रंडियो का घर – Update 35 | Incest Story

रंडियो का घर - Incest Adultery Sex Story
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अध्याय 35
“साहब यंहा पर किले में पुरातात्विक स्थल है अगर आप घूमना चाहे “

हम केशरगढ़ के किले में पहुचे ही थे ,और एक व्यक्ति ने मुझसे कहा उसने आंखों से इशारा किया किया की मेरे साथ चलिए ,मैंने बस हा में हल्के से सर हिलाया ,

“अरे साहब वो भी खंडहरों को क्या देखना ,वँहा पर गार्डन है जंहा पर सेल्फी पॉइंट है ,वँहा चलते है “

छिछोरे ने कहा ,जिससे मेरी बहने खुस हो गई

“हा भइया,एक तो यंहा बस खण्डर है और आप यंहा ले आये”

पूर्वी ने उसकी हा में हा मिलाया ,

“ऐसा करो तुम लोग गार्डन जाओ मैं जरा देखु की कौन सा पुरातात्विक स्थल है यंहा पर ,तुम्हारी भाभी से मैंने बहुत नाम सुना है इसका “

दोनो छिछोरे के साथ गार्डन की तरह चल दिए जबकि मैं खण्डरहो की तरफ …

अंदर जाने पर मुझे डॉ दिखाई दिए ,उन्होंने हाथ हिलाकर मुझे अपने पास बुलाया ,उनके पास ही एक अधेड़ महिला खड़ी थी ,मुझे लगा की मैंने इसे कही देखा है,वो कोई विदेशी लग रही थी ..

“आओ आओ देव ,इनसे मिलो ये है यंहा की खोजकर्ता मेडम मलीना “

ओह याद आया की मैंने इन्हें कहा देखा है ,

“हैल्लो मेडम मैंने आपकी किताब पड़ी है ‘डिस्कवरी ऑफ केशरगढ़’ उसके पीछे आपकी तस्वीर देखी थी मैंने,मेरी वाइफ आपकी किताबो को बहुत ही चाव से पढ़ती है “

वो मुस्कुराई ,

“आजकल के बच्चे भी इन सबमे इंटरेस्ट रखते है यकीन नही होता “वो मुस्कुराते हुए बोली

“मलीना ये देव है ,देव….श्रुति का पति “

मै चौक गया की डॉ ये क्या बोल रहे है ,लेकिन मलीना मेडम का चहरा मेरे ऊपर ही अटक गया ,उनकी मुस्कुराहट जाने कहा गायब हो गई और आंखों में आंसू आ गए ,उन्होंने मेरे गालो को अपने हाथो से पकड़ लिया था और मेरे माथे को चूमने लगी,मैं परेशान था की ये हो क्या रहा है,लेकिन मूझे उनके उनमे एक बहुत ही गहरे अपनत्व का अहसास हो रहा था…

मैं आश्चर्य से डॉ को देखने लगा ,

“अब समझ आया की वो मेरे किताबो को क्यो पढ़ती है ,मेरी ही तो बेटी है आखिर माँ से दूर कैसे रहेगी “

मलीना फफक कर रो पड़ी ,मेरा मुह खुला का खुला रह गया मैं कभी डॉ को देखता तो कभी मलीना को …

काजल ने मुझे अपनी माँ की तस्वीर दिखाई थी लेकिन ये वो तो नही थी ये तो कोई और ही थी …..डॉ ने मुझे आंखों से बस शांत रहने को कहा ,

“कैसी है वो उसे मेरी याद ही नही आती ,इतना गुस्सा की वो मुझसे मिलने भी नही आ सकती ,2 साल हो गए उसे देखे हुए ,शायद मुझे उसकी सजा मिल रही है जो मैंने अपने पिता के साथ किया था ,उनसे दूर जाकर “

डॉ ने उन्हें सम्हाला ,और मुझसे दूर जाकर उनसे कुछ बात करने लगे ,वो थोड़ी शांत हुई …

“अच्छा तो तुम अपनी बहनों के साथ आये हो कहा है वो सब “

इस बार मलीना के होठो पर एक मुसकान थी …….

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