अगली सुबह मैं जल्दी ही उठ गया, मैंने देखा की अयान अभी तक खर्राटे भर रहा है, मैंने टाइम देखा तो 8 बजने वाले थे, मैं उठा और छेद में से दुसरे कमरे का हाल देखा, मुझे विश्वास नहीं हुआ जो मैंने वहां देखा, ऋतू और सुरभि 69 के पोस में लेटी हुई एक दुसरे की चूत चाट रही थी..
एक ही रात में काफी खुल गयी थी सुरभि हमारे साथ..
मैं अचरज में पड़ गया, क्योंकि मैं वहां से सुबह 5 बजे के आस पास ही वापिस आया था और मुझे लगा की वो दोनों अब तक घोड़े बेच कर सो रही होंगी..
मैं झट से दरवाजा खोल कर उनके कमरे में गया.
वहां सेक्स का आखिरी दौर चल रहा था, मेरे पहुँचते ही ऋतू के साथ साथ सुरभि ने भी अपना रस छोड़ दिया.. और इस बार भी सुरभि अपने ओर्गास्म के होते ही बड़े जोर से चिल्लाई..
अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ओफ्फ्फ्फ़ ओफ्फ्फ्फो फूऊफ ओफ्फ्फ्फ़ ओफ्फ्फ्फ़ अह्ह्हह्ह्ह्ह यीईईइ उसकी चीख बड़ी ही तेज थी..मैं घबरा गया.. मैं झट से उसके पास पहुंचा और उसका मुंह दबा कर उसे शांत किया.. पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी.
उसकी आवाज सुनकर मम्मी भागकर ऊपर आ गयी. उन्हें लगा की किसी को करंट लगा है..
कमरे में पहुँचते ही उन्होंने देखा की ऋतू बेड पर लेती हुई है और सुरभि अपनी चूत उसके मुंह पर रखे उसकी चूत को चूस रही है, और मैंने सुरभि के मुंह को दबा रखा है. मम्मी को देखते ही सुरभि की सिट्टी पिट्टी ग़ुम हो गयी..
मम्मी सारा माजरा समझ गयी.
शुक्र है और किसी और ने सुरभि की आवाज नहीं सुनी. मम्मी अन्दर आ गयी और उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया.
सुरभि की हालत देखने वाली थी. मम्मी ने मुस्कुराते हुए बेड के पास आकर मेरे सर पर हाथ फेरते हुए कहा “तो ये सब चल रहा है…और तुमने इस बेचारी सुरभि को भी अपने खेल में शामिल कर लिया..”
सुरभि अपनी मौसी के इस रवेय्ये को देखकर हैरान थी.
मैंने उसकी परेशानी दूर की..
मैंने कहा “देखो सुरभि, तुम परेशान मत हो, मैंने तुमसे कहा था न की हमारे परिवार में किसी तरह की कोई रोक टोक नहीं है, इसलिए हम सभी एक दुसरे के साथ एन्जॉय करते हैं..और ये कहते हुए मैंने मम्मी को अपनी तरफ खींचा और उनके होंठों को चूसते हुए उनके दांये मुम्मे को सूट के ऊपर से ही दबाने लगा. मम्मी ने मेरा पूरा साथ दिया और अपनी बहन की बेटी की परवाह न करते हुए मेरा लंड पकड़कर उसे दबाने लगी.
सुरभि सब समझ गयी की हमारे घर में क्या क्या चलता है.
मैंने मम्मी के होंठो को चूसते हुए उनके कुर्ते को नीचे से पकड़कर उतारने लगा तो उन्होंने रोक दिया “अरे नहीं आशु…अभी नहीं, नीचे सब उठने ही वाले हैं..बाद में करेंगे…” पर मैंने उनकी एक न सुनी और उनका कुरता उतार दिया.
ऋतू पीछे बैठ गयी और सुरभि ऑंखें फाड़कर हमारा खेल देख रही थी.
मैंने मम्मी की ब्रा के हुक खोल दिए और उनके लोटे लुडक कर बाहर आ गए, मैंने झट से उनके दानो पर कब्ज़ा कर लिया. मैंने नोट किया था की मम्मी को सुबह -२ सेक्स करने में बड़ा मजा आता है, कल भी उन्होंने मेरे कमरे में जो सेक्स किया था, मुझे अभी तक याद था उनका उतावलापन.
इसलिए उन्होंने ज्यादा विरोध नहीं किया आज भी, जबकि उनकी भांजी उनके सामने बैठी थी, पर उन्हें तो सिर्फ अपनी चूत में हो रही खुजली की चिंता थी. मम्मी के बड़े-२ चुचे देखकर सुरभि हैरान रह गयी, उसने इतने बड़े चुचे कभी नहीं देखे थे.
मैंने उन्हें दबाना, चुसना, काटना शुरू किया और मम्मी ने मचलना, तड़पना और सिसकना.
मैंने उन्हें बिस्तर पर गिरा दिया और उनकी लास्टिक वाली पायजामी उतार डाली, और उसके बाद उनकी काली पेंटी भी..
मम्मी की महकती हुई चूत मेरे सामने थी, मैंने झट से अपना मुंह उनकी चूत में डाल दिया और सुबह का नाश्ता करने लगा.
मम्मी की आँखें बंद थी और वो धीरे-२ सिस्कारियां लेती हुई मेरे सर के बालों में अपनी उँगलियाँ घुमा रही थी. स्सस्सस्स म्मम्मम्मम अह्ह्ह्हह्ह ओयीईई …….
ऐसे ही बेटा….अह्ह्ह्हह्ह और तेज चुसो…हन्न्न्न वहीँ पर……शाबाश,.,अह्ह्ह्हह्ह म्मम्मम्म
सुरभि बिलकुल मम्मी के सर के पास बैठी हुई थी, उसने इतना कामुक दृश्य नहीं देखा था और ना ही माँ बेटे का ऐसा प्यार.
मेरे चाटने से मम्मी के मोटे मुम्मे बुरी तरह से हिल रहे थे, मेरे मुंह के हर झटके से उनके मोटे गुब्बारे ऊपर होते और फिर नीचे..
उन्हें हिलता हुआ देखकर सुरभि के मुंह में पानी आ गया और वो सम्मोहित सी होकर उनपर झुक गयी और अपनी मौसी के दांये मुम्मे को मुंह में भरकर उसे चूसने लगी..
मम्मी ने जैसे ही सुरभि के होंठों को अपनी छाती पर महसूस किया तो उनके आनंद की सीमा न रही उन्होंने अपनी ऑंखें खोली और सुरभि को अपने सीने पर और तेजी से दबा कर उसे अपना दूध पिलाने लगी.
ऋतू भी उठ खड़ी हुई और दूसरी तरफ से आकर मम्मी के बाएं मुम्मे पर अपना मुंह लगा कर उसे चूसने लगी. अब चीखने की बारी मम्मी की थी.
हय्य्यय्य्यय्य्य्य अह्ह्हह्ह्ह्हह्हssssssssssssssssssssss स्स्स्सस्स्स्स………म्मम्मम्मम्म
उन्हें इतनी तेज चीखता पाकर मैं फिर से डर गया..पर मम्मी को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने खुद पर काबू पाकर ऋतू और सुरभि के सर अपने मुम्मों पर और तेजी से दबा डाले. मैं नीचे से उनकी चूत का रस पी रहा था और ऊपर से वो दोनों उनका दूध.
मम्मी से और सब्र नहीं हुआ और वो उठी और घोड़ी बन कर अपनी गांड हवा में उठा दी और पीछे देखकर बोली…”आ जा बेटा…अब सहन नहीं होता…डाल दे अपनी माँ की चूत में अपना लंड…प्लीस…..” वो तड़प सी रही थी..
मैंने उन्हें तडपना उचित नहीं समझा और अपना लंड उनकी चूत के पास लेजाकर रखा, बाकी काम मम्मी ने कर दिया, पीछे की तरफ धक्का लगाकर और निगल गयी एक ही बार में मेरे पुरे लंड को.. मम्मी के दोनों तरफ बैठी हुई ऋतू और सुरभि हमारी चुदाई को देख रही थी..
मेरे मन में अपनी एक और इच्छा पूरी करने की बात आई. मैंने ऋतू और सुरभि को इशारे से मम्मी की ही तरह गांड उठा कर लेटने को कहा.
वो दोनों भी मम्मी के दोनों तरफ उनकी ही तरह घोड़ी बन कर लेट गयी.
मैंने उन दोनों की चूत के अन्दर अपनी उँगलियाँ डाल दी और तेजी से हिलाने लगा.
मेरी उँगलियाँ ऋतू और सुरभि को चोद रही थी और मेरा लंड मम्मी की चूत को. अचानक मैंने अपना लंड मम्मी की चूत से बाहर निकाल लिया.
मम्मी ने हैरानी से पीछे मूढ़ कर देखा, मैंने उनकी चूत में अपनी उँगलियाँ डाल दी और अपना लंड सुरभि की चूत में सटाया और एक तेज झटका मारा. अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह म्मम्मम्मम्म और उसने भी मेरा लंड निगल लिया अपनी चूत में. अब मैं सुरभि की चूत को पीछे से मार रहा था.
15 – 20 झटकों के बाद मैंने उसकी चूत से भी लंड बाहर निकला और ऋतू के पास जाकर उसकी अधीर सी चूत में पेल दिया.. मेरे सामने तीन चूतें थी जो हवा में अपनी मोटी गांड उठाये मेरे लंड का इन्तजार कर रही थी. मैं बारी-२ से तीनो की चूत मार रहा था.
सच में इतना मजा तो आज तक नहीं आया था मुझे.
जल्दी ही मम्मी ने आवाजें निकालनी शुरू कर दी, मैं समझ गया की वो झड़ने वाली हैं.
“अह्ह्ह ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ ऑफ अह्ह्ह बेटा ऐसे ही औउ और तेज बेटा…मार अपनी माँ की चूत हान्न्न ……हन्न्न्नन्न अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह म्मम्मम्म ” और उन्होंने मेरे लंड पर अपना सफ़ेद लिसलिसा पानी छोड दिया…
मैंने अपना लंड बाहर निकला और ऋतू की चूत में तब तक घिसा जब तक उसकी चूत का जिन्न पानी बनकर बाहर नहीं आ गया.. वो भी चिल्लाती हुई मेरे लंड को भिगोने लगी..
अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्हह्ह हह्ह्ह्ह अह्ह्ह म्मम्मम्मम मजा आ गया…भाई …….
मैंने पिछली रात 4 बार चोदा था इन दोनों को, इसलिए मेरा लंड जल्दी झड़ने का नाम नहीं ले रहा था.
मैंने अपना गीला लंड सुरभि की चूत में फंसाया और उसे भी उसके अंजाम तक पहुंचा दिया.
अपने ओर्गास्म के समय वो चिल्ला पड़ी, पर इस बार ऋतू तैयार थी उसके लिए, उसने सुरभि के मुंह पर अपना मुंह लगा दिया और उसकी चीख को वहीँ दबा दिया.
घ्न्नन्न्न्न नं,,,,,, म्मम्मम ग्न्न्नन्न्न्न ……म्मम्मम्म ….घ्ह्ह्हह्ह्ह्ह ….. उसकी गुर्राहट सुनाई दे रही थी ऋतू के मुंह से. तीन चूतें एक साथ मारकर मैंने अपनी एक और फ़ंतासी पूरी कर ली थी आज.
अब मेरा लंड उन तीनो के रस में नहाया हुआ खड़ा था, वो तीनो मेरे सामने बैठ गयी और बारी-२ से मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी.
मम्मी बीच में बैठी थी और ऋतू और सुरभि उनके दांये बांये.
मैंने अपने लंड के डंडे से उनके होंठों को मारा और उनकी आँखों पर, गालों पर, नाक पर, माथे पर उसे घिस घिसकर मजे लेने लगा. वो तीनो भी मेरे लंड को बारी-२ से चूस रही थी और एक दुसरे से छिनकर ज्यादा से ज्यादा देर तक अपने मुंह में रखकर मुझे स्वर्ग सा एहसास दे रही थी.
जल्दी ही उन तीनो की मेहनत रंग लायी और मैंने अपना रस निकालना शुरू कर दिया.
सबसे पहली धार मैंने मम्मी के मुंह पर मारी दूसरी सुरभि के और तीसरी ऋतू के..उन तीनो ने अपना मुंह खोल रखा था और मेरे लंड से निकलती बारिश की बूंदों को अपने मुंह में इकठ्ठा कर रही थी…मैं आज तक इतना नहीं झड़ा था.
अपनी आखिरी बूँद मैंने सुरभि की थोड़ी पर निचोड़ दी.
उनके चेहरे देखने लायक थे. बर्फ की सफ़ेद चादर सी बिछ गयी थी तीनो के चेहरे पर.
ऋतू ने मम्मी के चेहरे को चाटना शुरू किया, सुरभि समझ गयी और उसने ऋतू के चेहरे को चाटकर चमका दिया, मम्मी ने भी बारी-२ से दोनों के चेहरे से अमृत इकठ्ठा किया और पी गयी और इस तरह से उन तीनो का पेट भर गया.
मम्मी ने अपने कपडे पहने और बोली “चलो अब जल्दी से नहा धो लो और नीचे आ जाओ, हमें आज घूमने जाना है..”
मैंने अपने कपडे पहने और अपने कमरे में आकर बाथरूम में चला गया और नहाकर बाहर आया.
मैंने अयान को उठाया और उसे नहाने भेज दिया.
नीचे आकर देखा तो हरीश अंकल मेरठ जाने के लिए निकल रहे थे, उनके जाने के बाद हम सभी ने इकठ्ठा नाश्ता किया और हम घूमने निकल गए.
पुरे रास्ते सुरभि मुझसे चिपकी रही , वो मेरे लंड की दीवानी हो चुकी थी..कल से आज तक वो करीब 5 बार मेरा लंड अपनी चूत में ले चुकी थी. और अभी भी उसकी चूत कुलबुला रही थी मेरे लंड की गर्मी पाने के लिए.
मैंने नोट किया की पापा का सारा ध्यान दीपा आंटी की तरफ था, दीपा आंटी भी पापा की नजरों को भांप चुकी थी, पर उन्हें मालुम था की उनका जीजा ऐसा ही है, उसपर हमेशा से गन्दी नजर रखता है, पर वो कर भी क्या सकती थी..
उस दिन हम लाल किला घुमे, क़ुतुब मीनार गए और कनाट प्लेस भी गए और वहां से पालिका बाजार, जहाँ से हमने काफी खरीदारी करी.
शाम को खाना खाकर हम सभी वापिस घर आ गए.

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