पूरी रात जाग कर निकाली थी मैने…
इसलिए मेरी आँखे जल सी रही थी….
मैने सोनिया की तरफ देखा, वो तो घोड़े बेचकर सो रही थी..
अपनी छुट्टियों को अच्छे से एंजाय कर रही थी वो…
चुदाई करवाकर और जी भरकर सोकर…
इंसान को यही 2 चीज़े बेहिसाब मिल जाए, किसी और चीज़ की ज़रूरत ही महसूस नही होगी.
भले ही आँखे जल रही थी नींद के मारे, पर नींद आ ही नही रही थी…
जब भी सोने लगता तो साक्षी के साथ बिताए पल याद आ जाते..
कैसे मैने उसकी चूत में लंड डाला…
कैसे खुली छत पर उसकी चीखे गूँजी थी…
और स्वीमिंग पूल की वो रोमांचक चुदाई तो मेरी लाइफ में हमेशा एक यादगार बनकर रहने वाली थी….
बस यही सब सोचकर मैं अपने लंड को शाबाशी देता हुआ, सोने की कोशिश कर रहा था…
और तभी, कमरे का दरवाजा खुला और मॉम अंदर आ गयी…
मैंने झट्ट से आँखे बंद कर ली.
मॉम अंदर आई और इधर-उधर बिखरे कपड़े समेटने लगी..
पापा ऑफीस जा चुके थे.
मैने नोट किया की जब मैं घर आया था तो मॉम ने पूरी नाईटी पहन रखी थी, पर अब उन्होने अपनी नाईटी के उपर वाला गाउन उतार दिया था और सिर्फ़ अंदर का छोटा हिस्सा ही अब उनके गुदाज जिस्म को ढक रहा था..
और उस छोटी सी नाईटी में उनकी मोटी जांघे कमाल की लग रही थी..
मैं अपनी अधखुली आँखो से उन्हे देख रहा था….
खिड़की से आ रही रोशनी में उनकी नाईटी के अंदर का सब कुछ दिखाई दे रहा था…
और अंदर सब कुछ खुल्ला डुल्ला था…
यानी मॉम ने ना तो ब्रा पहनी हुई थी और ना ही पेंटी…
इधर-उधर हिलने से उनके मोटे मुम्मे और गद्देदार गांड की थिरकन सॉफ दिखाई दे रही थी मुझे..
कुछ पल पहले मैं साक्षी के बारे में सोचकर अपना लंड हिला रहा था और अब मॉम के आ जाने से मेरा लंड उनके हुस्न की तरफ आकर्षित होकर, उनके नाम पर अकड़ने लगा…
ये साला लंड बड़ा हरामी होता है…
इसे बस चूत दिखनी चाहिए…
वो किसकी है, इस बात का उसे कोई फ़र्क नही पड़ता…
बस देखा और खड़ा हो गया..
अचानक मॉम ने पलटकर मेरी तरफ देखा…
मैने फिर से आँखे मूंद ली…
वो मेरे सिरहाने आकर बैठी और मेरे माथे पर हाथ फेरने लगी…
उन नर्म हाथो में ममता भरी पड़ी थी…वो थोड़ी देर और सहलाती रहती तो मुझे पक्का नींद आ जाती..
पर जल्द ही उस ममता ने वासना का रूप ले लिया और उनके हाथ धीरे-2 खिसक कर नीचे आ गये…
मेरी तो साँसे अटक कर रह गयी….
और कोई मौका होता तो मेरा सीना उपर नीचे होने लगता…
नाक से तेज हवा अंदर बाहर होने लगती…
पर मॉम के हिसाब से तो मैं घोड़े बेचकर सोता हूँ इसलिए मुझे गहरी नींद की एक्टिंग करनी थी…
जैसे पिछली बार की थी…
यानी आज फिर से मुझे वैसा ही टॉर्चर सहना पड़ेगा…
या शायद उससे भी ज़्यादा.
मॉम ने मेरे बालों को सहलाया…
मेरे होंठो पर अपना अंगूठा फेरा और फिर अपने हाथ मेरे सीने से रगड़ती हुई मेरे लंड तक ले आई…
अब तो मेरा जिस्म एक बार फिर से अकड़ने लगा था…
और पिछली बार की तरह मुझे कवर करने के लिए मेरी बहन भी नही थी…
वो खुद इस वक़्त घोड़े बेचकर सो रही थी…
इस बात से अंजान की मॉम मेरे साथ क्या कर रही है.
”उम्म्म्मममममममम……..हर समय खड़ा रहता है इसका तो…जवानी का यही फायदा है….”
अब उन्हे कौन समझाए की मैं सो नही रहा बल्कि उनके इस रूप को देखकर और भी ज़्यादा उत्तेजित हो रहा हूँ…
मॉम ने मेरे पायजामे को नीचे खिसका दिया और एक ही झटके में मेरा छोटा सिपाही उछलकर मैदान में आ गया..
मेरी तो आँखे बंद थी पर मेरे लंड की अकड़न देखकर मेरी माँ की आँखे और भी ज़्यादा फ़ैल गयी..
”ओह माय गॉड ……सो स्ट्रॉंग….एन्ड हार्ड…….”
और फिर मुझे वो सुनहरा एहसास हुआ जो उस दिन हुआ था….
उन्होने झुककर मेरे लंड को चूम लिया….
मॉर्निंग में माँ के होंठो की किस्स अपने लंड पर मिल जाए, इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है…
उन्होने जीभ निकाली और मेरे लंड को चाट लिया….
और फिर अपने होंठो और जीभ को लंड के चारो तरफ लपेटकर उसे जकड़ लिया ….
थोड़ी देर चूसने के बाद वो फिर से उपर आई और इस बार उन्होने अपनी नाईटी की चैन खोलकर अपना मुम्मा बाहर निकाल लिया…
मुझे तो इस बात का एहसास तब हुआ जब उन्होने वो नंगा मुम्मा मेरे चेहरे पर लगा कर अपना निप्पल मेरे होंठो पर रगड़ा..
उफफफ्फ़….
कितना मजबूर था मैं इस वक़्त….
बहुत कुछ करना चाहता था
पर कुछ कर नही सकता था..
मुझे सोनिया की वो बात अच्छे से याद थी की मैं अपनी तरफ से तब तक कुछ ना करू जब तक मॉम अपने पूरे होशो हवास में मुझे चुदाई के लिए खुद से ना कहे…
और इसके लिए मेरा जागे रहना भी ज़रूरी था…
वैसे जाग तो मैं इस वक़्त भी सकता था पर हो सकता है की मेरे जाग जाने से मॉम को झटका लगे और शर्मिंदगी की वजह से वो उठकर वहां से चली जाए…
और इतनी आगे आकर मैं ये तो हरगिज़ नही चाहता था..
मॉम एक हाथ से मेरे लंड को मसलती हुई अपने मुम्मे को मेरे मुँह पर फिराने लगी…
यार, कोई मेरी मॉम को समझा दो की ऐसा करना कितना ख़तरनाक होता है…
ये तो ऐसी हरकत कर रही थी जिसमें अच्छे से अच्छा इंसान भी गहरी नींद से जाग जाए…
और मैं तो इस वक़्त पहले से ही जाग रहा था…
पता नही घोड़े बेचकर सोने की कौन सी परिभाषा उनके दिमाग़ में उतर चुकी थी की मेरे साथ ऐसी हरकते कर रही थी जैसे मैं कोई प्लास्टिक का पुतला हूँ …
उनकी गर्म साँसे मेरे चेहरे पर पड़ रही थी…
वो उन गर्म सांसो को काबू करने की असफल कोशिश करते हुए फुसफुसाई
”आअह ……चूस ले इन्हे…..उम् …..चाट ना मेरे लाल……काट ले इन्हे…जैसे बचपन में काटा करता था…काट ना…..”
एक बार फिर से बोडम महिला वाली बाते कर रही थी वो….
अर्रे मुँह में डालोगी तभी तो काटूंगा ना…
वैसे मन तो मेरा कर रहा था की खुद ही अपने मुँह में लेकर उनके मोटे निप्पल्स को काट लूँ …
पर मैं अपनी तरफ से कुछ करके उन्हे सकते में नही डालना चाहता था…
कुछ देर तक अपने नुकीले निप्पल से मेरे चेहरे पर गुदाई करने के बाद उन्होने खुद ही अपने निप्पल को मेरे होंठो के बीच फँसा दिया…
और फिर मेरे होंठो को ज़बरदस्ती खोकर उन्होने वो मोटा कंचा मेरे मुँह में धकेल दिया….
ऐसा लगा जैसे छोटी रसभरी मेरे मुँह में धकेल दी हो उन्होने…
मेरी जीभ का संपर्क जब उनके निप्पल से हुआ तो उन्होने मेरे सिर के नीचे हाथ रखकर मुझे थोड़ा उपर उठा लिया और ज़ोर से अपनी छाती पर लगाकर भींच दिया…
और उपर मुँह करके एक आनंदमयी सिसकारी मारी
”आआआआआआआआआआआअहह मेरी ज़ाआाआन ……खा जा इन्हे….”
अब तो मेरे बस की बात नही रह गयी थी…
मैने उन्हे चुभलाना शुरू कर दिया…
और मेरी जीभ को अपने निप्पल पर महसूस करते ही मॉम एकदम से ठिठक कर रह गयी…
और मेरे चेहरे को देखने लगी…
मैने बड़े इत्मीनान से अपना संयम बनाए रखा और बहुत धीरे-2 उनके निप्पल को चूसता रहा….
बिना कोई एक्सप्रेशन अपने चेहरे पर लाए…
जैसे सब नींद में कर रहा हूँ मैं
कुछ पल तक देखते रहने के बाद मॉम को जब विश्वास हो गया की मैं नींद में ही उनके निप्पल को चूस रहा हूँ तो वो फिर से मेरे लंड को मसलने लगी…
एक बे बाद उन्होने दूसरा मुम्मा भी मेरे मुँह में धकेला और उसके निप्पल में हो रही खुजली भी मेरे दांतो से बुझवाई…
कसम से…
उन नर्म और मोटे मुम्मो को मैं अब पूरी जिंदगी नही भूलने वाला था….
चेहरे पर लगकर वो मेरे पूरे फेस को कवर कर रहे थे…
जैसे कोई गुदाज सा तकिया मेरे मुँह पर दबाकर मेरी साँसे रोकने की कोशिश कर रहा हो…
पिछले कुछ दिनों से छोटी-2 अंबिया चूसने के बाद ये खरबूजे जितने मोटे मुम्मे सच में एक नया आनंद और एहसास दे रहे थे..
और इस एहसास को महसूस करके मेरा लंड भी एक नया मुकाम हासिल कर चुका था….
आज वो पहले से कई ज़्यादा कड़क और लंबा हो चुका था…
मॉम ने अपना मुम्मा मेरे मुँह से निकाला और एक ही झटके में अपना वो इकलौता कपड़ा भी अपने शरीर से निकाल फेंका जिसने उनके खूबसूरत जिस्म को ढक कर रखा हुआ था…
और नंगी होकर जब उन्होने खुद ही अपने मुम्मे पकड़कर दबाए और एक गुदगूदाई हुई सी चीख मारी तो मैं अपने बिस्तर पर पड़ा-2 काँप सा गया..
उन्होने मेरी शॉर्ट्स को खींचकर पूरा उतार दिया….
मुझे तो इस वक़्त उनके इरादे ख़तरनाक से लग रहे थे…
पर ऐसा शायद उन्होने अपनी सहूलियत के लिए किया था….
ताकि मेरे लंड और उनके मुँह के बीच कोई रुकावट ना आए..
आज उनकी सकिंग पावर कुछ ज़्यादा ही थी…
मेरे लंड और बॉल्स को अपने चेहरे पर पूरा लगाकर वो अच्छे से उनका स्वाद ले रही थी….
जैसे आज उन्हे खा ही जाएगी…
मेरा शरीर उनके हर टच से उपर नीचे होने लगा..
और फिर वो उठी और मेरे सामने खड़ी हो गयी
जैसे अब कुछ करके रहेगी
पर इससे पहले वो कुछ और कर पाती, पीछे से आवाज आयी
”मॉम , ये क्या हो रहा है सुबह सुबह ”
ये सोनिया दी थी , जो अपनी आँखे मलती हुई खड़ी हो चुकी थी







