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ऋतू नीचे मचल रही थी वापिस लंड निगलने के लिए, रेहान ने फिर से अपना लंड निकाला और ऋतू की चूत भर दी, और इस तरह वो लगभग 10 -12 झटके ऋतू की चूत में मारता और उतने ही नेहा की चूत में…
दोनों फफक फफक कर चुदवा रही थी….उनकी सिस्कारियों से पता चल रहा था की उन दोनों रंडियों को कितना मजा आ रहा था उस मुसलमानी लंड से…
मैंने हिना के कुरते को ऊपर करके निकाल दिया, और पीछे से उसकी ब्रा भी खोल दी…अब वो भी पूरी नंगी थी, वो शर्मा कर पीछे मुड़ी और मेरे सीने में सर छुपा कर मुझसे लिपट गयी, उसका नर्म और मुलायम शरीर मुझसे किसी बेल की भाँती लिपटा हुआ था, मैंने जल्दी से अपने कपडे उतारे और उसके हाथों में अपना लंड थमा दिया, मेरे लंड को देखते ही उसके पसीने छूट गए, वो घबरा कर पीछे हट गयी और बोली “बाप रे बाप, इतना मोटा, मेरा भी वो ही हाल होगा जो तुम्हारी बहनों का हुआ है…मेरे छोटे से छेद में तो ये नहीं जाएगा..”
“अरे हिना डरो मत, देखो ये तो हर लड़की के साथ एक न एक दिन होता ही है, और ये तो तुम्हारे भाई से थोडा छोटा ही है, आगे चलकर तुम्हे अपने भाई का लंड भी तो लेना है..” मैंने कहा.
अपने भाई के लंड को लेने के नाम से ही उसके शारीर में एक झुरझुरी से फ़ैल गयी, वो किस ख्यालों में खो गयी..और धीरे से बोली “अपने भाई का…पर ये तो गलत होगा न…”
“अरे कोई गलत नहीं है, मैं जानता हूँ तुम ये सब अपने भाई के साथ भी करना चाहोगी.. क्या तुम्हे पता है, ये दोनों मेरी बहने जो तुम्हारे भाई से चुदवा रही हैं, उन दोनों को पहली बार मैंने चोदा था..” मेरे ऐसा कहने से वो मेरी तरफ हेरत भरी नजरों से देखने लगी.
फिर मैंने अपने होंठ उसके गुलाबी निप्पल पर टिका दिए… स्स्सस्स्स्सस्स्स अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह म्मम्मम्म…..
उसने आनंद से अपनी ऑंखें बंद कर ली, और मैंने उसकी गोरी छाती को चुसना शुरू कर दिया..
उसने मेरा सर अपनी छाती से बड़ी बेदर्दी से दबा रखा था, लगता था उस मुसलमानी लड़की के चुचे आज तक किसी ने नहीं चुसे थे, मैंने एक हाथ उसकी कसी हुई गांड पर टिकाया और उसके गुदाज पुट्ठे को मसलने लगा.
रेहान किसी जंगली की तरह बारी-२ से बड़ी तेजी से उन दोनों की चूत मार रहा था, ऋतू और नेहा ने अपने होंठ एक दुसरे से चिपका रखे थे और मजे ले लेकर वो मोटे लंड का मजा ले रही थी..रेहान ने नेहा की चूत में अपना लंड डालकर काफी तेजी से झटके दिए, जल्दी ही नेहा ने झड़ना शुरू कर दिया और उसका रस टपक कर ऋतू की चूत को और गीला करने लगा, अब ऋतू की बारी थी, उसकी चूत पर भी रेहान ने तेज प्रहार किये और उसकी चूत ने भी पानी छोड़ दिया..रेहान का मुसल्ला लंड अभी भी तना हुआ खड़ा था..
ऋतू और नेहा उठ कर नीचे जमीन पर बैठ गयी और रेहान ने अपना लंड हाथ में लेकर मसलना शुरू कर दिया, दोनों रंडियों ने अपने चुचे अपने हाथ में पकडे और रेहान के लंड की तरफ देखकर अपना मुंह खोलकर बारिश का इन्तजार करने लगी..उन्हें ज्यादा इन्तेजार नहीं करना पड़ा, जल्दी ही रेहान ने एक तेज हुंकार के साथ झाड़ना शुरू कर दिया, उसने अपने लंड को ऋतू के मुंह की तरफ और फिर नेहा की तरफ घुमा घुमाकर पानी की बोछारों से उनका मुंह और चुचे भिगो डाले..
उन दोनों ने काफी माल अपने मुंह में कैच किया और बाकी अपनी छातियों पर लोशन की तरह मल लिया.
वो तीनो वहीँ जमीन पर निढाल होकर सुस्ताने लगे..
अब मैंने अपना पूरा ध्यान हिना की तरफ कर दिया. हिना अपने पुरे शरीर को मुझसे घिस रही थी, उसकी चूत से काफी रस टपक रहा था, मैंने ज्यादा देरी करना सही नहीं समझा और उसे नीचे घांस पर लिटा दिया और उसकी दोनों टांगो को चोडा करके अपने लंड को उसकी चूत पर टिकाया, और एक जोर का झटका मारा.. आआआआआआआआआआआह्ह माआआआआआआर दाआआआआआआलाआआआआअ
वो बड़ी तेज चिल्लाई….
मैंने उसपर रहम नहीं खाया और एक और तेज झटका मारकर अपना पूरा साड़े सात इंच लम्बा लंड उसकी कुंवारी चूत में उतार दिया..
आआआआआआआआआआआआआआआआह्ह ऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊह वो दर्द से बिलबिला उठी, उसकी चूत की झिल्ली फट गयी और खून का गर्म रसाव मैंने अपने लंड पर महसूस किया…
इस बार उसकी चीख सुनकर वो तीनो का ध्यान हमारी तरफ गया और सब भागते हुए वहां पहुँच गए.
वहां का नजारा देखते ही रेहान चिल्लाया “……अरे…आपा …..आप यहाँ…..अरे छोड़ो ये क्या कर रहे हो मेरी बहन के साथ….”
“नहीईईईईईइ….रेहान…..तुम पीछे हट जाओ…….” हिना दर्द में चिल्लाई “….तुम भी तो वहां येही मजा ले रहे थे इसकी बहनों के साथ…. अब वो मजा जब मैं ले रही हूँ तो तुम मुझे रोक रहे हो… आआआआआआह….”
मेरे झटको से उसके चुचे बुरी तरह हिल रहे थे, रेहान समझ गया की उसकी बहन ने सब कुछ देख लिया है उसका गुस्सा अब धीरे-२ गायब होने लगा और उसका ध्यान अपनी बहन के हिलते हुए चूचो पर केन्द्रित हो गया. ऋतू और नेहा भी समझ गयी की मैं रेहान की बहन के साथ छुपकर उनका प्रोग्राम देख रहा था और अब रेहान की बहन को चोद भी रहा था, रेहान की बहन की चूत में मेरा लंड जाते देखकर उनकी चूत में फिर से चींटियाँ रेंगने लगी..और वो नंगे खड़े रेहान से अपना शरीर घिसने लगी.
रेहान ने भी अपनी बला की सुंदर बहन के बारे में कई बार सोचकर मुठ मारी थी और आज जब वो मुझसे नंगी और बेशर्म होकर चुद रही थी तो उसके लंड ने अपनी बहन के बारे में सोचते हुए फिर से अंगडाई लेनी शुरू कर दी..अपने दोनों तरफ से दो गर्म लड़कियों के शरीर की गर्मी ने उसके लंड को खड़ा करने में मदद की. जल्दी ही उसके घोड़े जैसा लंड फिर से खड़ा हो कर फुफकारने लगा..
मैंने भी अपने धक्के हिना की चूत में तेज कर दिए…हिना अब सिस्कारियां ले-लेकर अपनी चूत मरवा रही थी.
वो हर झटके के साथ अपनी गांड भी उठा देती थी और मेरे लंड को नीचे की तरफ से टक्कर देती हुई और अन्दर तक घुसा लेती थी…अपनी पहली चुदाई को वो काफी एन्जॉय कर रही थी…उसकी नजरें अपने भाई की तरफ ही थी, रेहान भी अपनी बहन को चुदते हुए देखकर अपने लंड को हिलाने लगा…मैं जल्द ही अपने आखिरी पड़ाव पर पहुँच गया और उसकी टांगो को उठा कर एक साथ 8 -10 झटके मारे, मेरे तेज झटके हिना से भी बर्दाश्त नहीं हुए और वो एक तेज चीख मारती हुई…अपने भाई की आँखों में देखती हुई…झड़ने लगी
…..आआआआआआआआआआआह्ह्ह्ह आआआआआआआह अह अ हः अ हः अ ह्ह्ह्हह्ह्ह …
मैंने भी अपना रस उसकी चूत के अन्दर तक भर दिया…सच में मुसलमानी चूत को मारने में काफी मजा आया, बड़ी गर्म होती है ये मुसल्मानियाँ….
हिना की छातियाँ तेज सांस लेती हुई ऊपर नीचे हो रही थी….रेहान की नजर अभी तक उनपर टिकी हुई थी…मैं समझ गया की रेहान भी अपनी बहन को चोदना चाहता है..मैंने ऋतू और नेहा को इशारा किया की उसके पास से हट जाए..वो दोनों भी समझ गयी और पीछे हट कर रेहान को अपनी बहन की तरफ धकेल दिया..
मैं भी हिना की चूत से अपना लंड निकाल कर खड़ा हुआ और ऋतू और नेहा के साथ जाकर खड़ा हो गया..
रेहान आगे बड़ा और नीचे लेटी अपनी नंगी बहन को ऊपर से नीचे तक देखा, हिना की आँखें अपने भाई को सामने नंगा देखकर मदहोश सी होने लगी…रेहान नीचे झुका और हिना की टांगो के बीच जाकर अपना मुंह उसकी रसीली चूत पर टिका दिया… आआआआह्ह .. स्स्स्सस्स्स्स…. म्मम्मम्मम्म … हिना ने अपनी आँखें बंद कर ली और अपनी टाँगे हवा में उठा दी…

वो अभी-२ झड़ी थी पर अपने भाई को अपनी चूत चाटते देखकर वो फिर से गरम होने लगी, रेहान ने अपनी जीभ अपनी बहन हिना की चूत के अन्दर डाल दी, वहां पर पड़ा मेरा माल उसके मुंह से टकराया और वो उसे हिना के रस के साथ-२ चाटने लगा…मेरे मन को बड़ा सुकून मिला, पहले तो मैंने उसकी कुंवारी बहन को चोदा और अब वो साला मेरा माल अपनी बहन की चूत से चाट रहा है…मैं होले से मुस्कुरा दिया.
रेहान ने अपनी जीभ और होंठो से उसकी सूजी हुई रसीली चूत को चाट चाटकर साफ़ कर दिया..हिना मछली की तरह जमीन पर पड़ी हुई मचल रही थी…
आआआआअह्ह्ह्ह रेहाआआआआआआन्न्न हाआआआअन्न्न ऐसे ही चुसो……. आआआआआअह्ह्ह …..भाई ऐसे ही चुसो ……….अह अ हा हा हा अह अ……..अम्म्म्मम्म्म्मम्म ….. म्म्म्मम्म्म्मम्म हिना को बड़ा मजा आ रहा था..
ऋतू ने मुझे नीचे धक्का दिया और नीचे लिटा दिया और मेरे आधे खड़े लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी, नेहा भी हरकत में आई और मेरे मुंह पर आकर बैठ गयी और मैं उसकी चूत को चाटने लगा…नीचे मेरे लंड के खड़े होते ही ऋतू ने मोर्चा संभाला और कूद कर अपनी चूत को लंड पर टिका दिया…
आआआआआआआआअ ………आआआआआआह्ह्ह …..और उछल-२ कर लंड के मजे लेने लगी.
रेहान भी उठा और उसने अपनी आपा की चूत पर लंड टिकाया और उसकी आँखों में देखकर एक धक्का मारा…आआआआआआअह्ह्ह , उसकी चूत का छेद मैंने खोल तो दिया था पर रेहान के मोटे लंड को अन्दर जाने के लिए और जगह चाहिए थी…वो जोर से दर्द में चिल्ला उठी और अपने भाई के चेहरे को नीचे करके चूसने लगी…रेहान भी अपनी बहन के गुलाबी होंठो को बड़े मजे से चूस रहा था और अपना लंड भी उसकी चूत में पेल रहा था..
मैंने अपनी बगल में लेती नंगी हिना के चूचो पर अपने हाथ रख दिए और रेहान की तरफ देखा…वो भी मुझे देखकर मुस्कुरा दिया..और thank you बोला…क्योंकि मेरी वजह से ही उसे अपनी खुबसूरत बहन की चूत मारने को जो मिल रही थी…
मैंने अपने ध्यान वापिस नेहा की चूत पर लगाया और उसको कुरेदने लग गया.
जल्दी ही नेहा के साथ साथ ऋतू और हिना एक – एक करके झड़ने लगी….रेहान ने भी अपना सारा रस अपनी बहन हिना की चूत में डाल दिया…मेरे लंड ने भी झड़ना शुरू कर दिया और मैंने भी अपनी बहन ऋतू के अन्दर अपना लंड खाली कर दिया…ऋतू हांफती हुई मेरे ऊपर गिर गयी…और रेहान अपनी बहन के ऊपर..
नेहा भी झड़ने के बाद नीचे जमीन पर पड़ी गहरी साँसे ले रही थी.
सबसे पहले ऋतू उठी और अपने कपडे उठा कर लायी और पहनने लगी, और फिर नेहा और रेहान भी अपने कपडे उठाने उधर ही चल दिए, मैंने हिना की तरफ मुस्कुरा कर देखा और उसकी आँखों में उमड़ता प्यार देखकर मैं समझ गया की वो आज काफी खुश है, हो भी क्यों न, अपनी पहली चुदाई वाले दिन ही दो-२ मोटे लंड जो खाने को मिले थे, जिसमे एक उसके भाई का भी था..
मैं सरककर उसकी बगल में आया और उसे अपनी बाँहों में भरकर भींच लिया, उसकी छातियाँ चरमरा गयी..तभी पीछे से ऋतू की आवाज आई…”अरे भाई..अब तो छोड़ दो बेचारी को…दो बार तो चुद चुकी है..अभी भी कसर है क्या..अब भी मन कर रहा है तो मैं आऊं क्या..” और वो हंसने लगी.
मैंने उसे छोड़ा और अपने कपडे पहनकर खड़ा हो गया, हिना भी अपनी लाली छुपाते हुए अपना सलवार कमीज पहन कर तैयार हो गयी..
नीचे उतरते हुए हम सभी इकट्ठे होकर काफी हंसी मजाक कर रहे थे , अभी भी हमारे पास पांच दिन थे, मैं सोच रहा था की इन आने वाले पांच दिनों में मैं और क्या कर सकता हूँ…सच पूछिए तो अपने पिछले अनुभवों के आधार पर मैं ये तो समझ गया था की यहाँ पर आये हर कपल के साथ चुदाई करना तो बहुत आसान है, मैं तो बस अपने तरीको को और ज्यादा कारगार बनाने के बारे में सोच रहा था.
रेहान का स्वाभाव भी मेरी तरफ काफी बदल सा गया था, वो मुझे एक तरह से अब गुरु की तरह देख रहा था, क्योंकि मेरी वजह से उसे अपने इस ट्रिप में इतना मजा जो आ रहा था और चुदाई भी करने को मिल रही थी, ऋतू और नेहा भी रेहान का लंड पाकर मानो हवा में उढ़ रही थी, उनके मन में भी अब तरह-२ के लोगो से चुदवाने के विचार आ रहे थे. और हिना की तो बात ही ना पूछो, उसकी कमसिन चूत जो कली से फूल बन चुकी थी, वहां की खुजली को रोक पाना अब संभव नहीं लग रहा था.
नीचे पहुंचकर मैंने देखा की सोनी और मोनी अपने मम्मी और पापा के साथ खड़ी बातें कर रही हैं, मैंने ऋतू की तरफ देखा और उसे अपने साथ चलने को कहा, बाकी लोगो को दूर किसी टेबल पर बैठने के लिए बोला.
मैं और ऋतू वहां पहुंचे और सभी को विश किया “हाई..गुड मोर्निंग…सोनी .मोनी..कैसी हो” ऋतू ने जाते ही कहा.
“हम ठीक हैं.” सोनी ने मुझे देखते हुए गहरी सांस में कहा.
“ये तुम्हारे मम्मी पापा हैं क्या ?” मैंने अनजान बनते हुए कहा
“हाँ ये हैं मेरे पापा पंकज और ये हैं मेरी मम्मी मंजू” सोनी ने कहा
उसके मम्मी पापा हम दोनों को अपने सामने देखकर अवाक से रह गए.
“क्या तुम चारों एक दुसरे को जानते हो” सोनी के पापा पंकज ने हमसे पूछा ?
“हाँ…हम बस यहीं घूमते हुए मिले थे…हमारी तरह के बच्चे यहाँ काफी हैं..” मैंने उनके सवाल का जवाब दिया और अपने बाकी साथियों की तरफ ,जो दूर टेबल पर बैठे थे, इशारा किया.
“चलो फिर उनके पास चलते हैं..” मोनी ने गहरी हंसी हँसते हुए कहा..
हमारे जाते ही पंकज और मंजू ने एक दुसरे की तरफ देखा और मंजू बोली “हे भगवान्..अब क्या होगा..ये दोनों तो हमारी लड़कियों को भी जानते हैं..कहीं वो हमारे बारे में उन्हें तो नहीं बता देंगे”
पंकज : “अरे नहीं डार्लिंग…तुम घबराती क्यों हो..ऐसा कुछ नहीं होगा..हमने जो मजे उन दोनों भाई बहन को कल दिए हैं वो दोबारा लेने के लिए उन्हें मालुम है की ये बाते छुपा कर ही रखनी पड़ेगी..”
“हाँ तुम ठीक कहते हो…वैसे भी उस चुलबुली लड़की की चूत जब से तुमने मारी है,उसे दोबारा लाने की बातें बार -२ कर रहे हो..” मंजू ने अपने पति को सताते हुए कहा.
“वो तो सच है…तुम भी तो उस जवान लड़के से अपनी चूत मरवाने के बाद बड़ी खुश लग रही हो…लगता है दोनों को जल्दी ही दोबारा बुलाना पड़ेगा अपने काटेज में..” पंकज ने भी हँसते हुए कहा, और वो दोनों वापिस अपने कमरे की तरफ चल पड़े…चुदाई करने के लिए.
हमारे साथ काफी दूर चलने के बाद मैंने सोनी से कहा “तो क्या ख्याल है कल के बारे में…मैंने जो कहा था वो कर दिखाया के नहीं.”
“हाँ यार…तुमने तो सही में कमाल ही कर दिया, इतनी सफाई से तुम उनकी पार्टी में शामिल हो गए और चुदाई भी करी..मजा आ गया देखकर..” मोनी ने अपनी ख़ुशी को उभारते हुए मुझसे कहा.
“हाँ….हहमम.जो तुमने कहा वो कर भी दिखाया..पर मेरे ख्याल से वो सही नहीं था…काफी गन्दा काम किया तुम दोनों ने ” सोनी बोली.
“अच्छा दीदी…तो फिर तुम क्यों अपनी चूत को रगड़ रही थी कल वो सब देखकर…मेरी चूत तो अभी तक सूजी हुई है कल की वजह से…तुम लोगो के जाने के बाद हम दोनों ने काफी देर तक उनको फिर से शर्मा अंकल और आंटी के साथ वो दोबारा करते हुए देखा..सही में काफी मजा आया था.” मोनी ने फिर से कहा.
“तो क्या तुम दोनों को अपना वादा याद है…”मैंने उन दोनों से कहा.

“अरे बिलकुल याद है…मेरी तो चूत में खुजली हो रही है कल से..” मोनी ने उत्सुक्ता से कहा
“और तुम क्या बोलती हो सोनी..” मैंने सोनी की तरफ देखकर कहा.
“ह्म्म्म ठीक है..मुझे पता है की मैं शर्त हार चुकी हूँ…बताओ क्या करना है” आखिर सोनी ने भी अपनी हार मानते हुए मुझसे कहा.
“जो भी करेंगे तुम्हे मजा आएगा…फिकर मत करो” मैंने उसे आश्वासन दिया.
“तो ठीक है, तय रहा, हम आज शाम वाले प्रोग्राम के दोरान ही मिलेंगे तुम्हारे कमरे में, कितना मजा आएगा हम सारे तुम्हारे कमरे में होंगे और तुम्हारे मम्मी पापा साथ वाले कमरे में अपने दुसरे साथियों के साथ..” ऋतू ने सुझाव दिया.
“अरे ये तो बहुत बढ़िया आईडिया है..” मोनी ने उछलते हुए कहा.
“लेकिन अगर उन्होंने हमें पकड़ लिया तो” सोनी ने अपनी शंका जताई.
“वो कुछ नहीं कर सकेंगे…मेरा विशवास रखो” मैंने सोनी को फिर से अश्वस्त किया, और फिर वो दोनों वापिस चले गए.
वापिस टेबल पर पहुँच कर मैंने नेहा और रेहान को भी शाम का प्रोग्राम बताया, हिना पहले ही जा चुकी थी, उसकी टांगो में दर्द हो रहा था चुदाई के बाद से , वो अब आराम करना चाहती थी, वो दोनों भी शाम का प्रोग्राम सुनकर काफी खुश हुए, और फिर नेहा ने कहा की वो रेहान को लेकर अपने कमरे में जा रही है…अकेले. ऋतू और मैं समझ गए की वो और चुदना चाहती है रेहान से..इसलिए मुस्कुराते हुए हमने उसे जाने दिया. और हम दोनों दूसरी तरफ चल पड़े.
जाते हुए ऋतू ने मुझसे पूछा..”अब क्या इरादा है”
“मेरे ख्याल से हमें ये सब मम्मी-पापा को बता देना चाहिए की हम क्या कर रहे हैं…और उन दोनों को पंकज और मंजू के काटेज में भेजना चाहिए..ताकि कोई गड़बड़ हो तो वो संभाल ले.” मैंने ऋतू से कहा.
“वाह क्या आईडिया है..” ऋतू ने उछलते हुए कहा और अपने मोटे आम मेरे सीने से दबाकर मुझे वहीँ खड़े-२ चूमने लगी..
“अरे संभल कर…” पास से जाती एक लम्बी और खुबसूरत सी लड़की ने हम दोनों को चुमते हुए देखा और कहा..
हमने उसपर कोई ध्यान नहीं दिया और मैं एक पेड़ की आड़ में खड़ा होकर ऋतू के चुचे दबाने लगा, यहाँ सभी लोग अपिरिचित थे, अब तो ये नौबत आ गयी थी की अगर हमारे मम्मी-पापा भी अगर हमें ये सब खुले में करते हुए देख ले तो वो भी हमें कुछ नहीं कह सकते थे…इसलिए इस आजादी को हम दोनों काफी एन्जॉय कर रहे थे.
उस लड़की ने जब देखा की हम दोनों एक दुसरे को चुमते जा रहे हैं तो वो भी वोहीं खड़े होकर बड़ी ही बेशर्मी से हमें देखने लगी..
मैं अपनी अधखुली आँखों से उस लड़की को भी देख रहा था, वो अपनी चूत को अपने दायें हाथ से रगड़ रही थी.
मैंने ऋतू को चुमते हुए उस लड़की को इशारे से अपनी तरफ बुलाया, वो लगभग भागती हुई हमारे पास आई तब मैंने उसको ऊपर से नीचे तक देखा, उसने जींस और जेकेट पहनी हुई थी, लम्बी हील और बाल खुले, उसकी छाती को देखकर अंदाजा लगा सकते थे की काफी बार दबवा चुकी है, और उसकी चोडी गांड भी इस बात की गवाही दे रही थी की काफी लंड भी ले चुकी है..उसका गोल चेहरा और मोटे होंठ देखकर मेरे मुंह में भी पानी आ गया ” मैंने ऋतू के चुचे दबाते हुए उससे पूछा “क्या नाम है तेरा..”
“हम्म…मेरा नाम गरिमा है..और मैं अपने मम्मी पापा के साथ यहाँ आई हूँ” उसने अपनी चूत खुजलानी नहीं छोडी और आगे बोली “मैं तो यहाँ बोर ही हो गयी हूँ…शहर में तो मेरा बॉय फ्रेंड भी था, आशुतोष, जो मुझे रोज चोदता था, पर पिछले तीन दिनों से मेरा बुरा हाल है, तुम दोनों को देखकर मुझे अपना यार याद आ गया, मैंने गलती करी, उसे भी अपने साथ ले कर आना चाहिए था..”
“जैसा तुम सोच रही हो ऐसा कुछ नहीं है…ये मेरा बॉय फ्रेंड नहीं बल्कि मेरा भाई है..” ऋतू ने उसकी तरफ देखते हुए कहा.
“क्याआआआआआआ….” उसकी आँखें बाहर की तरफ आने लगी ये सुनकर.
“हाँ मैं इसका भाई हूँ और हम ये मजे रोज लेते हैं..तुम्हे भी लेने है तो बोलो” मैं उसका उत्तर तो जानता था फिर भी पूछा.
“वाह तुम दोनों भाई बहन होकर ये सब कर रहे हो…मेरा कोई भाई नहीं है..और न ही कोई बहन…पर अगर होता तो मैं भी उससे चुदे बिना नहीं रह पाती..” गरिमा ने कहा और आगे आकर सीधा मेरे लंड पर अपना हाथ रख दिया.

मैंने अपने चारों तरफ नजर दौड़ाई, इतनी खुली जगह पर चुदाई करनी सही नहीं थी ..मैंने उन्हें इशारे से एक काटेज की ओढ़ में आने को कहा जहाँ पर किसी की नजर हम पर नहीं पड़ सकती थी, वहां पीछे की तरफ नदी बह रही थी,..वहां पहुँचते ही गरिमा किसी भूखी शेरनी की तरह मुझपर टूट पड़ी..ऋतू उसकी उत्सुक्ताता देखकर दंग रह गयी…गरिमा ने मेरे गले में अपनी बाहें डाली और मुझे चूमने लगी, और अपनी चूत को मेरे लंड वाली जगह से रगड़ने लगी, उसके होंठ बड़े नर्म थे, मैंने उसके उभारों पर हाथ रखा तो दंग रह गया उसकी मोटाई देखकर, उसकी उम्र की लड़की के इतने बड़े तरबूज मैंने आज तक नहीं देखे थे , मैंने उसके जेकेट की जिप खोल दी, अन्दर उसने सिर्फ एक ब्रा पहनी हुई थी, जो उन तरबूजों को संभालने के लिए छोटी पड़ रही थी, वो फ्रंट से खुलने वाली ब्रा थी, मैंने उसके हुक खोल दिए, उसके तरबूज किसी पानी भरे गुब्बारे की तरह उछल कर बाकर आकर लटक गए, मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा, वो पूरी तरह वासना में डूबी हुई थी, ऋतू जो पीछे खड़ी हुई थी, उसने अपने कपडे उतारने शुरू कर दिए, मैंने गरिमा की जींस के बटन खोले और उसे खींच कर नीचे कर दिया, जेकेट और ब्रा भी उतार कर नीचे पटक दी, अब वो पूरी तरह से नंगी हमारे सामने खड़ी हुई थी, वो एक भरे हुए शरीर की मालकिन थी, उसकी फूली हुई चूत देखकर कोई भी बता सकता था की हरामजादी काफी लंड निगल चुकी है, उसका पेट बिलकुल सपाट था और गांड काफी उभरी हुई और मोटी थी.
वो झट से जमीन पर बैठ गयी और मेरी जींस के बटन खोलकर एक झटके से उसे नीचे उतार दिया, मेरा खड़ा हुआ लंड उसके चेहरे से जा टकराया, उसकी सांप जैसी जीभ बाहर निकली और उसने मेरा नाग अपने मुंह में भर लिया और उसे बड़ी तेजी से चूसने लगी, एक हाथ से वो मेरे टट्टे सहला रही थी, फिर उसने अपना बड़ा सा मुंह पूरा खोला और मेरी दोनों गोलियां भी अपने मुंह में भरकर चूसने लगी, बड़ा मजा आ रहा था, ऋतू भी आगे आई और हम दोनों के बीच से होती हुई गरिमा की चूत की तरफ मुंह किया और उसे चाटने लगी, गरिमा की लम्बी सिसकारी निकल गयी..आआआआआआआआआआह्ह्ह … पर उसने मेरा लंड चुसना नहीं छोड़ा..गरिमा अब लगभग ऋतू के चेहरे पर अपनी चूत का पिटारा खोले बैठी थी और मेरा लंड और टट्टे चूस रही थी, मैं अपनी आँखें बंद किये इस चुस्वाई के मजे ले रहा था..
गरिमा काफी गरम थी इसलिए ऋतू ने जब उसे चुसना शुरू किया तो उसकी चूत का बाँध टूट गया और उसका रस पर्वाह तेजी से बाहर आकर उसके चेहरे पर पड़ा..आआआआआआआआअह आआआआआअह आहा हा आहा अ हः…..उसकी साँसे मानो अटक ही गयी….वो मेरा लंड पकडे हुए नीचे लेट गयी…उसकी टांगो ने जवाब दे दिया था…ऋतू बड़ी तेजी से उसकी चूत का पानी चाट रही थी, मैंने भी झुक कर अपनी दोनों टाँगे उसके दोनों तरफ करके उसके मोटे चुचे पर बैठ गया, क्या मुलायम एहसास था, मैंने अपना पूरा भार उसपर नहीं डाला, उसने मेरा लंड चुसना चालू रखा, उसकी चूत चाटने के बाद ऋतू आगे आई और मेरे सामने आकर खड़ी हो गयी.
उसने आते ही मेरे सर को बड़ी बेदर्दी से पकड़ा और अपनी चूत पर दे मारा, मैंने उसकी चूत का पानी पीना शुरू कर दिया, नीचे लेती गरिमा अपने एक हाथ से अपनी चूत को भी सहला रही थी और फिर से गर्म होने लगी थी…ऋतू ने एकदम से मेरा मुंह पीछे किया और मैं समझ गया की वो झड़ने वाली है…पर मेरा अंदाजा गलत निकला, अगले ही पल उसकी चूत में से एक लम्बी पेशाब की धार मेरे मुंह से आकर टकराई, मैं सकते में आ गया, आजतक ऋतू ने ऐसा नहीं किया था, पर शायद काफी देर से उसने रोक रखा था और अब उससे सेहन नहीं हुआ और उसके पेशाब की धार सीधे मेरे मुंह से टकराती हुई नीचे लेटी हुई गरिमा के ऊपर जा गिरी, उसने मेरा लंड अपने मुंह से निकाल दिया और ऊपर से आती बारिश को अपने मुंह में समेटने में लग गयी, उसे शायद ऋतू का पेशाब मेरे लंड से भी ज्यादा टेस्टी लगा था, इसलिए उसने अपने हाथ ऊपर करके ऋतू को नीचे खींचा और अपने मुंह पर बिठा लिया और बाकी का बचा हुआ ड्रिंक सीधे वहीँ से पीने लगी, मैं पीछे हुआ और अपना लंड हाथ में पकड़कर गरिमा की चूत पर जा टिकाया.
उसने अपने दोनों चुतड ऊपर उठा दिए और बोली…दाआआआआआआआआल्लो प्लीईईईईईईईईस …….मैंने देरी करना उचित नहीं समझा और मैंने एक झटका दिया और मेरा लंड उसकी वेलवेट जैसी चूत के अन्दर तक समाता चला गया….
आआआआआआआआआआआआह्ह अह आआआआआआआआआआआआआआआआह्ह्ह्ह …
वो हम दोनों भाई बहन के नीचे पड़ी मचल उठी…उसकी गांड बड़ी गद्देदार थी…मैंने नीचे हाथ करके उसकी गांड के छेद को टटोला..गरिमा की गांड का छेद भी काफी गरम था, मैंने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाल लिया….उसने ऋतू की चूत को चुसना छोड़ दोय और बोली “ये क्याआअ…….” पर अगले ही पल मैंने उसकी गांड के छेद पर लंड टिकाया और धक्का देकर उसे अन्दर कर दिया….अयीईईईईईईईईईईई ….. मर्र्र्रर्र्र्रर गयीईईईईईईईईईईई……..वो लगभग चिल्ला उठी, उसकी गांड का छेद काफी टाईट था, मैंने उसे धक्के देने शुरू किये,,वो अब घांस पर अपनी कोहनियों के बल आधी लेटी हुई थी, उसके मोटे-२ चुचे बुरी तरह हिल रहे थे….हर झटके से उसके मुंह से एक आह निकल रही थी…ऋतू साइड में लेटी हुई अपनी चूत रगड़ रही थी…मैंने उसका अकेलापन देखा तो मैंने गरिमा को कुतिया वाले स्टाइल में आने को कहा. वो झट से उलट कर अपनी गांड हवा में उठा कर लेट गयी और इस तरह से उसका मुंह अब नीचे लेटी हुई ऋतू की चूत पर था…उसने अपना एक हाथ पीछे किया और मेरे लंड को पकड़कर अपनी गांड के छेद पर टिका दिया और पीछे की तरफ झटका मारकर फिर से मेरा लंड अपनी गांड में फंसा लिया..मैं उसकी कुशलता देखकर हैरान रह गया..
मैं उसकी कमर पर आधा लेट गया और आगे झूलते हुए उसके तरबूजों को दबा दबाकर पीछे से झटके मारने लगा….
नीचे से ऋतू की चूत चुस्वाई हो रही थी और पीछे से गरिमा की गांड मरवाई..
दोनों की सिस्कारियां गूंज रही थी..आआआआआआअह अह अ हा हा हा हा हा हा……आआआआआआअह म्म्म्मम्म्म्मम्म अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ……ऋतू बड़े जोर से अपनी चूत उठा उठा कर गरिमा के मुंह में ठूस रही थी…
गरिमा के निप्पल काफी बड़े थे, उसके चूचो की तरह ही,,,मैंने पीछे से उन्हें अपनी उँगलियों में भरा और जोर से मसल डाला….
आआआआआआआआआआआआआआआह्ह कुत्ते …………..मार डाला…….आआआआआआअह्ह मेरे टट्टे उसकी चूत को ठोकर मार रहे थे, जिसकी वजह से उसकी चूत की गर्मी भी बाहर निकल रही थी….जल्दी ही ऋतू ने झड़ना शुरू कर दिया….उसकी मलाई को गरिमा ने अपनी लम्बी जीभ से चाट चाटकर साफ़ कर दिया…मैंने अपने धक्कों की स्पीड बड़ा दी और जल्दी ही गरिमा के साथ-साथ मेरी सिस्कारियां भी गूंजने लगी…और हम दोनों ने एक साथ झड़ना शुरू कर दिया..
आआआआआआआआआआआअह्ह आआआआआआआ ह्ह्ह अ हाहा अ हा ह …..म्म्मम्म्म्मम्म ….मैं तो गया…और मैंने अपना गाड़ा रस उसकी मोटी गांड में उडेलना शुरू कर दिया…अपनी गांड में मेरे वीर्य की गर्मी पाकर उसका भी ओर्गास्म हो गया और वो भी हांफती हुई झड़ने लगी..आआआआआआअह्ह्ह म्म्मम्म्म्मम्म मैं भी गयी……
मैंने अपना लंड उसकी गांड से बाहर निकाला तो वो झट से आगे होकर ऋतू के मुंह के ऊपर गयी और अपनी गांड से टपकते हुए मेरे रस को उसके मुंह में भरने लगी…मैं भी खड़ा हुआ और अपना लंड ले कर उसके मुंह के पास जाकर खड़ा हो गया साफ़ करवाने के लिए…
थोड़ी देर लेटने के बाद हम तीनो ने पीछे बहती हुई नदी में जाकर ठन्डे पानी से नहाया और अपने कपडे पहन कर वापिस चल पड़े.
गरिमा को दोबारा मिलने का वादा किया और उसने भी दुगने जोश से फिर से चुदने की इच्छा जताई और वो भी वापिस अपने कॉटेज में चली गयी..

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