लंड के कारनामे – फॅमिली सागा – Update 31

लंड के कारनामे - फॅमिली सागा - Incest Sex Story
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दोनों औरतें काफी मोटी और भरी छाती वाली थी, एक की गांड तो इतनी बड़ी थी की मैं भी हैरान रह गया, वो एक आदमी का लंड चूस रही थी, दूसरी उसकी चूत चाट रही थी और उसकी गांड दूसरा आदमी मार रहा था, पुरे कमरे में सिस्कारियां गूंज रही थी, मैंने जींस से अपना लंड बाहर निकला और मुठ मारना शुरू कर दिया, जो औरत लंड चूस रही थी, वो उठी और मेरी तरफ अपनी मोटी सी गांड करके कुतिया वाले आसन में बैठ गयी, वो आदमी पीछे से आया और अपना थूक से भीगा हुआ लंड उसकी चूत में डाल दिया, दूसरी औरत भी उठी और उसके साथ ही उसी आसन मैं बैठ गयी, और दुसरे आदमी ने अपना मोटा काला लंड उसकी गांड में पेल दिया, दोनो ने एक दुसरे को देखा और ऊपर हाथ करके हाई 5 किया , और एक आदमी दुसरे से बोला “यार तू सही कह रहा था, तेरी बीबी मंजू की गांड काफी टाईट है हा हा”
दुसरे ने जवाब दिया “और तेरी बीबी की चूत भी कम नहीं है, शशि भाभी की मोटी गांड को मारने के बाद इनकी चूत में भी काफी मजा आ रहा है” और दोनों हंसने लगे.
मैंने गौर किया की उनकी बीबियाँ, मंजू और शशि, भी उनकी बातें सुनकर मुस्कुरा रही है…मैंने ये सोचकर की वो दोनों कितने मजे से एक दुसरे की बीबीयों की गांड और चूत मार रहे है, अपने हाथों की स्पीड बड़ा दी. वहां चर्मोस्तर पर पहुँच कर मंजू और शशि की चीख निकली और यहाँ मेरे लंड से गाडा-२ वीर्य उस दीवार पर……
मैंने अपना लंड अन्दर डाला और बाहर निकल गया.
मैंने वापिस पहुँच कर ऋतू को इशारे से बाहर बुलाया, उसे भी प्रोग्राम में मजा नहीं आ रहा था, बाहर आकर मैंने ऋतू को सारी बात बताई.
वो मेरी बात सुन कर हैरान हो गयी, उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था की मैं ऐसे किसी और कॉटेज में घुस गया पर जब चुदाई की बात सुनी तो वो भी काफी अक्साईटेड हो गयी, मैंने उसे अपना प्लान बताया, मैंने कहा की यहाँ कुछ ही लोग अपने बच्चे साथ लाये है, बाकी फैमिलीज़ अकेली हैं, और रोज शाम को प्रोग्रामे के बहाने से बच्चो को बाहर निकाल कर वो अपने रूम में ओर्गी कर सकते है, मैंने उसे कहा की हम रोज किसी भी रूम में घुसकर देखेंगे की वहां क्या हो रहा है, और अगर इस खेल को और भी मजेदार बनाना है तो कुछ और बच्चो को भी इसमें शामिल कर लेते हैं.
ये सब तय करने के बाद हम दोनों वापिस अपने रूम की तरफ आ गए, नेहा वहीँ प्रोग्राम में बैठी थी, अन्दर आकर हमने नोट किया की अजय चाचू के रूम की लाइट जल रही है, मेरे चेहरे पर मुस्कान दौड़ गयी, और हम चुपके से अपने रूम में घुस गए.
शीशा हटाकर देखा तो वासना का वोही नंगा नाच चल रहा था, आरती चाची और मेरी माँ पूर्णिमा नंगी लेटी हुई एक दुसरे को फ्रेंच किस कर रही थी, मेरी माँ की गांड हवा में थी जबकि चाची पीठ के बल लेती हुई अपनी टाँगे ऊपर करे, मेरे पापा का मुसल अपनी चूत में पिलवा रही थी…
मैने ऋतू के कान में कहा “देखो तो साली आरती चाची कैसे चुद्दकड़ औरत की तरह अपनी चूत मरवा रही है …कमीनी कहीं की…कैसे हमारे बाप का लंड अपनी चूत में लेकर हमारी माँ के होंठ चूस रही है कुतिया….”

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