अध्याय 39
जिस्म की प्यास बुझ चुकी थी और मैं अपनी खिड़की से बाहर झांक रहा था ,बाहर मुझे छिछोरे दिखाई दिया ,मैंने अपनी सिगरेट सुलगाई और उसकी हरकतों को देखने लगा,
वो नाम का ही नही काम का भी छिछोरा था ,
इसी रेस्टरूम में काम करने वाली एक महिला को पकड़े हुए दिखाई दिया ,वो दोनो झाड़ियों के पीछे थे लेकिन मैं दूसरी मंजिल में खड़ा हुआ था ,गार्डन की झाड़ियों के पीछे का दृश्य देखकर मैं अपनी हँसी रोक नही पाया ,क्योकि वो महिला शादीशुदा थी और छिछोरे के बीवी तो नही थी ……
“छेदीलाल “
मैं जोरो से चिल्लाय जिसे सुनकर वो दोनो ही अलग हुए और मुझे ऊपर खड़ा देख जैसे उनके प्राण ही सुख गए …
महिला दौड़ती हुई भागी वही छेदीलाल बस मूर्ति बना हुआ मुझे ताक रहा था ,मैं खिलखिला के हँस पड़ा ,मैं अपनी शर्ट पहन नीचे आया ही था की छेदीलाल मेरे पाव में गिर गया ..
“मुझे माफ कर दीजिये दीजिये साहब,किसी को मत बताइयेगा वरना नॉकरी जाएगी वो अलग लेकिन इसका पति मार मार के मेरा भर्ता ही बना देगा “वो गिड़गिड़ाने लगा और मेरे होठो में एक कमीनी सी मुस्कान आ गई
“अच्छा पहले बोल की चंदू के चाचा ने चंदू के चाची को चांदी के चमचे से चटनी चटाई ..”
मैं मुस्कुराकर उसे देखने लगा ,वो हड़बड़ाया सा मुझे देखने लगा
“छंदू के छाछा ने छंदू के छाछि को छांदी के छमचे से छटनी छटाई”वो बड़ी ही मुश्किल से बोल पाया
मैं जोरो से हँस पड़ा और उसका मुह मुरझा गया ..
“अच्छा चल मेरा एक काम कर तेरा कमरा कहा है “
वो मुझे आश्चर्य से देखने लगा ,मैं उसे लेकर उसके कमरे में चला गया
एक छोटा सा रूम था उसका ..
मैंने मोबाइल निकाल कर उसे काजल की तस्वीर दिखाई
“इसे पहचानता है “उसकी आंखे बड़ी हो गई थी जिसका मतलब मुझे समझ आ रहा था की ये इसे जानता है …
……………..
“साहब आपके पास इनकी तस्वीर कहा से आयी “
“तू वो बता जिसे मैं पूछ रहा हु “
“जी साहब जानता हु ..”
वो हड़बड़ा रहा था …
“कौन है ये “
“श्रुति श्रुति मेमसाहब”
उसकी जबान बुरी तरह से लड़खड़ा रही थी लेकिन मुझे मेरे सवालों का जवाब मिल चुका था की काजल असल में कौन है ..इससे पहले की मैं और कुछ पूछता मेरा मोबाइल बज उठा ,नंबर डॉ का था ..
“उससे पूछने से तुम्हे तुम्हारे सवालों का सही जवाब नही मिलेगा ,कल तुम मुझसे मिलो अकेले में …”
उन्होंने पता तो बता दिया लेकिन मैं और भी चकित रह गया क्योकि डॉ मुझपर भी नजर रखे हुए था …..

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