वापिस पहुंचकर हम सीधा मम्मी पापा के कमरे में गए, और उन्हें रात को पंकज और मंजू के काटेज में जाने को कहा, ज्यादा बात न बताते हुए सिर्फ ये कहा की वो एन्जॉय करेंगे…उनकी उत्सुकतता बड़ गयी, और उन्होंने शाम को वहां जाने का वादा किया.
शाम को जब प्रोग्राम के दोरान हम सभी लोग मिले और जल्दी से बाहर निकल कर एक जगह इकठ्ठा हो गए.
मैं, नेहा, ऋतू एक तरफ थे और सोनी और मोनी दूसरी तरफ. सोनी ने जींस के ऊपर स्वेटर पहना हुआ था और मोनी आज बड़ी ही सेक्सी शोर्ट स्कर्ट पहन कर आई थी, मेरा लंड तो उसको देखते ही खड़ा हो गया था.
रेहान और हिना आज नहीं आये थे, सुबह की चुदाई से हिना का बुरा हाल हो गया था, इसलिए रेहान भी उसके साथ अपने कॉटेज में ही रुका हुआ था.
हम सभी ने एक दुसरे को पूरा प्लान समझाया और सोनी-मोनी के काटेज की तरफ चल पड़े, वहां जाकर देखा की आज फिर सिर्फ एक ही कमरे की बत्ती जल रही है, बीच वाले की, हम सभी चुपचाप उसके साथ वाले कमरे में, जो की सोनी-मोनी का कमरा था, में घुस गए.
मैंने जाते ही कमरे में लटका हुआ शीशा हटाया और अन्दर झाँका, पंकज और मंजू के साथ अपने मम्मी और पापा को देखकर मैं मुस्कुरा दिया, उनके साथ एक और जोड़ा भी था, टोटल 6 लोग थे कमरे में, सभी नंगे होकर एक दुसरे के लंड और चूत चूसने में लगे हुए थे, मैंने जगह बनाकर सोनी-मोनी को भी अन्दर झाँकने को कहा.
थोड़ी देर देखने के बाद सोनी मेरी तरफ घूमी और बोली “तुम सही कह रहे थे, यहाँ सभी बड़े लोग ग्रुप सेक्स और वाईफ स्वेपिंग के लिए आते हैं, आज फिर यहाँ पर नयी पार्टी चल रही है..” उसने कबूल करते हुए कहा.
“हाँ और इसी में ही मजा है..” ऋतू ने आगे आकर उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा. “तुम्हे इसका बुरा नहीं लगना चाहिए”
“लेकिन ये बुरा है..” सोनी ने जोर देते हुए कहा “इनको सिर्फ एक दुसरे के साथ ही ये सब करना चाहिए”
“ये तो अपने-२ देखने का नजरिया है” मैंने सोनी से कहा “और दूसरा नजरिया यहाँ है” मैंने अन्दर इशारा करते हुए कहा. “ये लोग एक दुसरे को धोखा नहीं दे रहे है और ना ही कोई एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर चला रहे हैं, वो सिर्फ सेक्स कर रहे है और मजे ले रहे हैं…बस.”
“लेकिन हमारे बारे में क्या…मुझे तो इन सभी बातों से आघात लगा है” उसने धीमी आवाज में कहा.
“लेकिन क्यों????” मैंने थोडा तेज आवाज में कहा “क्या उन्होंने तुम्हारे साथ कोई बुरा बर्ताव किया, तुम्हारा ख्याल नहीं रखा, या उन्होंने तुम्हे अपने साथ मिलाने की कोशिश की..बोलो ..”
“नहीं..ऐसा कुछ भी नहीं हुआ..” उसने कहा
“तो फिर क्या प्रॉब्लम है…just relax …अब हमारा टर्न है मौज लेने का” मैंने उसकी आँखों में देखते हुए कहा.
“ठीक है…” उसने एक गहरी सांस ली और दिवार से घूम कर दूसरी तरफ सर कर लिया. “अब हमें क्या करना है”
“वेल …सबसे पहले तो हम सभी को अपने कपडे उतार देने चाहिए..” ऋतू ने गहरी मुस्कान के साथ कहा.
ये सुनते ही मोनी ने एक झटके से अपनी शोर्ट स्कर्ट उतार दी, अन्दर उसने पेंटी नहीं पहनी हुई थी, और अपनी शर्ट भी उतार कर नंगी हो गयी, उसके छोटे-२ संतरे जैसे चुचे तन कर खड़े हुए थे और उनपर भूरे रंग के छोटे-२ निप्प्ल्स.. और उसकी चूत पर अभी बाल आने शुरू ही हुए थे, गोल्डेन कलर के बाल उसकी चूत को छिपाने में असमर्थ थे, उसकी चूत अपने रस में सनी हुई लसलसा कर चमक रही थी.
“क्या तुम लोग अपने कपडे नहीं उतारोगे…” उसने मुझे अपनी तरफ घूरते हुए देखकर कहा..
“हाँ हाँ…क्यों नहीं..” और मैंने, नेहा और ऋतू ने भी जल्दी से अपने कपडे उतार डाले और नंगे हो गए.
“अरे वाह …तुम्हारा लंड तो काफी बड़ा और सुन्दर है….क्या मैं भी इसको अपने मुंह में लेकर चूस सकती हूँ जैसे मेरी माँ तुम्हारे पापा का चूस रही है..” उसने लार टपकाते हुए कहा.
“हाँ क्यों नहीं…चूस लो..जैसा तुम चाहो ” ऋतू ने मोनी के कंधे पर हाथ रखकर उसे नीचे मेरे लंड के सामने बिठाया…”और तुम क्या अपने कपडे नहीं उतरोगी सोनी ?” उसने सोनी से पूछा जो कोने में खड़ी हुई सारा नजारा देख रही थी.
“ह्म्म्म …मुझे थोडा समय दो..तुम लोग करो…मैं थोड़ी देर मैं उतार दूंगी…” उसने धीरे से कहा.
“ठीक है…जैसा तुम चाहो…” ऋतू ने उससे कहा और फिर मेरा खड़ा हुआ लंड पकड़कर नीचे बैठी मोनी के मुंह के पास लेजाकर बोली “ये लो मोनी…चुसे इसे..”
मोनी ने मेरे लंड पर अपने नन्हे हाथ रखकर उसे जोर से पकड़ा…उसके हाथों का सपर्श पाकर मैं सिहर उठा..वो बड़े प्यार से उसे देख रही थी, थोड़ी देर मसलने और सहलाने के बाद वो बोली “वाह ये कितना मुलायम और गर्म है…”
“हाँ…चलो अब चुसो इसे..” ऋतू भी नीचे अपने पंजो के बल बैठ गयी और अपनी चूत में उंगलियाँ डालकर मसलती हुई मोनी से बोली.
सोनी भी थोडा और नजदीक आकर खड़ी हो गयी जहाँ से उसे लंड चूसती उसकी छोटी बहन साफ़ दिखाई दे…मोनी ने अपना छोटा सा मुंह खोला और अपनी जीभ बाहर निकाल कर मेरे लंड को उसपर विराजमान कराया और फिर जीभ के साथ-२ मेरे लंड को भी अपने मुंह में डाल लिया और चूसने लगी..उसके गर्म मुंह में जाते ही मेरे मुंह से एक लम्बी सिसकारी निकल गयी, मेरी टाँगे अपने आप मूढ़ गयी आआआआआआआआआआआअह्ह sssssssssssssssss …. म्म्मम्म्म्मम्म .
मेरे लंड के चारों तरफ उसके गुलाबी होंठ कस गए और वो उसे बड़े मजे से चूसने लगी…थोड़ी देर चूसने के बाद उसने लंड बाहर निकाला और अपनी बड़ी बहन सोनी की तरफ देखते हुए बोली “दीदी…ये तो बड़ा ही टेस्टी है..तुम भी ट्राई करो..”
सोनी का चेहरा लाल हो गया अपनी बहन को मेरा लंड चूसते हुए देखकर…वो अन्दर से तो चाहती थी पर अपने आप को रोक के खड़ी थी..सोनी फिर से मेरे लंड को बड़ी तेजी से चूसने लगी…नेहा अब मोनी के पीछे जाकर बैठ गयी और उसके स्तन दबाने लगी, उसके निप्प्ल्स को अपनी उँगलियों में दबाकर उन्हें और फुलाने लगी..ऋतू उठकर सोनी के पास गयी और उसकी पीठ से चिपककर अपना सर उसके कंधे पर रख दिया और अपने हाथ उसके पेट पर…”मैं जानती हूँ की तुम भी ये सब करना चाहती हो..शरमाओ मत.. मैं तुम्हारी मदद करती हूँ…” और उसने उसके स्वेटर को नीचे से पकड़कर ऊपर उठाना शुरू कर दिया..
सोनी ने शर्माते हुए अपनी स्वीकृति दे दी और ऋतू उसके कपडे एक-२ करके उतारती चली गयी और थोड़ी ही देर में सोनी भी हमारे सामने नंगी खड़ी थी.
मैंने अपनी आँखें खोलकर देखा और उसके सोंदर्य को देखता ही रह गया, उसकी कमर जितनी पतली थी उसके चुचे और कुल्हे उतने ही मोटे…उसके गुदाज जिस्म को देखकर मेरे मुंह में पानी आ गया…वो अपने हाथों से अपनी चूत और चुचे को छिपाने की कोशिश कर रही थी..ऋतू उसके हाथ बार-२ हटा कर उसके अंग उजागर कर रही थी…वो बड़ी ही शर्मीली थी जबकि उसकी छोटी बहन उतनी ही खुले विचारों वाली..तभी तो वो बड़े मजे से मेरा लंड चूसने में लगी हुई थी.नेहा भी अब मेरे सामने बैठ गयी थी और बारी-२ से मोनी और नेहा मेरा लंड चूसने लगी.
“तुम बहुत सुंदर हो सोनी…तुम्हारी ब्रेस्ट काफी सुन्दर हैं..” ऋतू ने उसके चूचो को अपने हाथों में लेकर हलके से दबाते हुए कहा.
ऋतू के द्वारा उसके निप्प्ल्स पर हाथ लगते ही उसका शरीर कांपने लगा, उसने आनंद के मारे अपनी आँखें बंद कर ली, ऋतू उसके सामने आई और उसके गले लग कर अपना एक हाथ उसकी गांड पर लेजाकर दबा दिया, दुसरे हाथ से वो उसके निप्पल को मसलती रही. सोनी ने अपने शरीर को ऋतू के सामने ढीला छोड़ दिया.
पर थोड़ी ही देर में उसका शरीर अकड़ गया क्योंकि ऋतू ने अपना सर नीचे करके उसके निप्पल को अपने मुंह में लेकर चुसना शुरू कर दिया, उसके पुरे शरीर में करंट दौड़ गया, वो अपने हाथों से ऋतू के सर को नीचे की तरफ दबा रही थी, ऋतू तो निप्पल चूसने में माहिर थी, वो अपने दांतों और जीभ का उपयोग कर रही थी और सोनी खड़े हुए तड़प रही थी. जल्दी ही उसकी तड़प एक चीख में बदल गयी जब ऋतू ने अपना एक हाथ उसकी चूत पर रख दिया और जोर से दबा दिया…आआआआआआआआआआआआआआअह्ह्ह और उसकी चीख भी पूरी ना होने पायी थी की ऋतू ने अपनी एक ऊँगली उसकी गीली चूत के अन्दर डाल दी..सोनी की आवाज गले में ही घुट कर रह गयी..
फिर ऋतू ने उसके निप्पल को चुसना छोड़ दिया और अपना हाथ भी उसकी चूत से हटा लिया और उससे बोली “तुम्हारा शरीर सच में काफी सुंदर है और टेस्टी भी..” और उसने सोनी की चूत में डूबी वो ऊँगली अपने मुंह में डाल ली.
“ये तो सही में मुझे अच्छा लगा…” सोनी ने शर्माते हुए कहा.
“तुम अब मेरे साथ ये सब क्यों नहीं करती…” ऋतू ने सोनी से कहा.
सोनी की आँखें चोडी हो गयी ये सुनकर…पर फिर उसने आगे बढकर ऋतू के दांये स्तन को अपने हाथ में पकड़ा और उसे उठाकर और दबाकर उसे गौर से देखने लगी, वो उसके स्तन से थोडा अलग था, उसने अपने दोनों हाथों से ऋतू के चूचो को दबाना शुरू कर दिया, और उसके निप्प्ल्स को भी बीच -२ में उमेठने लगी, और फिर उसने अपना सर नीचे करके उसके एक निप्पल को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी किसी प्यासी बच्ची की तरह..ऋतू ने अपनी आँखें बंद करके अपना सर ऊपर उठा लिया, उसे बड़ा मजा आ रहा था, उसकी एक लम्बी सिसकारी निकल गयी.
म्म्मम्म्म्मम्म स्स्सस्स्स्सस्स्स………sssssssssssssssssssssssssssssssssssssssssssssssssss
ऋतू ने उसके सर को पकड़कर उसे अपने चुचे पर घुमाना शुरू कर दिया, सोनी ने अपनी बाहें ऋतू की कमर के चारों तरफ बाँध दी और चप -२ की आवाजों के साथ उसका दूध पीने लगी..धीरे-२ सोनी ने अपना हाथ नीचे ले जाकर ऋतू की चूत के ऊपर फिराना शुरू कर दिया, उसके ठन्डे हाथों के स्पर्श से उसका शरीर झटके मार रहा था, सोनी ने ऋतू की चूत के ऊपर हाथ रखकर थोड़ी देर उसे दबाया और फिर अपनी बीच वाली ऊँगली उसकी चूत के अन्दर डाल दी..और फिर एक और ऊँगली अन्दर डाल कर उसकी क्लिट पकड़कर उसे धीरे २ मसलने लगी…. आआआआआआआआआह्ह्ह म्म्मम्म्म्मम्म……
“बड़ा अच्छा लग रहा है सोनी…बस ऐसे ही करती रहोऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ.” ऋतू ने आँखें बंद रखते हुए सोनी से कहा.
अपनी तारीफ़ सुनकर सोनी थोडा रिलेक्स हुई और मजे ले लेकर उसके निप्प्ल्स को चुस्ती हुई उसकी चूत को अपनी उँगलियों से चोदने लगी.
मेरे लंड का भी बुरा हाल था, दो-२ गर्म लड़कियां मेरा लंड चूस रही थी, मैंने मोनी के मुंह से अपना लंड बाहर निकाला और उसे खड़ा कर दिया और कहा “तुम तो सच में काफी अच्छे से चुस्ती हो..मजा आ गया… क्या तुम्हे मजा आया ?” ये कहकर मैंने उसके होंठो को चूम लिया..
“हाँ बड़ा मजा आया…मन कर रहा है की तुम्हारा लंड मेरे मुंह में ही पड़ा रहे और मैं इसे चुस्ती रहूँ …क्या तुम भी मेरी चूत को चूस सकते हो…जैसे तुम्हारी मम्मी की मेरे पापा चूस रहे हैं…” उसने मुझे वापिस चुमते हुए कहा.
“बिलकुल चूस सकता हूँ…क्या तुम वहां देखते हुए अपनी चूत चुस्वाना चाहती हो…” मैंने शीशे वाली जगह की तरफ इशारा किया.
“हाँ हाँ बिल्कुल…” उसने लगभग उछलते हुए कहा..
चलो फिर….और मैं मोनी को उस शीशे वाली जगह के पास ले गया.
मैं मोनी को लेकर दीवार के पास गया और अपनी पीठ दीवार पर लगाकर ऊपर मुंह करके बैठ गया, मोनी मेरे दोनों तरफ टाँगे करके खड़े हो गयी और दुसरे कमरे में देखने लगी, मेरी नजरों के सामने अब दुनिया की सबसे छोटी चूत थी, अनखुली, गुलाबी पंखड़ियों वाली, हलके गोल्डन कलर के बाल, और अपने ही रस में नहाकर चमकती हुई चूत..मोनी ने अपनी वासना भरी नजरों से मुझे देखा और मैंने अपनी जीभ निकल कर उसकी पंखुड़ियों को सहलाया..वो सिहर उठी…. स्स्सस्स्स्सस्स्स……बड़ी मुश्किल से उसने अपनी चीख रोकी, अपने होंठो को दांतों तले दबाया और मेरे सर पर हाथ फेरने लगी.
मैंने उसकी चूत को अपनी उँगलियों से फेलाया और अन्दर से आती भीनी खुशबु को सूंघता हुआ अपना मुंह उसपर टिका दिया…उसका बैलेंस बिगड़ गया और वो मेरे मुंह पर बैठ सी गयी, उसकी टाँगे कांप रही थी, उसका वजन ज्यादा नहीं था, इसलिए मैंने उसकी जांघो को पकड़ कर लगभग हवा में उठा रखा था और उसकी चूत को अपने मुंह से चोद रहा था, उसकी हालत देखकर लगता था जैसे वो मरने वाली है..बड़े अजीब से मुंह बना रही थी वो, शायद अपनी सिस्कारियों को रोकने के चक्कर में और अन्दर से आ रही मजे की लहरों को रोकने में असमर्थ हो रही थी, मैंने उसकी मीठी चूत को लप लपाकर चुसना और पीना शुरू कर दिया, वो अपने कूल्हों को बड़ी तेजी से आगे पीछे करके मेरे मुंह पर रगड़ रही थी, उसके हलके बाल मेरे उपरी होंठो पर चुभ से रहे थे, उसके दोनों हाथों ने मेरे बालों को बड़ी जोर से पकड़ा हुआ था.
मेरे मुंह की तरफ ध्यान रखने से वो दुसरे कमरे में नहीं देख पा रही थी, पर जब उसकी नजर वहां गयी वो वहां का नजारा देख कर दंग रह गयी, उसकी माँ मंजू कुतिया वाले पोस में बेड पर थी, उसके पीछे से मेरे पापा उसकी गांड मार रहे थे, और नीचे से उसकी चूत को वो नए वाले अंकल …और आगे से उसके पापा का लंड था उसकी माँ के मुंह में, अपनी माँ के सभी छेदों को चुदते हुए देखकर थोड़ी देर के लिए वो अपनी चूत पर मेरे हमले को लगभग भूल सी गयी, अपनी माँ की कुशलता देखकर उसकी छाती गर्व से और मोटी हो गयी…
इसी बीच, ऋतू जो खड़े होकर अपनी चूत नीचे बैठी हुई सोनी से चटवा रही थी, उसने पीछे हटना शुरू किया और बेड के किनारे पर जाकर उसपर लेट गयी, सोनी उसकी चूत को चूमती हुई ऊपर तक आई और ऋतू ने उसके होंठो को जकड कर अपनी चूत का रस उसके मुंह से वापिस पीना शुरू कर दिया, और फिर उसने सोनी को नीचे किया और खुद उसके पेट पर चढ़ बैठी..ऋतू ने अपना मुंह नीचे करके उसके निप्पल को अपने मुंह में दबाकर काट लिया…वो चीख पड़ी.. उयीईईईईइ धेरीईईईईईई … अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह पर फिर वोही चीख धीरे-२ उसकी सिस्कारियों में बदल गयी,….वो आँखें बंद किये ऋतू के सर को पकडे हलके से मुस्कुराते हुए बेड पर लेटी मचल सी रही थी..
थोड़ी देर उसके तने हुए निप्पल को चुबलाने के बाद ऋतू ने दक्षिण की तरफ जाना शुरू किया, उसके गुदाज पेट को चुमते हुए उसकी चूत के ऊपर जाकर वो उसकी चूत को निहारने लगी, फूली हुई चूत को देखते ही ऋतू के मुंह में पानी सा आ गया और उसने अपनी लम्बी जीभ निकाली और टूट पड़ी सोनी की चूत पर.. आआआआआआआआआआआआअह्ह्ह एक लम्बी सिसकारी फिर से सोनी के मुंह से निकल गयी, ऋतू बड़े मजे ले लेकर उसकी चूत का रस पी रही थी, थोड़ी देर बाद वो ऊपर उठी और बोली ” सोनी…तुम्हारी चूत तो बड़ी टेस्टी और मीठी है…मजा आ गया सच में…”
“मुझे भी ऐसा एहसास आज तक नहीं हुआ…” सोनी ने लम्बी साँसे लेते हुए कहा.
“उम्म्म्मम्म…” और ऋतू ने फिर से अपनी जीभ उसकी चूत में घुसा दी.
मेरी जीभ भी अब काफी अन्दर तक जा रही थी मोनी की चूत में..मैंने अपने हाथों को धीरे-२ नीचे करना शुरू किया और मोनी का पेट और छोटे स्तन मेरे मुंह के आगे से होते हुए नीचे की तरफ जाने लगे, अंत में उसकी चूत मेरे खड़े हुए लंड के बिलकुल ऊपर थी…उसकी छाती ऊपर नीचे हो रही थी आने वाले पलों के बारे में सोचकर…उसने अपने पंजो के बल अपना आधे से ज्यादा वजन रोका हुआ था, बाकी मैंने उसकी जांघो को पकड़कर….मेरा लंड उसकी चूत के लिप्स के बीच में था, अचानक मैंने अपने हाथों को उसकी जांघो से हटा लिया…उसे इसकी जरा भी उम्मीद नहीं थी… “ओह्ह्हह्ह ये क्याआआआअ ……” और वो अपनी चूत समेत मेरे लंड के ऊपर बैठती चली गयी…मेरा लंड उसकी गर्म चूत में किसी लोहे के सरिये की तरह जा धंसा…..उसके गले से एक घुटी हुई सी चीख निकली. .. आआआयीईईईईईईईइ …… अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह , वो झ्यादा न चिल्लाये इसलिए मैंने आगे बढकर उसके होंठो को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगा….उसकी सील टूट चुकी थी, गर्म खून बहकर मेरे लंड को गिला कर रहा था….उसकी अंकों से आंसू बह निकले मेरा मोटा लंड लेकर..वो थोड़ी देर तक ऐसे ही बैठी रही और जब उसका शरीर कांपना बंद हुआ तो उसने अपनी आँखें खोली और बोली “अरे….तुमने तो मुझे मार ही डाला….ऐसा भी कोई करता है क्या…” और उसने प्यार से मेरे सीने पर मुक्का मारा…
मैं हंस दिया और उसके गोल कुल्हे उठाकर थोडा ऊपर किया और फिर नीचे….ऐसा 7 -8 बार करने के बाद उसे भी मजा आने लगा और वो फिर से अपने पंजो के बल बैठकर अपनी चूत को मेरे लंड के उपर कूटने लगी, उसकी चूचियां मेरे मुंह के आगे उछल रही थी, मैंने उन्हें मुंह में लेकर चुसना शुरू किया, मेरे मुंह लगाने से उसका उछलना बंद हो गया इसलिए वो अपनी चूत को मेरे लंड पर गोल चक्की की तरह घुमाने लगी, उसकी चूत की गर्मी से मेरा बुरा हाल हो रहा था, मेरा लंड इतनी गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पाया और मैंने उसकी चूत के अन्दर अपने वीर्य की पिचकारियाँ छोडनी शुरू कर दी…वो भी अपने अन्दर गर्मी पाकर झटके खाने लगी और झड़ते हुए मेरे होंठो को बुरी तरह से चूसने और काटने लगी..
आआआआआआआआआअह्ह्ह्ह मैं तो गयीईईईईईईईईईईईईई म्म्म्मम्म्म्मम्म …. मजा आ गयाआआआआआआआअ………वाउ ………………………वो बड़ी खुश लग रही थी.
उधर सोनी भी अपने अंतिम पड़ाव पर थी, ऋतू ने उसकी गांड में एक ऊँगली क्या डाली उसकी चूत से गर्म पानी का फव्वारा फुट पड़ा..आआआआआआआआआआअह्ह्ह्ह मर्र्र्रर्र्र्रर गयीईईईईईईईईईईईईई म्म्म्मम्म्म्मम्म …..
ऋतू ने सारा गर्म पानी पी लिया..
मैंने छोटी की चूत फाड़कर उसे झाड दिया और ऋतू ने बड़ी की चूत चाटकर…
मेरी गोद में थोड़ी देर तक बैठने के बाद मोनी उठी और उसकी चूत से सारा खून मिला रस मेरे पेट पर गिरने लगा, उसने कपडे से सारा खून और माल साफ़ किया और पलंग पर जाकर लेट गयी… मैं भी उसकी बगल में जाकर लेट गया.
हम दोनों अब सोनी को ऋतू की चूत चाटते हुए देख रहे थे..मोनी मेरे कंधे पर सर रखे अपनी बहन को ऋतू की चूत चाटते हुए देख रही थी…उसका एक हाथ मेरे लंड को सहला रहा था…ऋतू भी काफी देर से गरम हो कर तड़प रही थी इसलिए उसने झड़ने में ज्यादा टाइम नहीं लिया और उसका भी रस बाहर आने लगा, सोनी किसी कुशल चूत चाटने वाली की तरह उसका सारा रस पी गयी…मैंने गौर किया की ऋतू का रस चाटते हुए उसका एक हाथ अपनी चूत को रगड़ रहा था…यानी वो फिर से गरम हो रही थी…उसकी कसी हुई चूत देखकर मेरे लंड ने फिर से अंगडाई लेनी शुरू कर दी..मेरी बगल में लेटी हुई मोनी समझ गयी की अब उसकी बहन की चुदने की बारी है..
नेहा जो बड़ी देर से अपनी चूत में ऊँगली डाले और दुसरो की चूत चाटकर काम चला रही थी, उठकर मेरे पास आई और मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी..मैंने उसके सर पर हाथ फेरा जैसे मेरी पालतू कुतिया हो…वो अपनी मोटे-२ आँखों से मुझे देखते हुए मेरा लंड मुंह में डाले मुस्कुराती हुई लंड चूसने लगी, वो भी अब मेरी पालतू जैसी बर्ताव कर रही थी और उसने अपनी मोती गांड हवा में उठाकर हिलाना शुरू कर दिया, मेरे मन में एक विचार आया और मैंने कमरे में चरों तरफ देखा और कोने में पड़े एक दुपट्टे को उठा लिया उसे लपेट कर लम्बा कर दिया और उसका एक सिरा नेहा की गांड के छेद में डाल दिया..अब ऐसा लग रहा था की वो दुपट्टा उसकी दुम है..उसे कपडा अपनी गांड में लेने में थोड़ी तकलीफ हुई पर फिर एडजस्ट करने के बाद उसे भी मजे आने लगे.
मेरा लंड अब उसके मुंह में फूलकर फिर से अपनी औकात पर आ गया था.
मेरे पास लेटी मोनी उठ कर अपनी बहन सोनी के पास गयी जो ऋतू की चूत चाटने में व्यस्त थी और उसके पीछे पहुँच कर उसकी गांड में अपना मुंह लगा कर पीछे से उसकी चूत चूसने लगी, पीछे मुड़कर जब सोनी ने देखा की उसकी सगी बहन ही उसकी चूत चूस रही है तो उसके मुंह से एक लम्बी सिसकारी निकल गयी…आआआआआआआआआआआआअह
अब वो अपनी मोटी गांड मटकाते हुए मोनी से अपनी चूत चटवा रही थी और आगे से अपनी जीभ निकाल कर मेरी बहन की चूत भी चाट रही थी.
मेरा लंड अभी-२ झाडा था इसलिए मैं जानता था की अगली बार मैं ज्यादा देर तक चुदाई कर सकता हूँ, इसलिए मैंने बेचारी नेहा की चूत का भी उद्धार करने की सोची और उसके मुंह से लंड निकाल कर उसे कुतिया वाले पोसे में आने को कहा…वो ख़ुशी-२ अपने पैर और टांगो के बल खड़ी हो कर अपनी दुम हिलाने लगी.
मैंने उसकी मोटी गांड को एक जोरदार चांटा लगाया..उसके सफ़ेद कुल्हे पर मेरे पंजे का निशान जम सा गया. वो तड़प उठी..अयीईईईईईईईईईईईईईइ ये क्याआआआआआआअ भैईईईईईईई याआआआआआ…. फिर मैंने वो दुपट्टा उसकी गांड में और अन्दर तक ठूस दिया, थोडा खींचा, वो थोडा कुनमुनाई, फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत के ऊपर रखा और उस दुपट्टे को अपने हाथों से पकड़ा और एक तेज धक्का उसकी चूत में लगाया… अपनी गांड में फंसे कपडे के खिंचाव से और अपनी चूत में आते मेरे लंड के दबाव से उसकी चीख निकल गयी. आआआआआआआआआआआह्ह्ह्ह ऊऊऊऊऊऊऊऊओह ….. धीईईईरे ……. अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह…
अपना लंड उसकी चूत के अन्दर तक डालने के बाद मैंने धीरे-२ धक्के लगाने शुरू किये… मेरे हर धक्के से दुपट्टा थोडा-२ करके बाहर आ रहा था…मेरे धक्को की स्पीड बदती जा रही थी… अह अह अ हः अह अ ह की आवाजें गूंज रही थी कमरे में, नेहा को एक साथ अपनी चूत और गांड से आती झनझनाहट अजीब सा मजा दे रही थी, तभी एक झटके से वो दुपट्टा बाहर निकल गया…वो चिल्लाई….डालो फिर से उसे अन्दर……प्लीस ……मैंने अगला हिस्सा थोडा और मोटा किया और उसकी गांड के अन्दर धकेल दिया..मोटाई अधिक होने की वजह से अब उसे तकलीफ हुई आआआआआआआआयीईईईईईईईईईईइ थोडा धीरे…………….भैयाआआआआआआ …….मैंने उस पूंछ वाली कुतिया को फिर से चोदना शुरू कर दिया….मैं बोला….तू मेरी कुतिया है…..साली रंडी….तेरी माँ की चूत….कुतिया कहीं की….मेरे लंड को रोज अपनी चूत में और गांड में लिया कर..समझी रांड….. ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह
वो भी चिल्लाई….हाँ भैयाआआआआआआ मैं आपकी पालतू कुतिया हूँ….मेरी चूत और गांड आपकी है…जब मर्जी मार लिया करो…..आआआआआआअह्ह्ह्ह मरो अपनी रांड बहन की चूत…..मारो प्लीस…..मेरा लंड अभी काफी दूर तक जा सकता था…पर नेहा काफी देर से अपनी चूत में रस का सेलाब लिए घूम रही थी इसलिए उससे ज्यादा बर्दाश्त नहीं हुआ और वो मेरे लंड पर झड़ने लगी..आआआआआआआआआआआआअह्ह भैयाआआआआआअ मैं तो गयीईईईईईईईईईई ……..
मैंने उसकी चूत में से रस से भीगा लंड बाहर निकाल लिया, वो दुपट्टा अभी भी उसकी गांड में फंसा हुआ था.
फिर मैंने इशारे से मोनी को पीछे हटने को कहा..वो समझ गयी की अब उसकी बहन चुदेगी..मैंने उसकी चूत में पीछे से अपना लंड लगाया वो कुछ समझ पाती इससे पहले ही मैंने एक तेज धक्का मारकर अपना आधे से ज्यादा लंड उतार दिया सोनी की चूत में….
वो चीख पड़ी. आआआआआआआआआअयीईईईईईईईईई पर तभी आगे लेती ऋतू ने उसका मुंह अपनी चूत पर दबाकर उसकी चीख को शांत कर दिया…वो हांफ रही थी …वो निढाल होकर नीचे लेट गयी जिसके कारण मेरा लंड भी बाहर निकल आया..उसके सिरे पर खून लगा हुआ था…यानी उसकी झीली भी फट चुकी थी..
मैं नीचे लेता और उसको अपने ऊपर खींच लिया और उसके गुलाबी और लरजते हुए होंठो को चूसने लगा..
बड़े मीठे थे उसके होंठ, मैंने नीचे हाथ करके उसके गोल चुचे थाम लिए, बड़े दिलकश थे उसके अमृत कलश, मैं उन्हें पीने लगा, वो मचलती हुई मेरा लंड के ऊपर अपनी टाँगे मसल रही थी, उसे अब मेरा लंड फिर से अपनी चूत में चाहिए था और जब उससे बर्दाश्त नहीं हुआ तो उसने अपने आप ही मेरे लंड को अपनी चूत पर लगाया और अन्दर ले कर दबाती चली गयी आआआआआआआआआआआह्ह्ह्ह ….म म्म्म्मम्म्म्मम्म वोव्वव्व्व्वव्व्व…….आआआआआआआअह्ह्ह मेरा पूरा लंड अब उसकी कुंवारी चूत में था…मैंने नीचे से धक्के मारने शुरू किये, उसके मोटे चुचे मेरे मुंह पर थपेड़े मार रहे थे,
नेहा ने अब सोनी की जगह ले ली थी और ऋतू की चूत चाट रही थी.
पुरे कमरे में ऋतू , मेरी और सोनी की सिस्कारियां गूंज रही थी, सोनी की चूत से निकलता रस मेरे लंड को भिगो रहा था.
जल्दी ही हम तीनो की सिस्कारियां चीखों में बदलती चली गयी और सभी ने एक साथ झड़ना शुरू कर दिया..
आआआआआआआआआआआआह्ह्ह्ह मैं तो गयीईईईईईईईईईइ और सोनी ने अपना रस मेरे लिंग पर छोड़ दिया…मेरा लंड भी बारिश में नहाकर रस छोड़ने लगा और मैंने उसकी चूत के अन्दर एक के बाद एक कई पिचकारियाँ छोड़ दी…. आआआआआआआह्ह्ह म्मम्मम्मम्म ऊऊऊऊऊऊऊओह मजा आ गयाआआआआआआअ ……
ऋतू भी मचलती हुई झड़ने लगी..आआआआआआआयीईईईईईईईई म्म्मम्म्म्मम्म ओह्ह ओह होह ओह्ह्हह्ह ….
हम सभी इतनी चीखे मार रहे थे की हमें दुसरे कमरे का ध्यान ही नहीं रहा, वहां दुसरे कमरे में सभी एक दुसरे की बीबियों की चूत मार रहे थे, जब मंजू ने दुसरे कमरे से आती आवाज सुनी तो अपनी चूत से मेरे पापा का लंड बाहर निकाल कर वो शीशे वाली जगह के पास गयी जहाँ से उसे आवाजें आ रही थी, उसने जब शीशा हटाया तो दुसरे कमरे का नजारा देखकर उसके होश उढ़ गए, वहां हम सभी को नंगा लेते देखकर और अपनी दोनों बेटियों को भी हमारे साथ देखकर वो चकरा सी गयी, सोनी मेरे लंड को अन्दर लिए अभी भी मेरी छाती पर लेटी हुई हांफ रही थी..
मंजू ने अपनी बड़ी बेटी को नंगे मेरे ऊपर लेटे हुए देखा और वो समझ गयी की उसकी बेटी तो चुद चुकी है, ये सोचते ही उसके मुंह से एक हांफने जैसी आवाज निकल गयी, जिसे सुनकर मैंने शीशे वाली जगह पर देखा और मंजू आंटी को अपनी तरफ देखते हुए पाकर मैं समझ गया की उन्होंने सभी कुछ देख लिया है. ऋतू ने भी देखा की मैं शीशे वाली जगह देख रहा हूँ तो उसने भी वहां मंजू आंटी को खड़ा हुआ देखकर अपनी चूत चाटती मोनी को और जोर से अपनी चूत पर दबा दिया, मंजू आंटी की आँखें फैलती जा रही थी अपनी बेटियों की करतूते देखकर..
सोनी ने अपनी साँसे सँभालते हुए जब देखा की मेरी नजर कहाँ है तो वहां अपनी माँ को अपनी तरफ घूरते पाकर वो भी सहम सी गयी, मेरा लंड अभी भी उसकी चूत में पड़ा हुआ उसके अन्दर अजीब तरह की तरंगे छोड़ रहा था जिससे उसे बड़ा मजा आ रहा था पर एकाएक अपनी माँ को देखकर उसने मेरा लंड अपनी चूत में मसलना बंद कर दिया जिसकी वजह से वो बाहर आ गया और वो मेरे मुरझाये हुए लंड के ऊपर से हट कर बैठ गयी.
मोनी ने जब चूत चाटना बंद किया तो उसने अपना मुंह ऊपर किया, उसका पूरा मुंह ऋतू के रस से नहाया हुआ चमक रहा था, ऋतू उसकी माँ को पहले ही देख चुकी थी इसलिए उन्हें और किलसाने के लिए उसने मोनी को ऊपर खींचा और अपने होंठो से उसके रसीले होंठ चाटते हुए अपने ही रस का स्वाद लेने लगी और बोली “क्यों मोनी…मजा आया के नहीं..”
मोनी : “अरे ऋतू दीदी, सही में आपकी चूत का स्वाद बड़ा ही नशीला है, मेरा मन कर रहा था की आपका रस निकलता रहे और मैं पीती रहूँ..” और उसने अपनी बड़ी बहन सोनी की तरफ देखा जो शीशे वाली जगह पर अपनी माँ को देखकर सहमी बैठी थी, मोनी ने भी जब देखा की उनकी माँ उन्हें चुदते हुए देख रही है तो वो भी डर गयी और सोचने लगी की अब क्या होगा.
वो ऋतू से बोली : “अरे ये तो मोम है ….हे भगवान्, उन्होंने सब कुछ देख लिया है…अब क्या होगा..”
मैं : ” अरे डरो मत, कुछ नहीं होगा”
तभी बाहर का दरवाजा खुला और मंजू आंटी और पंकज अंकल नंगे ही हमारे कमरे मैं दाखिल हुए और आते ही चिल्ला कर बोले : “ये क्या हो रहा है, क्या कर रहे हो तुम लोग …”
मैंने कहा : “यहाँ वो ही हो रहा है जो आपके कमरे में हो रहा है, और हम वो ही कर रहे हैं जो हमने कल आप लोगो के साथ किया था…यानी सेक्स.”
मंजू : “पर ये हमारे बच्चे हैं, तुम ऐसे कैसे कर सकते हो”
मैंने कहा “क्या आपने हमारी मम्मी, जिनकी चूत और गांड अभी पंकज अंकल मार कर आ रहे हैं, और पापा, जिनका लंड मंजू आंटी अपनी चूत, गांड और मुंह में लेकर आ रही है, को बताया की कल आप लोगो ने हम दोनों भाई बहन की भी चुदाई की थी…नहीं ना..हमने आज रात आप लोगो को अपने दुसरे फ्रेंड्स के साथ और हमारे पेरेंट्स के साथ भी ग्रुप सेक्स करते हुए देखा, कल कोई और था आपके साथ जब आपने हमारे साथ सेक्स किया था, जब आप ये सब कर सकते हो तो सोनी और मोनी क्यों नहीं कर सकती”
“ये तो पागलपन है” मंजू आंटी चिल्लाई “तुम जानते भी हो की तुम क्या कह रहे हो”
“हाँ मैं जानता हूँ की मैं क्या कह रहा हूँ” मैंने कहा “सेक्स एक बड़ी ही मजेदार चीज है, अगर आपका कोई इमोशन इसके साथ जुड़ा ना हो तो इसमें सबसे ज्यादा मजा आता है, बहुत बढ़िया है ये, एक अच्छी एक्सर्साईज़ है ये तो”
“लेकिन हमारे बच्चे …” मंजू ने फिर से कुछ कहना चाहा..
“ये अब बड़े हो रहे हैं…हैं ना..आपको तो इनपर नाज होना चाहिए की आपको देखकर ये सीख रहे हैं और आगे बढ़ रहे हैं..क्या आपको लगता है की जो आप कर रहे हैं वो सही है..?” मैंने कहा
“हम यहाँ अपने आप को डिस्कस नहीं कर रहे हैं” पंकज ने कहा.
पीछे से आवाज आई “क्यों नहीं कर रहे हैं…जबकि ये सब कुछ आप लोगो से जुड़ा हुआ है” उन्होंने पीछे मूढ़ कर देखा तो हमारे मम्मी पापा खड़े थे, वो भी बिलकुल नंगे.
“नहीं पूर्णिमा…आप समझ नहीं रहे हैं, ये इतना आसान नहीं है हमारे लिए..” मंजू ने मेरी माँ से कहा.
“ये हमारे लिए भी आसान नहीं था, लेकिन फिर हमने भी ये कबूल कर लिया की हमारे बच्चे भी हम लोगो की तरह खुले विचारों वाले हैं..
इसलिए हमने ये डिसाईड किया की इन बच्चो को हमसे ही सीखना चाहिए..ना की किसी बाहर वाले से, जहाँ से कुछ और गड़बड़ की आशंका हो..” मम्मी ने उन्हें समझाते हुए कहा.
“थेंक यू मोम…” मैंने मम्मी को कहा और उठकर उनके पास जाकर खड़ा हो गया,
“क्या आप लोगो को हमारे बच्चो के साथ कल रात मजा आया था ?” मम्मी ने मंजू से पूछा
वो शर्मा सी गयी और बोली “मैं क्या कहूँ..ये दोनों कल जब नंगे हमारे पास आये तो हमसे ना कहा ही नहीं गया..”
“आप लोग इन्हें ना भी कर सकते थे, अगर आपके मन में अपने बच्चो के लिए अच्छे विचार हैं तो दुसरो के बच्चो के लिए भी वोही विचार होने चाहिए…” मम्मी ने कहा.
“मैं आपके कहने का मतलब समझ गयी…” मंजू ने गहरी सांस लेते हुए कहा “हमें तो बस अपनी बच्चियों को एकदम से सेक्स करते देखकर यकीन ही नहीं हुआ की वो इस उम्र में ये सब कर सकती हैं…मुझे इनकी चिता हो रही थी पर लगता है ये सच में बड़ी हो गयी हैं…”
“ओह मोम….हम ठीक हैं..हमें भी ये सब करने में बड़ा मजा आया” मोनी ने आगे बढ़कर अपनी माँ से कहा.
“आशु..ऋतू..नेहा..तुम सभी चलो यहाँ से, इन्हें आपस में बातें करके अब सब कुछ निपटाने दो..” पापा ने हमसे कहा.
“ठीक है…” ऋतू बोली और हम सभी अपने कपड़े पहनने लगे, ऋतू ने मोनी से कहा “तुम लोग हमारे कमरे में आ सकते हो…अगर तुम चाहो तो..”
मोनी बोली “बिलकुल…मुझे भी काफी मजा आया आज, हम जरूर आयेंगे”

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