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अध्याय 70
काजल की आंखे भयावह थी ,लाल आंखे जैसे शैतान हँस रहा हो ,लेकिन फिर कुछ बूंदे पानी की भी उनमे आ गई थी ,

मैं स्तब्ध सा उसे देख रहा था ,उसके चहरे में मुस्कान खिल गई थी लेकिन ये मुस्कान भी बहुत ही डरावनी थी लगा जैसे किसी शैतान का कोई शैतानी मकसद पूरा हो गया हो …

वो जाकर अपने कपड़े पहन रही थी की दरवाजे में दस्तक हुई,जब दरवाजा खोला गया तो सामने अंजू (हरिया की बीवी) थी …

अंजू पसीने से सनी हुई थी ,उसकी सांसे उखड़ी हुई थी ,चहरा पिला था जैसे बहुत डरी हुई हो और हाथ में चाय की प्याली थी..

काजल उसकी हालत देखते ही समझ चुकी थी की डाल में कुछ काला है ..

“क्या बात है अंजू”

उसने बहुत धीरे से कहा था लेकिन मुझे उसकी आवाज सुनाई दी ,

“मेडम वो ..वो “

वो इधर उधर देखने लगी

“अंदर आओ “

उसके अंदर आते ही काजल ने दरवाजा बंद कर लिया..

अंदर आते ही अंजू ने तुरत ही चाय की ट्रे रखी और बोल पड़ी

“मेडम देव साहब कल आये थे,मैंने देखा था ..ठाकुर और हरिया उसे बांध के इस कमरे में बंद कर दिए थे ..”

उसने कांच की तरफ इशारा किया ,काजल अजीब सी निगाहों से कांच की ओर देखने लगी

“पहले क्यो नही बताया “

काजल चीखी

“वो हरिया…”

अंजू कुछ बोल पाती इससे पहले ही काजल कमरे से बाहर जा चुकी थी ,

थोड़ी ही देर में मेरे कमरे का दरवाजा खुला और काजल और अंजू ने मिलकर मुझे खोल दिया ..

रात के मार और मानसिक शारीरिक मानसिक पीड़ा से मैं टूट चुका था ,और बहुत ही थक चुका था,जैसे ही मैं खड़ा हो पाया था मेरे गालो से एक जोर का हाथ पड़ा …

“क्या जरूरत थी तुम्हे यंहा आने की ,हमारे बीच अब बचा ही क्या है जो तुम यंहा आये थे ..”

काजल की चीख से मैं बुरी तरह से झेंपा

“ये क्या कर रही है मेडम साहब को पता चला तो “

हरिया की आवाज आयी ,अबतक सभी कमरे से बाहर आ चुके थे ,

हरिया अंजू को लाल लाल आंखों से देख रहा था

“मैं उसे सम्हाल लुंगी इसे जाने दो “

“मैं इसे नही जाने दे सकता “इस बार हरिया की आवाज में दृढ़ता थी

“जाने दीजिये ना “अंजू ने थोड़ा सहमे आवाज में कहा

“चुप कर रांड साली तुझे तो मैं बाद में देखता हु “

हरिया चिल्लाया और अंजू बिल्कुल ही सहम सी गई ..

लेकिन काजल की आंखों में जैसे आग उतर आया था…

“जब मैंने कह दिया की ये जा रहा है तो तेरे बात समझ में नही आती “

“चुप कर साली ,”

हरिया भी तमतमाया

“दो कौड़ी की रांड मुझे सिखाएगी,जब तक ठाकुर साहब नही कह देते ये कही नही जाएगा “

काजल की आंखों में खून उतर आया था और उसने हरिया को मारने के लिए अपना हाथ उठाया लेकिन हरिया मजबूत आदमी था ,उसने उसका हाथ पकड़ लिया साथ ही उसे एक ओर धक्का देकर मुझे फिर से कमरे के अंदर ले जाने लगा ,

काजल ने पास से एक कुल्हाड़ी उठायी और ……

“नही …..”अंजू की चीख फिजा में गूंज गई ,काजल का चहरा खून से सना हुआ था ,और हरिया के सर के कई टुकड़े बिखर गए थे ,खून से जमीन लाल हो चुकी थी…

काजल ने कुल्हाड़ी एक ओर फेक दी …और अंजू की ओर देखा जो अभी बिल्कुल किसी मूर्ति सी जमी खड़ी थी …

मैं भी कुछ सोचने समझने की हालत में नही था …

“तू क्यो रो रही है ,यही तो है जो तुझे खान और ठाकुर के सामने नंगी करके नचवाता था,तेरी जैसी गांव की भोली भाली लड़की को साले ने रांड बना दिया,उसके लिए आंसू बहा रही है ……

काजल ने फिर से वो कुल्हाड़ी उठा ली

“ये ले जा अपने उस ससुर की भी लीला आज खत्म कर दे जो ये सब होंते हुए देखने के बाद भी चुप रहा ,और इन सबमे साथ देता रहा,और अपने कपड़े बांध ले ,बच्चों को स्कूल से ही उठा लेंगे …ये काम तो पहले ही कर देना था,थोड़ी देर हो गई …”

अंजू थोड़ा सम्हल गई थी और कुल्हाड़ी को अपने हाथो में पकड़ लिया ..लेकिन उसके होठ कुछ कहने को फड़फड़ा रहे थे…

“ठाकुर साहब …”

काजल के खून से सजे चहरे पर वो मुस्कान शैतान का भी दिल दहला देती ..

“उसका इंतजाम मैंने कर दिया है ,आज खान और ठाकुर खून के आंसू रोयेंगे ,”

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थोड़ी ही देर में हम फॉर्महाउस से बाहर थे,मुझे मेरी कार तक छोड़कर काजल अंजू को लेकर चली गई थी ,मेरे दिमाग में बार बार काजल के वो शब्द गूंज रहे थे ……

‘क्या जरूरत थी तुम्हे यंहा आने की ,हमारे बीच अब बचा ही क्या है जो तुम यंहा आये थे ..’

‘उसका इंतजाम मैंने कर दिया है ,आज खान और ठाकुर खून के आंसू रोयेंगे’

हमारे बीच में अब बचा ही क्या है ?????????

ये सवाल मुझे खाये जा रहा था ……

आज खान और ठाकुर खून के आंसू रोयेंगे…..ऐसा क्या कर दिया था काजल ने ???

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