अध्याय 3
आज मैं बहुत ही बेचैन सा अपने घर में गया ,वह देखा तो मेरी दोनों बहने पढ़ने में लगी थी काजल अभी तक नहीं आई थी,मैंने काजल को फ़ोन किया
‘कहा हो जान ,’मैंने उत्सुकता से पूछा ,
‘अभी तो मैं (उसकी आवाज नार्मल नहीं थी )वो अजीम सर के साथ हु ,सुनो ना मीटिंग है और लेट हो सकता है और पूर्वी को बोल देना की खाना बना दे ओके बाय,’कहकर उसने कॉल काट दिया मेरे मन की बेचैनी और बढ़ गयी थी मैंने पूर्वी को खाना बनाने को बोल अपने रूम में चला गया मैंने उन्हें बोला की मेरे सर में दर्द है और मैं सोने जा रहा हु ,खाना बना के खा के सो जाना और उठाकर खा लूँगा या जब काजल आएगी खा लूँगा,
मैं अपने कमरे में जाकर ऐसे ही लेटा सोच रहा था की मेरे रूम में निश आ गयी मैंने उसे देख थोडा गुस्सा दिखाया ,
‘मैंने कहा था ना की सर में दर्द है ,क्या हुआ आराम करने दे मुझे चल जा,’वो बिना कुछ बोले मेरे बिस्तर के पास आ गयी और उसके हाथो में एक तेल था मेरे सिरहाने बैठ के मेरा सर दबाने लगी और तेल लगाने लगी ,उसके हाथो के कोमल अहसास और उसके प्यार भरे स्पर्श ने मुझे बहुत शुकून दिया मैंने उसे सर उठा कर देखा तो वो मुझे देख मुस्कुरा रही थी,मैंने उसके गोद में अपना सर रख लिया और अपने हाथो को उसके कमर से बांध लिया,वो मेरे सर को सहलाती और मालिश करती रही ..थोड़ी देर में ही मेरी आँखे लग गयी और जब मैं उठा तो देखा की रात के 11 बज चुके थे मुझे लेटे 2 घंटे हो चुके थे काजल शायद अभी भी नहीं आई थी और मैं अब भी निशा के गोद में ही सोया था,मेरे हलचल होने से उसकी भी नींद टूटी वो मेरे बालो को प्यार से सहलाई..
‘अब कैसा लग रहा है भईया,’
‘मेरी प्यारी बहन ने मालिश की है अच्छा ही लगेगा ना,इधर आ..’वो मेरे ऊपर झुक गयी और मैंने उसके गालो को चूम लिया मैं वहा से उठा उसका प्यार देखकर मेरा दिल हल्का हो गया था,मैंने उसे खाना बनाने को कहा और साथ ही खा कर सो गया …काजल को काल किया पर उसने नहीं उठाया ,ये हमारे काम में अकसर होता था की हमें रात में भी काम करना पड़ता था और ऐसा पहली बार नहीं हो रहा था पर आज मैं दुखी था ,पता नहीं क्यों पर मैं दुखी था मुझे काजल का यु मेरा फोन ना उठाना और रात भर बहार रहना अच्छा नहीं लग रहा था,…

