नेहा पास गयी और अन्दर देखने लगी, अन्दर देखते ही उसके तो होश ही उड़ गए, उसके मम्मी पापा हमारे मम्मी पापा यानि उसके ताऊ और ताई जी के साथ नंगे एक ही पलंग पर लेते थे.अब तक दुसरे रूम में सेक्स का नया दौर शुरू हो चूका था.
मेरी माँ अब जमीन पर बैठी थी और नेहा के पापा का लम्बा लंड अपने मुंह में डाले किसी रंडी की तरह चूसने में लगी थी.
मेरे पापा भी आरती चाची को उल्टा करके उनकी गांड पर अपने होंठ चिपका दिए और उसमे से अपना वीर्य चूसने लगे.
ऋतू ने आगे आकर नेहा के कंधे पर अपना सर टिका दिया और वो भी दुसरे कमरे में देखने लगी. और नेहा के कान में फुसफुसाकर बोली : “देखो जरा हमारी फॅमिली को, तुम्हारे पापा मेरी माँ की चूत मारने के बाद अब उनके मुंह में लंड डाल रहे हैं और तुम्हारी माँ कैसे अपनी गांड मेरे पापा से चुसवा रही है, इसी गांड में थोड़ी देर पहले उनका मोटा लंड था.”
नेहा अपने छोटे से दिमाग में ये सब समाने की कोशिश कर रही थी की ये सब हो क्या रहा है.
उसकी उभरती जवानी में शायद ये पहला मौका था जब उसने इतने सारे नंगे लोग पहली बार देखे थे. मैंने नोट किया की नेहा का एक हाथ अपने आप उसकी चूत पर चला गया है.
“जब हमारे पेरेंट्स ये सब एक दुसरे के साथ खुल कर कर सकते हैं तो हम क्यों पीछे रहे” ऋतू ने अपना तर्क दिया.
“पर ये सब गलत है ” नेहा देखे जा रही थी और बुदबुदाये जा रही थी.
“क्या गलत है और क्या सही अभी पता चल जाएगा….” और ऋतू ने आगे बढकर मेरा मुरझाया हुआ लंड पकड़कर नेहा के हाथ में पकड़ा दिया. उसके पुरे शरीर में एक करंट सा लगा और उसने मेरा लंड छोड़ दिया और मुझे और ऋतू को हैरानी से देखने लगी.
“देखो मैं तुम्हे सिर्फ ये कहना चाहती हूँ की जैसे वहां वो सब और यहाँ हम दोनों मजे ले रहे हैं, क्यों न तुम भी वो ही मजे लो…” ऋतू बोली और फिर से मेरा उत्तेजित होता हुआ लंड उसके हाथ में दे दिया.
इस बार उसने लंड नहीं छोड़ा और उसके कोमल से हाथों में मेरा लंड फिर से अपने विकराल रूप में आ गया. उसका छोटा सा हाथ मेरे लम्बे और मोटे लंड को संभाल पाने में असमर्थ हो रहा था , उसने अपना दूसरा हाथ आगे किया और दोनों हाथों से उसे पकड़ लिया.
मैं समझ गया की वो मन ही मन ये सब करना चाहती है पर खुल के बोल नहीं पा रही है, अपनी तरफ से तो ये साबित कर रही है की इन्सेस्ट सेक्स बुरा है पर अपनी भावनाओ को रोक नहीं पा रही है.
ऋतू ने मुझे इशारा किया और मैंने आगे बढकर एक दम से उसके ठन्डे होंठो पर अपने गरम होंठ टिका दिए. उसकी आंखे किस करते ही फ़ैल गयी, पर फिर वो धीरे-२ मदहोशी के आलम में आकर बंद हो गयी.
मैंने इतने मुलायम होंठ आज तक नहीं चूमे थे..एकदम ठन्डे, मुलायम, मलाई की तरह. मैंने उन्हें चुसना और चाटना शुरू कर दिया, नेहा ने भी अपने आपको ढीला छोड़ दिया.
उसने भी मुझे किस करना शुरू किया, मैं समझ गया की वो स्कूल में किस करना तो सीख ही चुकी है, वो किसी एक्सपर्ट की तरह मुझे फ्रेंच किस कर रही थी, अपनी जीभ मेरे मुंह में डालकर, मेरी जीभ को चूस रही थी..
अब मेरे लंड पर उसके हाथों की सख्ती और बढ़ गयी थी. ऋतू नेहा के पीछे गयी और उसके मोटे-२ चुचे अपने हाथों में लेकर रगड़ने लगी. नेहा ने अपनी किस तोड़ी और अपनी गर्दन पीछे की तरफ झुका दी, मैंने अपनी जीभ निकाल कर उसकी लम्बी सुराहीदार गर्दन पर टिका दी, वो सिसक उठी…स्स्सस्स्स्सस्स्सम्मम्मम्म ………नाआआआअ …….
ऋतू की उँगलियों के बीच उसके निप्प्ल्स थे, नेहा मचल रही थी हम दोनों भाई बहिन के नंगे जिस्मो के बीच.
नेहा अपनी छोटो गांड पीछे करके उससे ऋतू की चूत दबा रही थी. नेहा ने आत्मसमर्पण कर दिया था. हम दोनों के आगे और अपनी उत्तेजना के सामने.
मेरी माँ अब जमीन पर बैठी थी और नेहा के पापा का लम्बा लंड अपने मुंह में डाले किसी रंडी की तरह चूसने में लगी थी.
मेरे पापा भी आरती चाची को उल्टा करके उनकी गांड पर अपने होंठ चिपका दिए और उसमे से अपना वीर्य चूसने लगे.
ऋतू ने आगे आकर नेहा के कंधे पर अपना सर टिका दिया और वो भी दुसरे कमरे में देखने लगी. और नेहा के कान में फुसफुसाकर बोली : “देखो जरा हमारी फॅमिली को, तुम्हारे पापा मेरी माँ की चूत मारने के बाद अब उनके मुंह में लंड डाल रहे हैं और तुम्हारी माँ कैसे अपनी गांड मेरे पापा से चुसवा रही है, इसी गांड में थोड़ी देर पहले उनका मोटा लंड था.”
नेहा अपने छोटे से दिमाग में ये सब समाने की कोशिश कर रही थी की ये सब हो क्या रहा है.
उसकी उभरती जवानी में शायद ये पहला मौका था जब उसने इतने सारे नंगे लोग पहली बार देखे थे. मैंने नोट किया की नेहा का एक हाथ अपने आप उसकी चूत पर चला गया है.
“जब हमारे पेरेंट्स ये सब एक दुसरे के साथ खुल कर कर सकते हैं तो हम क्यों पीछे रहे” ऋतू ने अपना तर्क दिया.
“पर ये सब गलत है ” नेहा देखे जा रही थी और बुदबुदाये जा रही थी.
“क्या गलत है और क्या सही अभी पता चल जाएगा….” और ऋतू ने आगे बढकर मेरा मुरझाया हुआ लंड पकड़कर नेहा के हाथ में पकड़ा दिया. उसके पुरे शरीर में एक करंट सा लगा और उसने मेरा लंड छोड़ दिया और मुझे और ऋतू को हैरानी से देखने लगी.
“देखो मैं तुम्हे सिर्फ ये कहना चाहती हूँ की जैसे वहां वो सब और यहाँ हम दोनों मजे ले रहे हैं, क्यों न तुम भी वो ही मजे लो…” ऋतू बोली और फिर से मेरा उत्तेजित होता हुआ लंड उसके हाथ में दे दिया.
इस बार उसने लंड नहीं छोड़ा और उसके कोमल से हाथों में मेरा लंड फिर से अपने विकराल रूप में आ गया. उसका छोटा सा हाथ मेरे लम्बे और मोटे लंड को संभाल पाने में असमर्थ हो रहा था , उसने अपना दूसरा हाथ आगे किया और दोनों हाथों से उसे पकड़ लिया.
मैं समझ गया की वो मन ही मन ये सब करना चाहती है पर खुल के बोल नहीं पा रही है, अपनी तरफ से तो ये साबित कर रही है की इन्सेस्ट सेक्स बुरा है पर अपनी भावनाओ को रोक नहीं पा रही है.
ऋतू ने मुझे इशारा किया और मैंने आगे बढकर एक दम से उसके ठन्डे होंठो पर अपने गरम होंठ टिका दिए. उसकी आंखे किस करते ही फ़ैल गयी, पर फिर वो धीरे-२ मदहोशी के आलम में आकर बंद हो गयी.
मैंने इतने मुलायम होंठ आज तक नहीं चूमे थे..एकदम ठन्डे, मुलायम, मलाई की तरह. मैंने उन्हें चुसना और चाटना शुरू कर दिया, नेहा ने भी अपने आपको ढीला छोड़ दिया.
उसने भी मुझे किस करना शुरू किया, मैं समझ गया की वो स्कूल में किस करना तो सीख ही चुकी है, वो किसी एक्सपर्ट की तरह मुझे फ्रेंच किस कर रही थी, अपनी जीभ मेरे मुंह में डालकर, मेरी जीभ को चूस रही थी..
अब मेरे लंड पर उसके हाथों की सख्ती और बढ़ गयी थी. ऋतू नेहा के पीछे गयी और उसके मोटे-२ चुचे अपने हाथों में लेकर रगड़ने लगी. नेहा ने अपनी किस तोड़ी और अपनी गर्दन पीछे की तरफ झुका दी, मैंने अपनी जीभ निकाल कर उसकी लम्बी सुराहीदार गर्दन पर टिका दी, वो सिसक उठी…स्स्सस्स्स्सस्स्सम्मम्मम्म ………नाआआआअ …….
ऋतू की उँगलियों के बीच उसके निप्प्ल्स थे, नेहा मचल रही थी हम दोनों भाई बहिन के नंगे जिस्मो के बीच.
नेहा अपनी छोटो गांड पीछे करके उससे ऋतू की चूत दबा रही थी. नेहा ने आत्मसमर्पण कर दिया था. हम दोनों के आगे और अपनी उत्तेजना के सामने.

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