उनका लंड अपने छोटे भाई की पत्नी जो बहु के सामान होती है की चूत मैं अन्दर बाहर हो रहा था. अब मुझे सब समझ आ रहा था, ये लोग हर साल यहाँ इकठ्ठा होते हैं और ओर्गी करते है, एक दुसरे की बीबी और पति से मजा लेते हैं, मैंने wife /husband स्वेपिंग के बारे में और ग्रुप सेक्स के बारे में सुना था, आज देख भी रहा था, पर मैंने ये कभी नहीं सोचा था की मैं ये सब अपने ही परिवार के साथ होते हुए देखूंगा.
मेरा लंड ये सब देखकर अकड़ कर दर्द करने लगा था, मैंने अपनी शोर्ट्स गिरा दी और अपने लंड को हाथों में लेकर, माँ की चूत पर अजय चाचा का चेहरा देखकर, हिलाने लगा.
उधर ऋतू के तो होश ही उड़ गए थे, अपने पापा का लम्बा, गोरा और जानदार लंड देखकर…पर जल्दी ही वो भी सब कुछ समझते हुए , हालात के मजे लेने लगी थी और उसका एक हाथ अपने आप ही अपनी चूत पर जा लगा और दूसरा हाथ घुमा कर मेरे लंड को पीछे से पकड़ लिया और मेरे से और ज्यादा चिपक गयी..
आशु देखो तो जरा, पापा का लंड कितना शानदार है…. वो था भी शानदार, चाचा के लंड जितना ही बड़ा …..पर गोरा चिट्टा.
चाची की चूत में मेरे पापा का लंड जाते ही वो गांड उछाल -२ कर चुदवाने लगी, पापा ने अपने हाथ उसके मोटे-२ चूचो पर टिका दिए और मसलने लगे, फिर थोडा झुके और उनके दायें चुचे पर अपने होंठ टिका दिए….मेरे आगे खड़ी ऋतू ऐसे बिहेव कर रही थी जैसे पापा वो सब उसके साथ कर रहे है, क्योंकि वो उनके ताल के साथ-२ अपनी गांड आगे पीछे कर रही थी और पापा द्वारा चाची के चुचे पर मुंह लगते ही वो भी सिहर उठी और अपनी चूत से हाथ हटाकर अपने निप्प्ल्स को उमेठने लगी, उसने एक झटके में अपनी टी शर्ट उतार दी और अब वो अपने आगे झूलते हुए मोटे-२ चूचो को एक-२ करके दबा रही थी और लम्बी -२ सिस्कारियां ले रही थी.
मैं समझ गया की उसको पापा का लंड पसंद आ गया है….जैसे मुझे मम्मी का बदन और उनकी चूत पसंद आ गयी है.
मम्मी ने अपनी ऑंखें खोली और उठ कर बैठ गयी, उसने अजय चाचा के चेहरे को पकड़ कर उठाया और बड़ी व्याकुलता से अपने होंठ उसके होंठो से चिपका दिए, फिर तो कामुकता का तांडव होने लगा बेड पर…अजय चाचू माँ के होंठ ऐसे चूस रहे थे जैसे उन्हें कच्चा ही चबा जायेंगे, उनके मुंह से तरह-२ की आवाजें आ रही थी, माँ ने चाचा के चेहरे पर लगे अपने रस को सफा चट कर दिया, उनकी घनी मूंछो से ढके होंठो को वो चबा रही थी, बीच-२ में उनकी मूंछो पर भी अपनी लम्बी जीभ फिरा रही थी, अजय से ये सब बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने माँ को दोबारा लिटा दिया और अपना तन्तनाता हुआ लंड पेल दिया गीली-२ चूत में..आआआआऐईईईइ marrrrrrrrrrr गयीईई …माँ धीरे से चिल्लाई…
aaaaaaaaaaammmm aurrrrrrrrrrrrrrrr jorrrrrrrrrrrrrr सीईईईईईईईई ajayyyyyyyyyyyyyy aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh
मेरा तो बुरा हाल हो रहा था अपनी माँ को चुदते हुए देखकर.
पापा भी अपनी पूरी स्पीड में थे. ऋतू की नजरें पापा के लंड से हटने का नाम ही नहीं ले रही थी. अचानक चाची ने पापा के लंड को अपनी चूत में से निकाल दिया और बेड पर उलटी हो कर कुतिया की तरह बैठ गयी..
पापा ने अपना चेहरा चाची की गांड से चिपका दिया, मैंने नोट किया की पापा आरती चाची की चूत नहीं गांड का छेद चाट रहे है….मेरी उत्तेजना अपनी चरम सीमा पर थी, पापा उठे और अपने लंड को चाची की गांड के छेद से सटाया और आगे की तरफ धक्का मारा..
चाची तो मजे के मारे दोहरी हो गयी….उसकी गांड में पापा का लंड फ़चाआअक की आवाज के साथ घुस गया. वो अब चाची की गांड मार रहे थे, दोनों के चेहरे देख कर यही लगता था की उन्हें इसमें चूत मारने से भी ज्यादा मजा आ रहा है.
ये देखकर ऋतू की सांसे तेज हो गयी और उसने अपने हाथों की गति मेरे लंड पर बड़ा दी और अपनी गांड को पीछे करके टक्कर मारने लगी.

