हम दोनों भागते हुए अपने कॉटेज पहुंचे तो हमारे मम्मी-पापा नंगे अजय चाचू के कमरे से निकल रहे थे, हम दोनों को सामने पाकर वो दोनों ठिठक कर वहीं खड़े हो गए.
“तुम इतनी रात को कहाँ से घूम कर आ रहे हो” मम्मी ने हम दोनों से पूछा, वो पूरी नंगी हमारे सामने खड़ी थी, इसलिए थोडा शर्मा भी रही थी अपनी हालत पर.
“हम दोनों अपने कुछ दोस्तों से मिल कर आ रहे है” ऋतू ने अपने पापा के आधे खड़े हुए लंड को घूरते हुए कहा.
“क्या आप दोनों चाचू के कमरे से आ रहे हैं” मैंने मम्मी की तरफ देखते हुए पूछा .
“ह्म्म्म ..हम उन्हें गुड नेट बोलने गए थे” मम्मी ने हडबडा कर कहा, उनके निप्प्ल्स तन कर खड़े हो चुके थे.
“ठीक है…गुड नेट ” मैंने कहा और अपने कमरे में चला गया.
अन्दर जाते हुए हम दोनों ने बड़ी मुश्किल से अपनी हंसी रोकी, हम जानते थे की हमने मम्मी-पापा को रंगे हाथों पकड़ लिया है, उनकी शक्ल देखते ही बनती थी, अन्दर आकर ऋतू ने अपने कपडे बड़ी फुर्ती से उतार फैंके और बेड पर जाकर लेट गयी, दुसरे कमरे में चाचू और चाची ने जब हमारी बात सुनी और बाद में हमें अन्दर आते देखा तो उन्होंने शीशे वाली जगह से अन्दर झाँका और ऋतू को नंगी लेते देखकर चाचू का लंड फिर से तन कर खड़ा हो गया और वो उसे सहलाने लगे.
मैंने भी अपने सारे कपडे उतार डाले और बेड पर कूद कर ऋतू की रसीली रसमलाई जैसी चूत पर मुंह टिका दिया.
ऋतू ने अपने चुतड ऊपर हवा में उठा दिए और मेरे मुंह में अपनी चूत से ठोकरें मारने लगी.
दुसरे कमरे में आरती चाची ने मेरा लंड मेरी टांगो के बीच से लटकता हुआ देखा तो उनसे सहन नहीं हुआ और वो दोनों नंगे ही अपने कमरे से निकल कर हमारे कमरे में आ गए और चाची ने आते ही मेरी टांगो के बीच लेटकर मेरे लटकते हुए खीरे को अपने मुंह में भर लिया, मेरे मुंह से एक लम्बी सिसकारी निकल गयी. आआआआआआआआआअह्ह्ह्ह
चाचू भी अपना फड़कता हुआ लंड लेकर आगे आये और मेरे सामने लेती हुई ऋतू के मुंह के पास जाकर उसके मुंह में अपना लंड डाल दिया, ऋतू ने उसे भूखी शेरनी की तरह लपका और उसका रस चुसना शुरू कर दिया.
चाची बड़ी आतुरता से मेरा लंड चूस रही थी, उनके और ऋतू के मुंह से सपड-२ की आवाजें आ रही थी.
तभी दरवाजा खुला और नेहा अन्दर आ गयी, वो अन्दर का नजारा देखकर बोली “मुझे तुम लोग वहां छोड़कर यहाँ मजे ले रहे हो..” और ये कहकर उसने भी अपने कपडे उतारे और कूद गयी वो भी बेड पर.
ऊपर आकर वो अपने पापा के पास गयी और अपने नन्हे होंठो से उनके मोटे-२ होंठ चूसने लगी, चाचू ने हाथ आगे करके अपनी बेटी के मोटे-२ चुचे थाम लिए और उन्हें जोर से दबा डाला.
नेहा चाचू के आगे आ कर ऋतू के मुंह के ऊपर जाकर बैठ गयी, ऋतू ने चाचू का लंड चुसना छोड़ दिया और नेहा की चूत को चाटने लगी, चाचू का लंड अब नेहा के पेट से टकरा रहा था, नेहा जो पहले ही सोनी-मोनी के कमरे से उनके मम्मी-पापा का ग्रुप सेक्स देखकर उत्तेजित हो चुकी थी, उससे सहन नहीं हुआ और उसने अपने पापा का लंड पकड़कर अपनी रस उगलती चूत पर टिका दिया और उसे अन्दर समाती चली गयी, आआआआआआआआअयीईईईईईईईई पपाआआआआआआअ
… नीचे लेटी ऋतू ने इस काम को बड़ी खूबी से अंजाम दिया, लंड को चूत में धकेलने के लिए. वो अब नेहा की गांड के छेद को चूस रही थी. म्म्म्मम्म्म्मम्म
उधर अपने कमरे में जाने के बाद मम्मी को इस बात की बड़ी चिंता हो रही थी की आज वो चाचू के कमरे से नंगे बाहर निकलते हुए पकडे गए, इस बात को वो चाचू को भी बताना चाहते थे ताकि अगर हम उनसे भी पूछे की उनके मम्मी – पापा रात के समय नंगे उनके कमरे से क्यों निकल रहे थे तो वो भी वोही जवाब दे जो उन्होंने दिया था.
ये सोचकर वो अपने कमरे से निकली और चाचू के कमरे में चली गयी, वहां जाकर उन्होंने देखा की कमरा तो बिलकुल खाली था, तभी उनकी नजर दिवार पर गयी, शीशा नीचे पड़ा हुआ था और उस जगह एक बड़ा सा छेद था, वो आगे गयी और अन्दर झाँका, वहां का नजारा देखकर पुर्णिमा के परखछे उड़ गए, उनका बेटा नंगा अपनी सगी बहन की चूत चाट रहा था, और नीचे लेटी उनकी देवरानी उनके बेटे का लंड चूस रही थी, और ऊपर उनका देवर अपनी ही बेटी को चोद रहा था और नीचे से उनकी बेटी अपनी जीभ से अपनी बहन की गांड चाट रही थी. उनकी आँखे घूम गयी ये सब देखकर.
“तुम इतनी रात को कहाँ से घूम कर आ रहे हो” मम्मी ने हम दोनों से पूछा, वो पूरी नंगी हमारे सामने खड़ी थी, इसलिए थोडा शर्मा भी रही थी अपनी हालत पर.
“हम दोनों अपने कुछ दोस्तों से मिल कर आ रहे है” ऋतू ने अपने पापा के आधे खड़े हुए लंड को घूरते हुए कहा.
“क्या आप दोनों चाचू के कमरे से आ रहे हैं” मैंने मम्मी की तरफ देखते हुए पूछा .
“ह्म्म्म ..हम उन्हें गुड नेट बोलने गए थे” मम्मी ने हडबडा कर कहा, उनके निप्प्ल्स तन कर खड़े हो चुके थे.
“ठीक है…गुड नेट ” मैंने कहा और अपने कमरे में चला गया.
अन्दर जाते हुए हम दोनों ने बड़ी मुश्किल से अपनी हंसी रोकी, हम जानते थे की हमने मम्मी-पापा को रंगे हाथों पकड़ लिया है, उनकी शक्ल देखते ही बनती थी, अन्दर आकर ऋतू ने अपने कपडे बड़ी फुर्ती से उतार फैंके और बेड पर जाकर लेट गयी, दुसरे कमरे में चाचू और चाची ने जब हमारी बात सुनी और बाद में हमें अन्दर आते देखा तो उन्होंने शीशे वाली जगह से अन्दर झाँका और ऋतू को नंगी लेते देखकर चाचू का लंड फिर से तन कर खड़ा हो गया और वो उसे सहलाने लगे.
मैंने भी अपने सारे कपडे उतार डाले और बेड पर कूद कर ऋतू की रसीली रसमलाई जैसी चूत पर मुंह टिका दिया.
ऋतू ने अपने चुतड ऊपर हवा में उठा दिए और मेरे मुंह में अपनी चूत से ठोकरें मारने लगी.
दुसरे कमरे में आरती चाची ने मेरा लंड मेरी टांगो के बीच से लटकता हुआ देखा तो उनसे सहन नहीं हुआ और वो दोनों नंगे ही अपने कमरे से निकल कर हमारे कमरे में आ गए और चाची ने आते ही मेरी टांगो के बीच लेटकर मेरे लटकते हुए खीरे को अपने मुंह में भर लिया, मेरे मुंह से एक लम्बी सिसकारी निकल गयी. आआआआआआआआआअह्ह्ह्ह
चाचू भी अपना फड़कता हुआ लंड लेकर आगे आये और मेरे सामने लेती हुई ऋतू के मुंह के पास जाकर उसके मुंह में अपना लंड डाल दिया, ऋतू ने उसे भूखी शेरनी की तरह लपका और उसका रस चुसना शुरू कर दिया.
चाची बड़ी आतुरता से मेरा लंड चूस रही थी, उनके और ऋतू के मुंह से सपड-२ की आवाजें आ रही थी.
तभी दरवाजा खुला और नेहा अन्दर आ गयी, वो अन्दर का नजारा देखकर बोली “मुझे तुम लोग वहां छोड़कर यहाँ मजे ले रहे हो..” और ये कहकर उसने भी अपने कपडे उतारे और कूद गयी वो भी बेड पर.
ऊपर आकर वो अपने पापा के पास गयी और अपने नन्हे होंठो से उनके मोटे-२ होंठ चूसने लगी, चाचू ने हाथ आगे करके अपनी बेटी के मोटे-२ चुचे थाम लिए और उन्हें जोर से दबा डाला.
नेहा चाचू के आगे आ कर ऋतू के मुंह के ऊपर जाकर बैठ गयी, ऋतू ने चाचू का लंड चुसना छोड़ दिया और नेहा की चूत को चाटने लगी, चाचू का लंड अब नेहा के पेट से टकरा रहा था, नेहा जो पहले ही सोनी-मोनी के कमरे से उनके मम्मी-पापा का ग्रुप सेक्स देखकर उत्तेजित हो चुकी थी, उससे सहन नहीं हुआ और उसने अपने पापा का लंड पकड़कर अपनी रस उगलती चूत पर टिका दिया और उसे अन्दर समाती चली गयी, आआआआआआआआअयीईईईईईईईई पपाआआआआआआअ
… नीचे लेटी ऋतू ने इस काम को बड़ी खूबी से अंजाम दिया, लंड को चूत में धकेलने के लिए. वो अब नेहा की गांड के छेद को चूस रही थी. म्म्म्मम्म्म्मम्म
उधर अपने कमरे में जाने के बाद मम्मी को इस बात की बड़ी चिंता हो रही थी की आज वो चाचू के कमरे से नंगे बाहर निकलते हुए पकडे गए, इस बात को वो चाचू को भी बताना चाहते थे ताकि अगर हम उनसे भी पूछे की उनके मम्मी – पापा रात के समय नंगे उनके कमरे से क्यों निकल रहे थे तो वो भी वोही जवाब दे जो उन्होंने दिया था.
ये सोचकर वो अपने कमरे से निकली और चाचू के कमरे में चली गयी, वहां जाकर उन्होंने देखा की कमरा तो बिलकुल खाली था, तभी उनकी नजर दिवार पर गयी, शीशा नीचे पड़ा हुआ था और उस जगह एक बड़ा सा छेद था, वो आगे गयी और अन्दर झाँका, वहां का नजारा देखकर पुर्णिमा के परखछे उड़ गए, उनका बेटा नंगा अपनी सगी बहन की चूत चाट रहा था, और नीचे लेटी उनकी देवरानी उनके बेटे का लंड चूस रही थी, और ऊपर उनका देवर अपनी ही बेटी को चोद रहा था और नीचे से उनकी बेटी अपनी जीभ से अपनी बहन की गांड चाट रही थी. उनकी आँखे घूम गयी ये सब देखकर.
मम्मी जल्दी से भागकर वापिस गयी और अपने कमरे से पापा को बुलाकर लायी, उन्होंने शीशे वाली जगह से अन्दर देखने को कहा, जब पापा ने अन्दर का नजारा देखा तो उनकी आँखें फटी की फटी रह गयी, उनका छोटा भाई अपनी बेटी को चोद रहा था, और उनका बेटा अपनी सगी बहन की चुदाई कर रहा था, ये देखकर वो आग बबूला हो गए और मम्मी को साथ लेकर वो दनदनाते हुए हमारे कमरे में आये और चिल्लाये ” ये सब हो क्या रहा है!!!!!!!!!!”
पापा की आवाज सुनकर मैंने दरवाजे की तरफ देखा तो मैं स्तब्ध रह गया, पर मेरा लंड जो झटके मार-मारकर अपनी बहन को चोद रहा था, वो नहीं रुका, मैंने धक्के देते हुए हैरानी से उनकी तरफ देखा और बोला “मम्मी पापा आप….?”
उधर नेहा की चूत में उसके पापा का लंड अपनी आखिरी साँसे ले रहा था, उनसे सहन नहीं हुआ और उन्होंने अपना रस अपनी बेटी की चूत में उगलना शुरू कर दिया…नेहा ने भी आँखें बंद करके अपने पापा के गले में अपनी बाहें डालकर एक लम्बी चीख मारी .आआआआआआअयीईईईइ पपाआआआआआआआ ..और वो भी झड़ने लगी, उनका मिला जुला रस नीचे लेटी ऋतू बड़े चटखारे ले-लेकर पी रही थी, उसे मालुम तो चल गया था की उसके मम्मी – पापा कमरे में आ गए हैं, पर अपनी चूत में अपने भाई के लंड के धक्के और अपने मुंह पर बरसते गर्म रस का मजा लेने से उसे कोई नहीं रोक सका.
उसने भी अपनी उखड़ी साँसों से उन्हें देखा और पूछा “मोम डैड आप यहाँ क्या कर रहे हैं?”
“आशु क्या तुम ये करना बंद करोगे…..”मम्मी ने मेरी तरफ घूरकर देखते हुए कहा, वो एक तरह से मुझे अपनी बहन की चूत मारने से रोक रही थी.
मैं अपने आखिरी पलो में था, मैंने जैसे ही अपना लंड बाहर निकाला उसका विकराल रूप जो की मेरी बहन की चूत के रंग में डूबकर गीला हो चूका था और उसपर चमकती नसे देखकर मेरी माँ की आँखें फटी की फटी रह गयी, लंड ने बाहर निकलते ही झड़ना शुरू कर दिया और मेरी पिचकारी सीधे ऋतू की खुली हुई चूत से जा टकराई..
चाची जल्दी से आगे आई और मेरे लंड पर अपना मुंह टिका दिया और मेरा सारा रस पी गयी, फिर उन्होंने ऋतू की चूत के ऊपर अपना मुंह टिकाया और वहां से भी मलाई इकट्ठी करके खा गयी..और मेरी आ की तरफ देखकर बोली “भाभी आपके बच्चे बड़े टेस्टी है…”
“आरती…तुम ये सब कैसे कर सकती हो…”उन्होंने चाची को डांटते हुए कहा.
“हमें तो इन्होने ही बुलाया था…” चाची ने सपाट लहजे में कहा.
“क्या………” मेरी माँ का मुंह खुला का खुला रह गया.
और फिर चाची ने सारी कहानी हमारे मम्मी-पापा को सुना दी, वो अपना मुंह फाड़े सब बाते सुन रहे थे, उन्होंने ये भी बताया की हम दोनों उनके कमरे में देखते हैं और हमें उनके बारे में सब पता है की कैसे वो चारों लोग ग्रुप सेक्स करते हैं.
मम्मी-पापा ये सारी बात सुनकर शर्मिंदा हो गए पर फिर भी मम्मी ने मेरी तरफ देखा और बोली “तुम दोनों ने ये सब क्यों किया”
“हम भी आपके और पापा की तरह बनना चाहते थे, जब हमने देखा की आप और पापा, चाचू और चाची के साथ मिलकर सेक्स कर रहे हो और एन्जॉय भी कर रहे हो तो हमने भी ठान लिया की हम भी ये करेंगे, हमने यहाँ और लोगो को भी ग्रुप सेक्स करते देखा है और वो सब भी खूब एन्जॉय करते हैं..” मैंने उन्हें सीधे शब्दों में बताया.
“लेकिन तुम्हे ये सब नहीं करना चाहिए” मम्मी ने मुझसे रुंधी आवाज में कहा.
“क्यों नहीं करना चाहिए…मेरी चूत में हर तरह का लंड चला जाता है और मुझे उन्हें चूसने में भी मजा आता है..तो फिर ये सब क्यों नहीं करना चाहिए” अब ऋतू भी मेरे पक्ष में बोल पड़ी.
“पर ये सब गलत है, भाई बहन को आपस में ये सब नहीं करना चाहिए..” मम्मी ने फिर से कहा.
“अच्छा ……तो आप लोग जो करते हो वो गलत नहीं है क्या” ऋतू ने अपने शब्दों को पीसते हुए उनसे कहा.
चाची जो बड़े देर से ये सब देख रही थी वो मम्मी की तरफ हँसते हुए बोली “देखो भाभी, ये जो कह रहे है वो सही है, हम लोग भी कहाँ रिश्तेदारी का ख्याल रखते है, हमें भी तो सिर्फ सेक्स करने में मजा आता है, अगर ये भी वोही कर रहे है तो बुरा क्या है”
“पर ये हमारे बच्चे हैं..” मम्मी ने फिर से कहा.
“हाँ है और तभी इनके साथ ये सब करने में कुछ ज्यादा ही मजा आता है” अब की बार चाचू ने कहा और अपनी बाँहों में पकड़ी नंगी नेहा को अपने सीने से दबा दिया और आगे बोले ” और मुझे लगता है की आपको भी एक बार ये सब ट्राई करना चाहिए”
मम्मी ने अपने सर को एक झटका दिया और कहा “मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रहा है, मैं सोने जा रही हूँ, इस बारे में कल बात करेंगे”
“ठीक है बाय …” चाची ने उनसे कहा
“बाय का क्या मतलब है…तुम लोग नहीं जा रहे क्या अपने कमरे में” मम्मी ने हैरानी से पूछा.
“नहीं अभी मुझे कुछ और भी काम है ” और चाची ने हाथ बढाकर मेरे लंड को थाम लिया और दुसरे हाथ से अपनी चूत मसलने लगी.
“आरती…बंद करो ये सब” मम्मी चिल्लाई.
“अरे भाभी आप यहाँ आओ और थोडा relax करो” चाचू आगे आये और मम्मी का हाथ पकड़कर बेड पर बिठा दिया उनका झूलता हुआ लंड उनकी आँखों के सामने लटक रहा था, चाचू ने उनका मुंह पकड़ा और अपना लंड उनके मुंह में ठूस दिया और उन्हें नीचे धक्का देकर बेड पर लिटा दिया और खुद उनकी छाती पर चढ़ बैठे.
“अब चुपचाप लेटी रहो और मेरा लंड चुसो…”चाचू ने मम्मी की आँखों में देखकर कहा. और आरती की तरफ देखकर बोले “डार्लिंग…मेरी थोड़ी मदद करो न…”
“हाँ हाँ क्यों नहीं ..” चाची अपनी जगह से उठी और बेड के किनारे आकर मम्मी के नाईट गाउन को खींच कर बीच में से खोल दिया, उन्होंने नीचे कुछ नहीं पहना था, और उनकी मोटी जांघे पकड़कर रसीली चूत पर अपना मुंह रख दिया.मम्मी के मुंह में चाचू का लंड था पर फिर भी उनके मुंह से घुटी हुई सी सिसकारी निकल गयी…आआआआअह्ह्ह्ह.
पापा की आवाज सुनकर मैंने दरवाजे की तरफ देखा तो मैं स्तब्ध रह गया, पर मेरा लंड जो झटके मार-मारकर अपनी बहन को चोद रहा था, वो नहीं रुका, मैंने धक्के देते हुए हैरानी से उनकी तरफ देखा और बोला “मम्मी पापा आप….?”
उधर नेहा की चूत में उसके पापा का लंड अपनी आखिरी साँसे ले रहा था, उनसे सहन नहीं हुआ और उन्होंने अपना रस अपनी बेटी की चूत में उगलना शुरू कर दिया…नेहा ने भी आँखें बंद करके अपने पापा के गले में अपनी बाहें डालकर एक लम्बी चीख मारी .आआआआआआअयीईईईइ पपाआआआआआआआ ..और वो भी झड़ने लगी, उनका मिला जुला रस नीचे लेटी ऋतू बड़े चटखारे ले-लेकर पी रही थी, उसे मालुम तो चल गया था की उसके मम्मी – पापा कमरे में आ गए हैं, पर अपनी चूत में अपने भाई के लंड के धक्के और अपने मुंह पर बरसते गर्म रस का मजा लेने से उसे कोई नहीं रोक सका.
उसने भी अपनी उखड़ी साँसों से उन्हें देखा और पूछा “मोम डैड आप यहाँ क्या कर रहे हैं?”
“आशु क्या तुम ये करना बंद करोगे…..”मम्मी ने मेरी तरफ घूरकर देखते हुए कहा, वो एक तरह से मुझे अपनी बहन की चूत मारने से रोक रही थी.
मैं अपने आखिरी पलो में था, मैंने जैसे ही अपना लंड बाहर निकाला उसका विकराल रूप जो की मेरी बहन की चूत के रंग में डूबकर गीला हो चूका था और उसपर चमकती नसे देखकर मेरी माँ की आँखें फटी की फटी रह गयी, लंड ने बाहर निकलते ही झड़ना शुरू कर दिया और मेरी पिचकारी सीधे ऋतू की खुली हुई चूत से जा टकराई..
चाची जल्दी से आगे आई और मेरे लंड पर अपना मुंह टिका दिया और मेरा सारा रस पी गयी, फिर उन्होंने ऋतू की चूत के ऊपर अपना मुंह टिकाया और वहां से भी मलाई इकट्ठी करके खा गयी..और मेरी आ की तरफ देखकर बोली “भाभी आपके बच्चे बड़े टेस्टी है…”
“आरती…तुम ये सब कैसे कर सकती हो…”उन्होंने चाची को डांटते हुए कहा.
“हमें तो इन्होने ही बुलाया था…” चाची ने सपाट लहजे में कहा.
“क्या………” मेरी माँ का मुंह खुला का खुला रह गया.
और फिर चाची ने सारी कहानी हमारे मम्मी-पापा को सुना दी, वो अपना मुंह फाड़े सब बाते सुन रहे थे, उन्होंने ये भी बताया की हम दोनों उनके कमरे में देखते हैं और हमें उनके बारे में सब पता है की कैसे वो चारों लोग ग्रुप सेक्स करते हैं.
मम्मी-पापा ये सारी बात सुनकर शर्मिंदा हो गए पर फिर भी मम्मी ने मेरी तरफ देखा और बोली “तुम दोनों ने ये सब क्यों किया”
“हम भी आपके और पापा की तरह बनना चाहते थे, जब हमने देखा की आप और पापा, चाचू और चाची के साथ मिलकर सेक्स कर रहे हो और एन्जॉय भी कर रहे हो तो हमने भी ठान लिया की हम भी ये करेंगे, हमने यहाँ और लोगो को भी ग्रुप सेक्स करते देखा है और वो सब भी खूब एन्जॉय करते हैं..” मैंने उन्हें सीधे शब्दों में बताया.
“लेकिन तुम्हे ये सब नहीं करना चाहिए” मम्मी ने मुझसे रुंधी आवाज में कहा.
“क्यों नहीं करना चाहिए…मेरी चूत में हर तरह का लंड चला जाता है और मुझे उन्हें चूसने में भी मजा आता है..तो फिर ये सब क्यों नहीं करना चाहिए” अब ऋतू भी मेरे पक्ष में बोल पड़ी.
“पर ये सब गलत है, भाई बहन को आपस में ये सब नहीं करना चाहिए..” मम्मी ने फिर से कहा.
“अच्छा ……तो आप लोग जो करते हो वो गलत नहीं है क्या” ऋतू ने अपने शब्दों को पीसते हुए उनसे कहा.
चाची जो बड़े देर से ये सब देख रही थी वो मम्मी की तरफ हँसते हुए बोली “देखो भाभी, ये जो कह रहे है वो सही है, हम लोग भी कहाँ रिश्तेदारी का ख्याल रखते है, हमें भी तो सिर्फ सेक्स करने में मजा आता है, अगर ये भी वोही कर रहे है तो बुरा क्या है”
“पर ये हमारे बच्चे हैं..” मम्मी ने फिर से कहा.
“हाँ है और तभी इनके साथ ये सब करने में कुछ ज्यादा ही मजा आता है” अब की बार चाचू ने कहा और अपनी बाँहों में पकड़ी नंगी नेहा को अपने सीने से दबा दिया और आगे बोले ” और मुझे लगता है की आपको भी एक बार ये सब ट्राई करना चाहिए”
मम्मी ने अपने सर को एक झटका दिया और कहा “मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रहा है, मैं सोने जा रही हूँ, इस बारे में कल बात करेंगे”
“ठीक है बाय …” चाची ने उनसे कहा
“बाय का क्या मतलब है…तुम लोग नहीं जा रहे क्या अपने कमरे में” मम्मी ने हैरानी से पूछा.
“नहीं अभी मुझे कुछ और भी काम है ” और चाची ने हाथ बढाकर मेरे लंड को थाम लिया और दुसरे हाथ से अपनी चूत मसलने लगी.
“आरती…बंद करो ये सब” मम्मी चिल्लाई.
“अरे भाभी आप यहाँ आओ और थोडा relax करो” चाचू आगे आये और मम्मी का हाथ पकड़कर बेड पर बिठा दिया उनका झूलता हुआ लंड उनकी आँखों के सामने लटक रहा था, चाचू ने उनका मुंह पकड़ा और अपना लंड उनके मुंह में ठूस दिया और उन्हें नीचे धक्का देकर बेड पर लिटा दिया और खुद उनकी छाती पर चढ़ बैठे.
“अब चुपचाप लेटी रहो और मेरा लंड चुसो…”चाचू ने मम्मी की आँखों में देखकर कहा. और आरती की तरफ देखकर बोले “डार्लिंग…मेरी थोड़ी मदद करो न…”
“हाँ हाँ क्यों नहीं ..” चाची अपनी जगह से उठी और बेड के किनारे आकर मम्मी के नाईट गाउन को खींच कर बीच में से खोल दिया, उन्होंने नीचे कुछ नहीं पहना था, और उनकी मोटी जांघे पकड़कर रसीली चूत पर अपना मुंह रख दिया.मम्मी के मुंह में चाचू का लंड था पर फिर भी उनके मुंह से घुटी हुई सी सिसकारी निकल गयी…आआआआअह्ह्ह्ह.
चाचू का लम्बा लंड मम्मी के मुंह में किसी पिस्टन की तरह आ जा रहा था, नीचे बैठी चाची भी अपनी लम्बी जीभ के झाड़ू से मम्मी की चूत की सफाई करने में लगी हुई थी. चाचू ने मम्मी के ऊपर बैठे हुए उनके गाउन के बटन खोल दिए और मम्मी के मोटे चुचे ढलक कर दोनों तरफ झूल गए.
उन्होंने उसे मम्मी के कंधो से थोड़ी मुश्किल से उतारा और बाकी काम नीचे बैठी चाची ने कर दिया, उन्होंने उनकी गांड ऊपर करके उसे नीचे से बाहर खींच दिया और इस तरह मम्मी हमारे सामने पूरी नंगी हो गयी.
उन्हें इतनी पास से नंगा देखने का ये मेरा पहला अवसर था, वो किसी professional की तरह चाचू के लंड को आँखें बंद किये चूस रही थी, उनकी चूत से इतना रस बह रहा था की चाची उसे पी ही नहीं पा रही थी और वो बहकर मम्मी की गांड को भी गीला कर रहा था.उनके मोटे-२ चुचे देखकर मेरे मुंह में भी पानी आ गया, मैंने उनके चुचे हमेशा अपने मुंह में लेने चाहे थे, घर में भी जब वो बिना चुन्नी के घुमती थी तो मेरा मन उनकी गोलाइयाँ देखकर पागल हो जाता था. और अब जब वो मेरे सामने नंगे पड़े थे, मेरा लंड उन्हें देखकर तन कर खड़ा हो गया था, मैंने अपने हाथ से उसे मसलना शुरू कर दिया.
ऋतू ने इशारा करके पापा को अपनी तरफ बुलाया, वो थोडा झिझकते हुए उसके पास आये और हम सबके साथ आकर खड़े हो गए, ऋतू ने अपना हाथ उनकी कमर में लपेट दिया और उनसे सट कर खड़ी हो गयी, पापा थोडा असहज महसूस कर रहे थे, हो भी क्यों न उनकी जवान लड़की नंगी जो खड़ी थी उनसे चिपककर..
हम सभी की नजर मम्मी पर गडी हुई थी, मेरी देखा देखी पापा ने भी अपना पायजामा नीचे गिरा दिया और अपनी पत्नी को अपने भाई और उसकी पत्नी के द्वारा चुद्ता हुआ देखकर वो भी अपना लंड हिलाने लगे, उनका मोटा लंड देखकर ऋतू की आँखों में एक चमक आ गयी, वो अपने पापा के लंड को काफी दिनों से देख रही थी और मन ही मन उनसे चुदना भी चाहती थी, आज उन्हें अपने साथ खड़ा होकर हिलाते देखकर उससे सहन नहीं हुआ और उसने झुक कर अपने पापा का लंड अपने मुंह में भर लिया..
पापा के मुंह से एक ठंडी सिसकारी निकल गयी…स्स्सस्स्स्सस्स्स आआआआआअह्ह्ह
उन्होंने अपना हाथ हटा लिया, अपने सामने बैठी अपनी नंगी बेटी को देखकर उनका लंड फुफकारने लगा और वो तेजी से उसका मुंह चोदने लगे…
आआआआआआआआह्ह्ह्ह …..उन्होंने अपनी आँखें बंद करी और एक तेज आवाज निकाली.
ऋतू उठ खड़ी हुई और पापा के लंड को पकड़कर आगे की तरफ चल पड़ी, बेड पर पहुंचकर उसने पापा को नीचे लिटाया और उनकी कमर के दोनों तरफ टाँगे चोडी करके बैठ गयी, और उनकी आँखों में देखकर अपनी चूत का निशाना उनके लंड पर लगाया….और बोली…पापा प्लीस …चोदो मुझे..और उसने अपने मोटे चूतडो का बोझ पापा के लंड के ऊपर डाल दिया.
उनका मोटा लंड अपनी बेटी की चूत में ऐसे गया जैसे मक्खन में गर्म छुरी.. आआआआआअह्ह ऋतू ने एक तेज सीत्कारी ली…….उसकी आवाज सुनकर मम्मी ने अपनी आँखें खोली और पास लेते अपने पति को अपनी बेटी की चूत मारते हुए देखा और फिर उन्होंने भी मौके की नजाकत समझी और अपनी आँखें बंद करके चाचू का लंड चूसने में मस्त हो गयी.
पापा और मम्मी ने जब एक दुसरे को देखा तो वो समझ गए की अब अपने आपको रोकना व्यर्थ है इसलिए इन हसीं पलों के मजे लो, और जब मम्मी ने आँखें बंद करली तो पापा ने अपना ध्यान ऋतू की तरफ लगा दिया, उन्होंने अपने हाथ ऊपर उठाये और ऋतू के झूलते हुए मुम्मे अपने हाथों में भर लिए, वो हमेशा घर पर अपनी बेटी के ब्रा में कैद और टाईट टी शर्ट में बंद इन्ही कबूतरों को देखकर मचलते रहते थे, आज ये दोनों रस कलश उनके हाथ में थे, उन्होंने अपना मुंह ऊपर उठाया और उन कलशो से रस का पान करने लगे, उनके मोटे -२ होंठ और मूंछे ऋतू के नाजुक निप्पलस पर चुभ रहे थे, पर उनका एहसास बड़ा ही मजेदार था, उसने अपने पापा के सर के नीचे हाथ करके अपनी छाती पर दबा दिया और अपना चुचा उनके मुंह में ठुसने की कोशिश करने लगी, पापा ने अपना मुंह पूरा खोल दिया और ऋतू का आधे से ज्यादा स्तन उनके मुंह के अन्दर चला गया, उनका मुंह अपनी बेटी के चुचे से पूरा भर गया, और फिर जब उन्होंने अपनी जीभ अन्दर से उसपर घुमानी शुरू की तो ऋतू तो जैसे पागल ही हो गयी, इतना मजा आजतक उसे नहीं आया था, नीचे से पापा का लम्बा लंड उसकी चूत की प्यास बुझा रहा था और ऊपर से पापा उसका दूध पीकर अपनी प्यास बुझा रहे थे.
चाची अपनी जगह से उठी और अपनी चूत को मम्मी के मुंह के ऊपर लेजाकर रगड़ने लगी, चाचू मम्मी के मुंह से नीचे उतर गए और उनके उतरते ही अपनी जवानी की आग में तड़पती हुई नेहा उनपर झपट पड़ी और उनके होंठ अपने मुंह में दबाकर नीचे चित्त लिटा दिया और चाचू का लंड अपनी चूत पर टीकाकार उसे अन्दर ले लिया.
मैंने मम्मी की चूत के ऊपर अपना मुंह रखा और उसे चाटने लगा, मम्मी को शायद पता चल गया था की मैं उनकी चूत चूस रहा हूँ, उन्होंने उत्तेजना के मारे अपने चुतद ऊपर उठा दिया, मैंने नीचे हाथ करके उनके चौड़े पुट्ठे पकडे और अपनी दो उँगलियाँ उनकी गांड के अन्दर डाल दी और अपनी लम्बी जीभ उनकी चूत के अन्दर..
आआआआआआआआआआआआआआआआह्ह्ह्ह मम्मी मचल उठी इस दोहरे हमले से…
मैं उठा और अपना लंड उनकी चूत के छेद पर टिका दिया, आज मैं उसी छेद के अन्दर अपना लंड डाल रहा था जहाँ से मैं निकला था…मेरे लंड का स्पर्श अपनी चूत पर पाकर मम्मी तो बिफर ही पड़ी उन्होंने अपने चुतद फिर से ऊपर उठाय और मेरा पूरा लंड उनकी चूत के अन्दर समाता चला गया..
आआआआअह उनके मोअन की हलकी आवाजें चाची की चूत से छनकर मुझे सुने दे रही थी…
मैंने अपनी स्पीड बड़ा दी और मैं तेजी से अपनी माँ की चूत मारने लगा..
उधर ऋतू अपने आखिरी पड़ाव पर थी, वो पापा के लंड के ऊपर उछलती हुई बडबडा रही थी…. आआआअह्ह्ह चोदो मुझे पापा…अपने प्यारे लंड से ….फाड़ डालो अपनी बेटी की चूत इस डंडे से….चोदो न….जोर से….आआआह्ह्ह बेटी चोद सुनता नहीं क्या तेज मार…भोंसडीके ….कुत्ते…बेटिचोद….चोद जल्दी जल्दी….आआआआआह्ह ……डाल अपना मुसल मेरी चूत के अन्दर तक….अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ……और तेज और तेज और तेज…….आआआअह्ह्ह हाँ ऐसे ही…..भेन्चोद….चोद…अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह…और पापा से अपनी बेटी के ये प्यारे शब्द बर्दाश्त नहीं हुए और उन्होंने अपना रस अपनी छोटी सी बेटी की चूत के अन्दर उड़ेल दिया….ऋतू भी पापा के साथ-२ झड़ने लगी…
ऋतू को देखकर नेहा को भी जोश आ गया….वो भी चिल्लाने लगी चाचू के लंड पर कूदकर…हननं डेडी…चोदो अपनी बेटी को…देखो ऋतू को अंकल कैसे चोद रहे है,….वैसे ही चोदो अपनी लाडली को…डालो अपना लंड मेरी चूत के अन्दर तक….ahhhhhhhhhhhh ……दाआअलूऊऊऊऊओ …..और वो भी चाचू के साथ-२ झड़ने लगी..
उन्होंने उसे मम्मी के कंधो से थोड़ी मुश्किल से उतारा और बाकी काम नीचे बैठी चाची ने कर दिया, उन्होंने उनकी गांड ऊपर करके उसे नीचे से बाहर खींच दिया और इस तरह मम्मी हमारे सामने पूरी नंगी हो गयी.
उन्हें इतनी पास से नंगा देखने का ये मेरा पहला अवसर था, वो किसी professional की तरह चाचू के लंड को आँखें बंद किये चूस रही थी, उनकी चूत से इतना रस बह रहा था की चाची उसे पी ही नहीं पा रही थी और वो बहकर मम्मी की गांड को भी गीला कर रहा था.उनके मोटे-२ चुचे देखकर मेरे मुंह में भी पानी आ गया, मैंने उनके चुचे हमेशा अपने मुंह में लेने चाहे थे, घर में भी जब वो बिना चुन्नी के घुमती थी तो मेरा मन उनकी गोलाइयाँ देखकर पागल हो जाता था. और अब जब वो मेरे सामने नंगे पड़े थे, मेरा लंड उन्हें देखकर तन कर खड़ा हो गया था, मैंने अपने हाथ से उसे मसलना शुरू कर दिया.
ऋतू ने इशारा करके पापा को अपनी तरफ बुलाया, वो थोडा झिझकते हुए उसके पास आये और हम सबके साथ आकर खड़े हो गए, ऋतू ने अपना हाथ उनकी कमर में लपेट दिया और उनसे सट कर खड़ी हो गयी, पापा थोडा असहज महसूस कर रहे थे, हो भी क्यों न उनकी जवान लड़की नंगी जो खड़ी थी उनसे चिपककर..
हम सभी की नजर मम्मी पर गडी हुई थी, मेरी देखा देखी पापा ने भी अपना पायजामा नीचे गिरा दिया और अपनी पत्नी को अपने भाई और उसकी पत्नी के द्वारा चुद्ता हुआ देखकर वो भी अपना लंड हिलाने लगे, उनका मोटा लंड देखकर ऋतू की आँखों में एक चमक आ गयी, वो अपने पापा के लंड को काफी दिनों से देख रही थी और मन ही मन उनसे चुदना भी चाहती थी, आज उन्हें अपने साथ खड़ा होकर हिलाते देखकर उससे सहन नहीं हुआ और उसने झुक कर अपने पापा का लंड अपने मुंह में भर लिया..
पापा के मुंह से एक ठंडी सिसकारी निकल गयी…स्स्सस्स्स्सस्स्स आआआआआअह्ह्ह
उन्होंने अपना हाथ हटा लिया, अपने सामने बैठी अपनी नंगी बेटी को देखकर उनका लंड फुफकारने लगा और वो तेजी से उसका मुंह चोदने लगे…
आआआआआआआआह्ह्ह्ह …..उन्होंने अपनी आँखें बंद करी और एक तेज आवाज निकाली.
ऋतू उठ खड़ी हुई और पापा के लंड को पकड़कर आगे की तरफ चल पड़ी, बेड पर पहुंचकर उसने पापा को नीचे लिटाया और उनकी कमर के दोनों तरफ टाँगे चोडी करके बैठ गयी, और उनकी आँखों में देखकर अपनी चूत का निशाना उनके लंड पर लगाया….और बोली…पापा प्लीस …चोदो मुझे..और उसने अपने मोटे चूतडो का बोझ पापा के लंड के ऊपर डाल दिया.
उनका मोटा लंड अपनी बेटी की चूत में ऐसे गया जैसे मक्खन में गर्म छुरी.. आआआआआअह्ह ऋतू ने एक तेज सीत्कारी ली…….उसकी आवाज सुनकर मम्मी ने अपनी आँखें खोली और पास लेते अपने पति को अपनी बेटी की चूत मारते हुए देखा और फिर उन्होंने भी मौके की नजाकत समझी और अपनी आँखें बंद करके चाचू का लंड चूसने में मस्त हो गयी.
पापा और मम्मी ने जब एक दुसरे को देखा तो वो समझ गए की अब अपने आपको रोकना व्यर्थ है इसलिए इन हसीं पलों के मजे लो, और जब मम्मी ने आँखें बंद करली तो पापा ने अपना ध्यान ऋतू की तरफ लगा दिया, उन्होंने अपने हाथ ऊपर उठाये और ऋतू के झूलते हुए मुम्मे अपने हाथों में भर लिए, वो हमेशा घर पर अपनी बेटी के ब्रा में कैद और टाईट टी शर्ट में बंद इन्ही कबूतरों को देखकर मचलते रहते थे, आज ये दोनों रस कलश उनके हाथ में थे, उन्होंने अपना मुंह ऊपर उठाया और उन कलशो से रस का पान करने लगे, उनके मोटे -२ होंठ और मूंछे ऋतू के नाजुक निप्पलस पर चुभ रहे थे, पर उनका एहसास बड़ा ही मजेदार था, उसने अपने पापा के सर के नीचे हाथ करके अपनी छाती पर दबा दिया और अपना चुचा उनके मुंह में ठुसने की कोशिश करने लगी, पापा ने अपना मुंह पूरा खोल दिया और ऋतू का आधे से ज्यादा स्तन उनके मुंह के अन्दर चला गया, उनका मुंह अपनी बेटी के चुचे से पूरा भर गया, और फिर जब उन्होंने अपनी जीभ अन्दर से उसपर घुमानी शुरू की तो ऋतू तो जैसे पागल ही हो गयी, इतना मजा आजतक उसे नहीं आया था, नीचे से पापा का लम्बा लंड उसकी चूत की प्यास बुझा रहा था और ऊपर से पापा उसका दूध पीकर अपनी प्यास बुझा रहे थे.
चाची अपनी जगह से उठी और अपनी चूत को मम्मी के मुंह के ऊपर लेजाकर रगड़ने लगी, चाचू मम्मी के मुंह से नीचे उतर गए और उनके उतरते ही अपनी जवानी की आग में तड़पती हुई नेहा उनपर झपट पड़ी और उनके होंठ अपने मुंह में दबाकर नीचे चित्त लिटा दिया और चाचू का लंड अपनी चूत पर टीकाकार उसे अन्दर ले लिया.
मैंने मम्मी की चूत के ऊपर अपना मुंह रखा और उसे चाटने लगा, मम्मी को शायद पता चल गया था की मैं उनकी चूत चूस रहा हूँ, उन्होंने उत्तेजना के मारे अपने चुतद ऊपर उठा दिया, मैंने नीचे हाथ करके उनके चौड़े पुट्ठे पकडे और अपनी दो उँगलियाँ उनकी गांड के अन्दर डाल दी और अपनी लम्बी जीभ उनकी चूत के अन्दर..
आआआआआआआआआआआआआआआआह्ह्ह्ह मम्मी मचल उठी इस दोहरे हमले से…
मैं उठा और अपना लंड उनकी चूत के छेद पर टिका दिया, आज मैं उसी छेद के अन्दर अपना लंड डाल रहा था जहाँ से मैं निकला था…मेरे लंड का स्पर्श अपनी चूत पर पाकर मम्मी तो बिफर ही पड़ी उन्होंने अपने चुतद फिर से ऊपर उठाय और मेरा पूरा लंड उनकी चूत के अन्दर समाता चला गया..
आआआआअह उनके मोअन की हलकी आवाजें चाची की चूत से छनकर मुझे सुने दे रही थी…
मैंने अपनी स्पीड बड़ा दी और मैं तेजी से अपनी माँ की चूत मारने लगा..
उधर ऋतू अपने आखिरी पड़ाव पर थी, वो पापा के लंड के ऊपर उछलती हुई बडबडा रही थी…. आआआअह्ह्ह चोदो मुझे पापा…अपने प्यारे लंड से ….फाड़ डालो अपनी बेटी की चूत इस डंडे से….चोदो न….जोर से….आआआह्ह्ह बेटी चोद सुनता नहीं क्या तेज मार…भोंसडीके ….कुत्ते…बेटिचोद….चोद जल्दी जल्दी….आआआआआह्ह ……डाल अपना मुसल मेरी चूत के अन्दर तक….अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ……और तेज और तेज और तेज…….आआआअह्ह्ह हाँ ऐसे ही…..भेन्चोद….चोद…अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह…और पापा से अपनी बेटी के ये प्यारे शब्द बर्दाश्त नहीं हुए और उन्होंने अपना रस अपनी छोटी सी बेटी की चूत के अन्दर उड़ेल दिया….ऋतू भी पापा के साथ-२ झड़ने लगी…
ऋतू को देखकर नेहा को भी जोश आ गया….वो भी चिल्लाने लगी चाचू के लंड पर कूदकर…हननं डेडी…चोदो अपनी बेटी को…देखो ऋतू को अंकल कैसे चोद रहे है,….वैसे ही चोदो अपनी लाडली को…डालो अपना लंड मेरी चूत के अन्दर तक….ahhhhhhhhhhhh ……दाआअलूऊऊऊऊओ …..और वो भी चाचू के साथ-२ झड़ने लगी..
ऋतू पापा के लंड से नीचे उतरी और उसे अपने मुंह में लेकर चूसने लगी, चाची जो अपनी चूत मम्मी से चुसवा रही थी, उन्होंने अपना सर आगे किया और ऋतू की चूत से टपकते पापा के रस को पीने लगी, मेरे लिए भी अब सब्र करना कठिन हो गया था, मैंने भी एक-दो तेज झटके मारे और अपना पानी मम्मी की चूत के अन्दर छोड दिया…मम्मी ने अपने अन्दर मेरे गर्म पानी के बहाव को महसूस किया और वो भी जोर से चिल्ला कर झड़ने लगी.आआआआआआआआआआअह्ह्ह्ह आआआआआ अह अह अ अ हहा ह अ ह हा हा हा ……..मैंने अपना लंड बाहर निकाला और ऋतू जो पापा के लंड से उतर चुकी थी आगे आई और मम्मी की चूत से मेरा रस पीने लगी, अपनी चूत पर अपनी बेटी का मुंह पाकर मम्मी की चूत के अन्दर एक और हलचल होने लगी…उन्होंने उसके सर को पकड़ कर अपनी चूत पर दबा दिया और उसकी टाँगे खींचकर अपने मुंह के ऊपर कर ली और उसकी चूत से अपने पति का वीर्य चाटने लगी, ऋतू की चूत को मम्मी बड़े चाव से खा रही थी, थोड़ी ही देर में उनकी चूत में दबी वो आखिरी चिंगारी भी भड़क उठी और दोनों एक-दुसरे के मुंह में अपना रस छोड़ने लगी.
“ये कितने अच्छे बच्चे हैं…” चाची ने हम तीनो बच्चो की तरफ हाथ करके कहा.. वो हमारी पर्फोर्मांस से काफी खुश थी.
“ये कुछ ज्यादा ही हो गया…” मम्मी ने बेड से उठते हुए कहा.
“क्या आपको ये सब अच्छा नहीं लगा मम्मी” ऋतू ने उनसे पूछा.
“हम्म्म्म हाँ अच्छा तो लगा…पर ये सब एकदम से हुआ…मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रहा है..” उन्होंने धीरे से कहा.
“पर हमें तो बड़ा मजा आया, क्या आपको मेरी चूत को चुसना अच्छा नहीं लगा…मेरी तो इतने दिनों की इच्छा पूरी हो गयी पापा के लंड से अपनी चूत मरवाकर…कितना मजा आया उनका मोटा लंड लेने में…क्या आपको नहीं आया भैय्या का लंड अपनी चूत में लेनेमें….बोलो..” ऋतू ने उनसे सवाल किया.
सबकी नजरें मम्मी की तरफ उठ गयी..
उसने पापा से पूछा “और पापा क्या आपको मेरी चूत पसंद नहीं आई…”
उन दोनों को चुप देखकर चाची ने कहा “अरे…अब आप दोनों ऐसे क्यों शर्मा रहे हैं…आप दोनों को अपने बच्चो के साथ सेक्स करने मं मजा आया है तो इस बात को कबूल करने में इतना झिझक क्यों रहे हो..हमने भी तो अपनी बेटी नेहा को इस खेल में शामिल किया है, और उसकी चूत चूसने में मुझे तो बड़ा मजा आता है और उसके पापा भी कल से अपनी बेटी की कसी हुई चूत का बार बार तारीफ़ कर रहे हैं….”
“चलो ठीक है…अब हमें अपने कमरे में चलना चाहिए” मम्मी ने कहा.
“अरे. भाभी मूड़ मत खराब करो…अभी तो मजा आना शुरू हुआ है…अभी तो पूरी रात पड़ी है..” चाची ने कहा.
साली इस चाची के बदन में आग लगी है, पूरी रात चुदवाने की तय्यारी से आई थी हरामजादी..मैंने मन ही मन सोचा.
“नहीं…अब और नहीं..चलो तुम दोनों अब चुपचाप सो जाओ…और आरती-अजय .. प्लीस.. आप भी चलो यहाँ से..” मम्मी ने कहा.
हम सबने उनकी बात को मानना उचित समझा और अपने बेड पर जाकर रजाई के अन्दर घुस गए.
“चलो ठीक है..तुम कहती हो तो चलते हैं..चलो अजय अपने रूम में जाकर हम दोनों ही आपस में चुदाई करते हैं…” और चाची हमारे पास आकर हमें गुड नाईट बोली और मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर मसल दिया..और बोली “काफी मजा आया..कल मिलते हैं”
सबके जाने के बाद हम तीनो अपने बेड पर नंगे रजाई में बैठे हंस रहे थे,
ऋतू बोली “मुझे विशवास ही नहीं हो रहा है की हमने अपने मम्मी पापा के साथ भी चुदाई की..और इतना सब होने के बाद भी उन लोगो ने हमें फिर से इस कमरे में छोड दिया हा हा हा ….”
“और मैं सच कहूं तो तुम्हारे मम्मी पापा को भी काफी मजा आया होगा, वो अभी खुलकर नहीं बता रहे हैं पर तुम दोनों से सेक्स करके वो भी कम खुश नहीं थे…” नेहा ने अपने चूत को मेरी टांगो पर दबाते हुए कहा.
ऋतू ने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़कर कहा “तो क्या तुम्हारा ये लंड अभी भी कुछ कारनामे दिखाने के मूड में है क्या…”
“मेरे लंड के कारनामे देखना चाहते हो तो उसे तैयार करो और फिर मैं तुम दोनों को दिखाता हूँ की चुदाई क्या होती है” मैंने उन्हें उकसाया..
“ओह….माय माय…..लगता है किसी को अपने लंड पर कुछ ज्यादा ही गुरुर हो गया है….” ऋतू ने अपनी आँखें मटकाते हुए नेहा की तरफ देखा और फिर वो दोनों एक साथ बोली “और गुरुर तोडना पड़ेगा हा हा हा” और फिर जो चुदाई का खेल शुरू हुआ तो उनकी चूत के परखचे ही उड़ गए…उस रात मैंने ऋतू और नेहा की कितनीबार चुदाई की, मुझे खुद ही नहीं मालुम..और वो दोनों बेचारी अपनी सूजी हुई चूत लेकर नंगी ही मुझसे लिपटकर सो गयी.
उधर अपने कमरे में पहुंचकर चाची ने शीशे वाली जगह पर ही खड़े होकर चाचू से लगभग तीन या चार बार अपनी चूत मरवाई…दुसरे कमरे में अपनी बेटी और अपनी भतीजी को मुझसे चुदते हुए देखकर..
“ये कितने अच्छे बच्चे हैं…” चाची ने हम तीनो बच्चो की तरफ हाथ करके कहा.. वो हमारी पर्फोर्मांस से काफी खुश थी.
“ये कुछ ज्यादा ही हो गया…” मम्मी ने बेड से उठते हुए कहा.
“क्या आपको ये सब अच्छा नहीं लगा मम्मी” ऋतू ने उनसे पूछा.
“हम्म्म्म हाँ अच्छा तो लगा…पर ये सब एकदम से हुआ…मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रहा है..” उन्होंने धीरे से कहा.
“पर हमें तो बड़ा मजा आया, क्या आपको मेरी चूत को चुसना अच्छा नहीं लगा…मेरी तो इतने दिनों की इच्छा पूरी हो गयी पापा के लंड से अपनी चूत मरवाकर…कितना मजा आया उनका मोटा लंड लेने में…क्या आपको नहीं आया भैय्या का लंड अपनी चूत में लेनेमें….बोलो..” ऋतू ने उनसे सवाल किया.
सबकी नजरें मम्मी की तरफ उठ गयी..
उसने पापा से पूछा “और पापा क्या आपको मेरी चूत पसंद नहीं आई…”
उन दोनों को चुप देखकर चाची ने कहा “अरे…अब आप दोनों ऐसे क्यों शर्मा रहे हैं…आप दोनों को अपने बच्चो के साथ सेक्स करने मं मजा आया है तो इस बात को कबूल करने में इतना झिझक क्यों रहे हो..हमने भी तो अपनी बेटी नेहा को इस खेल में शामिल किया है, और उसकी चूत चूसने में मुझे तो बड़ा मजा आता है और उसके पापा भी कल से अपनी बेटी की कसी हुई चूत का बार बार तारीफ़ कर रहे हैं….”
“चलो ठीक है…अब हमें अपने कमरे में चलना चाहिए” मम्मी ने कहा.
“अरे. भाभी मूड़ मत खराब करो…अभी तो मजा आना शुरू हुआ है…अभी तो पूरी रात पड़ी है..” चाची ने कहा.
साली इस चाची के बदन में आग लगी है, पूरी रात चुदवाने की तय्यारी से आई थी हरामजादी..मैंने मन ही मन सोचा.
“नहीं…अब और नहीं..चलो तुम दोनों अब चुपचाप सो जाओ…और आरती-अजय .. प्लीस.. आप भी चलो यहाँ से..” मम्मी ने कहा.
हम सबने उनकी बात को मानना उचित समझा और अपने बेड पर जाकर रजाई के अन्दर घुस गए.
“चलो ठीक है..तुम कहती हो तो चलते हैं..चलो अजय अपने रूम में जाकर हम दोनों ही आपस में चुदाई करते हैं…” और चाची हमारे पास आकर हमें गुड नाईट बोली और मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर मसल दिया..और बोली “काफी मजा आया..कल मिलते हैं”
सबके जाने के बाद हम तीनो अपने बेड पर नंगे रजाई में बैठे हंस रहे थे,
ऋतू बोली “मुझे विशवास ही नहीं हो रहा है की हमने अपने मम्मी पापा के साथ भी चुदाई की..और इतना सब होने के बाद भी उन लोगो ने हमें फिर से इस कमरे में छोड दिया हा हा हा ….”
“और मैं सच कहूं तो तुम्हारे मम्मी पापा को भी काफी मजा आया होगा, वो अभी खुलकर नहीं बता रहे हैं पर तुम दोनों से सेक्स करके वो भी कम खुश नहीं थे…” नेहा ने अपने चूत को मेरी टांगो पर दबाते हुए कहा.
ऋतू ने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़कर कहा “तो क्या तुम्हारा ये लंड अभी भी कुछ कारनामे दिखाने के मूड में है क्या…”
“मेरे लंड के कारनामे देखना चाहते हो तो उसे तैयार करो और फिर मैं तुम दोनों को दिखाता हूँ की चुदाई क्या होती है” मैंने उन्हें उकसाया..
“ओह….माय माय…..लगता है किसी को अपने लंड पर कुछ ज्यादा ही गुरुर हो गया है….” ऋतू ने अपनी आँखें मटकाते हुए नेहा की तरफ देखा और फिर वो दोनों एक साथ बोली “और गुरुर तोडना पड़ेगा हा हा हा” और फिर जो चुदाई का खेल शुरू हुआ तो उनकी चूत के परखचे ही उड़ गए…उस रात मैंने ऋतू और नेहा की कितनीबार चुदाई की, मुझे खुद ही नहीं मालुम..और वो दोनों बेचारी अपनी सूजी हुई चूत लेकर नंगी ही मुझसे लिपटकर सो गयी.
उधर अपने कमरे में पहुंचकर चाची ने शीशे वाली जगह पर ही खड़े होकर चाचू से लगभग तीन या चार बार अपनी चूत मरवाई…दुसरे कमरे में अपनी बेटी और अपनी भतीजी को मुझसे चुदते हुए देखकर..

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