अध्याय 55
सन्नाटा किसे कहते है ………???????
अतीत की गलतियों को सुधारा नही जा सकता ,ग्लानि में किसी माफी की जगह भी नही होती ,
और दर्द चुभन की कोई सीमा नही होती ,
कार में सन्नाटा फैला हुआ था और मैं ग्लानि से भरा हुआ था ,गाड़ी चलाते हुए बाजू में बैठी पूर्वी को सुबकते हुए देखता हुआ भी मैं कुछ नही कह पा रहा था क्योकि अतीत को बदला नही जा सकता जो हो गया वो हो गया ….
मैं चुप था लेकिन शांत नही था ,
मन में अजीब सवाल उठ रहे थे जिसका उत्तर मेरे पास नही था ,मेरी आंखों में आंसू तो नही थे लेकिन सीने में इतनी हिम्मत भी नही थी की मैं पूर्वी से सर उठा कर बात कर सकू ..
“मैं आपके साथ आयी ही क्यो …”
पूर्वी ने रोते हुए कहा ,वो फूल सी बच्ची सिकुड़े हुए बैठी थी ..
मैं उसे देखने की हिम्मत ही नही जुटा पा रहा था…
गाड़ी घर तक आ चुकी थी लेकिन अब भी मैं चुप ही था पूर्वी भी चुप ही थी …
वो सीधे बिना कुछ बोले ही अपने कमरे में चली गई ,
“अरे भइया पूर्वी को क्या हो गया और आप लोग कहा गए थे “
निशा की बातो का मैं क्या जबाव देता ,मैं नजर गड़ाए ही रखा मेरा नशा ना जाने कहा काफूर हो चुका था ,
मैं बिना कोई जवाब दिए ही सीधे अपने कमरे में चला गया ,मैं आंखे बंद किये हुए बीते बातो को याद कर रहा था ,मेरे सामने बार बार पूर्वी का चहरा झूम जाता था ,मैं अपना सर झटकता लेकिन फिर से वो चहरा दिमाग में भर जाता था…
उसकी साफ मासूम आंखे मुझे दिखाई दे रही थी,जो आंसुओ से भरी हुई थी ,वो उसका सिसकना और उसका वो दर्द मैं महसूस कर पा रहा था …
ना जाने कितना समय बीत चुका था की निशा कमरे में आयी उसकी आंखे लाल थी ,उसे देखते ही मेरा सर झुक गया …
चटाक ….
एक झन्नाटेदार थप्पड़ मेरे गालो में पड़ा वो रूह तक ही सिहर गया था ,
मेरा चहरा लाल था और माथे में पसीने की बूंदे तैरने लगी ,मैंने निशा को इतने गुस्से में कभी नही देखा था…
“मुझे शर्म आ रही है आपको भाई कहते हुए “निशा की आवाज लड़खड़ा रही थी
मैं कुछ भी कहने की हालत में नही था ,और कहता भी तो क्या कहता ??
मैं अब भी वही बैठा रहा जब निशा ने जोर से दरवाजा बंद किया और कमरे से निकल गई ..
मेरे आंखों में पानी आने शुरू हो चुके थे ,
ना जाने कब तक मैं ऐसे ही बैठा रहा मुझे दरवाजा खुलने का आवाज आया ,वो काजल थी जो हाल में निशा से कुछ बात कर रही थी ,थोड़ी देर में ही काजल अंदर आयी ,
मैं अब भी अपने बिस्तर में सिमटा हुआ बैठा था,मैंने काजल को देखा वो मुझे गुस्से से घूर रही थी ..
मैं ज्यादा देर तक उससे आंखे ही नही मिला पाया ,
वो बिना कुछ बोले ही बाथरूम में चली गई और आते ही दूसरी तरफ मुह कर सो गई …
मैं किसी गुनहगार की तरह बस बैठा हुआ अपने की विचारों में खोया हुआ था ना जाने कितना समय बीत चुका था और ना जाने कब मुझे नींद आ गई थी ………..

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