अध्याय 74
काजल शांत बैठी रही और मैं उसे देखता रहा ,जाने वो कौन दी दुनिया में थी और ना जाने मैं किस दुनिया में था…
मैं उसे अकेला छोड़कर जाने को मुड़ा ही था की मेरे पैरो से एक कुछ टकरा गया ,उस शांत वातावरण में वो आवज तेज हो गई थी ,
“कौन है ..”
काजल जैसे अपने विचारों के भवर से जगी होगी और तेजी से एक्टिव हो गई …
मैं भागने की कोशिस करता उससे पहले ही वो मेरे ऊपर पिस्तौल तान चुकी थी ,
“खबरदार जो एक भी कदम भी बढ़ाया तो ..”
मैं वही रुक गया ..और पीछे पलटा
मुझे देखते ही काजल ने अपने हाथ नीचे किया
“तुम यंहा पर ..”
“हम्म “
“चलो जो होना था हो चुका है ,अब जाओ यंहा से …”
काजल पीछे पटल गई थी
“काजल ,हम दोनो इसतरह दूर क्यो रह रहे है ,क्या तुम्हे पता नही की मैं तुम्हे कितना प्यार करता हु “
“जानती हु इसीलिए दूर हु ,कही तुम्हारा प्यार मेरी कमजोरी ना बन जाए…”
इतना ही बोलकर वो तेजी से वँहा से निकल गई थी …
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मैं होटल आया तो पूर्वी बहुत ही खुस दिख रही थी ,
“भइया जानते हो कौन आया है “
“कौन ..??”
“निशा दीदी “
वो उछली मैं भी उछल पड़ा…
मैं पूर्वी के साथ अपने कमरे में गया ,वँहा निशा डॉ चुतिया के साथ बैठी हुई थी ,और मुझे देखते ही मुझसे आकर लिपट गई …
हम दोनो ही रोने लगे थे
“कहा चली गई थी तू ,क्या तुझे मुझपर थोड़ा भी भरोसा नही था “
“जानती थी भइया की आप मुझे माफ कर दोगे लेकिन मैं डर गई थी “
मैं डॉ की ओर देखने लगा
“थैंक्स डॉ साहब इसे वापस लाने के लिए “
डॉ ने बस हा में अपना सर हिलाया
“मुझे शबनम ने बतलाया की ये गोवा में है और इसका एड्रेश दिया ,और मैं इसे समझने पहुच गया ,(ऐसे भी मेरा काम ही क्या रह गया है इस स्टोरी में )”
मैं हल्के से मुस्कुरा गया …
“काजल से भी मिलना था उसके अंतिम शिकार के लिए “
डॉ ने आराम से कहा …….
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डॉ ने काजल और निशा की मीटिंग फिक्स की थी साथ मैं और पूर्वी थी थे ,साथ ही शबनम और डॉ भी थे लेकिन वो दोनो थोड़ी देर बाद ही चले गए ताकि हम आरम से बात कर सके …
“मैं आपसे माफी मांगना चाहती हु भाभी “
निशा का बदला हुआ रूप देखकर सभी दंग थे …
“मुझे तुमसे कोई भी गीला नही है निशा “
काजल ने भी आराम से कहा
“तो फिर हम फिर से पहले जैसे रह सकते है ,मतलब मैं आप पूर्वी और भइया एक साथ “
अचानक ही मैंने अपने बहन में एक बचपना देखा ..
“नही निशा अभी और कुछ काम करना बाकी है “
“क्या फिर से चुदवाने जाओगी क्या किसी से “
निशा फिर से अचानक ही भड़क उठी ,उसके ऐसा कहने से सभी सकते में आ गए थे
“निशा ये क्या बोल रही हो तुम “
मैंने निशा को धमकाने के अंदाज में कहा
“क्या गलत कहा है भइया इसके बदले के चक्कर में हमारा पूरा परिवार बिखर गया ,आप को इतनी तकलीफ हुई ,पूर्वी का ….भइया इसे तो मैं जान से मार देती लेकिन क्या करू आप इससे इतना प्यार जो करते हो “
क्या गलत कहा था मेरी बहन ने ,उसकी आंखों में आंसू की बूंदे आ गई थी वही काजल भी फफक पड़ी थी ,और जाने लगी लेकिन पूर्वी ने उसे रोक लिया …
“निशा माफी मांग भाभी से ,ये क्या बतमीजी है ,जो हुआ वो हो चुका है “
पूर्वी की बात ने मानो आग में घी का काम कर दिया
“हा तू तो इस रांड का साथ देगी ही ना ,तुझे ही जो चुदने मिल रहा है मेरे भइया से ,याद रखना तुम दोनो ये मेरे है और जब तक तुम दोनो जिंदा रहोगी तब तक इन्हें खुसी नही मिलने वाली ,तुम दोनो को तो मैं मार कर ही रहूंगी “
मेरे लिए अब सहना मुश्किल था ,मैंने निशा को घुमाया और एक जोर का झापड़ उसके गाल में लगा दिया ..
जैसे एक तूफान शांत हो गया हो ……
निशा के चहरे में एक मुस्कान आ गई
“भइया आप भी इसका ही साथ दोगे,लेकिन इसके कारण ही आपकी जिंदगी बर्बाद हुई है और मैं इसे छोडूंगी नही …”
“वो पुरानी बाते है निशा बहन तुम “
“नही भइया आप इसे माफ कर सकते हो मैं नही “
निशा ने घूरकर फिर के उन दोनो को देखा और वँहा से निकल गई ,मैं उसके पीछे भागा लेकिन वो कार से दूर जा चुकी थी और नजरो से गायब ही हो गई …….

