रंडियो का घर – Update 69 | Incest Story

रंडियो का घर - Incest Adultery Sex Story
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अध्याय 69
मेरी आंख खुली तो मैं एक काल कोठारी की तरह के कमरे में था ,सामने एक बड़ा सा कांच लगा हुआ था जिसके पार वही बेडरूम था जिसे देखने के लिए मैं उस छोटे से झरोखे का इस्तेमाल किया करता था,वो दीवाल नुमा कांच था शायद एक तरफा कांच रहा हो जिससे मैं तो उधर देख पाऊ लेकिन मुझे और इस कमरे को कोई देख नही पाए ,कमरे की छोटी छोटी आवाज भी मेरे कानो में पड़ रही थी लगा की कोई स्पीकर फिट कर दिया गया हो ,मेरे कमरे में बहुत ही अंधेरा था इतना की मुझे मेरा हाथ भी नही दिखाई दे रहा था ,उधर से आने वाला प्रकाश भी छन कर ही आ रहा था जिससे थोड़ी रोशनी समय के साथ मेरे आंखों ने अनुभव की थी ,

मैं जब थोड़ा हिलने को हुआ तब मुझे मालूम हुआ की मेरे हाथ बंधे हुए है और साथ ही मेरा मुह भी मुझे एक कुर्सी में बांध दिया गया था ,मैं इतना बेसहारा था की ठिक से हिल भी नही पा रहा था,

ना जाने मैं कब तक बेहोश रहा था ,जब मैंने आगे देखा तो मुझे बिस्तर में काजल और ठाकुर नंगे लेटे हुए दिखाई दिए थे ,मैं टूट गया और रोने लगा लेकिन यंहा मेरी आवाज सुनने वाला कौन था ,मुह में कपड़ा घुसा दिया गया था मैं ठीक से रो भी तो नही पा रहा था ,

काजल के नंगे जिस्म को ठाकुर जकड़े हुए सो रहा था ,और काजल का हाथ भी ठाकुर के कंधे में थी ,स्वाभाविक है की मेरी बेहोशी में ही उन्होंने हवस का खेल खेल लिया था,

ठाकुर को काजल की मुलायम मखमली चुद पसंद थी …

वो उसके नशे में है …

ये सोचकर ही मुझे काजल और ठाकुर से घृणा आने लगी थी..

ना जाने वो कब तक ऐसे ही सोते रहे ,मेरा जागना और सोना दोनो ही बेमतलब था,

फिर भी मेरे लिए सो जाना ही आराम का एक मात्रा रास्ता बचा था …

**************

मेरी नींद खुली काजल के गुनगुनाने की आवाज काजल मेरे ठीक सामने खड़ी होकर अपने बालो से खेल रही थी,असल में वो उस आदमकद कांच के सामने थी जिसके पीछे मैं था ,उसके चहरे से तो यही लग रहा था की वो इस बात से बेखबर है ,लेकिन मैं उसके नंगे जिस्म को देख पा रहा था ,वो अपने पेट में पड़े हुए उस दांत के निशान को देखती है जिसे शायद आज के हवस के खेल में ठाकुर ने उसे दिया था ,वो अब भी लाल और ताजा था ,वो थोड़ी डर होकर पास ड्रेसिंग से एक क्रीम ले आयी और फिर से उसे मेरे सामने ही लगाने लगी ,

तभी ठाकुर भी आ चुका था ,उसका काला लिंग किसी सांप की तरह उसके जांघो के बीच लटक रहा था और वो आकर काजल को पीछे से पकड़ कर उसकी योनि को सहलाने लगा ,

“रात भर तो इसे रगड़ लिए हो फिर से खेल रहे हो इससे “

काजल ने हल्के से हंसते हुए कहा,

ठाकुर दर्पण से ऐसे देखा जैसे मेरी आंखों में ही देख रहा हो,उसके होठो में एक बहुत ही कमीनी सी मुस्कान थी ,उसने अपनी उंगली उसकी योनि में घुसा दी …

“अरे जानेमन ये तो मख्खन है जितना भी घुसाओ साला फिर से टाइट हो जाता है,इतना नरम और गर्म तो मैंने आजतक किसी का नही देखा “

वो बड़े ही अदा से उसकी योनि को सहला रहा था ,काजल के होठो ने भी सिसकियां छोड़ दी ,उसकी आंखे बंद हो गई थी ,लेकिन ठाकुर मेरे आंखों में देखने लगा और उसके होठो की मुस्कान बहुत ही गहरी थी ..

“पता नही तेरा पति कैसा चुतिया है जो इस मखमली चुद को छोड़कर दुसरो के पीछे पड़ा हुआ है ..”

मैं शर्म से पानी पानी हो रहा था

लेकिन उसकी इस बात से काजल में तुरतं ही फर्क आया

वो उससे अलग हो गई

“कितनी बार कहा की उस चूतिए का नाम लेकर मेरा मूड खराब मत किया करो साले तो अपनी बहन चोदनी है उसे साथ लेकर भाग गया साला नामर्द ,हरिया ने बताया था ना की कैसे मुझे तुम्हारे साथ देखकर साला अपनी बहन के साथ छि ऐसे नामर्द का नाम मेरे सामने फिर कभी मत लेना “

काजल की बात सुनकर मैं बिल्कुल ही स्तब्ध रह गया ,शायद मेरे किसी पुराने कर्मो की ही सजा था ,या शायद उस बेवफा से इतना प्यार करने की सजा …

काजल मेरे बारे में ऐसा सोचती है ये सोच कर ही मैं टूट गया ,रही सही थोड़ी हिम्मत भी टूट ही गई ,अब बस यंहा पड़े हुए मुझे मौत का ही इंतजार था ना जाने वो किस रूप में आएगी …

ठाकुर ने उसका मूड ठीक करने के लिए उसे पुचकारने लगा और फिर मेरे ही सामने फिर से वो दो जिस्म मिल गए ,लेकिन इस बार ठाकुर ने काजल को उसी कांच में टिकाया था ,काजल का हाथ उस कांच को थामे हुए था और ठाकुर उसे पीछे से ही भरे जा रहा था ….

ठाकुर की आंखे मुझपर ही टिकी थी और काजल की आहो से पूरा कमरा गूंज रहा था ,लेकिन मुझे ना ही उनके इस कृत्य में कोई मजा आ रहा था ना ही मैं उसे दिखना चाहता था,मैं तो बस भगवान से अब अपनी मौत की ही दुवा कर रहा था …

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ठाकुर और काजल का खेल खत्म हो चुका था और दोनो एक साथ ही बाथरूम में घुस चुके थे ,…

ठाकुर जाने को तैयार हो चुका था ,मैंने कमरे की दीवार में लगी हुई घड़ी देखी,8 बज चुका था अभी तक किसी ने मेरी कोई सुध भी नही ली थी ,काजल अब भी एक नाइटी में ही थी ,ठाकुरर जाने लगा तभी काजल ने उसे रोका और अपने पर्स से एक पुड़िया निकाली

“अजीम को दे देना “

“कितना ख्याल रखती हो तुम उसका ,साले को मर जाने दो नशे के बिना “

काजल खिलखिला पड़ी

“इतना जल्दी मर जाएगा तो जायजाद हमारे नाम कैसे होगा “

काजल की कमीनी मुस्कान के साथ ही ठाकुर भी मुस्कुरा उठा और वो पुड़िया अपने जेब में डाल ली,दोनो एक दूसरे के होठो को किसी प्रेमी की तरह चूसते रहे और वो निकल गया …

उसके जाने के बाद काजल उस कांच तक आयी और अपने को निहारने लगी ,उसने अपनी नाइटी निकाल फेंकी थी और अपने जिस्म को ध्यान से देखने लगी फिर उसने अपनी ही आंखों को देखा ,उसके होठो में एक मुस्कान थी ……..

भयानक डरा देने वाली मुस्कान ………

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