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अध्याय 67
हॉस्पिटल में मैं और काजल दोनो ही शांत बैठे हुए थे ,ना ही मेरे पास कुछ कहने को था ना ही काजल के पास ,सुशांत ठीक था और उसे वही के एम्बुलेंस में बैठा कर शहर भेज दिया गया था ,मेरे और काजल के बीच कोई भी बातचीत नही हुई थी जबकि निशा के ऊपर केस नही किया गया,लेकिन पुलिस से उसे ढूंढने की बात जरूर कह दी गई थी,काजल ने इसके लिए कुछ बड़े अधिकारियों से बात की थी,और मामला वही दब गया था,साथ ही सुशांत ने भी इस मामले में निशा के पक्ष में ही बयान दिया था,

लेकिन काजल और मेरे बीच की बातचीत पूरी तरह से बंद हो चूकी थी ,निशा की तलास जारी थी लेकिन उसका कही कोई आता पता नही चल पा रहा था,काजल भी अब घर नही आती थी ,और मैं भी अब उसे घर आने को नही कहता ,…

सब कुछ अचानक से ही बहुत शांत हो चला था ,ना जाने निशा कहा थी,पोलिस के अलावा मैं भी उसे ढूंढने की भरपूर कोशिस में जुटा हुआ था ,लेकिन दो महीने खत्म हो चुके थे और मैं और पुलिस दोनो ही शांत हो चुके थे …

इन सब में पूर्वी अकेली हो गई थी ,मैं अपने काम में चला जाता और काजल तो घर में थी ही नही ,शाम जब आता तो काम से और जीवन में आये हुए इन झमेलों से परेशान हो चुका होता,पूर्वी बेचारी करती भी क्या,लेकिन फिर भी हम दोनो ही एक दूसरे का सहारा थे..

पूर्वी ने एक दो बार काजल से मिलकर उसे समझने की भी कोशिस की और उसे घर लाने की कोशिस की लेकिन वो अपने को मेरा गुनहगार मानती थी और मेरे सामने नही आना चाहती थी मैं भी उसे वापस लाना नही चाहता था जबकि निशा के साथ ये हादसा हो गया था ,सच कहु तो सबसे दूर होकर ही मैं खुस था और इस जॉब को छोड़कर पूर्वी के साथ दूसरे शहर जाने का प्लान बना लिया था ,मैं चैन का जीवन बिताना चाहता था उससे भी ज्यादा अपनी बहन को एक सुरक्षित जिंदगी देना चाहता था,मैंने शबनम और रश्मि के लाख मना करने के बाद भी अपने जॉब से रिजाइन कर दिया और वँहा से 80 किलो मीटर दूर दूसरे शहर में एक छोटे से होटल में मैनेजर की नॉकरी जॉइन कर ली ,साथ ही अपने घर में ताला लगा कर मैं चुपचाप ही इन सबसे दूर दूसरे शहर में चला गया ………………..

मैंने अपना नंबर भी बदल दिया था ,साथ ही किसी से ये भी नही कहा था की मैं कहा जा रहा हु …

पूर्वी और मैं बस एक दूसरे के लिए ही रह गए थे ,जीवन में हमारा एक दूसरे के सिवा और कोई नही बचा था,कभी कभी वो रोती तो मैं उसे सहारा दे देता कभी मैं रोता तो वो मुझे सहारा दे देती ,लेकिन फिर भी हम अच्छे थे ,15 दिन और बीत गए ,और सब कुछ बहुत हद तक ठीक होने लगा था लेकिन ……

उस दिन के अखबार में मुझे चौका दिया जब सुबह की न्यूज थी ,…

‘मशहूर कपूर होटल के मालिक मिस्टर कपूर की हत्या ,हत्या का शक उसकी बेटी रश्मि पर ,रश्मि अभी फरार है और पुलिस को उसकी तलास है ,हत्या की वजह ये बताई जा रही है की रश्मि को शक था की मिस्टर कपूर ने ही उनकी माँ की हत्या जायदाद के लालच में आकर की है …

बता दे की रश्मि कपूर साहब की सौतेली बेटी थी ,इसके साथ ही उन्हें लेकर और भी खुलासे हो रहे है,कहा जा रहा है की कपूर साहब का असली नाम रॉकी है जो कभी होटल आदित्य में मैंनेजर हुआ करता था और सालो से अपनी पत्नी नेहा के मर्डर के आरोप में फरार था ,उसने कपूर होटल के मालिक को फंसा कर उनकी बेटी से शादी की थी जिनकी पहले से एक बेटी रश्मि भी थी ……’

खबर पढ़ते ही मैं चौक कर उठा ,पूर्वी मेरे चहरे का भाव समझ चुकी थी,

“पूर्वी तुम्हारा फोन जो की हमने बंद करके रख दिया था जरा देना तो “

पूर्वी के चहरे में थोड़े आश्चर्य के बाद थोड़ी मुस्कान भी आ गई

“क्या हम फिर से वापस जा रहे है “

“पता नही लेकिन मुझे कुछ फोन करने है “

पूर्वी खुसी खुशी अपना फोन लेने चली गई …..

“हैल्लो मैं बोल रहा हु “

“कहा हो तुम इतने दिनों के बाद याद आयी पता है की सब कितना परेशान थे “

“क्या हो रहा है वँहा ये क्या पढ़ने को मिल रहा है “

“सब निधि का किया कराया है “

निधि का नाम सुनकर ही मैं बेचैन हो गया ,तो वो रश्मि से मिली थी ..

“या किया निधि ने “

मेरी बात पर शबनम थोड़ी देर तक चुप ही रही

“पता नही शायद उसे सच्चाई बता दी ,बस इतना ही काफी था बाकी का काम तो खुद रश्मि ने अपने हाथो से कर दिया “

शबनम की बात सुनकर मैं चौक गया मुझे भी तक यकीन नही हो रहा था की रश्मि ने ही कपूर को मारा है ..

“क्या सच में रश्मि ने ही …”

“हा रश्मि ने ही,अपनी माँ की मौत का बदला उसे अपने हाथो से लेना था लेकिन फिक्र मत करो ,कोर्ट में कुछ भी साबित नही हो पायेगा,वो आसानी से छूट जाएगी “

हा हमारी अदालतों में गवाहों और सबूतों को तोडना मरोड़ना कोई बड़ा काम तो नही था ,रश्मि भी बच ही जाएगी ऐसे भी उसने कौन से मासूम इंसान की हत्या की थी,जिसकी हत्या की गई वो भी एक गुनहगार ही था ,

“लेकिन उसे इतनी आसान मौत मिली शायद काजल को ये पसंद नही आया होगा”

शबनम ने मेरे मुह से काजल का नाम सुनकर थोड़ी हँसी बिखेर दी

“काजल का नशा अब भी तुम्हारे सर चढ़ा हुआ है देव “

“हम्म अब ये नशा है या आदत मुझे नही पता लेकिन हा रोज ही काजल और निशा की याद आया करती है “

थोड़ी देर तक कोई भी कुछ नही कह पाया

“कहा हो तुम “

“सोच रहा हु की वापस आ जाऊ ,निशा सही सलामत है ये सुनकर थोड़ी तसल्ली हुई लेकिन उससे मिलना चाहता हु “

“वो अभी रश्मि के साथ ही गायब है,दोनो का ही कोई अता पता नही चल रहा …”

“ह्म्म्म और काजल कैसी है “

ना चाहते हुए भी मेरे मुह से काजल का नाम निकल ही गया था

“ओह ये प्यार ,इतना ठोकर खाकर भी फिर से सर उसके पैरो में रखना चाहते हो ताकि फिर से तुम्हे ठोकर मार दे “

थोड़ा व्यंग थोड़ा अपनापन और थोड़ी खुसी सभी कुछ तो था शबनम की बात में

“यही समझ लो ,जब सर ओखली में दे ही दिया है तो फिर अंजाम से क्या डरना ,”

मैं थोड़े हल्के मूड में बोला

“ह्म्म्म बात तो सही है ,लेकिन काजल मेडम तो आजकल पूरी तरह से बस अपने काम में ही लगी हुई है ,ना जाने कौन सी रात अजीम ठाकुर और खान की आखिरी रात साबित होगी ,खासकर कपूर के मरने के बाद तो वो और भी देर नही करना चाहती ,क्योकि राज खुलने लगे है और पुलिस कपूर उर्फ रॉकी की हिस्ट्री खोजने में लगी हुई है ,काजल भी अपना काम जल्दी से खत्म कर तुम्हारे तरह ही चैन की जिंदगी बिताना चाहती है “

“चैन की जिंदगी ..??????

अपनो के बिना कही कोई जिंदगी चैन की होती है शबनम ?/

मेरी बहन मेरे पास नही है ,मेरा प्यार मेरे पास नही है तो ये जिंदगी चैन की कैसे हो गई,मैं अपने दोस्तो से अपने शहर से अलग होकर रह रहा हु ,मैं ये बोलना तो नही चाहता था लकिन हा जबसे आया हु लगता है की पल पल भारी है ,पता नही वो दोनो किस तकलीफ से गुजर रहे होंगे और मैं सब छोड़कर भाग आया हु …”

“ये लड़ाई तुम्हारी थी ही नही देव तुम आखिर कर भी क्या सकते हो ,इस हालात को बनाने वालो को ही इसे भुगतना होगा ,तुम या मैं चाहकर भी कुछ नही कर सकते “

कुछ देर तक हम दोनो में से किसी ने कुछ नही कहा …

“हा शबनम लेकिन मैं अब यंहा नही रहना चाहता “

“तो आ जाओ ,होटल में रहो ,मैं भी तो अकेली हो गई हु ,मुझे और इस होटल को तुम्हारी जरूरत है …”

कहते है ना की नशेड़ी को नशे का बहाना चाहिए…

मुझे भी काजल और निशा के नाम का नशा लगा हुआ था और मुझे बहाना मिल गया था ………

**************

होटल का माहौल बिल्कुल ही बदला हुआ था यंहा कस्टमर कम और पोलिश वाले ज्यादा दिखाई दे रहे थे,मेरे आने के बाद मेरा भी बयान लिया गया ,और मेरे ही कहने पर होटल की निगरानी पर बस कुछ सादे कपड़े में पोलिश वाले नियुक्त किये गए ,ताकि होतल में आने वाले कस्टमर को कोई परेशानी ना हो और पोलिस की तहकीकात में भी कोई बाधा ना पड़े …

शबनम बहुत ही खुश थी और पूर्वी भी लेकिन मेरे मन में कई संशय उमड़ रहे थे …

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मुझे आये एक ही दिन हुआ था और मैं अभी अपने होटल में ही था की मुझे कुछ पोलिश वालो के साथ इंस्पेक्टर ठाकुर भी आता हुआ दिखाई दिया ,मुझे देखकर उसके चहरे की चमक बढ़ गई ,वो मेरे पास आया …

“ओह देव तुम आखिर आ ही गए “

मैंने हल्के से सर हिलाया

“ऐसे काजल कह ही रही थी की तुम ज्यादा दिनों तक यंहा से देर नही रह पाओगे “

उसकी बात से मेरा खून ही जल गया ,उसके होठो में एक चिढ़ाने वाली मुस्कान थी

“चौक क्यो गए मुझे पता चल गया है की तुम काजल के पति देव हो ..वाह देखो ना पति देव जी देव जी ..हा हा हा “

वो इतनी गंदी हँसी हंसा की लगा की उसका जबड़ा ही निकाल लू ,मेरी मुठ्ठियां भिच गई थी ,जिसे देखकर वो फिर से एक कमीनी मुस्कान में मुस्काया

“देव बाबू जब पत्नी ही बेवफाई कर दे तो मुठ्ठी भिच कर क्या करोगे ..”

वो मेरे कानो के पास आय और फुसफुसाया

“ऐसे सच बताऊँ मखमल है तुम्हारी बीवी ,साली को जितना भी रगड़ो कम ही लगता है “

उसकी बाते जैसे मेरे कानो में पिघले हुए लोहे की तरह उतर रही थी

“मादरचोद “

मैं पलटा और उसके कॉलर को पकड़ कर खड़ा हो गया ,लेकिन तुरंत ही कुछ पोलिश वाले मेरे हरकत को देख वहां आकर हमे घेर कर खड़े हो गए

ठाकुर फिर से कमीनेपन से मुकुराय

“अपना गुस्सा सम्हाल कर रखो देव और मेरे रिश्ते में आने की सोचना ही मत वरना जो दो पैरो पर सही सलामत खड़े हो वो भी नही रह पाओगे “

वो मेरा हाथ अपने कॉलर से झटक कर हटा दिया और वँहा से चले गया ,मैं ठगा सा बस उसे देख रहा था ,गुस्से की आग ने मुझे जला रखा था पर इतनी हिम्मत भी नही रह गई थी की मैं उसका मुह तोड़ दु ………..

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