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उसने अपने दुसरे हाथ से अपनी स्कर्ट उतार दी, नीचे उसने पेंटी नहीं पहनी थी, अब उसके गोल चुतड मेरे लंड के सुपाडे से टकरा रहे थे. वो उत्तेजना के मारे कांप रही थी, ऐसा मैंने पहली बार देखा था, वो थोडा झुकी और अपनी गांड को फैला कर अपने हाथ दीवार पर टिका कर खड़ी हो गयी, और मेरे लंड को पीछे से अपनी चूत पर टिका दिया….मैंने एक हल्का झटका मारा और मेरा पूरा लंड उसकी रसीली चूत में जा घुसा….mmmmmmmmmmmm……ऋतू ने अपनी ऑंखें बंद करली और पीछे होकर तेजी से धक्के मारने लगी, फिर तकरीबन 5 मिनट बाद अचानक उसने मेरा लंड निकाल दिया और उसे पकड़ कर अपनी गांड के छेद पर टिका दिया..
मैंने हैरानी से उसकी तरफ देखा…
“प्लीज़ ……..मेरी गांड में अपना लंड daaalooooo ” मेरी तो हिम्मत ही नहीं हुई उसे ना कहने की.
मैंने ऋतू की चूत के रस से भीगा हुआ अपना लंड उसकी गांड के छेद पर ठीक से लगाया और एक करारा झटका मारा, आआआआआआआअह्ह्ह्ह …….marrrrrrrrrrrrrrrrrrrr गयी………….मैंने उसके मुंह में अपनी उंगलियाँ डाल दी ताकि वो ज्यादा न चिल्ला पाए, वो उन्हें चूसने और काटने लगी. उसके मुंह की लार ने मेरी साड़ी उंगलियाँ गीली कर दी और मैंने वोही गीला हाथ उसके चेहरे पर मल कर उसे और ज्यादा उत्तेजित कर दिया.
मेरा आधे से ज्यादा लंड उसकी गांड में घुसा हुआ था, मैंने उसे बाहर निकाला और अगली बार और ज्यादा तेजी से अन्दर धकेल दिया….वो पहले झटके से उबर भी नहीं पायी थी की दुसरे ने तो उसकी गांड ही फाड़ दी..वो थोड़ी देर के लिए नम सी हो गयी, उसका शरीर एकदम ढीला हो गया और वो मेरे हाथों में लटक सी गयी…उसका ओर्गास्म हो चूका था.
वहां दुसरे रूम में पापा ने अपनी स्पीड बड़ा दी और जोर से हुंकारते हुए अपना टैंक आरती चाची की चूत में खाली कर दिया…
चाची अपनी मोटी गांड मटका-२ कर पापा का रस अन्दर ले रही थी, उनका चेहरा हमारी तरफ था, और वो अपने मुंह में अपनी उँगलियाँ डाले चूस रही थी,,,जैसे कोई लंड हो.
अजय चाचू भी लगभग झड़ने के करीब थे, उन्होंने एक झटके से मेरी माँ को ऊपर उठा लिया जैसे कोई गुडिया हो और खड़े-२ उन्हें चोदने लगे.
माँ ने अपने हाथ चाचू की गर्दन के चारो तरफ लपेट लिए थे और टांगे उनकी कमर पर.
तभी उन्होंने एक जोर का झटका दिया और अपने रोकेट जैसी वीर्य की धारें मेरी माँ की चूत में उछाल दी. माँ भी झड़ने लगी, हवा में लटकी हुई.
उनकी चूत में से चाचा का रस टपक कर नीचे गिर रहा था. चाचू के पैरों पर..
मैंने माँ को झड़ते देखा तो मेरा लंड भी जवाब दे गया और मैंने भी अपना वीर्य अपनी बहन की कोमल गांड में डाल दिया, अपने हाथ आगे करके उसके उभारों को पकड़ा और दबा दिया. ऋतू ने अपनी कमर सीधी करी और अपने एक हाथ को पीछे करके मेरे सर के पीछे लगाया और अपने होंठ मुझसे जोड़ दिया, मेरा लंड फिसल कर उसकी गुदाज गांड से बाहर आ गया और उसके पीछे-२ मेरा ढेर सारा रस भी बाहर निकल आया.
हम फ्रेंच किस कर रहे थे.
उसने ऑंखें खोली और अपनी नशीली आँखों से मुझे देखकर थैंक्स बोली….पर तभी पीछे देखकर वोही ऑंखें फैल कर चोडी हो गयी.
हमारी चचेरी बहन नेहा उठ चुकी थी और हमारी कामुकता का नंगा नाच ऑंखें फाड़े देख रही थी.
मैंने जब पीछे मुड कर देखा तो नेहा हम भाई बहन को नंगा देखकर हैरान हुई खड़ी थी, उसकी नजर मेरे लटकते हुए लंड पर ही थी.
मैंने अपने लंड को अपने हाथ से छिपाने की कोशिश की पर उसकी फैली हुई निगाहों से बच नहीं पाया
” ये तुम दोनों क्या कर रहे हो….?” नेहा ने हैरानी से पूछा
” तुम्हे क्या लगता है नेहा, हम लोग क्या कर रहे हैं” ऋतू ने बड़े बोल्ड तरीके से नंगी ही उसकी तरफ जाते हुए कहा.
मैं तो कुछ समझ ही नहीं पाया, की ऋतू ये क्या कह रही है और क्यों.
“मम्मउ झे sss लगता है की तुम….दोनो ssss …गन्दा काम कर रहे थे….” नेहा ने हकलाते हुए कहा.
ऋतू : “गंदे काम से तुम्हारा क्या मतलब है ..”
नेहा : “वोही जो शादीsss के बाद करतेsss है…” उसका हकलाना जारी था.
ऋतू : “तुम कैसे जानती हो की ये गन्दा काम है…शादी से पहले या बाद में, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, ये तो सभी करते है और खूब एन्जॉय करते हैं”
नेहा : “पर तुम दोनों तो भाई बहन हो, ये तो सिर्फ लवरस या पति पत्नी करते है”
ऋतू : “हम्म्म्म काफी कुछ मालुम है तुम्हे दुनिया के बारे में, अपने घर के बारे में भी कुछ मालुम है के नहीं”
नेहा :”क्या मतलब ??”
ऋतू : “यहाँ आओ और देखो यहाँ से..”
ऋतू ने उसे अपने पास बुलाया और ग्लास वाले एरिया से देखने को बोला.

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