लंड के कारनामे – फॅमिली सागा – Update 42

लंड के कारनामे - फॅमिली सागा - Incest Sex Story
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रात को प्रोग्राम शुरू होने के बीस मिनट बाद वो सभी थोड़ी-२ देर में उठे और बाहर आकर एक जगह इकठ्ठा हो गए. रेहान बड़ा फुदक रहा था, वो जानता था की अगर मेरी बात सच हुई तो उसके तो मजे हैं और अगर झूठ निकली तो मेरी बेईसती देखने को तो मिलेगी ही..
मैंने उन्हें समझाया की हमें बिलकुल चुपचाप रहना होगा, अगर जरा सी भी आहट हुई तो सारा खेल बिगड़ जाएगा.
हम सभी उनके कॉटेज में पहुंचे और बिना किसी आहट किये मोनी और सोनी के बेडरूम में चले गए, मैंने देख लिया था की उनके साथ वाले बेडरूम से रौशनी आ रही है, यानी वहां पक्का कोई खेल चल रहा है.
अन्दर जाने के बाद सोनी मेरे बिलकुल सामने खड़ी हो गयी और अपनी छाती ऊपर नीचे करते हुए मुझे देखने लगी और बोली “अब बताओ…क्या कह रहे थे तुम..?”
मैं आगे बड़ा और शीशा हटा कर दुसरे कमरे में देखा, मेरा अनुमान सही था. वहां दो औरतें 69 की अवस्था में एक दुसरे की चूत चाट रही थी, मैंने गौर से देखा तो पाया , ये तो वोही कल वाली आंटी मंजू थी, जिसकी काफी मोटी गांड थी, पर आज वो किसी और जोड़े के साथ थे, और उनके पास बैठे दो आदमी अपने लंड हाथों में पकड़ कर मसल रहे थे और उन्हें देख रहे थे,, एक तो वोही कल वाला आदमी यानी मंजू का पति और सोनी, मोनी का बाप था दूसरा कोई नया आदमी था, मैंने सोनी को कहा “ओके..यहाँ आओ और देखो”
वो उस शीशे के हटते ही आश्चर्यचकित रह गयी की ऐसी जगह उनके कमरे में हैं जहाँ से दुसरे कमरे में देखा जा सकता है, और अगर है भी तो मैं ये कैसे जानता हूँ, पर उसने सोचा ये बाद में देखेंगे अभी तो दुसरे कमरे में क्या है वो देखा जाये..ये सोचकर जैसे ही वो आगे आई और अन्दर देखा तो उसके हाव भाव ही बदल गए, उसका मुंह खुला का खुला रह गया.
मोनी जो अपनी बहन का चेहरा देखते ही समझ गयी थी की अन्दर क्या हो रहा है, झट से आगे आई और उसे पीछे करके अन्दर देखने लगी, सोनी ने उसे रोकने की कोशिश की पर तब तक देर हो चुकी थी..
मोनी ने अन्दर देखा और वो बोली “वाउ …..तुम सच कह रहे थे…”
सोनी ने उससे कहा “मोनी तुम पीछे हट जाओ, तुम्हे ये सब नहीं देखना चाहिये..”
मोनी : “अरे..सोनी देख तो , मम्मी कैसे इंदु आंटी की टांगो के बीच में उनकी चूत चाट रही है….और शर्मा अंकल और पापा कैसे अपने हाथों में अपना लंड लेकर मसल रहे हैं, कितने बड़े हैं दोनों के…” वो देखे जा रही थी और धीरे-२ बोले जा रही थी.
अपनी बहन के मुंह से लंड और चूत जैसे शब्द सुनकर स्तब्ध रह गयी, पर कुछ ना बोली…
“अरे देखो सोनी, पापा अब अपना लंड इंदु आंटी की चूत में डाल रहे हैं….वो….और मम्मी भी शर्मा अंकल को लिटा कर उनके ऊपर चढ़ गयी है और उनका लंड अपनी चूत में ले कर उछल रही है..”
उनकी बातें सुनकर वो चोदु रेहान आगे आया और मोनी को साइड करके खुद देखने लगा, अन्दर का नंगा नाच देखकर उसने अपनी जींस के ऊपर से ही अपना लंड मसलना शुरू कर दिया..
“ये सब कितने मजे कर रहे हैं, उनके चेहरे देख कर लगता है की वो इन सबमे खुश हैं, कितनी सफाई से वो एक दुसरे से प्यार कर रहे है…” रेहान ने कहा.
“हाँ …ये सब खुश हैं और इन्हें मजे भी आ रहे हैं, तभी तो इस वक़्त सभी पेरेंट्स अपने-२ कॉटेज में यही कर रहे हैं..” मैं उनसे कहा.
“ये तुम क्या कह रहे हो…सभी पेरेंट्स यही कर रहे हैं ? ” सोनी ने आश्चर्य से मेरी तरफ देखते हुए कहा.
“हाँ..सभी पेरेंट्स…अगर तुम मेरे साथ आओ तो मैं तुम्हे दिखा भी सकता हूँ” मैंने उसे कहा.
“क्या सच में…मैं तो जरूर देखना चाहूंगी …” मोनी ने मचलते हुए कहा.
“चलो फिर मेरे साथ…तुम ये सब रोज देख सकते हो अगर तुम चाहो तो..” मैंने उनसे कहा और हम सब बाहर की तरफ चल दिए.
मैंने बाहर आकर देखा और एक और कॉटेज में, जहाँ से लाइट बाहर आ रही थी, चले गए, वहां भी हम सभी चुप चाप अन्दर गए, अन्दर आकर मैंने शीशा हटाया और अन्दर देखा. वासना का नंगा नाच चल रहा था, तीन जोड़े थे वहां पर..सभी एक दुसरे की मारने में लगे हुए थे. मोनी ने मुझे पीछे किया और अन्दर देखने लगी.
“अरे…देख तो सोनी..ये आंटी कैसे अपनी चूत में उस अंकल का लंड ले रही है और दुसरे अंकल उनकी गांड में लंड डाल रहे हैं, और वो आंटी कितने मजे से आँखें बंद करके मजे से चीख रही है…” वो बुदबुदाये जा रही थी और अन्दर का हाल बताये जा रही थी, अन्दर का नजारा, सोनी, मोनी, रेहान, नेहा और रितु ने भी देखा..
मैंने नोट किया की मोनी अन्दर का नजारा देख कर काफी खुश हो रही है, पर जब मैंने सोनी की तरफ ध्यान दिया तो पाया की वो अपनी जींस के ऊपर से अपनी चूत को रगड़ रही है, उससे कण्ट्रोल नहीं हो पा रहा था, मैं समझ गया को अब इसके कपडे उतारने में ज्यादा समय नहीं लगेगा.
और वो चोदु रेहान तो अपनी लार टपका -२ कर ऐसे देख रहा था की अभी दीवार फाड़ कर दुसरे कमरे में घुस जाएगा और चुदाई में शामिल हो जाएगा. घूमकर जब वो मेरी बहन ऋतू को अपनी चुदासी नजरों से देखता तो मेरा खून खोल उठता..पर इस समय मेरा ध्यान इन दो कमसिन लड़कियों, सोनी और मोनी, पर था.
“चलो अब आगे चलते हैं, एक और कॉटेज देखते हैं” मैंने उनसे कहा.

हम सब बाहर निकल आये और इस बार मैं उन्हें अपने कॉटेज में ले आया और अपने रूम में आकर मैंने शीशा हटाया और अन्दर देखा, वहां मम्मी और चाची नीचे जमीन पर बैठी हुई पापा और अजय चाचू का लंड चूस रही थी, और एक हाथ से अपनी-२ चूत भी मसल रही थी, मम्मी खड़ी हुई और चाचू की गोद में चढ़ कर अपनी टाँगे हवा में लटका दी और उनका मोटा और खड़ा हुआ लंड उनकी गीली चूत में उतरता चला गया, आआआआआआआआआआआआआह…वहां से मेरी माँ की तेज आवाज आई, आवाज सुनकर सोनी आगे आई और मेरे आगे आकर अन्दर देखने लगी.
मैंने आगे बढकर उसके कंधे पर सर टिका दिया और उसकी उभरती हुई गांड पर अपने लंड का दबाव डाल दिया और कहा “ये हमारे पेरेंट्स है..”
वो विस्मय से मुझे देखकर बोली “ये क्या कह रहे हो…सही में…? कोनसे वाले..?”
“वो जो गोद में चढ़ कर मजे ले रही है वो मेरी माँ है, और जो उनकी मार रहा है वो मेरे चाचू है, और वो नीचे मेरी चाची मेरे पापा का लंड मुंह में लेकर चूस रही है..” मैंने उसके कानो से अपने होंठ सटाते हुए कहा, मेरे होंठो का स्पर्श अपने कानों पर पाकर वो सिहर उठी.
“क्या उन्हें मालुम है की तुम इस तरह उन्हें देखते हो” उसने आगे पूछा
“उन्हें तो नहीं, पर चाचू और चाची को पता है”
“और वो गुस्सा नहीं हुए इस बात पर”
“नहीं..बल्कि ये जानने के बाद तो वो दोनों हमारे कमरे में आये और हमने भी एक दुसरे के साथ मजे किये”
“तुम मजाक तो नहीं कर रहे हो…तुम्हारे सगे चाचा चाची ने तुम दोनों के साथ ये सब किया”
“हम दोनों के साथ ही नहीं, उन्होंने अपनी बेटी के साथ भी चुदाई की” मैंने नेहा की तरफ इशारा किया, नेहा मुस्कुरा दी.
बाप ने बेटी की चुदाई की, ये बात सुनते ही सोनी के दिमाग में एक बिजली सी कौंध गयी और उसके जहन में अपने कमरे से देखा वो नजारा तैर गया जहाँ उसके पापा अपना मोटा लंड अपने हाथ में लेकर मसल रहे थे. उसका एक हाथ बरबस ही अपनी चूत पर चला गया और वो उसे मसलने लगी.
मैंने भी मौके का फायदा उठाया और उसके मोटे चूतडो पर अपना एक हाथ टिका दिया, और मसल दिया, उसने मुझे अर्थपूर्ण नजरों से देखा पर कुछ कहा नहीं.
मोनी जो काफी देर से अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रही थी, आगे आई और अन्दर देखने लगी, रेहान भी उसके साथ-२ देखने लगा.
“पर वो तो बड़े लोग हैं, उनकी उम्र 35 -45 के आसपास होगी, वो ये सब एकदूसरे से करते है, उन्हें तुम लोगो में और तुम्हे उन लोगो में क्या मजा आया होगा.” सोनी ने मुझसे कहा.
“सभी को एक दुसरे से मजा आता है, हर व्यस्क अपने से छोटी उम्र वाले के साथ चुदाई करना चाहता है और हर टीनएजर बड़ी उम्र वाले के साथ, और मैं शर्त लगा कर कह सकता हूँ की तुम्हारे मम्मी पापा के साथ भी मैं ये सब कर सकता हूँ और वो ख़ुशी-२ कर भी लेंगे.” मैंने उसकी आँखों में देखकर कहा.
“मैं ये मान ही नहीं सकती…” उसने दृढ़ता से कहा.
“हाँ जैसे तुम वो बात नहीं मान रही थी की तूम्हारे पेरेंट्स ग्रुप सेक्स करते हैं” मैंने उसका जवाब दिया.
मैंने आगे कहा “चलो लगी शर्त…अगर मैंने आज रात उनके साथ ये कर लिया तो तुम्हे कल रात यही सब मेरे साथ करना होगा.”
“क्या बकवास है…इसका सवाल ही नहीं उठता” उसने मुझे घूरते हुए कहा.
मोनी ने बीच में बोलते हुए कहा “सोनी, अगर तुम्हे इतना ही विशवास है अपने ऊपर की मम्मी पापा इसके साथ ये सब नहीं करेंगे तो शर्त लगाने में क्या प्रॉब्लम है…और अगर वो कर लेते हैं तो हमें भी तो कुछ मजे लेने का अधिकार है के नहीं..”उसकी जवानी मचल रही थी.
कुछ देर सोचने के बाद सोनी ने कहा “ठीक है…जैसा तुम कहो”
“चलो फिर…चलें यहाँ से..” मैंने उनसे कहा और हम सभी बाहर निकल आये.
बाहर आकर मैं वापिस सोनी और मोनी के कॉटेज के अन्दर गया और शीशा हटा कर अन्दर देखा, वहां अभी तक वही चुदाई का प्रोग्राम चल रहा था.
“इधर आओ और मुझे बताओ, तुम्हारे मम्मी पापा कोन से है” मैं जानता तो था पर कन्फर्म कर रहा था.
“वो जो नीचे जमीन पर बैठी लंड चूस रही है वो मेरी मम्मी है और वो जो पलंग पर उस आंटी की गांड मार रहे हैं वो मेरे पापा हैं” सोनी ने मुझसे कहा.
“ठीक है, तुम सब यहाँ वेट करो, अन्दर मैं और ऋतू ही जायेंगे” मैंने ऋतू को इशारा किया, उसकी तो चूत पिछले 1 घंटे से सुलग रही थी, अलग-२ तरह के लंड और चुदाई देखकर, मेरा इशारा पाते ही वो मेरे पीछे चल पड़ी.
मैं और ऋतू घूमकर बाहर आये और मैंने धीरे से ऋतू के कान में अपना प्लान समझाया, और फिर हम दोनों ने जल्दी से अपने-२ कपडे उतार दिए और नंगे हो गए, मैंने दरवाजा खोला और हम दोनों अन्दर आ गए.

सोनी की मम्मी, मंजू, जो शर्मा जी का लंड चूस रही थी, उसकी नजर हम दोनों नंगे भाई-बहन पर पड़ी और वो बोखला गयी और उसने लोडा चुसना छोड़ दिया और बोली “ये क्या है…कौन हो तुम दोनों और यहाँ क्या कर रहे हो..?”
“हमने सुना था की यहाँ कोई पार्टी चल रही है तो हमने सोचा की हमें भी चलना चाहिये..” मैंने उनकी आँखों में देखकर कहा.
“तुम यहाँ से फ़ौरन चले जाओ, बच्चे …नहीं तो मैं तुम्हारे पेरेंट्स को बता दूंगी..” उसने थोडा गुस्से में कहा.
“मुझे लगता है की आपको हमें इस पार्टी में शामिल कर लेना चाहिए नहीं तो हम इस सबके बारे में सोनी और मोनी को बता देंगे..” मैंने हँसते हुए कहा.
मंजू आंटी थोडा घबरा गयी और दूसरी औरत की तरफ देखने लगी. वो समझ गयी की मैं उनके बारे मैं सब जानता हूँ. शर्मा आंटी जो ये सब देख रही थी बोली “तुम आखिर चाहते क्या हो ?”
“ये हुई न काम की बात…” मैंने कहा “मैं तुम्हारी चूत चाटना चाहता हूँ”
“और मैं आपका लंड चुसना चाहती हूँ ” ऋतू अपने मोटे-२ चुचे उछालती हुई सोनी-मोनी के पापा, पंकज की तरफ बड़ी.
“पर ये गलत है…” मंजू की आवाज आई
“अगर ऐसा है तो पहले मैं आपकी चूत चूस देता हूँ” मैंने कहा और अपना मुंह उनकी गीली चूत पर रख दिया, वो अभी ना कर रही थी पर मेरा मुंह उनकी चूत पर लगते ही उन्होंने मेरे सर को अपनी चूत पर और तेजी से दबा दिया और अपने मुंह से एक तेज सिसकारी निकाली.. आआआआयीईईईईईइ ………mmmmm………………..
उधर सोनी के पापा अपनी तरफ आती एक जवान लड़की को देखकर पागल ही हो गए, ऋतू के उछालते हुए चुचे और रस टपकाती चूत को देखकर उनसे रहा नहीं गया और वो शर्मा आंटी को छोड़ कर ऋतू की तरफ लपके और उसे किसी छोटे बच्चे की तरह ऊपर उठा लिया और अपना मुंह सीधा ऋतू के निप्पल पर रख कर उसका दूध पीने लगे…ऋतू के मुंह से चीख निकल गयी… आआआआआआअह्ह्ह्ह अंकल धेरीईईईईई ……आआआआआअह्ह्ह
पंकज अंकल का हाथ ऋतू की गांड के नीचे था और ऋतू उनका मुंह अपने सीने में दबा रही थी और उन्हें और ज्यादा दूध पीने को उकसा रही थी.
मैंने जब मंजू आंटी की चूत चाटना शुरू की तो उनके रस से मेरा मुंह भीग गया, वो बड़ी रसीली आंटी थी, थोड़ी देर में ही उन्होंने मुझे नीचे जमीन पर लिटाया और अपनी टाँगे मेरे सर के दोनों तरफ फैला कर मेरे मुंह के ऊपर बैठ गयी. और घिसने लगी अपनी चूत मेरे मुंह पर और तेज साँसों से सिस्कारियां लेने लगी..
शर्मा आंटी भी अपनी जगह से उठी और मेरे खड़े हुए लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी, उनके चूसने के तरीके की दाद देनी होगी, वो मेरा लंड किसी बच्चे की तरह चूस रही थी, वो सिर्फ अपने होंठो और जीभ का इस्तेमाल कर रही थी, बड़ा ही गर्म मुंह था उनका, उन्होंने अपना एक हाथ आगे किया और मेरे मुंह पर बैठी मंजू आंटी की गांड में एक साथ दो उंगलियाँ डाल दी और दुसरे हाथ से वो अपनी चूत मसलने लगी.
अपनी गांड पर शर्मा आंटी की उंगलियाँ पाकर वो तो बिफर ही गयी, मंजू आंटी ने अपनी चूत को मेरे मुंह के अन्दर तक ठूस दिया, मेरा सांस लेना भी मुश्किल हो गया, बड़ी मुश्किल से मैंने उनकी चूत को अपने मुंह से निकाला.
आआआआआआआआआआआह्ह्ह्ह चुसो नाआआआआआआआआआआआ वो चिल्लाई….
मैंने उसी तेजी से उनकी चूत को चुसना शुरू कर दिया.
उधर शर्मा अंकल ऋतू के पीछे गए और पीछे से उसके दोनों उभार थाम लिए और बड़ी जोर से दबा डाले, ऋतू दर्द के मारे दोहरी होगई और अपने पीछे खड़े शर्मा अंकल पर अपनी पीठ का भार डालकर उनके गले में अपने बाहें डाली और उनके होठों को अपनी तरफ घुमाकर चूसने लगी.
शर्मा अंकल के तो मजे हो गए, उन्होंने इतनी गर्म लड़की आज तक नहीं देखी थी, जो किसी जंगली बिल्ली की तरह उनके होंठ चूस रही थी, उन्होंने ऋतू के निप्पल्स को अपनी उँगलियों में लेकर हलके-२ मसलना शुरू कर दिया, वो निप्पल्स ऋतू की कमजोरी थे, उनके उमेठे जाने से उसकी चूत में आग सी लग गयी और उसने अपनी टाँगे, जो पंकज अंकल की कमर के चारो तरफ लपेट रखी थी, उनका घेरा थोडा खोला और उनके तने हुए लंड पर पहुँच कर अपनी चूत उसपर टिका दी, बाकी काम उनके आठ इंच लम्बे लंड ने कर दिया और वो उसकी गर्म चूत को चीरता हुआ अन्दर तक चला गया…ऋतू जो शर्मा अंकल का होंठ चूस रही थी, चिल्ला पड़ी…आआआआआआआअह्ह्ह्ह ….मर गयीईईईईईईईईई ……. हय्य्यय्य्य्यय्य्य्य……….आआआआआआआअह ….
उसकी चीख इतनी तेज थी की मैंने भी मंजू आंटी की चूत चुसना छोड़ दी और उस तरफ देखा, पर जब उसे हवा में मजे से चुदते हुए देखा तो मैंने फिर से अपना ध्यान सोनी – मोनी की माँ की चूत पर लगा दिया.

अपनी गांड में शर्मा आंटी की उँगलियाँ और अपनी चूत पर मेरी जीभ का हमला पाकर, मंजू भी झड़ने के कगार पर पहुँच गयी और उन्होंने अपनी चूत के रस को मेरे मुंह में उड़ेल दिया और झड़ने लगी…………
आआआआआह्ह्ह मैं तो गयीईईईईईईईईईईईई……..
नीचे बैठी शर्मा आंटी ने मौका देखा और मेरे लंड पर अपनी चूत को टिका दिया और नीचे होती चली गयी…आआआआआआआआआआआआअह्ह्ह्ह………..
शर्मा अंकल ने जब देखा की पंकज ने ऋतू की चूत में लंड डाल दिया है तो उन्होंने भी अपने मोटे लंड पर थूक लगायी और हवा में झूल रही ऋतू की मोटी गांड पर अपने लंड का टोपा टिका दिया, लंड थोडा मोटा था, पर ऋतू जो उछल -२ कर पंकज का लंड ले रही थी, अपनी गांड में आये नए मेहमान को पाकर एक तेज झटके नीचे आई और से उसे भी निगल गयी, और इस तरह वो अब एक साथ पंकज अंकल और शर्मा अंकल के लंड को अपनी चूत और गांड में लेकर हवा में उछल-२ कर चुदवा रही थी.
झटके से ऊपर जाती और नीचे आते हुए अपनी चूत और गांड में दो अलग-२ लंड लेकर बैठ जाती, उसे आज बड़ा मजा आ रहा था, एक साथ अपनी चूत और गांड मरवाने मैं..
आआआआअ ह अह अह अह अह हा ह अह आहा अह आहा वो लम्बी-२ सिस्कारियां ले रही थी….उसकी गांड बड़ी कसाव वाली थी, इतना कसाव शर्मा अंकल से सेहन नहीं हुआ और उन्होंने अपने लंड का रस उसकी छोटी सी गांड में उडेलना शुरू कर दिया…
आआआआआआआआह्ह्ह्ह …….मजा आ गया………………..
आगे की तरफ, अपने मुंह पर ऋतू के उछलते हुए मुम्मो की मार पाकर और अपने लंड पर उसकी गरम चूत का दबाव पाकर, पंकज अंकल भी खल्लास होने लगे….उन्होंने उसके दाए चुचे को अपने मुंह में दबाया और अपना फुवारा उसकी चूत में चला दिया….आगे और पीछे से अपने दोनों छेदों में गर्म पानी पाकर ऋतू भी झड़ने लगी और उसने भी छोड़ दीया…आआआआआआआआआआआआआअयीईईईईई ………….आआआआआआआआआअह्ह्ह्ह
ओई माआआआआआअ……………ओह godddddddddddddddddddddddddd……
मेरे लंड के ऊपर शर्मा आंटी बड़ी देर तक उछलती रही और अंत में वो भी झड गयी और एक तरफ लुडक गयी, मेरा लंड अभी भी खड़ा हुआ था, मंजू आंटी जो अब थोडा संभल चुकी थी वो उठी और उन्होंने अपनी गांड को हवा में उठाया और मेरी तरफ मुंह करके बोली…”चल घुसा दे…जहाँ तेरी मर्जी हो..”
मैंने उनकी मोटी गांड देखी तो मैंने अपना मुंह उनकी गांड के छेद पर लगा दिया और अपनी जीभ से उनके पीछे वाले छेद को कुरेदने लगा, उनकी गांड बड़ी दिलकश थी, मैंने पहले ही बताया था की मैंने इतनी सुन्दर गांड आज तक नहीं देखीती, इसलिए मैंने सोच लिया की आज मैं उनकी गांड ही मारूंगा, मैंने अपने हाथों से उनके छेद को फैलाया और उनकी गांड के रिंग में अपनी लम्बी जीभ डाल दी, उन्होंने अपनी गांड के अन्दर मेरी गर्म जीभ पाकर अपना कसाव बढाया जिससे मेरी जीभ उनकी गांड के अन्दर फंस सी गयी, मैंने उसे बाहर निकाला और अपने लंड पर उनकी चूत की चिनाई और थोड़ी थूक लगायी और डाल दिया गांड के छेद के अन्दर….वो बड़ी टाईट थी, मेरा लंड उनकी गांड के छेद से काफी मोटा था..
आआआआआआआआआआआह्ह्ह माआर दलाआआआआआआआआ …आआआआआआआआयीईईईईइ….
वो बिलबिला उठी पर मैंने उनकी गांड को नहीं बक्शा और अपना पूरा लंड उतार दिया उनके अन्दर…..
“थोडा धीरे बेटा, इनका पीछे के छेद का उदघाटन अभी दो दिन पहले ही हुआ है, अपनी शादी के २० साल तक इसने अपनी गांड नहीं मरवाई थी …”पीछे से उनके पति, पंकज की आवाज आई.
मैं उनके दर्द का कारण समझ गया, पर उनकी चीखे सुनकर मुझे बड़ा मजा आ रहा था, इसलिए मैंने अपनी स्पीड कम करने के बजाये और तेज कर दी….
आआआआअह उन्हें भी मजा आने लगा…और तेज…और तेज…आआआआअह्ह और तेज मारो मेरी गांड……..अहः अह अह अ हा हा हा हः अह अहः हा आहा ह ………..उनकी गर्म गांड और तेज चीखों ने मेरे लंड के पसीने छुड़ा दिए और मैंने अपना पसीना उनकी गांड में छोड़ना शुरू कर दिया….आआआआआआआआआअह्ह मैंने एक लम्बी हुंकार भरी और मंजू आंटी की पीठ पर लुढ़क गया.
वो भी दोबारा झड चुकी थी.
सेक्स का नंगा नाच ख़तम हुआ तो मैंने उनसे कहा “अब हमें चलना चाहिए, हमारे मम्मी-पापा हमें ढूँढ रहे होंगे..” और हम बाहर निकले और अपने-२ कपडे पहन कर सीधे बाहर निकल गए, हमारे पीछे-२ रेहान भी बाहर निकल आया और अपने कॉटेज में चला गया.

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