऋतू की चूत से बाहर निकाल लिया, वो मुरझा गया था. पता नहीं क्यों, !!
अभी तो वो अपनी बेटी को चोदने की बात कर रहे थे और उसे अपने सामने नंगा देखकर ही उनके छोटे सिपाही ने मैदान छोड़ दिया,समझ नहीं आया कुछ. !!
वो दोनों काफी देर तक एक दुसरे की आँखों में देखते रहे..सुरभि की चूत के साथ-२ उसकी आँखें भी बह रही थी,
वो बोली “पापा….आप मुझसे इतना प्यार करते हैं…और बताया भी नहीं कभी…. अरे…बोला तो होता…तब आपको पता चलता की मैं भी आपसे उतना ही प्यार करती हूँ…जितना की आप…

मैंने कई बार आपकी हिंट देने की कोशिश की , आपके सामने छोटे कपड़ों में घुमती थी, बाथरूम की खिड़की हमेशा खुली रखती थी, और मैंने कई बार आपकी और मम्मी को प्यार करते हुए भी देखा है, पर आपने कभी मुझसे अपने दिल की बात नहीं बताई… क्यों पापा… !!
ऐसा क्यों किया आपने मेरे साथ….” वो अपने पापा से शिकायत कर रही थी, बड़ा ही मार्मिक दृश्य था बाप बेटी के प्यार का. वो रोती हुई अपने पापा के पास आई और उनसे लिपट गयी…
अपनी बेटी के नंगे शरीर का स्पर्श पाते ही अंकल का लंड स्प्रिंग की तरह से दोबारा ऊपर की तरफ उछला….और अपनी बेटी की चूत से जा टकराया…
सुरभि ने अपने आंसू पोछे और बोली “पर आप अब फिकर मत करो पापा…अब मैं उन सभी पिछले पलों का हिसाब चूका दूंगी जो आपने और मैंने एक दुसरे के बारे में सोचकर गंवाए हैं…” और ये कहकर वो पंजो के बल नीचे बैठ गयी और उसने अपने पापा का लंड अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया..
उन्माद के मारे अंकल की आँखें बंद सी होने लगी…उनका सपना सच होने जा रहा था, अपनी बेटी को चोदने का..जो वो ना जाने कितने समय से देख रहे थे. ऋतू बेड पर नंगी पड़ी मुस्कुरा रही थी, उसकी आँखें भी नम थी बाप बेटी का प्यार देखकर…
और जब उसने देखा की सुरभि अंकल के लंड को चाट रही है, जो कुछ देर पहले उसकी चूत में था, तो उसे अपनी चूत की याद आई और उसने अपनी चूत को खुजलाना शुरू कर दिया… मेरा लंड भी टाईट होने लगा था ऋतू की रसीली चूत को देखकर…
अंकल ने सुरभि को ऊपर उठाया और उसे अपने गले से लगा लिया , और अपने होंठों से उसके होंठों का नाप लेना शुरू कर दिया, और अपनी उँगलियों से उसके मोटे चूचकदाने पकड़कर उन्हें तोड़ने का प्रयास करने लगे.
अंकल के बारे में मैंने एक बात नोट करी थी, वो सेक्स करते हुए इतने उत्तेजित हो जाते थे की उन्हें दुसरे के बारे में कुछ ख्याल ही नहीं रहता था की उसे कोई तकलीफ हो रही है या नहीं,
वो तो बस अपने मजे में लगे रहते थे, यही हाल अब सुरभि का हो रहा था, उसके पापा निप्पल्स को ऐसे कटोच रहे थे जैसे वो मांस के नहीं रबड़ के बने हो, और उसके होंठों को भी जैसे चिकन की हड्डी समझ कर चूस रहे थे, पर इसमें दूसरी पार्टी को भी बाद में मजा आने लगता था, जैसे अब सुरभि को आने लगा था, अंकल ने सर नीचे करके उसके निप्पल को अपने मुंह में घुसाया और उसे चूसने लगे, वो मचलते हुए चिल्लाने लगी “हां….पापा….चुसो इन्हें….आपका कितना इन्तजार किया है इन्होने…अब आप ही इन्हें चूस कर बड़ा कर देना…मम्मी जितने हो जायेंगे जल्दी ही….और फिर मजा देंगे ज्यादा….
चुसो स्स्स्सस्स्स्स स्स्स्स अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ह्ह्हह्ह्ह्ह ह्स्स्सस्स्स्स इन्हेंssssssss…. प्आssssssssss….. पाआआअssssss ……अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह उयीईईईइ ………नाआआआआ धीरे……पपाआआ…….अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ”
वो चिल्ला भी रही थी क्योंकि अंकल अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे थे, और उसके नर्म मुलायम निप्पलस को काट भी रहे थे, जैसे उन्हें जड़ से उखाड़ देना चाहते हो….
अंकल ने उसे अपनी गोद में उठा लिया था, और सुरभि ने अपने पापा की कमर में अपनी टाँगे जकड कर अपनी पकड़ बना ली थी, वो थोडा और ऊपर हुई और अब उसकी चूत अंकल के पेट से भी ऊपर जाकर उनके निप्पल को घिसने लगी, उसने हाथ नीचे करके पापा के सर को अपने निप्पल पर फिर से दबाया और उनसे चुस्वाने लगी…
वो सोच रही थी की काश उसके निप्पल्स में से दूध निकल रहा होता तो अपने भूखे बाप को अपना दूध भी पिला देती…
मैंने सोचा की अब यही समय है ऋतू के पास जाकर उसकी चूत को मारने का, मैं नंगा होकर उसके कमरे की तरफ चल दिया, बाहर निकलते ही मैंने देखा की मम्मी और आंटी के साथ अयान भी ऊपर आ रहा है, मुझे नंगा ऋतू के कमरे में जाता देखकर वो समझ गए की अन्दर क्या चल रहा है, वो भी लगभग भागते हुए मेरे साथ ही अन्दर आ गए…
जैसे ही अंकल ने हम सभी को कमरे में घुसते देखा वो सब समझ गए, वो जान गए की इस घर में पिछले कई दिनों से क्या चल रहा है…
दीपा आंटी ने अपनी बेटी को अपने पति की गोद में चढ़े देखा तो उनकी चूत में भी खुजली सी होने लगी, उन्होंने अयान को अपने पास बुलाया और कहा “बेटा….चल शुरू हो जा…अब मत शरमा…
आज अपनी माँ को ऐसा चोदना की मजा आ जाए…” और कुछ ही देर में सभी लोग नंगे हो गए उस छोटे से कमरे में, और फिर जिसको जहाँ जगह मिली, चोदने के लिए वहीँ लेट गया.
दीपा आंटी ने अयान को लंड से पकड़कर बेड के किनारे पर लिटाया और उसका लंड चूसने लगी..और उनके नीचे लेटी मम्मी अपनी बहन की चूत को चाटने लगी, और मैं मम्मी की चूत को चाटने लगा.
सुरभि अपनी चूत को लेकर अयान के मुंह के ऊपर बैठ गयी और अपना पानी उसके मुंह से साफ़ करने लगी,
अंकल भी अब सुरभि को नीचे उतार चुके थे और उन्होंने अपना लंड जैसे ही उसकी चूत पर टिकाया…वो साली सुरभि जो चीख मारने में एक्सपर्ट है, जोर से चिल्लाने लगी…..अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह स्स्स्सस्स्स्स पापा……….डाअलूऊओ …..अपना लंड……आअज मेरी चूत में…….अह्ह्हह्ह्ह्हह्हsssssssssssss ”
और फिर अंकल ने जैसे ही उसकी चूत के अन्दर अपना लंड डाला, उसने उनकी कमर को फिर से अपनी टांगो से घेर लिया और उन्हें अपने बड़े-२ निप्पल चुस्वाने के लिए दे दिए. सारे कमरे में सिस्कारियां और चीखें गूंज रही थी…
ऋतू की चूत में अयान की लम्बी जीभ थी “अह्ह्हह्ह्ह्ह आयान्न्न्नन्न्न्न ….तुम्हारी जीभ भी लंड जितनी लम्बी है….चुसो मेरी चूत को……पी जाओ सारा पानी…….अह्ह्ह्हह्ह ….जोर से….उन्ह…….और जोर से……ओफ्फ्फ्फ़ फुक्क……फुक्क…फुक्क……..”
आंटी मम्मी के मुंह से ऊपर उठी और अपने बेटे अयान के लंड को अपनी चूत में लेकर रोटियां बेलने लगी….उसके बेलन से.. अयान ने अपनी माँ के मोटे मुम्मों को पकड़ा और उन्हें मसलने लगा..
अंकल भी अब अपनी बेटी सुरभि के छोटे-२ गुब्बारों को मुंह में लेकर उनमे हवा भरने लगे , उन्होंने उसके चुचों को बड़ा करने का बीड़ा जो उठा लिया था. अयान के मुंह पर ऋतू अपनी चूत घिस रही थी, उसे अपनी माँ नजर नहीं आ रही थी, उसकी आँखों के सामने तो ऋतू की सफाचट चूत थी…जिसके अन्दर से नेक्टर जैसा रस निकल कर उसके पेट में जा रहा था.
तभी फिर से दरवाजा खुला और पापा अन्दर आये.

चुदाई में हमने इस बात का ध्यान भी नहीं किया था की पापा के आने का समय हो चूका है, उन्होंने दरवाजा खडकाया होगा पर जब किसी ने नहीं खोला तो उन्होंने अपने पास राखी डुप्लिकेट चाबी से दरवाजा खोला और ऊपर आ गए, अन्दर सेक्स का दंगल चल रहा था चारों तरफ, और उनका साढ़ू, जो साले गांडू होते है, अपनी बेटी को चोदने में लगा हुआ था, उन्होंने जब पापा को अन्दर आते देखा तो वो मुस्कुरा दिए
पापा ने भी अपने कपडे जल्दी से उतार दिए और वो भी सेक्स के दंगल में कूद पड़े लड़ने के लिए…और उनके सामने से उनकी बेटी ही थी जो उनसे मुकाबला करने के लिए लगभग तैयार थी,
वो अयान के मुंह से ऊपर उठी और पापा के ऊपर जा गिरी..और उन्हें चूमने चाटने लगी….जैसे अपनी नाराजगी दिखा रही हो की इतनी देर से क्यों आये पापा…… पापा ने उसकी चूत को अपनी उँगलियों से टच करके देखा और वो समझ गए की उसकी चूत मारने के लिए बिलकुल तैयार है,
उन्होंने बिना किसी शोशाबाजी के उसकी चूत में अपना लम्बा और मोटा लंड उतार दिया…और उसके चुचुक चूसने लगे….
“अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह पापा………आपका लंड जब भी मेरी चूत में जाता है…….मुझे कुछ कुछ होता है…यु आर ग्रेट ….” और वो उनके ऊपर उचल कर उनके मोटे लंड का मजा लेने लगी…
पापा का लंड ऋतू की चूत में, मेरा मम्मी की चूत में, अयान का दीपा आंटी की और अंकल का सुरभि की चूत में…..सभी लोग मजे ले रहे थे….चुदाई के….

और फिर एक के बाद एक कई बाँध टूटने लगे कमरे में और हर किसी की चूत में बाढ़ सी आ गई, गाड़े सफ़ेद पानी की बाढ़…. सिस्कारियों और गहरी साँसों से पूरा कमरा गूंज सा रहा था…
पुरे कमरे में सिर्फ….
अह्ह्ह्हह्ह……..पापा…..
अह्ह्हह्ह्ह्ह ….मम्मी…
अह्ह्ह्हह्ह…..बेटा….
अह्ह्ह्हह्ह…बेटी….की ही आवाजें आ रही थी….
कोई अगर बाहर का इंसान ये सब सुन ले तो उसे विशवास ही न हो की इस दुनिया में ऐसा भी हो सकता है….
उस रात हम सभी ने इतनी चुदाई की…इतनी चुदाई की…की सुबह कब हुई और कैसे हुई …पता ही नहीं चला. सुरभि तो अपने पापा की दीवानी हो चुकी थी, वो तो उनके लोलीपोप को छोड़ ही नहीं रही थी..
उसकी मम्मी दीपा भी अब खुल कर अपने बेटे और अपने जीजा के साथ सेक्स करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही थी..अब उनके वापिस जाने में २ दिन ही तो बचे थे, इसलिए वो ज्यादा से ज्यादा अपने जीजा और मेरे लंड से चुद रही थी… उसके बेटे का लंड तो उनके पास हमेशा रहेगा…इसलिए उससे चुदने के लिए तो सारी उम्र पढ़ी थी.
खेर अगले दिन सभी लोग उठ कर जोड़े बना बनाकर नहाने लगे..इसके दो फायदे हुए, एक तो उनके उन अंगों की भी सफाई हो गयी जहाँ तक उनके हाथ नहीं पहुँच पाते थे और दुसरे…पानी की बचत…
आप तो जानते हैं…मैं पानी बचाने के कितने फेवर में हूँ..और साथ ही साथ चुदाई का एक और दौर भी चला सभी के बीच.. नहाने के बाद किसी ने भी कपडे पहनने की जेहमत नहीं उठाई..और नंगे ही नाश्ता करने बैठ गए.
सुरभि अपने पापा की गोद में नंगी बैठी हुई उनसे लाड लड़ा रही थी..
हरीश अंकल की नजर सामने बैठी हुई ऋतू के गोल खरबूजों पर थी, जो मेरे पापा बड़े मजे ले लेकर दबा रहे थे..
मैं दीपा आंटी को अपनी गोद में बिठाये उनकी गद्देदार गांड का मजा ले रहा था और उनके अंगूरों का रस पी रहा था..और अयान किचन में मम्मी के साथ मजे लेने में लगा हुआ था..
तभी डोर बेल बजी….सभी जल्दी से अपने-२ कमरे की तरफ दौड़े…कपडे पहनने के लिए..
मैंने जल्दी से केप्री और टी शर्ट पहनी और दरवाजा खोला..
बाहर २ लड़कियां खडी थी…उन्होंने बताया की वो नौकरानी के काम के लिए आई हैं…
मैं समझ गया की दीपा मौसी की सहेली ने उन्हें भेजा है, जिसकी वो कल बात कर रहे थे, मैंने उन्हें अन्दर बिठाया और कमरे में जाकर मम्मी को उनके बारे में बताया.. मम्मी ने उनसे बाहर आकर कुछ सवाल पूछे और उन्हें वापिस भेज दिया..
और वापिस आकर बोली..”वो तो काफी पैसे मांग रही थी…कहती थी, पूरा दिन यहीं रहेंगी और पांच हजार लेंगी…महीने का..” पापा बोले : “पांच हजार….साली अपनी चूत भी मरवायेंगी क्या….पांच हजार में…” और सभी उनके साथ हंसने लगे.
पापा ने जब नौकरानी की चूत मारने की बात कही तो मेरे लंड के अन्दर करंट सा लगा…
मैं हमेशा से नीचे तबके की…गरीब ..मैली सी दिखने वाली…काले रंग की लड़कियों को देखकर उत्तेजित हो जाया करता था…
हमारे घर के साथ वाले प्लाट में घर बन रहा है..और वहां पर काम करने वाली औरतें और लड़कियां वहीँ पर झुग्गी बना कर रहती हैं, और उन्होंने नहाने के लिए कपडे की चारदीवारी सी बना रखी है…जो उनके सर के बराबर ऊँची है..और हमारी छत्त से उन्हें साफ़ देखा जा सकता है छुपकर, मैंने अक्सर वहां पर उन्हें नहाते हुए देखा है, वो बड़ी बेफिक्र होकर नंगी खडी होकर नहाती हैं वहां, और खासकर जब उनकी जवान होती लड़कियां जिनके उभार अभी उगने शुरू ही हुए हैं,

जब वो नहाती है तो मेरा लंड खड़ा होकर स्टील जैसा हो जाता है..मन करता है की जाकर वो चादर को हटा दूं और डाल दू अपना लोहे जैसा लंड उनकी कुंवारी चूत में.. और आज अपने घर पर फुल टाइम मेड रखने की बात सुनकर मेरे लंड में फिर से वही तरंगे तैरने लगी…मैंने मम्मी से कहा…”मम्मी मैं भी आपके साथ बैठूँगा…जब आप उनका interview लोगी तो..”
वो समझ गयी की मेरे लंड के दिमाग में जरूर कुछ नया आया है…पर वो कुछ न बोली और मुस्कुरा दी…
अगले दो घंटो में लगभग 8 और लड़कियां आयीं और मैंने सभी को रिजेक्ट कर दिया..सभी के लटके हुए थे…
मैं किसी कसी हुई शरीर वाली नौकरानी के बारे में सोच रहा था..और तभी एक लड़की आई, उसकी उम्र लगभग 19 साल की होगी..और वो थी बिलकुल वैसी ही जैसा मैंने सोचा था,
उसका शरीर पसीने से भीगा हुआ था, गहरा सांवला रंग, मैले से कपडे पहने हुए थे, साडी फटी हुई थी, पर चेहरा बड़ा ही दिलकश था,
नैन नक्श बड़े ही तीखे थे, और खास कर के उसकी चूचियाँ बिलकुल सही आकार की थी, 32 का साइज़ था..और गांड भी मोरनी जैसी फैली हुई सी..मन कर रहा था की अभी सोफे पर पटक कर चोद दूँ साली को…
मम्मी ने उससे पूछना शुरू किया : “क्या नाम है तेरा..?”
“जी सोनिया..सोनिया नाम है मेरा..” उसने अपना पसीना पोछकर कहा.
मैं : “अच्छा सोनी..क्या-2 कर लेती है तू..”??
वो मेरा सवाल सुनकर हडबडा गयी….और फिर बोली “जी …जी…मैं घर का सारा काम,कपडे पोछा.. साफ़ सफाई..सब कर लेती हूँ जी..”
मम्मी : “और खाना बनाना जानती है क्या ?”
सोनी : “जी…थोडा थोडा….”
मम्मी : “देखो..हमें तो ऐसी नौकरानी चाहिए जो घर का सारा काम और खाना भी बनाना जानती हो..कभी-२ तो मैं भी हेल्प करुँगी…पर ज्यादातर तो वोही बनाएगी और करेगी…”
मम्मी की बात सुनकर मैं मायूस सा हो गया…मैं उस नौकरानी को छोड़ना नहीं चाहता था..
वो लड़की भी मम्मी की बात सुनकर मायूस सी होकर बोली “बीबी जी…मुझे काम की बड़ी जरुरत है…
मेरी माँ पिछले महीने ही मर गयी है…मैं उसके साथ ही जाती थी एक कोठी में…उनकी छत्त से गिरकर वो मर गयी.. अब वहाँ पुलिस का केस चल रहा है…इसलिए वहां काम नहीं कर पाऊँगी…कई दिनों से नयी नौकरी दूंढ रही हूँ…पर कोई भी सही पैसे नहीं देता… आप दया करो मुझपर और मुझे काम पर रख लो..अगर आपको खाना बनाने की इतनी ही चिंता है तो मेरी छोटी बहन है..वो अच्छी तरह खाना बना लेती है…
आप कहो तो उसको मैं साथ लेकर आ सकती हूँ…उसने अभी 12 कक्षा पास करी है…बड़ी मुश्किल से…पड़ने में थोड़ी कमजोर है..तीन साल लगे उसे 12 कक्षा कने में , इसलिए आगे नहीं पड़ना चाहती..
अब सोचती हूँ की वो भी काम पर लग जाए तो अच्छा है…”
मम्मी : “पर हम दोनों के पैसे नहीं दे पायेंगे…मैं तो सिर्फ तीन हजार तक दे सकती हूँ…दोनों के…तुझे सही लगता है तो बता…”
सोनिया : “बीबी जी…ये तो काफी कम है…मैं और माँ जहाँ काम करते थे वो दोनों के पांच हजार देते थे….”
मैंने बीच में ही बोलते हुए कहा “देखो उससे हमें कोई मतलब नहीं है…हम ज्यादा से ज्यादा तुम्हे पांच सो और दे सकते हैं, यानी साड़े तीन हजार रूपए…”
मम्मी : “पररर….”
मैंने उन्हें देखते हुए कहा..”.कोई बात नहीं मम्मी….इतना ठीक है…” और उन्हें आँख मार दी..
मम्मी समझ गयी की मेरा दिमाग कहाँ चल रहा है. उन्होंने कुछ नहीं कहा .
सोनी भी अब बात मान गयी और उसने कहा की वो एक घंटे में अपनी बहन को लेकर आयेगी और काम शुरू कर देगी और वो चली गयी.
मैं वापिस कमरे में आया और मम्मी ने मुझसे पुछा “बड़ा इंटरेस्ट ले रहा है तू इन सबमें…इरादा क्या है तेरा…” और उन्होंने मेरा लंड पकड़ लिया केप्री के ऊपर से…
मैंने कहा “मम्मी…टाइम आने पर आपको सब पता चल जाएगा…” और मैंने भी उनके चुचे दबा दिए साडी के ऊपर से..
मम्मी ने मुझे समझाते हुए कहा : “देख बेटा..मैं तुझे एक बात बता देती हूँ…तू चाहे जिसे मर्जी चोद..पर हमेशा बिमारियों से दूर रहना..”
मैं उनका इशारा समझ गया और उनको आश्वासन दिया की मैं इन सबका ध्यान रखूँगा.. लगभग एक घंटे के बाद सोनिया वापिस आई और उसके साथ उसकी छोटी बहन थी..
क्या माल थी यार….मैंने सोचा भी नहीं था की काम वालियों की लड़कियां इतनी सुन्दर भी हो सकती हैं… उसने जींस और टी शर्ट पहनी हुई थी मेली सी..पर उसका रंग सोनिया के मुकाबले काफी साफ़ था..
सोनिया ने कहा “बीबी जी..ये है मेरी छोटी बहन अनीता ….”मैं तो बस उसे देखता ही रह गया..
उसने मेरी नजरों को भांपा और मेरी तरफ देखकर होले से मुस्कुरा दी..मुझे लगा की शायद चालू माल है ये …ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी.. उसके बाद मम्मी ने उन दोनों को सारा काम समझाया और उन्हें काम करने पर लगा दिया.
मेरा तो लोडा बेठने का नाम ही नहीं ले रहा था …सोनिया और अनीता को देखकर.
मम्मी अनीता को लेकर किचन में चली गयी और सोनिया झाड़ू लेकर कमरे में सफाई करने लगी.मैं सोफे पर बैठा हुआ उसके भरे हुए शरीर को देखकर अपनी आँखें सेक रहा था, बैठकर सफाई करने की वजह से उसकी कसी हुई पिंडलियाँ मेरी आँखों के सामने थी,

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