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अध्याय 73
शबनम मेरी तपती हुई जिंदगी में एक पेड़ की छाया की तरह आयी थी ,मैं से अपने बांहो में लिए लेटा हुआ था ,उसके प्यार भरे दिल ने मुझे जो सुकून दिया था मानो जीवन उठापटक में एक गहरा चैन था ..

उसके पास होने से ही मुझे अजीब सी शांति मिलती थी ,हम दोनो ही अभी अभी प्यार के दरिया में नहा कर निकले थे ,वो अब भी सोई हुई थी और बहुत प्यारी लग रही थी ,मैं उसके चहरे को ही देखे जा रहा था …

उसके मोबाइल में एक मेसेज आया ,

स्क्रीन लॉक था लेकिन वाट्सअप का नोटिफिकेशन दिखा रहा था ,कुछ लाइने साफ दिख रही थी …

मेसेज काजल का था और बस इतना ही दिखा की ..

‘आजा तेरा भी तो दोषी है …”

मैं कुछ समझ नही पाया शायद और भी मेसेज किये होंगे जिसमे एक को मैं पड़ पा रहा था …

शबनम उठाने के बाद मेसेज को देखी और उसके चहरे का रंग बदल गया

“क्या हुआ???”

मैंने सवाल किया

“कुछ नही ..”

उसने चहरे के भाव को छुपाते हुए अपने चहरे में मुस्कान लायी …

स्वाभाविक सी बात थी की वो मुझसे कुछ छुपा रही थी मैंने भी उसे जोर नही दिया ,वो थोड़ी देर में ही तैयार होकर निकल पड़ी लेकिन साला मुझे तो पीछा करने की आदत पड़ी हुई थी ,तो मैं पीछे लग गया …

वो एक गोदाम में पहुची जो की सालो से बंद थी जरूर कुछ कांड होने वाला था ,

मैं लुक छुप कर देखना चाहता था जैसे मेरी आदत बन रही थी ,…

मैं चुप चाप कोई खिड़की देखने लगा ताकि अंदर देख सकू एक छोटा सा दरवाजा मुझे दिख गया जो की पीछे की ओर खुलता था ,मैं हल्के से अंदर आया तो वँहा कबाड़ का ढेर पाया ,अंदर कुछ आवाजे आ रही थी मैं उन बड़े बड़े कबाड़ बन चुके मशीनों में छुपता हुआ आगे बढ़ रहा था …

“बैठ इसमें “

काजल की तेज आवाज ने मेरा ध्यान खिंचा ,मैं उस ओर बढ़ गया..

“ये तुम मेरे और मेरे बेटे के साथ क्यो कर रही हो काजल ..”

खान की दर्द भरी आवाज मेरे कानो के पड़ी सामने देखा तो दंग ही रह गया क्योकि सामने काजल और शबनम दोनो ही खड़े हुए थे और साथ ही खान बहुत ही गंभीर अवस्था में खड़ा हुआ था ,उसे जिस कुर्सी पर काजल बैठने को कह रही थी उसमे ना मालूम कितनी सुइयां लगी हुई थी ,खान उसे देखकर ही कांप रहा था लेकिन काजल के हाथो में पिस्तौल था ,

“बैठ जा मादरचोद “

इसबार शबनम ने कहा

“तुम लोग ये क्यो कर रहे हो ,मेरे बेटे के जाने के बाद ऐसे भी मेरा जीना व्यर्थ हो चुका है,तुम सारी दौलत ले लो लेकिन मुझे अब मेरी बाकी की जिंदगी शांति से बिताने दो “

काजल जोरो से हँस पड़ी लेकिन साथ ही उसके लाल लाल आंखों में आंसू भी छलक उठा था …

“शांति के साथ …वाह …तुम्हारे कारण हमारे जीवन की शांति चली गई और तुम अपनी जिंदगी शांति से बिताने की बात कर रहे हो …”

“आखिर हो कौन तुम .और क्या चाहते हो .”

खान झल्ला गया था

“वो भी पता चल जाएगा “

उसने खान को जोर का धक्का दिया और वो कुर्सी में जा बैठा ,उसके मुह से दिल दहला देने वाली चीख निकली क्योकि सारे सुइयां अब उसके पिछवाड़े में जा गड़े थे,फर्श पर खून फुट पड़ा और तुरंत ही शबनम ने रश्सी उठाकर उसे बांध दिया था ,खान मानो दर्द से मर ही जाने वाला था,

“तू जानना चाहता है ना की हम कौन है तो सुन …..”

काजल कहती चली गई और खान की आंखे बड़ी होती गई …

“तुम मुझे मार ही क्यो नही डालती “

खान रोया

“ऐसे नही तेरे दोस्त को तो बहुत आराम की मौत नसीब हो गई वो तो मेरे हाथो से बच गया लेकिन अब तुझे ही उसका कोटा भी पूरा करना होगा …”

काजल ने एक इंगजेक्शन अपने पर्स से निकाला और खान को दे दिया

“तेरा शरीर 3 दिनों में अब धीरे धीरे गलेगा ,शबनम इसे उठा कर हॉस्पिटल में डाल दो ,जंहा इसका बेटा पड़ा हुआ है ,और हा याद रखना एक घंटे से पहले मत ले जाना..”

दोनो मिलकर उसे गाड़ी में डालने लगे

“रुको ,मेरी पूरी दौलत ले लो लेकिन मुझे छोड़ दो ..”

“तेरे पास है ही क्या …तेरी पूरी दौलत अब मेरे और शबनम के नाम हो चुकी है ,और जो तेरे नाम पर है भी वो बिजनेस ही पूरी तरह से डूब चुका है ,कर्ज में वो भी बिक ही जाएगा “

उसे डालने के बाद शबनम चली गई और काजल बस अकेले ही एक कोने में बैठ गई ,उसका चहरा बस शांत था कोई भी भाव उसमे दिखाई नही दे रहे थे ,इसी दिन के लिए उसने इतनी मेहनत की थी और ये इतनी जल्दी और इतने आराम से खत्म हो जाएगा उसने सोचा भी नही होगा …

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