बाहर काफी ठण्ड थी, सभी अपने-२ काटेज में जा चुके थे, काफी सुनसान हो चूका था सब कुछ.
ऋतू ठण्ड में अकड़ी हुई सी मेरे से चिपक कर चल रही थी, मैंने अपना हाथ उसकी कमर में डाल रखा था. थोड़ी ही देर में हम दोनों रेहान के काटेज में पहुँच गए..मैंने दरवाजा खडकाया और अन्दर से एक बहुत ही खुबसूरत लड़की बाहर निकल कर आई…”हाँ जी कहिये..” उसने अपनी सुरीली सी आवाज में कहा. उसने पीले रंग का सूट पहना हुआ था, एक दम गोरी चिट्टी, पतली कमर, फैले हुए कुल्हे, मोटे-२ लटकते हुए उसके चुचे जिनपर उसने चुन्नी भी नहीं डाल रखी थी, नीचे उसकी सलवार उसकी मोटी टांगो से चिपकी हुई थी, जिसकी वजह से उसकी मोटी टांगो की सुडोलता साफ़ दिखाई दे रही थी.
“जी मैं आशु हूँ और ये ऋतू है..” मैंने कहा..
“अच्छा तो अब आये हो आप लोग…कितनी देर से इंतज़ार कर रहे थे हम दोनों आपका…” उसने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अन्दर धकेल लिया..ऋतू भी मेरे पीछे -२ अन्दर आ गयी.
“आ गए क्या वो लोग…” अन्दर से एक मोटी सी आवाज आई…और अगले ही पल एक भीमकाय सा इंसान बाहर आया, उसने सफ़ेद कुर्ता पायजामा पहन रखा था, पायजामा घुटनों से थोडा नीचे था, सर पर गोल मुसल्माननी टोपी, काला रंग, पेट निकला हुआ, पान वाले लाल होंठ, बिना मूंछ के लम्बी दाड़ी जिसमे आधे से ज्यादा बाल सफ़ेद थे.
“आओ -२ … मेरा नाम रूबी है और ये हैं मेरे पति नाज़िर खान …” उसने अपनी सुरीली आवाज में कहा. मैं तो हैरान रह गया, मुझे लगा था की वो शायद रेहान की बड़ी बहन है पर ये तो उसकी माँ निकली..और क्या माँ थी…साली की जवानी अभी तक बरकरार थी..उसे देखकर लगता ही नहीं था की वो दो-दो जवान बच्चो की माँ है…और उसका पति उसके बिलकुल विपरीत था..पता नहीं ऐसे लोगो को इतनी ख़ूबसूरत बीबी कैसे मिल जाती है…
मैं सोच ही रहा था की रेहान के अब्बा बोले “मैंने दो बार फ़ोन करा था organisers के पास पर उन्होंने कहा की आज हमारे पास आने के लिए कोई तैयार नहीं हो रहा है…फिर तुम कैसे आये..और वैसे भी काफी देर हो चुकी है , हमारे बच्चे भी function से आते ही होंगे.. ” पर तभी उसने ऋतू की तरफ देखा, उसको देखते ही उसके बड़े से पायजामे में एक हलचल सी हुई..जिसे मैंने तो देखा ही, ऋतू भी देख कर कांप सी गयी..”पर अब तुम आ ही गए हो तो कुछ इन्तेजाम करते हैं” उसने अपने भद्दे से लाल होंठो पर जीभ फिराते हुए कहा.
मैं समझ गया की ये दोनों हमें कुछ और समझ रहे हैं… शायद रोज शाम को यहाँ के organisers सभी को अलग-२ तरह के जोड़े उपलब्ध कराते हैं, और इनके लिए शायद आज कोई तैयार नहीं हुआ होगा..और ये लोग हमें शायद organisers के द्वारा भेजा गया जोड़ा ही समझ रहे हैं..
उसकी बीबी रूबी को देखकर तो मेरा लंड फिर से अंगडाई लेने लगा पर ऋतू के बारे में सोचते ही मैं घबरा सा गया..क्योंकि अगर इस सांड जैसे कसाई ने मेरी बहन को चोदा तो उसकी चूत का भोंसडा बन जाएगा…और इसी लिए शायद इनके पास कोई भी जोड़ा आने को तैयार नहीं हो रहा होगा…पर तभी मेरे मन में ना जाने कैसे विचार आने लगे जिनमे ऋतू को तड़पाते हुए रेहान के पापा चोद रहे हैं और उसकी चीखों से मेरे मन में एक अजीब सा सकूँ मिल रहा है…मेरे मन में अपनी बहन के लिए ऐसे विचार क्यों आ रहे थे…मैं भी नहीं जानता था…पर मैंने निर्णय कर लिया की आज ऋतू की चुदाई इस जानवर जैसे कसाई के लंड से करवा के रहूँगा और अपने लंड से उसकी खूबसूरत बीबी को भी चोदुंगा …
मैंने ऋतू के कान में धीरे से कहा “ऋतू ये दोनों शायद हमें कोई और समझ रहे हैं…क्या बोलती हो..करें क्या इनके साथ भी”
“पागल हो गए हो क्या आशु…देख रहे हो इस मोटे सांड को…ये तो मेरी चूत के परखच्चे उदा देगा..ना बाबा ना…इनको सही बात बताओ और चलो यहाँ से..” ऋतू फुसफुसाई.
“अरे तुम पागल हो गयी हो क्या…इतना अच्छा मौका है…ये मोटे लोगो का लंड बड़ा ही शानदार होता है ..तुम्हे भी मजा आएगा, …अगर ज्यादा लम्बा हुआ भी तो संभाल लेना..तुम तो अब इन सबमे चेम्पियन हो चुकी हो…मैं जानता हूँ तुम इसको भी संभाल सकती हो..प्लीस..तुम्हारी वजह से मेरा चांस भी चला जाएगा…देखो तो जरा रेहान की माँ को…कितनी सुंदर है…मान जाओ न प्लीस….” मैंने उससे याचना करते हुए कहा..
उसने थोड़ी देर सोचा…और फिर बोली “ठीक है आशु…पर मैं ये सिर्फ तुम्हारे लिए कर रही हूँ….” उसके चेहरे पर अभी भी भय था.
“मेरी अच्छी ऋतू…” और मैंने ख़ुशी के मारे उसे चूम लिया..
“ये क्या खुसर-फुसर लगा रखी है तुमने…” रेहान के पापा की कर्कर्ष सी आवाज हमारे कानो में पड़ी.मैंने जल्दी से प्लान बनाया और कहा
“जी कुछ नहीं…..दरअसल..हम तो आपको ये बताने के लिए आये थे की रेहान और हिना आज रात को उनके दोस्तों के साथ ही रहेंगे…उन्होंने बाहर reception पर मेसेज छोड़ा है आपके लिए ….,और हमें organisers ने आपके पास भेजा है…मौज मस्ती के लिए…” मैंने कहा
“चलो अच्छा हुआ की वो दोनों आज रात नहीं आयेंगे…” रूबी ने कहा ” लगता है वो अपने उन्ही दोस्तों के पास रह गए होंगे जिनकी वो दोनों कल से बातें कर रहे थे..”
मैं समझ गया की वो हमारी ही बात कर रहे हैं.
“तुम दोनों तो काफी छोटे लगते हो…तुम्हारी शादी हो चुकी है क्या…” रबी ने मुझसे पूछा.
“जी..दरअसल हम दोनों भाई बहन है., हमारी उम्र 18 और 21 साल की है,…और हम भी यहाँ अपने मम्मी पापा के साथ आयें हैं…” मैंने धीरे से कहा.
मेरी बात सुनते ही उन दोनों का मुंह खुला का खुला रह गया..
“लाहोल विल्ला कुवत …तुम दोनों भाई बहन हो और इन सब में कैसे शामिल हो गए ..” रूबी ने कहा.
“जी ..हमारे घर में इस तरह की कोई पाबंदी नहीं है…हम सभी लोग घर में एक दुसरे के साथ चुदाई कर लेते है…” मैंने उसका उत्तर दिया.
“क्या सच में…” वो दोनों हमारे मुंह देखने लगे, उन्हें अपने कानो पर विशवास ही नहीं हो रहा था की भारत देश में भी ऐसा हो सकता है…..पर मैंने नोट किया की घर में चुदाई करने की बात सुनते ही उन दोनों के भाव बदल से गए थे, रूबी के सूट के अन्दर से उभरते उसके उभारों पर उसके मोती जैसे निप्पल तन कर खड़े हो गए थे, और उसके पति का लंड भी पायजामे में तम्बू सा बना रहा था.
“देखा…मैं न कहता था..हमारा देश भी काफी तरक्की कर चूका है इन सब बातों में…तुम तो मुझे ऐसे ही डांटती रहती थी, जब भी मैंने हिना के बारे में तुमसे कहा था…” नाज़िर खान ने अपनी बीबी से कहा..मैं समझ गया की उसकी गन्दी नजर अपनी फूल सी बेटी हिना पर है और उसकी माँ रूबी को ये पसंद नहीं है.
“हम जब बाहर के लोगो के साथ ग्रुप सेक्स कर सकते हैं तो अपने परिवार में करने में क्या बुराई है…” नाजिर ने आगे कहा “अब इन दोनों बच्चो को देखो…कितनी ख़ुशी से ये हमें अपने घर के बारे में बता रहे हैं..और तुम्हे भी तो अब ग्रुप सेक्स में काफी मजा आने लगा है…
जब से तुम बाहर से चुदवाने लगी हो, कितना आनंद आता है तुम्हे भी तो, अगर यही आनंद तुम्हे रेहान दे तो कैसा लगेगा…” नज़र खान ने जैसे उसकी कोई नस पकड़ ली हो…
रूबी की आँखों में लाल डोरे तैरने लगे कुछ सोचते हुए और उसका एक हाथ अपने आप ही अपनी चूत पर चला गया और उसे दबाने लगा…आआआआआअह उसने एक सिसकारी मारी और अपने पति की तरफ देखते हुए बोली…”वो बाते फिर कभी discuss करेंगे…अभी तो इनके मजे लो…” और इतना कहते ही वो मेरे शरीर से किसी बेल की भाँती लिपट गयी और अपने ठन्डे और गीले होंठ मेरे होंठो पर रख कर उन्हें बुरी तरह से चूसने लगी…
नाज़िर खान भी आगे बड़ा और ऋतू को अपने से चिपका कर अपने गले लगा लिया..मैंने देखा की ऋतू उसके गले लगते हुए बुरा सा मुंह बना रही थी…शायद उसके अन्दर से आती दुर्गन्ध की वजह से.
मैंने अपने हाथ रूबी के उभारों पर टिका दिए…वो सिसक उठी…वाह क्या कमाल के चुचे थे उनके…मैंने गर्दन नीचे करी और उसके सूट के ऊपर से ही चमकते हुए मोटे निप्पल पर दांत गदा दिए..
अयीईईईईईईई … स्सस्सस्सस म्मम्मम्मम्म अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह
उसने अपनी गर्दन पीछे करी और मेरे मुंह को अपनी छाती पर दबा दिया…मैंने अपने गीले होंठ और जीभ से उसके दाने को चुसना शुरू कर दिया…बड़ा ही मोटा दाना था उसका..मेरे चूसने से उसका सूट पारदर्शी सा हो गया और काले रंग का दाना चमकने लगा.
उसने मुझे फिर से ऊपर खींचा और मेरे होंठो को पागलों की तरह चूसने लगी…उसके मुंह से आह आह की आवाजें आ रही थी…
अह्ह्ह चुसो मुझे….अहह उफ्फ्फ अयीई ……
मैंने उसके मोटे होंठ चूस चूसकर सुजा से दिए थे..बड़ा ही मीठा रस निकल रहा था उनमे से..होंठ चूसते हुए मैंने उसके चुचे अपने हाथों से दबाने शुरू कर दिए..और धीरे -२ अपना एक हाथ नीचे लेजाकर उसकी चूत पर लगा दिया…उसकी गुफा में से जैसे गरम हवा बाहर आ रही थी.. उसपर हाथ लगते ही उसके होंठो का कडापन एकदम से गायब सा हो गया..और वो नरम मलाई जैसे हो गए..अब मुझे उसके होंठ चूसने में और भी मजा आ रहा था.
मैंने नजर घुमा कर देखा तो नाजिर भी मेरी बहन ऋतू के अपने पान वाले गंदे फटे हुए होंठो से चूस रहा था..ऋतू ने अपनी आँखें बंद कर रखी थी…साफ़ दिख रहा था की उसे मजा नहीं आ रहा है.
वो अपने बड़े-२ हाथों से ऋतू की छातियाँ बड़ी बेरहमी से दबा रहा था..अचानक उसके जोर से दबाने की वजह से ऋतू की चीख निकल गयी… आआआआअह्ह …अंकल धीरे….उसकी आँखों से आंसू निकल आये थे.
रूबी ने मेरा ध्यान फिर से अपनी तरफ खींचा और मुझे चाटने लगी..मैंने हाथ नीचे करके उसके कुरते को उठाया और सर से घुमा कर उतार दिया..उसने नीचे ब्रा नहीं पहनी हुई थी..और मोटे दूध जैसे स्तन उचल कर बाहर आ गए..मैं तो उन्हें निहारता ही रह गया..क्या माल था यार..मैंने अपने हाथों से उन दोनों दुर्लभ स्तनों को पकड़ा, दबाया, नापा, और फिर अपने मुंह में डालकर उन्हें चूसने लगा..
आआआआआआह …आआआआअह्ह …..अहह उफ्फ्फ अयीई …
रूबी ने फिर से एक सिसकारी मारी…मैंने अपना दूसरा हाथ उसके दुसरे खरबूजे पर रख दिया और उसे मसलने लगा..बड़ा ही मीठा स्वाद था उसके मुम्मे का..मेरे मुंह में जाकर उसका निप्पल और भी बड़ा हो गया था..आजतक मैंने सिर्फ आरती चाची का ही निप्पल सबसे बड़ा पाया था..पर ये तो उससे भी बड़ा था..मेरे मुंह में वो किसी टॉफी जैसा लग रहा था..मैं उसको चूस भी रहा था और अपने मुंह से उसकी छाती पर धक्के भी मार रहा था..
“इसे भी चुसो नाsssssssssssssssssss” रूबी ने कहा और मेरा मुंह अपने दुसरे वक्ष पर रख दिया..मैंने उसको भी उतनी ही तेजी से चुसना और काटना शुरू कर दिया…
मैंने नीचे उसकी चूत पर फिर से हाथ लगाया, वहां का एरिया पूरा गीला हो चूका था..मेरे हाथ भी चिपचिपे से हो गए.. मैंने उसकी सलवार का नाडा खोला और उसे नीचे गिरा दिया..
सलवार के नीचे गिरते ही उसने मुझे धक्का दिया और मुझे अपने पलंग पर गिरा दिया..और उसने तेजी से अपनी टांगो में फंसी हुई सलवार निकाली और काली रंग की पेंटी में खड़ी हो गयी…
बड़ी ही दिलकश लग रही थी..उसकी मोती मांसल टांगो में फंसी हुई काली कच्छी उसकी सुन्दरता में चार चाँद लगा रहे थे..उसके मोटे-२ चुचे मेरी आँखों के सामने झूल रहे थे..उसने झुक कर मेरी जींस के बटन खोले और उसे जोकी समेत नीचे खींच कर उतार दिया..मेरा लम्बा और गोरा लंड देखकर उसकी आँखें चमक उठी..उसने प्यार से उसे सहलाया..उसके ठन्डे हाथों का स्पर्श पाकर मैं कांप सा गया..और अचानक उसने गर्दन नीचे करके मेरे लंड को अपने मुंह में डाल लिया…उन्माद के मारे मेरी आँखें बंद हो गयी और मैंने अपना एक हाथ उसके सर के ऊपर रखकर अपने लंड पर दबा सा दिया..
ऋतू ठण्ड में अकड़ी हुई सी मेरे से चिपक कर चल रही थी, मैंने अपना हाथ उसकी कमर में डाल रखा था. थोड़ी ही देर में हम दोनों रेहान के काटेज में पहुँच गए..मैंने दरवाजा खडकाया और अन्दर से एक बहुत ही खुबसूरत लड़की बाहर निकल कर आई…”हाँ जी कहिये..” उसने अपनी सुरीली सी आवाज में कहा. उसने पीले रंग का सूट पहना हुआ था, एक दम गोरी चिट्टी, पतली कमर, फैले हुए कुल्हे, मोटे-२ लटकते हुए उसके चुचे जिनपर उसने चुन्नी भी नहीं डाल रखी थी, नीचे उसकी सलवार उसकी मोटी टांगो से चिपकी हुई थी, जिसकी वजह से उसकी मोटी टांगो की सुडोलता साफ़ दिखाई दे रही थी.
“जी मैं आशु हूँ और ये ऋतू है..” मैंने कहा..
“अच्छा तो अब आये हो आप लोग…कितनी देर से इंतज़ार कर रहे थे हम दोनों आपका…” उसने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अन्दर धकेल लिया..ऋतू भी मेरे पीछे -२ अन्दर आ गयी.
“आ गए क्या वो लोग…” अन्दर से एक मोटी सी आवाज आई…और अगले ही पल एक भीमकाय सा इंसान बाहर आया, उसने सफ़ेद कुर्ता पायजामा पहन रखा था, पायजामा घुटनों से थोडा नीचे था, सर पर गोल मुसल्माननी टोपी, काला रंग, पेट निकला हुआ, पान वाले लाल होंठ, बिना मूंछ के लम्बी दाड़ी जिसमे आधे से ज्यादा बाल सफ़ेद थे.
“आओ -२ … मेरा नाम रूबी है और ये हैं मेरे पति नाज़िर खान …” उसने अपनी सुरीली आवाज में कहा. मैं तो हैरान रह गया, मुझे लगा था की वो शायद रेहान की बड़ी बहन है पर ये तो उसकी माँ निकली..और क्या माँ थी…साली की जवानी अभी तक बरकरार थी..उसे देखकर लगता ही नहीं था की वो दो-दो जवान बच्चो की माँ है…और उसका पति उसके बिलकुल विपरीत था..पता नहीं ऐसे लोगो को इतनी ख़ूबसूरत बीबी कैसे मिल जाती है…
मैं सोच ही रहा था की रेहान के अब्बा बोले “मैंने दो बार फ़ोन करा था organisers के पास पर उन्होंने कहा की आज हमारे पास आने के लिए कोई तैयार नहीं हो रहा है…फिर तुम कैसे आये..और वैसे भी काफी देर हो चुकी है , हमारे बच्चे भी function से आते ही होंगे.. ” पर तभी उसने ऋतू की तरफ देखा, उसको देखते ही उसके बड़े से पायजामे में एक हलचल सी हुई..जिसे मैंने तो देखा ही, ऋतू भी देख कर कांप सी गयी..”पर अब तुम आ ही गए हो तो कुछ इन्तेजाम करते हैं” उसने अपने भद्दे से लाल होंठो पर जीभ फिराते हुए कहा.
मैं समझ गया की ये दोनों हमें कुछ और समझ रहे हैं… शायद रोज शाम को यहाँ के organisers सभी को अलग-२ तरह के जोड़े उपलब्ध कराते हैं, और इनके लिए शायद आज कोई तैयार नहीं हुआ होगा..और ये लोग हमें शायद organisers के द्वारा भेजा गया जोड़ा ही समझ रहे हैं..
उसकी बीबी रूबी को देखकर तो मेरा लंड फिर से अंगडाई लेने लगा पर ऋतू के बारे में सोचते ही मैं घबरा सा गया..क्योंकि अगर इस सांड जैसे कसाई ने मेरी बहन को चोदा तो उसकी चूत का भोंसडा बन जाएगा…और इसी लिए शायद इनके पास कोई भी जोड़ा आने को तैयार नहीं हो रहा होगा…पर तभी मेरे मन में ना जाने कैसे विचार आने लगे जिनमे ऋतू को तड़पाते हुए रेहान के पापा चोद रहे हैं और उसकी चीखों से मेरे मन में एक अजीब सा सकूँ मिल रहा है…मेरे मन में अपनी बहन के लिए ऐसे विचार क्यों आ रहे थे…मैं भी नहीं जानता था…पर मैंने निर्णय कर लिया की आज ऋतू की चुदाई इस जानवर जैसे कसाई के लंड से करवा के रहूँगा और अपने लंड से उसकी खूबसूरत बीबी को भी चोदुंगा …
मैंने ऋतू के कान में धीरे से कहा “ऋतू ये दोनों शायद हमें कोई और समझ रहे हैं…क्या बोलती हो..करें क्या इनके साथ भी”
“पागल हो गए हो क्या आशु…देख रहे हो इस मोटे सांड को…ये तो मेरी चूत के परखच्चे उदा देगा..ना बाबा ना…इनको सही बात बताओ और चलो यहाँ से..” ऋतू फुसफुसाई.
“अरे तुम पागल हो गयी हो क्या…इतना अच्छा मौका है…ये मोटे लोगो का लंड बड़ा ही शानदार होता है ..तुम्हे भी मजा आएगा, …अगर ज्यादा लम्बा हुआ भी तो संभाल लेना..तुम तो अब इन सबमे चेम्पियन हो चुकी हो…मैं जानता हूँ तुम इसको भी संभाल सकती हो..प्लीस..तुम्हारी वजह से मेरा चांस भी चला जाएगा…देखो तो जरा रेहान की माँ को…कितनी सुंदर है…मान जाओ न प्लीस….” मैंने उससे याचना करते हुए कहा..
उसने थोड़ी देर सोचा…और फिर बोली “ठीक है आशु…पर मैं ये सिर्फ तुम्हारे लिए कर रही हूँ….” उसके चेहरे पर अभी भी भय था.
“मेरी अच्छी ऋतू…” और मैंने ख़ुशी के मारे उसे चूम लिया..
“ये क्या खुसर-फुसर लगा रखी है तुमने…” रेहान के पापा की कर्कर्ष सी आवाज हमारे कानो में पड़ी.मैंने जल्दी से प्लान बनाया और कहा
“जी कुछ नहीं…..दरअसल..हम तो आपको ये बताने के लिए आये थे की रेहान और हिना आज रात को उनके दोस्तों के साथ ही रहेंगे…उन्होंने बाहर reception पर मेसेज छोड़ा है आपके लिए ….,और हमें organisers ने आपके पास भेजा है…मौज मस्ती के लिए…” मैंने कहा
“चलो अच्छा हुआ की वो दोनों आज रात नहीं आयेंगे…” रूबी ने कहा ” लगता है वो अपने उन्ही दोस्तों के पास रह गए होंगे जिनकी वो दोनों कल से बातें कर रहे थे..”
मैं समझ गया की वो हमारी ही बात कर रहे हैं.
“तुम दोनों तो काफी छोटे लगते हो…तुम्हारी शादी हो चुकी है क्या…” रबी ने मुझसे पूछा.
“जी..दरअसल हम दोनों भाई बहन है., हमारी उम्र 18 और 21 साल की है,…और हम भी यहाँ अपने मम्मी पापा के साथ आयें हैं…” मैंने धीरे से कहा.
मेरी बात सुनते ही उन दोनों का मुंह खुला का खुला रह गया..
“लाहोल विल्ला कुवत …तुम दोनों भाई बहन हो और इन सब में कैसे शामिल हो गए ..” रूबी ने कहा.
“जी ..हमारे घर में इस तरह की कोई पाबंदी नहीं है…हम सभी लोग घर में एक दुसरे के साथ चुदाई कर लेते है…” मैंने उसका उत्तर दिया.
“क्या सच में…” वो दोनों हमारे मुंह देखने लगे, उन्हें अपने कानो पर विशवास ही नहीं हो रहा था की भारत देश में भी ऐसा हो सकता है…..पर मैंने नोट किया की घर में चुदाई करने की बात सुनते ही उन दोनों के भाव बदल से गए थे, रूबी के सूट के अन्दर से उभरते उसके उभारों पर उसके मोती जैसे निप्पल तन कर खड़े हो गए थे, और उसके पति का लंड भी पायजामे में तम्बू सा बना रहा था.
“देखा…मैं न कहता था..हमारा देश भी काफी तरक्की कर चूका है इन सब बातों में…तुम तो मुझे ऐसे ही डांटती रहती थी, जब भी मैंने हिना के बारे में तुमसे कहा था…” नाज़िर खान ने अपनी बीबी से कहा..मैं समझ गया की उसकी गन्दी नजर अपनी फूल सी बेटी हिना पर है और उसकी माँ रूबी को ये पसंद नहीं है.
“हम जब बाहर के लोगो के साथ ग्रुप सेक्स कर सकते हैं तो अपने परिवार में करने में क्या बुराई है…” नाजिर ने आगे कहा “अब इन दोनों बच्चो को देखो…कितनी ख़ुशी से ये हमें अपने घर के बारे में बता रहे हैं..और तुम्हे भी तो अब ग्रुप सेक्स में काफी मजा आने लगा है…
जब से तुम बाहर से चुदवाने लगी हो, कितना आनंद आता है तुम्हे भी तो, अगर यही आनंद तुम्हे रेहान दे तो कैसा लगेगा…” नज़र खान ने जैसे उसकी कोई नस पकड़ ली हो…
रूबी की आँखों में लाल डोरे तैरने लगे कुछ सोचते हुए और उसका एक हाथ अपने आप ही अपनी चूत पर चला गया और उसे दबाने लगा…आआआआआअह उसने एक सिसकारी मारी और अपने पति की तरफ देखते हुए बोली…”वो बाते फिर कभी discuss करेंगे…अभी तो इनके मजे लो…” और इतना कहते ही वो मेरे शरीर से किसी बेल की भाँती लिपट गयी और अपने ठन्डे और गीले होंठ मेरे होंठो पर रख कर उन्हें बुरी तरह से चूसने लगी…
नाज़िर खान भी आगे बड़ा और ऋतू को अपने से चिपका कर अपने गले लगा लिया..मैंने देखा की ऋतू उसके गले लगते हुए बुरा सा मुंह बना रही थी…शायद उसके अन्दर से आती दुर्गन्ध की वजह से.
मैंने अपने हाथ रूबी के उभारों पर टिका दिए…वो सिसक उठी…वाह क्या कमाल के चुचे थे उनके…मैंने गर्दन नीचे करी और उसके सूट के ऊपर से ही चमकते हुए मोटे निप्पल पर दांत गदा दिए..
अयीईईईईईईई … स्सस्सस्सस म्मम्मम्मम्म अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह
उसने अपनी गर्दन पीछे करी और मेरे मुंह को अपनी छाती पर दबा दिया…मैंने अपने गीले होंठ और जीभ से उसके दाने को चुसना शुरू कर दिया…बड़ा ही मोटा दाना था उसका..मेरे चूसने से उसका सूट पारदर्शी सा हो गया और काले रंग का दाना चमकने लगा.
उसने मुझे फिर से ऊपर खींचा और मेरे होंठो को पागलों की तरह चूसने लगी…उसके मुंह से आह आह की आवाजें आ रही थी…
अह्ह्ह चुसो मुझे….अहह उफ्फ्फ अयीई ……
मैंने उसके मोटे होंठ चूस चूसकर सुजा से दिए थे..बड़ा ही मीठा रस निकल रहा था उनमे से..होंठ चूसते हुए मैंने उसके चुचे अपने हाथों से दबाने शुरू कर दिए..और धीरे -२ अपना एक हाथ नीचे लेजाकर उसकी चूत पर लगा दिया…उसकी गुफा में से जैसे गरम हवा बाहर आ रही थी.. उसपर हाथ लगते ही उसके होंठो का कडापन एकदम से गायब सा हो गया..और वो नरम मलाई जैसे हो गए..अब मुझे उसके होंठ चूसने में और भी मजा आ रहा था.
मैंने नजर घुमा कर देखा तो नाजिर भी मेरी बहन ऋतू के अपने पान वाले गंदे फटे हुए होंठो से चूस रहा था..ऋतू ने अपनी आँखें बंद कर रखी थी…साफ़ दिख रहा था की उसे मजा नहीं आ रहा है.
वो अपने बड़े-२ हाथों से ऋतू की छातियाँ बड़ी बेरहमी से दबा रहा था..अचानक उसके जोर से दबाने की वजह से ऋतू की चीख निकल गयी… आआआआअह्ह …अंकल धीरे….उसकी आँखों से आंसू निकल आये थे.
रूबी ने मेरा ध्यान फिर से अपनी तरफ खींचा और मुझे चाटने लगी..मैंने हाथ नीचे करके उसके कुरते को उठाया और सर से घुमा कर उतार दिया..उसने नीचे ब्रा नहीं पहनी हुई थी..और मोटे दूध जैसे स्तन उचल कर बाहर आ गए..मैं तो उन्हें निहारता ही रह गया..क्या माल था यार..मैंने अपने हाथों से उन दोनों दुर्लभ स्तनों को पकड़ा, दबाया, नापा, और फिर अपने मुंह में डालकर उन्हें चूसने लगा..
आआआआआआह …आआआआअह्ह …..अहह उफ्फ्फ अयीई …
रूबी ने फिर से एक सिसकारी मारी…मैंने अपना दूसरा हाथ उसके दुसरे खरबूजे पर रख दिया और उसे मसलने लगा..बड़ा ही मीठा स्वाद था उसके मुम्मे का..मेरे मुंह में जाकर उसका निप्पल और भी बड़ा हो गया था..आजतक मैंने सिर्फ आरती चाची का ही निप्पल सबसे बड़ा पाया था..पर ये तो उससे भी बड़ा था..मेरे मुंह में वो किसी टॉफी जैसा लग रहा था..मैं उसको चूस भी रहा था और अपने मुंह से उसकी छाती पर धक्के भी मार रहा था..
“इसे भी चुसो नाsssssssssssssssssss” रूबी ने कहा और मेरा मुंह अपने दुसरे वक्ष पर रख दिया..मैंने उसको भी उतनी ही तेजी से चुसना और काटना शुरू कर दिया…
मैंने नीचे उसकी चूत पर फिर से हाथ लगाया, वहां का एरिया पूरा गीला हो चूका था..मेरे हाथ भी चिपचिपे से हो गए.. मैंने उसकी सलवार का नाडा खोला और उसे नीचे गिरा दिया..
सलवार के नीचे गिरते ही उसने मुझे धक्का दिया और मुझे अपने पलंग पर गिरा दिया..और उसने तेजी से अपनी टांगो में फंसी हुई सलवार निकाली और काली रंग की पेंटी में खड़ी हो गयी…
बड़ी ही दिलकश लग रही थी..उसकी मोती मांसल टांगो में फंसी हुई काली कच्छी उसकी सुन्दरता में चार चाँद लगा रहे थे..उसके मोटे-२ चुचे मेरी आँखों के सामने झूल रहे थे..उसने झुक कर मेरी जींस के बटन खोले और उसे जोकी समेत नीचे खींच कर उतार दिया..मेरा लम्बा और गोरा लंड देखकर उसकी आँखें चमक उठी..उसने प्यार से उसे सहलाया..उसके ठन्डे हाथों का स्पर्श पाकर मैं कांप सा गया..और अचानक उसने गर्दन नीचे करके मेरे लंड को अपने मुंह में डाल लिया…उन्माद के मारे मेरी आँखें बंद हो गयी और मैंने अपना एक हाथ उसके सर के ऊपर रखकर अपने लंड पर दबा सा दिया..
वो बड़ी ही तेजी से मेरे लंड को चूसने और चाटने लगी..उसके मुंह से सादाप-२ की आवाजें आ रही थी.
वहां नाजिर ऋतू की टी शर्ट उतार कर और उसके ब्रा के स्ट्रेप को कंधे से नीचे गिरा कर उसके चुचे को बड़ी ही बेरहमी से दबा रहा था…उन्होंने अपना मुंह आगे किया और अपने काले -२ दांतों से ऋतू के निप्पल को दबा कर काट दिया..ऋतू अपने ऊपर हो रहे इन भयानक हमलो से सिसक रही थी उसके चेहरे पर उभरता दर्द साफ़ दिखाई दे रहा था..उसने याचना भरी नजरों से मेरी तरफ देखा पर मैंने उसे पुचकारकर नाजिर अंकल का साथ देने को कहा.
अचानक रूबी ने मेरे लंड को अपने मुंह से निकालकर मेरी बाल्स को अपने मुंह में भर लिया..और एक हाथ से वो मेरे लंड को ऊपर नीचे भी कर रही थी..मेरी दोनों गोटियाँ उसके मुंह में घुस रही थी..वो उन्हें किसी कैंडी की तरह से चूस रही थी..फिर उसने उन्हें भी बाहर निकाला और अपनी लम्बी जीभ से मेरी गांड के छेद को चाटने लगी…ये मेरे लिए बिलकुल नया अनुभव था..मुझे वहां बड़ी गुदगुदी सी होने लगी..उसकी गीली जीभ मेरे छेद को कुरेद रही थी..उसने अपने होंठ भी वहां पर चिपकाये…मुझे बड़ी घिन्न सी आई उनके ऐसा करने पर…लेकिन फिर थोडा -२ मजा भी आने लगा…
मेरे लंड को वो काफी तेजी से ऊपर नीचे कर रही थी..मुझे लगा की मेरा निकलने वाला है, इसलिए मैंने उन्हें एक झटका दिया और उठ खड़ा हुआ..और उन्हें बिस्तर पर गिरा कर उनकी टांगो को चोडा करके ऊपर उठा दिया..और फिर टांगो में फंसी हुई कच्छी को बड़ी बेरहमी से खींचकर उतार दिया..वो फट कर ही निकल पायी उन मोटी टांगो से..
अब मेरे सामने रूबी की सफाचट चूत थी..ऐसा लगता था की किसी कमसिन कलि की चूत है जिसपर अभी तक कोई बाल भी नहीं आया है..उसके अन्दर से रस की धार बाहर आ रही थी, मुझसे रहा नहीं गया और मैंने अपना मुंह नीचे करके गरमा गरम चूत पर रख दिया..वो चिल्ला पड़ी
आआआआआआआआआअह्ह्ह ऊऊऊऊऊऊऊऊऊह्ह उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ …….होय्य्य्यय्य्य्य …….म्मम्मम्म
मैंने अपनी एक ऊँगली भी डाल दी चूत में. अपने होंठो से मैंने उनकी चूत की फांको को फैलाया और बीच में से चमकते हुए क्लिट को अपनी जीभ से दबा दबाकर कुरेदने लगा….वो तो पागल सी होकर मेरे मुंह को अपनी चूत पर कण्ट्रोल करती हुई घिसने लगी..सही में यारों..इतनी गरम औरत मैंने आज तक नहीं देखी थी..
उसकी चूत में से गरम फुहारें निकल रही थी और मेरा मुंह गिला हो चूका था..पर मैंने उसकी चूत में रस को चुसना नहीं छोड़ा.. आआअयीईईईईईईईई ऑफ़ ऑफ़ ऑफ़ फक फक फक,…….मर्र्र्रर गयीईईई आआआआआआआआह्ह्ह्ह मैं समझ गया की अगर मैंने कुछ और देर की तो वो झड जायेगी…इसलिए मैं उठा और अपना लंड उनकी आग उगलती हुई चूत पर लगाया और एक धक्का दिया..
उनकी चूत की चिकनाहट ही इतनी थी की मुझे ज्यादा जोर लगाने की जरुरत ही नहीं पड़ी..लंड अन्दर तक सरकता चला गया… आआआआआआआआआआआआह्ह्ह म्मम्मम्मम्म….
आनंद के मारे उनकी आँखें बंद हो गयी और उनके चेहरे पर हलकी हंसी आ गयी थी..
मैं नीचे झुका और रूबी के गुलाबी होंठों को चूसने लगा…मैंने लंड उनकी चूत में ले जाकर छोड़ दिया था..कोई और हरकत ना पाकर उन्होंने नीचे से धक्के देने शुरू कर दिए… उम्म्म्म चोदो ना…डाल कर रुक क्यों गए…..
मैंने किसी आज्ञाकारी बच्चे की तरह उनका कहना माना और अपने लंड के धक्के उसकी चूत में लगाने शुरू कर दिए.. उफ़ उफ्फ्फ आह आह आह आह फक फक फक आआआआअह्ह्ह …… म्मम्मम स्सस्सस्सस………ओईए………अह्ह्हह्ह मैंने एक हाथ से उनके चुचे को मसला और दुसरे को अपने मुंह में डालकर उनका दूध पीने लगा… पी ले ….मेरा सारा दूध पी ले..बेटा ….मेरा बच्चा….रेहाआअन …….वो चिल्लाई….
मैं रेहान का नाम सुनकर चोंक गया.. वहां नाजिर भी अपनी पत्नी के मुंह से चुदाई के समय रेहान का नाम सुनकर रुक गया और फिर कुछ सोचकर उनके चेहरे पर कुटिल सी मुस्कान आ गयी..वो समझ गए की रूबी चुद तो मुझसे रही है पर उसके ख्यालों में उनका बेटा रेहान है …ये जानकार उन्हें कोई गुस्सा नहीं आया क्योंकि एक तरह से उनका रास्ता भी तो साफ़ हो गया था..हिना के लिए. मैं भी सब समझ सा गया..पर मुझे इस बात से कुछ फर्क नहीं पड़ता था..वो मुझे रेहान बुलाय या आशु..मुझे तो बस उनकी रसीली चूत से मतलब था..इसलिए मैंने और तेजी से रूबी की चुदाई करनी शुरू कर दी..
आआआअह्ह अआः ऑफ़ ऑफ़ ऑफ़ ऑफ़ ……अयीईईईईई……..
नाजिर भी ऋतू की तरफ फिर से मुड़ा और उसके गोरे जिस्म को फिर से चूसने लगा…अब तक ऋतू के सारे कपडे उतर चुके थे..नाजिर ने भी अपने ऊपर के कपडे उतार दिए थे..उसका भीमकाय शरीर काफी भयानक सा लग रहा था, उसकी छाती औरतों जैसी बड़ी होकर झूल सी रही थी…और वो ऋतू का सर पकड़कर अपने निप्पल्स को जबरदस्ती उसके मुंह में ठूस रहा था…वहां पर काफी घने बाल थे..ऋतू को उलटी सी आ रही थी, वो शायद काफी दिनों से नहाया भी नहीं था, उसके जिस्म से बड़ी ही गन्दी स्मेल आ रही थी, ऋतू के पास और कोई चारा नहीं था उसने बड़ी मुश्किल से अपना मुंह खोला और उसके भद्दे से लटकते हुए मोटे निप्पल को मुंह में लेकर चूसने लगी..शरीर की गन्दी महक अन्दर जाते ही उसके नथुने फड़क उठे..पर वो कुछ भी ना कर पायी क्योंकि नाजिर ने उसके सर को पीछे से अपने सीने पर दबा रखा था. वो बेचारी अपने भाई के लिए वो सब करने को बाधित थी.
थोड़ी देर चूसने के बाद उसने ऋतू को पीछे किया..वो सांस भी नहीं ले पा रही थी…खुली हवा पाकर वो ऊपर मुंह खोलकर सांस लेने लगी..नाजिर ने अपनी पेंट को नीचे सरकाया और पूरा नंगा होकर खड़ा हो गया..उसका लम्बा लंड देखकर तो मैं भी घबरा गया..काला सांप था एनाकोंडा जैसा…वो बुरी तरह से फुफकार रहा था…ऋतू की तो हालत ही पतली हो गयी ये सोचकर की उसे इस लंड से चुदना पड़ेगा..उसने फिर से मेरी तरफ देखा पर मैंने अपना सर घुमा लिया और रूबी के रूबी जैसे चुचे चूसने लगा..
रूबी ने मुझे नीचे किया और झटके से मेरे ऊपर आकर बैठ गयी..अब उसके उछलते हुए मोटे मुम्मे मेरे सामने थे मैंने उसकी बाँहों को पकड़ा और उसे नीचे खींचा ..उसके दोनों खरबूजे मेरे मुंह पर आ गिरे और मैं उन्हें ऊपर उछल उछल कर पकड़ने की कोशिश करने लगा….उसे भी इस गेम में बड़ा मजा आ रहा था..मैंने हाथ नीचे करके उसकी मोटी गांड को जकड लिया और दबाने लगा..मैंने एक ऊँगली नीचे करी अपने अन्दर जाते लंड के साथ जोड़कर उसकी चूत में डाल दी..मेरी ऊँगली पर अन्दर की चिनाई लग गयी और मैंने वोही ऊँगली उसकी गांड के छेद में डाल दी…उसका पूरा शरीर अकड़ गया और वो और तेजी से मेरे लंड को कुचलने लगी.
वहां नाजिर खान ने ऋतू को अपने सामने बैठाया और अपना काला नाग उसके मुंह में डाल दिया..उसका सुपाडा ही इतना बड़ा था की ऋतू का मुंह फटने सा लगा..उसके मुंह में सिर्फ आगे का हिस्सा जा कर फंस सा गया..अपने काले लंड को मासूम सी, बेटी जितनी उम्र की लड़की के मुंह में फंसा देखकर , नाजिर को बड़ा सुकून सा मिला और अगले ही पल उस कसाई ने एक तेज झटका मारा और अपना आधा लंड ऋतू के मुंह के अन्दर तक उतार दिया….
ग्गुन गूं …..गूं….की आवाज ही आ पाई ऋतू के गले से..
और उसकी आँखों से अश्रु की धार फिर से बह निकली..वो अपनी नाक से ज्यादा से ज्यादा सांस लेने की कोशिश कर रही थी पर छोड़ने का रास्ता तो बंद था इसलिए उसी रास्ते से सांस छोड़ भी रही थी..पर वो ज्यादा देर तक ऐसा नहीं कर पायी और उसने खांसते हुए नाजिर के लंड को बाहर धकेल दिया..
प्लीस…ऐसा मत करो अंकल…वो रो रही थी…मैंने जानकार उस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया और रूबी की चूत मारने में लगा रहा.
रूबी अब मुझे रेहान कह कर ही बुला रही थी…
हां रेहान चोद अपनी अम्मी को…हाँ ऐसे ही….अयिओईईइ चोद बेटा…डाल अपना लंड अपनी अम्मी की चूत में….आआह्ह हां बेटा…चोद अपनी रांड जैसी अम्मी की चूत को…
वो पागलों की तरह बदबदाये जा रही थी और मेरे लंड पर उछल उछल कर उसका कचुम्बर बना रही थी….जल्दी ही रूबी की चूत ने गर्म लावा उगलना शुरू कर दिया…आआआआआआह्ह्ह्ह बेटा……चोद मुझे……मैं तो गयीईईईईईईईइ……… और वो गहरी साँसे लेती हुई मेरी छाती पर गिर पड़ी…
थोड़ी देर तक उसकी कमर पर हाथ फेरते रहने के बाद वो उठी और बेड पर घोड़ी बन कर लेट गयी…उसकी उठी हुई गांड बड़ी ही दिलकश लग रही थी…मैंने उसके गांड के छेद को देखा तो मेरे लंड का ईमान डोल गया और मैंने अपना लंड उसके पीछे वाले छेद पर टिका दिया…वो समझ गयी और एक तेज धक्का पीछे की तरफ मारा और मेरा लंड अपनी कसी हुई गांड के छेद में उतार लिया…
आआआआआआआआआअह्ह्ह्ह मैं हलके से चिल्लाया और उसके गोल ग्लोबस को पकड़कर दबाने लगा और धक्के मारने लगा.. आआआआआआअ आःह्ह्ह ऑफ ऑफ ऊऊऊ ऊऊऊऊअ
जल्दी ही इसकी गांड के छेद में मैंने गोलियां दागनी शुरू कर दी..
आआआआआअह्ह्ह मैं गया……….आआआआआआअह्ह और मैं उनकी कमर पर चुमते हुए ढेर हो गया…
तभी मैंने एक तेज चीख सुनी…वो चीख ऋतू की थी…नाजिर उसकी चूत को बुरी तरह से चाट रहा था…
अब मैं बेड पर रूबी के साथ लेट गया और हम दोनों उन दोनों की चुदाई का खेल देखने लगे..
नाजिर तेजी से अपनी मोटी और खुरदुरी जीभ से मेरी ऋतू की चिकनी चमेली जैसी चूत को चाट रहा था..उसके बड़े से मुंह के आगे ऋतू की खुली हुई चूत किसी खिलोने की तरह लग रही थी, ऋतू की दोनी जाँघों को चोडा करके नाजिर अंकल ने अपनी घनी दाड़ी वाला मुंह उसकी चूत पर झुका रखा था , अपने होंठो से ज्यादा वो अपने दांत यूस कर रहे थे, और ऋतू की चूत के फैले हुए होंठो को अपने मुंह में डालकर वो ऊपर तक खींच-खींचकर छोड़ देते थे जिसकी वजह से ऋतू की चीखे निकल रही थी, उसने नाजिर के सर को पीछे की तरफ से पकड़ा हुआ था, और दर्द होने पर वो उनके बाल खींच देती थी, पर इस बात से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ रहा था..
नाजिर ने अपनी मोटी उँगलियों से उसकी गुलाबी चूत के किवाड़ खोले और उंदर से झांकती उसकी क्लिट को अपने मुंह में भर लिया..नाजिर का मुंह अन्दर तक जाने की वजह से उसकी दाड़ी के लम्बे बाल भी उसकी चूत की अंदरी दीवारों को छु रहे थे, जिसकी वजह से उसे बड़ी गुदगुदी सी हो रही थी, पर जैसे ही नाजिर ने क्लिट को मुंह में भींचा उसकी साँसे ही रुक गयी..नाजिर ने क्लिट को अपने दांत के नीचे दबा लिया, पर काटा नहीं, पर ऋतू को लगा की वो तो गयी..उसे पीड़ा के साथ – २ मजा भी आ रहा था..उसके मुंह से एक लम्बी आनंदमयी सिसकारी निकली..
वहां नाजिर ऋतू की टी शर्ट उतार कर और उसके ब्रा के स्ट्रेप को कंधे से नीचे गिरा कर उसके चुचे को बड़ी ही बेरहमी से दबा रहा था…उन्होंने अपना मुंह आगे किया और अपने काले -२ दांतों से ऋतू के निप्पल को दबा कर काट दिया..ऋतू अपने ऊपर हो रहे इन भयानक हमलो से सिसक रही थी उसके चेहरे पर उभरता दर्द साफ़ दिखाई दे रहा था..उसने याचना भरी नजरों से मेरी तरफ देखा पर मैंने उसे पुचकारकर नाजिर अंकल का साथ देने को कहा.
अचानक रूबी ने मेरे लंड को अपने मुंह से निकालकर मेरी बाल्स को अपने मुंह में भर लिया..और एक हाथ से वो मेरे लंड को ऊपर नीचे भी कर रही थी..मेरी दोनों गोटियाँ उसके मुंह में घुस रही थी..वो उन्हें किसी कैंडी की तरह से चूस रही थी..फिर उसने उन्हें भी बाहर निकाला और अपनी लम्बी जीभ से मेरी गांड के छेद को चाटने लगी…ये मेरे लिए बिलकुल नया अनुभव था..मुझे वहां बड़ी गुदगुदी सी होने लगी..उसकी गीली जीभ मेरे छेद को कुरेद रही थी..उसने अपने होंठ भी वहां पर चिपकाये…मुझे बड़ी घिन्न सी आई उनके ऐसा करने पर…लेकिन फिर थोडा -२ मजा भी आने लगा…
मेरे लंड को वो काफी तेजी से ऊपर नीचे कर रही थी..मुझे लगा की मेरा निकलने वाला है, इसलिए मैंने उन्हें एक झटका दिया और उठ खड़ा हुआ..और उन्हें बिस्तर पर गिरा कर उनकी टांगो को चोडा करके ऊपर उठा दिया..और फिर टांगो में फंसी हुई कच्छी को बड़ी बेरहमी से खींचकर उतार दिया..वो फट कर ही निकल पायी उन मोटी टांगो से..
अब मेरे सामने रूबी की सफाचट चूत थी..ऐसा लगता था की किसी कमसिन कलि की चूत है जिसपर अभी तक कोई बाल भी नहीं आया है..उसके अन्दर से रस की धार बाहर आ रही थी, मुझसे रहा नहीं गया और मैंने अपना मुंह नीचे करके गरमा गरम चूत पर रख दिया..वो चिल्ला पड़ी
आआआआआआआआआअह्ह्ह ऊऊऊऊऊऊऊऊऊह्ह उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ …….होय्य्य्यय्य्य्य …….म्मम्मम्म
मैंने अपनी एक ऊँगली भी डाल दी चूत में. अपने होंठो से मैंने उनकी चूत की फांको को फैलाया और बीच में से चमकते हुए क्लिट को अपनी जीभ से दबा दबाकर कुरेदने लगा….वो तो पागल सी होकर मेरे मुंह को अपनी चूत पर कण्ट्रोल करती हुई घिसने लगी..सही में यारों..इतनी गरम औरत मैंने आज तक नहीं देखी थी..
उसकी चूत में से गरम फुहारें निकल रही थी और मेरा मुंह गिला हो चूका था..पर मैंने उसकी चूत में रस को चुसना नहीं छोड़ा.. आआअयीईईईईईईईई ऑफ़ ऑफ़ ऑफ़ फक फक फक,…….मर्र्र्रर गयीईईई आआआआआआआआह्ह्ह्ह मैं समझ गया की अगर मैंने कुछ और देर की तो वो झड जायेगी…इसलिए मैं उठा और अपना लंड उनकी आग उगलती हुई चूत पर लगाया और एक धक्का दिया..
उनकी चूत की चिकनाहट ही इतनी थी की मुझे ज्यादा जोर लगाने की जरुरत ही नहीं पड़ी..लंड अन्दर तक सरकता चला गया… आआआआआआआआआआआआह्ह्ह म्मम्मम्मम्म….
आनंद के मारे उनकी आँखें बंद हो गयी और उनके चेहरे पर हलकी हंसी आ गयी थी..
मैं नीचे झुका और रूबी के गुलाबी होंठों को चूसने लगा…मैंने लंड उनकी चूत में ले जाकर छोड़ दिया था..कोई और हरकत ना पाकर उन्होंने नीचे से धक्के देने शुरू कर दिए… उम्म्म्म चोदो ना…डाल कर रुक क्यों गए…..
मैंने किसी आज्ञाकारी बच्चे की तरह उनका कहना माना और अपने लंड के धक्के उसकी चूत में लगाने शुरू कर दिए.. उफ़ उफ्फ्फ आह आह आह आह फक फक फक आआआआअह्ह्ह …… म्मम्मम स्सस्सस्सस………ओईए………अह्ह्हह्ह मैंने एक हाथ से उनके चुचे को मसला और दुसरे को अपने मुंह में डालकर उनका दूध पीने लगा… पी ले ….मेरा सारा दूध पी ले..बेटा ….मेरा बच्चा….रेहाआअन …….वो चिल्लाई….
मैं रेहान का नाम सुनकर चोंक गया.. वहां नाजिर भी अपनी पत्नी के मुंह से चुदाई के समय रेहान का नाम सुनकर रुक गया और फिर कुछ सोचकर उनके चेहरे पर कुटिल सी मुस्कान आ गयी..वो समझ गए की रूबी चुद तो मुझसे रही है पर उसके ख्यालों में उनका बेटा रेहान है …ये जानकार उन्हें कोई गुस्सा नहीं आया क्योंकि एक तरह से उनका रास्ता भी तो साफ़ हो गया था..हिना के लिए. मैं भी सब समझ सा गया..पर मुझे इस बात से कुछ फर्क नहीं पड़ता था..वो मुझे रेहान बुलाय या आशु..मुझे तो बस उनकी रसीली चूत से मतलब था..इसलिए मैंने और तेजी से रूबी की चुदाई करनी शुरू कर दी..
आआआअह्ह अआः ऑफ़ ऑफ़ ऑफ़ ऑफ़ ……अयीईईईईई……..
नाजिर भी ऋतू की तरफ फिर से मुड़ा और उसके गोरे जिस्म को फिर से चूसने लगा…अब तक ऋतू के सारे कपडे उतर चुके थे..नाजिर ने भी अपने ऊपर के कपडे उतार दिए थे..उसका भीमकाय शरीर काफी भयानक सा लग रहा था, उसकी छाती औरतों जैसी बड़ी होकर झूल सी रही थी…और वो ऋतू का सर पकड़कर अपने निप्पल्स को जबरदस्ती उसके मुंह में ठूस रहा था…वहां पर काफी घने बाल थे..ऋतू को उलटी सी आ रही थी, वो शायद काफी दिनों से नहाया भी नहीं था, उसके जिस्म से बड़ी ही गन्दी स्मेल आ रही थी, ऋतू के पास और कोई चारा नहीं था उसने बड़ी मुश्किल से अपना मुंह खोला और उसके भद्दे से लटकते हुए मोटे निप्पल को मुंह में लेकर चूसने लगी..शरीर की गन्दी महक अन्दर जाते ही उसके नथुने फड़क उठे..पर वो कुछ भी ना कर पायी क्योंकि नाजिर ने उसके सर को पीछे से अपने सीने पर दबा रखा था. वो बेचारी अपने भाई के लिए वो सब करने को बाधित थी.
थोड़ी देर चूसने के बाद उसने ऋतू को पीछे किया..वो सांस भी नहीं ले पा रही थी…खुली हवा पाकर वो ऊपर मुंह खोलकर सांस लेने लगी..नाजिर ने अपनी पेंट को नीचे सरकाया और पूरा नंगा होकर खड़ा हो गया..उसका लम्बा लंड देखकर तो मैं भी घबरा गया..काला सांप था एनाकोंडा जैसा…वो बुरी तरह से फुफकार रहा था…ऋतू की तो हालत ही पतली हो गयी ये सोचकर की उसे इस लंड से चुदना पड़ेगा..उसने फिर से मेरी तरफ देखा पर मैंने अपना सर घुमा लिया और रूबी के रूबी जैसे चुचे चूसने लगा..
रूबी ने मुझे नीचे किया और झटके से मेरे ऊपर आकर बैठ गयी..अब उसके उछलते हुए मोटे मुम्मे मेरे सामने थे मैंने उसकी बाँहों को पकड़ा और उसे नीचे खींचा ..उसके दोनों खरबूजे मेरे मुंह पर आ गिरे और मैं उन्हें ऊपर उछल उछल कर पकड़ने की कोशिश करने लगा….उसे भी इस गेम में बड़ा मजा आ रहा था..मैंने हाथ नीचे करके उसकी मोटी गांड को जकड लिया और दबाने लगा..मैंने एक ऊँगली नीचे करी अपने अन्दर जाते लंड के साथ जोड़कर उसकी चूत में डाल दी..मेरी ऊँगली पर अन्दर की चिनाई लग गयी और मैंने वोही ऊँगली उसकी गांड के छेद में डाल दी…उसका पूरा शरीर अकड़ गया और वो और तेजी से मेरे लंड को कुचलने लगी.
वहां नाजिर खान ने ऋतू को अपने सामने बैठाया और अपना काला नाग उसके मुंह में डाल दिया..उसका सुपाडा ही इतना बड़ा था की ऋतू का मुंह फटने सा लगा..उसके मुंह में सिर्फ आगे का हिस्सा जा कर फंस सा गया..अपने काले लंड को मासूम सी, बेटी जितनी उम्र की लड़की के मुंह में फंसा देखकर , नाजिर को बड़ा सुकून सा मिला और अगले ही पल उस कसाई ने एक तेज झटका मारा और अपना आधा लंड ऋतू के मुंह के अन्दर तक उतार दिया….
ग्गुन गूं …..गूं….की आवाज ही आ पाई ऋतू के गले से..
और उसकी आँखों से अश्रु की धार फिर से बह निकली..वो अपनी नाक से ज्यादा से ज्यादा सांस लेने की कोशिश कर रही थी पर छोड़ने का रास्ता तो बंद था इसलिए उसी रास्ते से सांस छोड़ भी रही थी..पर वो ज्यादा देर तक ऐसा नहीं कर पायी और उसने खांसते हुए नाजिर के लंड को बाहर धकेल दिया..
प्लीस…ऐसा मत करो अंकल…वो रो रही थी…मैंने जानकार उस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया और रूबी की चूत मारने में लगा रहा.
रूबी अब मुझे रेहान कह कर ही बुला रही थी…
हां रेहान चोद अपनी अम्मी को…हाँ ऐसे ही….अयिओईईइ चोद बेटा…डाल अपना लंड अपनी अम्मी की चूत में….आआह्ह हां बेटा…चोद अपनी रांड जैसी अम्मी की चूत को…
वो पागलों की तरह बदबदाये जा रही थी और मेरे लंड पर उछल उछल कर उसका कचुम्बर बना रही थी….जल्दी ही रूबी की चूत ने गर्म लावा उगलना शुरू कर दिया…आआआआआआह्ह्ह्ह बेटा……चोद मुझे……मैं तो गयीईईईईईईईइ……… और वो गहरी साँसे लेती हुई मेरी छाती पर गिर पड़ी…
थोड़ी देर तक उसकी कमर पर हाथ फेरते रहने के बाद वो उठी और बेड पर घोड़ी बन कर लेट गयी…उसकी उठी हुई गांड बड़ी ही दिलकश लग रही थी…मैंने उसके गांड के छेद को देखा तो मेरे लंड का ईमान डोल गया और मैंने अपना लंड उसके पीछे वाले छेद पर टिका दिया…वो समझ गयी और एक तेज धक्का पीछे की तरफ मारा और मेरा लंड अपनी कसी हुई गांड के छेद में उतार लिया…
आआआआआआआआआअह्ह्ह्ह मैं हलके से चिल्लाया और उसके गोल ग्लोबस को पकड़कर दबाने लगा और धक्के मारने लगा.. आआआआआआअ आःह्ह्ह ऑफ ऑफ ऊऊऊ ऊऊऊऊअ
जल्दी ही इसकी गांड के छेद में मैंने गोलियां दागनी शुरू कर दी..
आआआआआअह्ह्ह मैं गया……….आआआआआआअह्ह और मैं उनकी कमर पर चुमते हुए ढेर हो गया…
तभी मैंने एक तेज चीख सुनी…वो चीख ऋतू की थी…नाजिर उसकी चूत को बुरी तरह से चाट रहा था…
अब मैं बेड पर रूबी के साथ लेट गया और हम दोनों उन दोनों की चुदाई का खेल देखने लगे..
नाजिर तेजी से अपनी मोटी और खुरदुरी जीभ से मेरी ऋतू की चिकनी चमेली जैसी चूत को चाट रहा था..उसके बड़े से मुंह के आगे ऋतू की खुली हुई चूत किसी खिलोने की तरह लग रही थी, ऋतू की दोनी जाँघों को चोडा करके नाजिर अंकल ने अपनी घनी दाड़ी वाला मुंह उसकी चूत पर झुका रखा था , अपने होंठो से ज्यादा वो अपने दांत यूस कर रहे थे, और ऋतू की चूत के फैले हुए होंठो को अपने मुंह में डालकर वो ऊपर तक खींच-खींचकर छोड़ देते थे जिसकी वजह से ऋतू की चीखे निकल रही थी, उसने नाजिर के सर को पीछे की तरफ से पकड़ा हुआ था, और दर्द होने पर वो उनके बाल खींच देती थी, पर इस बात से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ रहा था..
नाजिर ने अपनी मोटी उँगलियों से उसकी गुलाबी चूत के किवाड़ खोले और उंदर से झांकती उसकी क्लिट को अपने मुंह में भर लिया..नाजिर का मुंह अन्दर तक जाने की वजह से उसकी दाड़ी के लम्बे बाल भी उसकी चूत की अंदरी दीवारों को छु रहे थे, जिसकी वजह से उसे बड़ी गुदगुदी सी हो रही थी, पर जैसे ही नाजिर ने क्लिट को मुंह में भींचा उसकी साँसे ही रुक गयी..नाजिर ने क्लिट को अपने दांत के नीचे दबा लिया, पर काटा नहीं, पर ऋतू को लगा की वो तो गयी..उसे पीड़ा के साथ – २ मजा भी आ रहा था..उसके मुंह से एक लम्बी आनंदमयी सिसकारी निकली..
अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह स्स्सस्स्स्सस्स्स म्मम्मम्मम धीरीईईईए ……अंकल…
नाजिर ने अपना मुंह ऊपर उठाया…और बोला… “मुझे अब्बा बोलो…बेटी…” उसकी बात सुनकर मैं, रूबी और हिना तीनो चोंक गए, मैं समझ गया की जिस तरह रूबी ने मुझे रेहान समझ कर चुदवाई करवाई है उसी तरह से अब नाजिर भी ऋतू को अपनी सगी बेटी हिना समझ कर चोदना चाहता है और वो ऋतू को हिना का रोल प्ले करने के लिए कह रहा है…मजा आएगा..मैंने सोचा..और रूबी की तरफ देखा…वो मेरे मुरझाये हुए लंड से अपनी मोटी गांड चिपकाये लेटी थी..और उनकी बातें सुनकर उसने अपनी मोटी गांड को मेरे लंड पर जोर से दबा दिया…यानी वो भी इस बात को सुनकर उत्तेजित हो रही थी.
“हाआआअन्न अब्बाआआआ ऐसे ही…..चुसो अपनी हिना की चूऊऊऊऊऊत ………आआआआआह्ह्ह ” ऋतू जोर से नाजिर के बाल पकड़कर चिल्लाई…
ऋतू के मुंह से अब्बा शब्द सुनते ही नाजिर के चेहरे पर अजीब तरह का सकून आ गया, उसने अपना मुंह उसकी गीली चूत पर से उठाया और बोला..
“मेरी हिना……मेरी जान……म्मम्मम्मम ” और वापिस उसकी बहती हुई चूत में डुबकी लगा कर मीठा पानी पीने लगा.
ऋतू उर्फ़ हिना बेड के किनारे पर अपनी एक कोहनी की मदद से आधी लेटी हुई बुरी तरह से मचल रही थी…और अचानक वो जोर से चिल्लाई…..आआआआआआआआयीईइ अब्बूऊऊऊउ मैं तो गयीईईईईईईइ अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह
और मैंने और रूबी ने देखा की उसकी चूत से एक फुव्वारा सा फूटा जो लगभग एक फूट ऊपर उछल कर नाजिर के मुंह को पूरा भिगो गया..नाजिर ने अपना बड़ा सा मुंह खोलकर उडती हुई बोछारों को अपने मुंह में लेने की कोशिश की…और अंत में शांत होते ज्वालामुखी के मुंह पर फिर से अपना मुंह लगाकर अन्दर का लावा चूसने लगा..
ऋतू की हालत पस्त हो चुकी थी, वो इस बुरी तरह से आज तक नहीं झड़ी थी.. अब नाजिर ऊपर खड़ा हो गया और ऋतू को टांगो को और चोडा करके खड़ा हो गया.
अपने सामने का नजारा देखकर वो कांप गयी, नाजिर का लंड उसकी चूत के सामने खड़ा हुआ फुफकार रहा था..उस लंड का साइज़ उसके चेहरे से भी बड़ा था.. नाजिर ने अपने लंड को उस छोटी सी चूत के मुहाने पर रखा और एक धक्का मारा.. आआआयीईईईईईईईईइ वो जोर से चिल्लाई..
लंड अन्दर जाने का नाम ही नहीं ले रहा था, लंड ने केवल बाहरी दिवार पर टक्कर मारी थी जिसकी वजह से ऋतू चिल्लाई थी…उसने मेरी तरफ देखा और बोला…”ओये लोंडे..यहाँ आ और मेरी मदद कर..” मैंने ऋतू की तरफ देखा..वो रो रही थी.. मैं उठा और उनके पास जा कर बैठ गया…मैंने देखा धक्के की वजह से ऋतू की चूत के साइड में लाल निशान बन गया है..मैं ऋतू के दर्द को समझ गया…मैंने कांपते हुए हाथो से नाजिर के मोटे लंड को पकड़ा..वो किसी मोटे खीरे जैसा था..और काफी गर्म भी..ये मेरा पहला अवसर था किसी ओर मर्द के लंड को पकड़ने का..मैंने उसे ऋतू की चूत के बिलकुल बीच में रखा..ऋतू ने अपने एक हाथ से मुझे कस कर पकड़ लिया और बोली…
“नहीं आशु…प्लीस…बड़ा दर्द हो रहा है..अंकल को बोलो की वहां ना डाले…” वो मेरी तरफ देखकर गिडगिडा रही थी…
पर मैंने उसकी बात को अनदेखा करते हुए नाजिर के लंड को ऋतू की चूत के बीचो बीच रख दिया और नाजिर को इशारा करके धक्का मारने को बोला…और अगले ही पल ऋतू दर्द से दोहरी हो कर मुझसे बुरी तरह से लिपट गयी… अयीईईईईईईईईईईई मर्र्र्रर्र्र्र गयी…………..अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ऑफ …
उयीईईईईईई मार दालाआआआआअ … मैंने लंड से अपना हाथ हटा लिया…ऋतू बुरी तरह से रो रही थी….मैंने आगे बढकर उसके चेहरे को थमा और उसके होंठो को चूसने लगा…उसके चेहरे पर आये पसीने और आंसुओं की वजह से पूरा चेहरा गीला था, मैंने जब उसके होंठो को चुसना शुरू किया तो सारा खट्टापन मेरे मुंह में जाने लगा पर मैंने चुसना नहीं छोड़ा…थोड़ी देर बाद ऋतू भी मेरे होंठों को चूसने लगी…वो अपने दर्द को भूल सी चुकी थी पर तभी उस कसाई ने एक और शोट मारा और अपना आधे से ज्यादा लंड उसकी चूत में उतार दिया…ऋतू ने मेरे होंठो को छोड़ दिया और फिर से चिल्ला पड़ी…
अयीईईईईईईई मम्मी,.,……मरर गयीई………अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह और फिर तो नाजिर रुका ही नहीं उसने अपना लंड पूरा बाहर खींचा और फिर से अपनी पूरी ताकत लगा कर तेज धक्का मारकर अपना पूरा 9 इंच का मोटा लंड ऋतू की चूत में उतार दिया…ऋतू की आँखों के सामने तारे घूम गए.. उसकी आँखें फ़ैल कर चोडी हो गयी…उसने नीचे झुक कर देखा तो उस दानव का पूरा लंड अपनी छोटी सी चूत में फंसा हुआ देखकर उसकी रुलाई फुट गयी….निकालो इस्से…..बड़ा दर्द हो रहा है…अंकल… प्लीस……. अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह
नाजिर ने अपना लंड बाहर खींच लिया…ऋतू की सांस में सांस आई पर अगले ही पल वो पूरा लंड वापिस अन्दर डाल दिया..और इस तरह उसकी रेल गाडी जो चली फिर तो उसने रुकने का नाम ही नहीं लिया..
मेरी आँखों के सामने मेरी बहन उस कसाई के मोटे लंड से चुद रही थी, उसके मोटे -२ चुचे ऊपर नीचे हर धक्के से इतनी जोर से हिल रहे थे की लगता था की वो उसके बदन से अलग ही हो जायेंगे…बड़े ही तेज धक्के मार रहा था नाजिर..अगले 15 मिनट तक सिर्फ ऋतू की चीखे ही गूँज रही थी उस कमरे में..
अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ऑफ ओफ्फ्फ ओफ्फफ्फ्फ़ अयीईईईईइ म्मम्मम ओईई……..अह्ह्ह्हह्ह
अह्ह्ह अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ओफ्फ्फ्फ़ नहीईई अह्ह्ह्हह्ह हयीईइ हयीईइ ओह ओह ओह ओह ओह ओह …….
ओह माय गोद्द्द्दद्द्द्द…. अह्ह्ह्ह ओह ओह हो हो हो ऊऊओह…….
और धीरे धीरे उसकी चीखें सिस्कारियों में बदलने लगी…. म्म्म्मम्म्म्मम्म अह्ह्ह्ह और तेज मारो प्लीस……अब्बूउ स्स्स्सस्स्स्स और तेज चोदो अपनी हिना को…..अह्ह्ह्हह्ह ,,,,,म्मम्मम्मम्म मजा आ गया……
अब ऋतू की चूत में वो मोटा लंड अपना कमाल दिखा रहा था..उसकी चूत को मोटे लंड के साइज़ ने अपने अन्दर फिट कर लिया था…ऋतू ने मेरे हाथ की उँगलियों को अपने मुंह में डाला और लंड की तरह उन्हें चूसने लगी….म्मम्मम्मम अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ओह याआआआअ म्मम्मम्म …….. चोदो मुझे…….अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह
रूबी भी उठ कर आगे आ गयी और अपने पति को ऋतू की चुदाई करते हुए देखकर, मेरी कमर से अपने मोटे मुम्मे रगड़ने लगी…
उसकी चूत में फिर से खुजली होने लगी थी..उसने आगे हाथ करके मेरे लंड को थाम लिया और हिलाने लगी, मेरा लंड खड़ा होकर ऋतू के पेट को छु रहा था, रूबी के द्वारा हिलाने से मेरे लंड का सुपाड़ा ऋतू के पेट को धक्के मार रहा था.. अह्ह्हह्ह अयीईईई ऋतू चिल्लाती जा रही थी.
मैंने भी अपना एक हाथ पीछे करके रूबी की चूत में अपनी तीन उँगलियाँ एक साथ डाल दी…वो कसमसा गयी और मेरे लंड को और तेजी से हिलाने लगी….मेरा एक हाथ ऋतू के नर्म मुंह में था और दूसरा रूबी की गर्म चूत में. नाजिर तो जैसे पागल ही हो गया इतनी कसी हुई चूत पाकर….
उसके हर धक्के से ऋतू के अस्थि पंजर हिल रहे थे…और अंत में उस कसाई के लंड ने झाड़ना शुरू कर दिया…वो जोर से चिल्लाया..
आआआआआआह्ह्ह ले मेरी बच्ची……मेरी हिना….ले अपने अब्बा का रस….अपनी चूत में…अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह….
ऋतू तो ना जाने कितनी बार झड चुकी थी पर जब अपने अन्दर लावे का तूफ़ान आते देखा तो एक और बार झडती हुई वो चिल्लाने लगी… आआआआआह्ह्ह अब्बूऊऊऊ लऊऊऊ अपना रस अपनी हिना की चूत में……आआआआआआह्ह्ह्ह और तभी मेरे लंड से भी पिचकारियाँ निकालनी शुरू हो गयी और वो नीचे लेटी ऋतू के चेहरे और छाती पर गिरने लगी….आआआआआआह्ह्ह ग्र्रीईईईए ……अम्म्म्मम्म्म्म ……
मैंने अपनी उँगलियाँ रूबी की चूत में फंसा कर उसे उठा सा लिया था…उसकी क्लिट मेरी उँगलियों में दब गयी और उसने भी अपना गरमा गरम पानी मेरे हाथ पर छोड़ दिया..
नाजिर ने अपना लंड बाहर निकाला और उसके निकलते ही ऋतू की चूत में से सफ़ेद पानी लाबकर बाहर की और आने लगा…पूरा बिस्तर गिला हो गया…
फिर हम सब उठे और अपने बदन को साफ़ करके वापिस बेड पर आकर लेट गए..
अपनी इतनी क्रूर चुदाई से ऋतू से चला भी नहीं जा रहा था..उसकी चूत की परतें अभी तक खुली हुई थी…वो वापिस बिस्तर पर आकर लेट गयी..मैंने देखा नाजिर का लंड फिर से अंगडाई लेने लगा है…हम दोनों उस रात वहीँ पर रहे, मैंने रूबी की 4 बार चुदाई करी और नाजिर ने तक़रीबन 6 बार ऋतू को हिना बनाकर चोदा. सुबह तक हम सभी एक ही बिस्तर पर नंगे पड़े हुए सो रहे थे. सबसे पहले मेरी आँख खुली.
नाजिर ने अपना मुंह ऊपर उठाया…और बोला… “मुझे अब्बा बोलो…बेटी…” उसकी बात सुनकर मैं, रूबी और हिना तीनो चोंक गए, मैं समझ गया की जिस तरह रूबी ने मुझे रेहान समझ कर चुदवाई करवाई है उसी तरह से अब नाजिर भी ऋतू को अपनी सगी बेटी हिना समझ कर चोदना चाहता है और वो ऋतू को हिना का रोल प्ले करने के लिए कह रहा है…मजा आएगा..मैंने सोचा..और रूबी की तरफ देखा…वो मेरे मुरझाये हुए लंड से अपनी मोटी गांड चिपकाये लेटी थी..और उनकी बातें सुनकर उसने अपनी मोटी गांड को मेरे लंड पर जोर से दबा दिया…यानी वो भी इस बात को सुनकर उत्तेजित हो रही थी.
“हाआआअन्न अब्बाआआआ ऐसे ही…..चुसो अपनी हिना की चूऊऊऊऊऊत ………आआआआआह्ह्ह ” ऋतू जोर से नाजिर के बाल पकड़कर चिल्लाई…
ऋतू के मुंह से अब्बा शब्द सुनते ही नाजिर के चेहरे पर अजीब तरह का सकून आ गया, उसने अपना मुंह उसकी गीली चूत पर से उठाया और बोला..
“मेरी हिना……मेरी जान……म्मम्मम्मम ” और वापिस उसकी बहती हुई चूत में डुबकी लगा कर मीठा पानी पीने लगा.
ऋतू उर्फ़ हिना बेड के किनारे पर अपनी एक कोहनी की मदद से आधी लेटी हुई बुरी तरह से मचल रही थी…और अचानक वो जोर से चिल्लाई…..आआआआआआआआयीईइ अब्बूऊऊऊउ मैं तो गयीईईईईईईइ अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह
और मैंने और रूबी ने देखा की उसकी चूत से एक फुव्वारा सा फूटा जो लगभग एक फूट ऊपर उछल कर नाजिर के मुंह को पूरा भिगो गया..नाजिर ने अपना बड़ा सा मुंह खोलकर उडती हुई बोछारों को अपने मुंह में लेने की कोशिश की…और अंत में शांत होते ज्वालामुखी के मुंह पर फिर से अपना मुंह लगाकर अन्दर का लावा चूसने लगा..
ऋतू की हालत पस्त हो चुकी थी, वो इस बुरी तरह से आज तक नहीं झड़ी थी.. अब नाजिर ऊपर खड़ा हो गया और ऋतू को टांगो को और चोडा करके खड़ा हो गया.
अपने सामने का नजारा देखकर वो कांप गयी, नाजिर का लंड उसकी चूत के सामने खड़ा हुआ फुफकार रहा था..उस लंड का साइज़ उसके चेहरे से भी बड़ा था.. नाजिर ने अपने लंड को उस छोटी सी चूत के मुहाने पर रखा और एक धक्का मारा.. आआआयीईईईईईईईईइ वो जोर से चिल्लाई..
लंड अन्दर जाने का नाम ही नहीं ले रहा था, लंड ने केवल बाहरी दिवार पर टक्कर मारी थी जिसकी वजह से ऋतू चिल्लाई थी…उसने मेरी तरफ देखा और बोला…”ओये लोंडे..यहाँ आ और मेरी मदद कर..” मैंने ऋतू की तरफ देखा..वो रो रही थी.. मैं उठा और उनके पास जा कर बैठ गया…मैंने देखा धक्के की वजह से ऋतू की चूत के साइड में लाल निशान बन गया है..मैं ऋतू के दर्द को समझ गया…मैंने कांपते हुए हाथो से नाजिर के मोटे लंड को पकड़ा..वो किसी मोटे खीरे जैसा था..और काफी गर्म भी..ये मेरा पहला अवसर था किसी ओर मर्द के लंड को पकड़ने का..मैंने उसे ऋतू की चूत के बिलकुल बीच में रखा..ऋतू ने अपने एक हाथ से मुझे कस कर पकड़ लिया और बोली…
“नहीं आशु…प्लीस…बड़ा दर्द हो रहा है..अंकल को बोलो की वहां ना डाले…” वो मेरी तरफ देखकर गिडगिडा रही थी…
पर मैंने उसकी बात को अनदेखा करते हुए नाजिर के लंड को ऋतू की चूत के बीचो बीच रख दिया और नाजिर को इशारा करके धक्का मारने को बोला…और अगले ही पल ऋतू दर्द से दोहरी हो कर मुझसे बुरी तरह से लिपट गयी… अयीईईईईईईईईईईई मर्र्र्रर्र्र्र गयी…………..अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ऑफ …
उयीईईईईईई मार दालाआआआआअ … मैंने लंड से अपना हाथ हटा लिया…ऋतू बुरी तरह से रो रही थी….मैंने आगे बढकर उसके चेहरे को थमा और उसके होंठो को चूसने लगा…उसके चेहरे पर आये पसीने और आंसुओं की वजह से पूरा चेहरा गीला था, मैंने जब उसके होंठो को चुसना शुरू किया तो सारा खट्टापन मेरे मुंह में जाने लगा पर मैंने चुसना नहीं छोड़ा…थोड़ी देर बाद ऋतू भी मेरे होंठों को चूसने लगी…वो अपने दर्द को भूल सी चुकी थी पर तभी उस कसाई ने एक और शोट मारा और अपना आधे से ज्यादा लंड उसकी चूत में उतार दिया…ऋतू ने मेरे होंठो को छोड़ दिया और फिर से चिल्ला पड़ी…
अयीईईईईईईई मम्मी,.,……मरर गयीई………अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह और फिर तो नाजिर रुका ही नहीं उसने अपना लंड पूरा बाहर खींचा और फिर से अपनी पूरी ताकत लगा कर तेज धक्का मारकर अपना पूरा 9 इंच का मोटा लंड ऋतू की चूत में उतार दिया…ऋतू की आँखों के सामने तारे घूम गए.. उसकी आँखें फ़ैल कर चोडी हो गयी…उसने नीचे झुक कर देखा तो उस दानव का पूरा लंड अपनी छोटी सी चूत में फंसा हुआ देखकर उसकी रुलाई फुट गयी….निकालो इस्से…..बड़ा दर्द हो रहा है…अंकल… प्लीस……. अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह
नाजिर ने अपना लंड बाहर खींच लिया…ऋतू की सांस में सांस आई पर अगले ही पल वो पूरा लंड वापिस अन्दर डाल दिया..और इस तरह उसकी रेल गाडी जो चली फिर तो उसने रुकने का नाम ही नहीं लिया..
मेरी आँखों के सामने मेरी बहन उस कसाई के मोटे लंड से चुद रही थी, उसके मोटे -२ चुचे ऊपर नीचे हर धक्के से इतनी जोर से हिल रहे थे की लगता था की वो उसके बदन से अलग ही हो जायेंगे…बड़े ही तेज धक्के मार रहा था नाजिर..अगले 15 मिनट तक सिर्फ ऋतू की चीखे ही गूँज रही थी उस कमरे में..
अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ऑफ ओफ्फ्फ ओफ्फफ्फ्फ़ अयीईईईईइ म्मम्मम ओईई……..अह्ह्ह्हह्ह
अह्ह्ह अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ओफ्फ्फ्फ़ नहीईई अह्ह्ह्हह्ह हयीईइ हयीईइ ओह ओह ओह ओह ओह ओह …….
ओह माय गोद्द्द्दद्द्द्द…. अह्ह्ह्ह ओह ओह हो हो हो ऊऊओह…….
और धीरे धीरे उसकी चीखें सिस्कारियों में बदलने लगी…. म्म्म्मम्म्म्मम्म अह्ह्ह्ह और तेज मारो प्लीस……अब्बूउ स्स्स्सस्स्स्स और तेज चोदो अपनी हिना को…..अह्ह्ह्हह्ह ,,,,,म्मम्मम्मम्म मजा आ गया……
अब ऋतू की चूत में वो मोटा लंड अपना कमाल दिखा रहा था..उसकी चूत को मोटे लंड के साइज़ ने अपने अन्दर फिट कर लिया था…ऋतू ने मेरे हाथ की उँगलियों को अपने मुंह में डाला और लंड की तरह उन्हें चूसने लगी….म्मम्मम्मम अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ओह याआआआअ म्मम्मम्म …….. चोदो मुझे…….अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह
रूबी भी उठ कर आगे आ गयी और अपने पति को ऋतू की चुदाई करते हुए देखकर, मेरी कमर से अपने मोटे मुम्मे रगड़ने लगी…
उसकी चूत में फिर से खुजली होने लगी थी..उसने आगे हाथ करके मेरे लंड को थाम लिया और हिलाने लगी, मेरा लंड खड़ा होकर ऋतू के पेट को छु रहा था, रूबी के द्वारा हिलाने से मेरे लंड का सुपाड़ा ऋतू के पेट को धक्के मार रहा था.. अह्ह्हह्ह अयीईईई ऋतू चिल्लाती जा रही थी.
मैंने भी अपना एक हाथ पीछे करके रूबी की चूत में अपनी तीन उँगलियाँ एक साथ डाल दी…वो कसमसा गयी और मेरे लंड को और तेजी से हिलाने लगी….मेरा एक हाथ ऋतू के नर्म मुंह में था और दूसरा रूबी की गर्म चूत में. नाजिर तो जैसे पागल ही हो गया इतनी कसी हुई चूत पाकर….
उसके हर धक्के से ऋतू के अस्थि पंजर हिल रहे थे…और अंत में उस कसाई के लंड ने झाड़ना शुरू कर दिया…वो जोर से चिल्लाया..
आआआआआआह्ह्ह ले मेरी बच्ची……मेरी हिना….ले अपने अब्बा का रस….अपनी चूत में…अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह….
ऋतू तो ना जाने कितनी बार झड चुकी थी पर जब अपने अन्दर लावे का तूफ़ान आते देखा तो एक और बार झडती हुई वो चिल्लाने लगी… आआआआआह्ह्ह अब्बूऊऊऊ लऊऊऊ अपना रस अपनी हिना की चूत में……आआआआआआह्ह्ह्ह और तभी मेरे लंड से भी पिचकारियाँ निकालनी शुरू हो गयी और वो नीचे लेटी ऋतू के चेहरे और छाती पर गिरने लगी….आआआआआआह्ह्ह ग्र्रीईईईए ……अम्म्म्मम्म्म्म ……
मैंने अपनी उँगलियाँ रूबी की चूत में फंसा कर उसे उठा सा लिया था…उसकी क्लिट मेरी उँगलियों में दब गयी और उसने भी अपना गरमा गरम पानी मेरे हाथ पर छोड़ दिया..
नाजिर ने अपना लंड बाहर निकाला और उसके निकलते ही ऋतू की चूत में से सफ़ेद पानी लाबकर बाहर की और आने लगा…पूरा बिस्तर गिला हो गया…
फिर हम सब उठे और अपने बदन को साफ़ करके वापिस बेड पर आकर लेट गए..
अपनी इतनी क्रूर चुदाई से ऋतू से चला भी नहीं जा रहा था..उसकी चूत की परतें अभी तक खुली हुई थी…वो वापिस बिस्तर पर आकर लेट गयी..मैंने देखा नाजिर का लंड फिर से अंगडाई लेने लगा है…हम दोनों उस रात वहीँ पर रहे, मैंने रूबी की 4 बार चुदाई करी और नाजिर ने तक़रीबन 6 बार ऋतू को हिना बनाकर चोदा. सुबह तक हम सभी एक ही बिस्तर पर नंगे पड़े हुए सो रहे थे. सबसे पहले मेरी आँख खुली.

