रंडियो का घर – Update 6 | Incest Story

रंडियो का घर - Incest Adultery Sex Story
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अध्याय 6
मैं आज घर लेट से जाने का प्लान बनाया मुझे शबनम से अपने होटल को जॉइन करने की बात करनी थी,ये तो स्वाभाविक था की वो बहुत ज्यादा कीमत बोलने वाली थी लेकिन उसके पास वो हुनर था जो कोई सामान्य लड़की के पास नही मिलता….

वो पढ़ी लिखी थी शादी शुदा थी,दिखने में कातिल सी खूबसूरत थी और सबसे बड़ी बात वो अपने जिस्म का सौदा करना और उसकी कीमत दोनो जानती थी….यंहा का मैनेजर तो मैं था लेकिन उसे हमने HR का पोस्ट देने की सौची,अभी जो HR का काम देख रही थी वो भी बहुत टैलेंटेड लकडी थी इसलिए उसे हटाने की जगह हमने दो पोस्ट बना दिए…क्योकि इसे कुछ अलग ही काम करना था….

मैं होटल के ही रेस्टारेंट में बैठा हुआ शबनम का इंतजार कर रहा था…

“हाय देव “

वो बला की खूबसूरत लग रही थी…जिसपर मेरी नजर थोड़े देर के लिए जम ही गई थी..

“हाय आओ आओ “मैं उसके स्वागत के लिए खड़ा हुआ

“तो बहुत इमरजेंसी में बुलाया है मुझे क्या बात है”

“कुछ नही एक जॉब का ऑफर था तुम्हारे लिए “

वो खिलखिला कर हँस पड़ी

“जॉब तुम मुझे जॉब ऑफर कर रहे हो ,यार मैंने तो सुना की तुम्हारी जॉब में ही खतरा है ,कपूर साहब बहुत ही भड़के हुए है तुम्हारे ऊपर “

हाय उसकी अदा उसकी मुस्कान ,इन गलियारों में बाते इतनी तेजी से फैलती है मुझे समझ आ गया था,

“ह्म्म्म वो कल की बात थी मेडम …आज कहानी कुछ अलग ही है,हम कुछ नए रिक्रूटमेंट करना चाहते है ,हमे एक HR मैनेजर चाहिए तुम्हारे जैसी ,और कुछ लड़कियों का भी रिक्रूटमेंट है ..जो तुम्हे हमारे साथ मिलकर फाइनल करना होगा “

शबनम को कुछ जैसे समझ सा आ गया

“ओह ,मुझे लगा की तुम्हारे रहते इस होटल को कभी मेरे जैसे मैनेजर की जरूरत नही पड़ेगी ,”वो थोड़ी से उदास हो गई थी ना जाने क्यो..

“तुम क्यो उदास हो रही हो,आजकल टैलेंट से क्या होता है “अब मैं थोड़ा उदास हो गया

“पता नही क्यो लेकिन तुम्हें ये सब करते देखना अच्छा नही लगता,तुम हमारे कालेज के टॉपर थे यार ,इतने टैलेंटेड हो और फिर भी “

शबनम मेरे ही कॉलेज की जूनियर थी ..

“ह्म्म्म छोड़ो वो सब, अब अगर मार्किट मे बने रहना है तो सब कुछ करना पड़ेगा “

उसके चहरे में थोड़ी चमक आई ,तभी एक वेटर आ गया

“मेरे लिए ब्लैक काफी और तुम “

“सेम “

“हम्म तो मुद्दे की बात करे ..”

“देखो देव रवि ऐसे भी मुझे अच्छी खासी तनख्वाह देता है,जो की मेरे टैलेंट से कही ज्यादा है …तो मैं तुम्हारा प्रपोसल क्यो एक्सेप्ट करू “

पता नही क्यो लेकिन उसकी खूबसूरती ने मुझे दीवाना बना दिया था,

“क्योकि बात सिर्फ पैसों की नही है,रवि के पास तुम्हारी इज्जत क्या है ये हम दोनो को पता है,यंहा तुम्हे इज्जत भी मिलेगा और उससे ज्यादा पैसा भी ,…”

“उससे ज्यादा पैसा …तुम पागल हो गए हो कपूर जैसा कंजूस आदमी उतने पैसे दे पायेगा,उतनी तो तुम्हारी सेलरी भी नही है “

“ह्म्म्म देखो अब कपूर साहब होटल के काम को छोड़कर दूसरे बिजनेस में ध्यान देने की सोच रहे है,तो यंहा का पूरा काम रश्मि देखेगी,जाहिर सी बात है की वो नए सोच की लड़की है और सच मानो पैसे खर्च करने में कोई कमी नही करेगी,बस एक चीज की कमी नही होनी चाहिए …”

शबनम ध्यान से मेरी बातो को सुन रही थी,

“उन्हें काम सॉलिड चाहिए ,तुम्हे हर बंदी को तैयार करने पर इंसेंटिव भी मिलेगा जो की सेलरी से कही ज्यादा हो सकता है,रवि के जैसे यंहा कोई जबरदस्ती करने वाला नही होगा,तुम अपने पति और घर को भी टाइम दे पाओगी और पैसे …वो तो तुमने सुन ही लिया “

“ह्म्म्म MBA किया था तो सोचा नही था की ये सब भी करना पड़ेगा “

शबनम हल्के से हँसी जिसे देखकर मेरे चहरे में भी हँसी आ गई ,हमारी काफी आ चुकी थी ..

“यार देव लेकिन एक बात बताऊ ,मुझसे ज्यादा टैलेंटेड तो काजल है ,तुमने उसे हायर करना चाहिए था “वो हल्के से मुस्कुराई ,लेकिन मेरा चहरा उतर गया ..

“हम्म मुझे पता है तुम दोनो के बारे में “शबनम की बात से मैं चौका और उसकी ओर देखने लगा ..

“फिक्र मत करो किसी को नही बताऊंगी ,लेकिन काजल मेरी अच्छी दोस्त रही है,हमारी बात होते रहती है और वो भी तो बेचारी मेरे ही जैसे है बस उसके पति को उसके काम का पता चल गया है “

शबनम के चहरे में आयी हुई कातिल मुस्कान से मेरे पैरो की जमीन खिसक गई ..

“तुम तुम बोलना क्या चाहती हो “

“वही जो तूम सुन रहे हो …लेकिन देखो यार देव हमारा फील्ड ही कुछ ऐसा हो गया है,तुमने ही तो कहा था की सिर्फ टैलेंट से आजकल कुछ भी नही होता,,उसे भी तो अपनी जॉब बचानी पड़ी जैसे तुम्हें बचानी पड़ी…यहां बहुत कंपीटिशन है देव वो नही करेगी तो कोई और कर लेगा …और अब तो तुम भी मान गए हो की इन सब चीजो की जरूरत तुम्हारे होटल को भी है …मैं भी तो शादी शुदा होने के बाद भी रवि के साथ …करना पड़ता है देव तुम मर्द हो तुम नही समझो की औरतों के दिल में क्या गुजरती है जब कोई पराया मर्द …”

मेरे आंखों में आंसू आ गए थे…

शबनम ने मेरे हाथ को अपने कोमल हाथो से पकड़ा और उसे सहलाया इसमें बहुत ही अपनत्व था…

“मैं जानती हु की हम गलत कर रहे है और मैं इसे पूरी तरह से सही भी नही कहती,और ना ही ये कहती हु की इसके बिना हम रह नही पाएंगे,लेकिन हमारे खर्चे अब इतने हो गए है की इसे सिर्फ काम करके पूरा करना मुश्किल है …और फिक्र मत करो जो सीक्रेट है वो सीक्रेट ही रहेगा और कब से जॉइन करना है …”

शबनम की बात से मुझे थोड़ा सुकून तो मिला ,असल में बात से नही उसके कोमल हाथो के अहसास से ..

“कल से “

“ओके “ वो खड़ी हुई और मेरे पास आकर मेरे गालो में एक हल्की से पप्पी लेकर वँहा से निकल गई ………

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