अध्याय 46
मैं कुछ ज्यादा ही चालाकी दिखाने लगा था ,मैंने रश्मि से भी यही कहा की मुझे कुछ खास पता नही चला,ऐसे मुझे इतना मोहनी के कारण पता ही लग गया था की रश्मि को कितना पता है…
वक्त आगे बढ़ने का नाम ही नही ले रहा था,जाने क्यो इतनी खामोशी सी फैल गई थी ,मेरा होटल में समय कटाना मुश्किल हो रहा था,मैं रश्मि के ऑफिस से निकल कर सीधा शबनम के पास चला गया,उसे एक केबिन दिया गया था,ऐसे तो होटल में इसकी जरूरत नही थी लेकिन वो और भी तो बहुत से काम कर रही थी ,वो मुझे देखते ही बहुत ही चहक कर उठी
“ओह यार देव कितने दिनों के बाद आज आये तुम ,”मेरे चहरे में भी एक मुस्कान फैल गई वो बला सी खूबसूरत लग रही थी
पास बैठी हुई एक लड़की खड़ी हो चुकी थी ,बहुत ही कम उम्र की लड़की लग रही थी शायद कालेज में हो ,
“मुझे भी तुम्हारी बहुत याद आ रही थी “
वो हँसी
“चलो झूठे कही के “
उसने लड़की की ओर देखा जो की मुझे अजीब निगाहों से घूर रही थी ,जब हमारी नजर मिली तो झेंपी और सर झुका लिया,मैंने उसे ध्यान से देखा अचानक ही मुझे कुछ याद आया और मैं बिल्कुल ही सहम गया मुझे याद आ गया था की ये कौन थी,
“अच्छा तुम बाहर जाओ “शबनम ने उस लड़की को कहा वो सर झुकाए हुए वँहा से वैसे भागी जैसे वो चाहती ही हो की जल्द से जल्द वँहा से निकल जाए ,उसके जाते ही मैं शबनम के सामने बैठ गया ..
“ये लड़की यंहा क्या कर रही थी “
मेरी निगाहों को जैसे उसने पहचान लिया था ..
“वही जो की बाकी की लडकिया मेरे पास करती है “
“तुम पागल हो गई हो ,इतनी कम उम्र की लड़की से ये सब काम करवा रही हो “
“अरे यार ये लीगल एज से कही ज्यादा है ,तुम फिक्र क्यो कर रहे हो “
“लेकिन ये मेरी बहन के साथ पड़ती है अभी तो ये कालेज में ही है “
शबनम के चहरे में मुस्कान फैल गई
“अरे मेरे बलमा इस उम्र की लडकिया तैयार हो जाती है सेक्स के लिए और इस उम्र में इन्हें भी तो बहुत खुजली होती है ,जिस्म की खुजली और साथ ही साथ पैसे और शोहरत की खुजली ,असल में लड़कियों का यही सही उम्र है …और मर्द भी तो इस उम्र की कमसिन कलियों को तोडना पसंद करते है इनके हमे ज्यादा पैसे मिलते है “
उसके चहरे का मुस्कान और भी गहरा गया ,लेकिन आज मुझे अपने पर घृणा होने लगी थी ,ये लड़की पूर्वी की क्लासमेट थी ,मेरी प्यारी सी पूर्वी जिसे तो मैं सोच भी नही सकता था की वो बड़ी भी हो गई है …
मेरा चहरा मुरझा गया था ..
शबनम मेरे पास आयी और मेरे सर को अपने स्तनों में गाड़ा दिया,मेरे सर उसके सीने से टिके हुए थे जो की उसके बड़े बड़े स्तनों के कारण उसके स्तनों में जा धसे थे ,
मेरे लिए ये कोमल तकिया आज किसी वासना का नही बल्कि एक गहरी दोस्ती का अहसास करा रहा था,हा शबनम मेरी दोस्त तो थी ,,,
वो बड़े ही प्यार से मेरा सर सहला रही थी
“देव यार तुम बड़े ही इमोशनल टाइप के आदमी हो बात बात पर इमोशनल हो जाते हो ,तुम्हे कई काम करना है और तूम मुह लटकाए बैठे हो ,हा ये सब गलत है लेकिन हम किसी भी लड़की के साथ जबरदस्ती तो नही करते ना…मुझे और काजल को जबरदस्ती इस धंधे में लाया गया था,बाद में आदत हो गई और पैसे मिलने पर मजा भी लेने लगे ,लेकिन मैं इस बात का पूरा ध्यान रखती हु की कोई भी लड़की को जबरदस्ती इस धंधे में ना लाया जाए …वो अपनी मर्जी से आती है और चाहे तो अपनी मर्जी से वापस भी जा सकती है ,तो फिर इसके लिए तुम कैसे दोषी हुए “
उसकी बातो में सच में गजब का प्यार झलक रहा था ,मैं उसे और भी जोरो से कस लिया पता नही क्यो लेकिन मुझे यंहा सुकून मिल रहा था..
“अरे क्या हुआ ,मेरी चाहिए क्या “
वो खिलखिलाई ,मैंने जब सर उठाया तो वो होले होले से मुस्कुरा रही थी
“चोदने के लिए इतने बहाने क्यो कर रहे हो सीधे ही बोल दो की चोदना है “
वो फिर से खिलखिलाई ,लेकिन मैंने उसे फिर से जकड़ लिया और किसी बच्चे की तरह उसके सीने से अपने सर को गड़ा लिया ,सच ही है की सबसे सुकून बच्चा बन जाने में ही मिलता है …
मर्दों के साथ एक चीज होती है की उन्हें सबसे सुकून माँ के सीने से लगने में ही मिलता है ,लेकिन वक्त के साथ और सेक्स के प्रभाव के कारण औरतों के सीने को सेक्स का प्रतीक मान लिया जाता है ,एक मर्द औरत के सीने को देखकर उत्तेजित होता है और यही से वो अपना सुकून भी खो देता है ,लेकिन फिर कभी वो अपनी प्रमिका के ,या पत्नि के या और किसी औरत के सीने में जब अपना सर लगाकर सोता है तो उसे उतना ही सुकून मिलता है ,लेकिन एक शर्त जरूरी है की वासना अंदर ना हो …
वही हाल मेरा भी था,मुझे भी बहुत सुकून मिल रहा था मैं एक बच्चे की तरह ही वासना से रहित था और मेरी ये दशा शबनम से छुपी नही थी ,वो भी मेरे सर को प्यार से सहलाने लगी ,…
सच ही तो है की सभी प्यार मां के प्यार से ही सुरु होते है और एक इंसान जीवन भर उसी को ही ढूंढता रहता है…
लेकिन उसके लिए बच्चा बनना ही पड़ता है ये ही उसकी अनिवार्य बात होती है ..
मैं अपने मानसिक थकान से बहुत ही थक चुका था और अब उसके सीने में गड़ा हुआ आराम कर रहा है …
ये बहुत देर तक रहा ,जब मैं अपना सर उठाया तो देखा की शबनम की आंखों में आंसू है और साथ ही मेरे भी ये आंसू आखिर क्यो आये थे ये तो मैं भी नही जानता था ना ही शबनम ही जानती थी ..
“क्या हुआ “मैंने उसे पूछा
“कुछ नही “उसने ना में सर हिलाया
“तू पहले ऐसे मर्द हो जिसने मुझे आजतक की जीवन में पहली बार इतने प्यार से छुवा है ,मेरे पति ने भी मुझे कभी इतने प्यार से नही छुवा “
वो आंसुओ को पोछते हुए भी हँसने की कोशिस करती है ,और मुझे बड़ी ही प्यार भारी निगाह के देखती है ,
“मन करता है की तुम्हारे लिए अपना सब कुछ लुटा दु “
उसने बहुत ही धीरे से कहा ,उसका कहना भी साबित कर रहा था की वो ये नही कर सकती और इसी लिए वो इतना धीरे बोली क्योकि वो चाहती तो है लेकिन कर नही सकती ,मेरे चहरे मे भी मुस्कान खिल गई मैं उठा और उसके माथे को चूम लिया …
लग रहा था की हम कालेज के नए नए जोड़े हो जो अभी अभी प्यार में पड़ा हो ..
“मुझे तुमसे कुछ भी नही चाहिए लेकिन यही प्यार मेरे लिए रखना “
मैंने मुस्कुराते हुए कहा
“लेकिन मुझे तो तुम्हे देना है सब कुछ देना है और रात भर देना है “
वो फिर से मस्ती के मूड में आ गई थी ,वो इतना बोल के ही खिलखिलाई ,
मैं भी उसके साथ हँस पड़ा था …..

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