सोनिया की नज़र सीधा मेरे खड़े लंड पर गयी और वो सब समझ गयी…
वो समझ गयी की मॉम का हाथ मेरे लंड पर आ लगा था…
ये देखकर वो मुस्कुरा दी…
क्योंकि यही तो उसका प्लान था…
वो यही चाहती थी की मॉम को मेरे खड़े लंड का पता चले..
सोनिया ने मुस्कुराते हुए कहा : “अर्रे मॉम …मैने कहा था ना…ये घोड़े बेचकर सोता है…ये नही उठने वाला…”
मॉम अभी भी अपने नंगे शरीर को उस चादर से छुपाने का प्रयत्न कर रही थी…
उन्होने मेरे लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा : “पर…वो…वो उसका…..उसका पेनिस…वो तो अकड़ कर खड़ा है….”
सोनिया : “अर्रे मॉम ..ये तो नॉर्मल बात है…ये उम्र ही ऐसी है….बेचारा कोई सपना देख रहा होगा…तभी उसका ये टावर खड़ा हो गया है….”
वो मॉम को चेहरे को देखकर ये सब बोल रही थी….
और उनके चेहरे को पढ़ने की कोशिश भी कर रही थी की उनके मन में इस वक़्त क्या चल रहा है…
मॉम का चेहरा मेरे लंड पर ही लगा हुआ था…
शायद कुछ देर पहले उसे अपने हाथ में लेकर वो उसके प्रति बुरी तरह से आकर्षित हो गयी थी…..
सोनिया उठी और मॉम के पीछे आकर खड़ी हो गयी…..
उनके कंधे पर अपना सिर रखकर, उनकी कमर को अपने हाथो से जकड़कर उसने अपना एक हाथ फिर से उनकी चूत की तरफ सरका दिया…
और बोली : “पर देखो ना मॉम ….भाई का लंड कितना लंबा है….उम्म्म्ममम….अगर ये मेरा भाई ना होता तो …..अभी इसे खा जाती……वाउ…..कितना मोटा है……और लंबा भी…..”
मॉम का शरीर सोनिया का एक-2 शब्द सुनकर काँप सा रहा था….
उनके हाथ से चादर छूट कर नीचे गिर गयी…
मैने हल्की आँखे खोल कर मॉम की तरफ देखा, जो एकटक मेरे लंड को घूर रही थी…
उन्होने सोनिया की बातो को सुनकर उसे डाँटा भी नही की वो अपने भाई के बारे में ऐसा क्यों बोल रही है….
शायद उनके हिसाब से उस वक़्त ये ग़लत नही था…
सोनिया तो जैसे गर्म लोहे पर प्रहार कर रही थी….
एक प्रहार वो अपने हाथ से मॉम की चूत पर कर रही थी
और
दूसरा प्रहार वो अपनी बातों से उनके दिमाग़ पर..
और उसका असर भी दिख रहा था….
मॉम तो जैसे सम्मोहित सी हो गयी थी मेरे खड़े लंड को देखकर…
सोनिया ने मॉम को पुश करके बेड पर बिठा दिया…
ठीक मेरी कमर के पास…
अब उनका नंगा बदन मेरे जिस्म से टच कर रहा था…
मेरा लंड और कड़क हो गया…
सोनिया का मम्मी को सम्मोहित करना चालू था
”देखो ना मॉम ….कितना बड़ा है…..आपके अंदर से निकले इस बेटे पर आपका पूरा हक है….आप इसे छू सकते हो मॉम …टच करो…देखो उसे….बाहर निकालो इसको….”
और मॉम के काँपते हुए हाथ मेरी तरफ लहरा गये…
अभी कुछ देर पहले तक जो सैक्स उन दोनो के बीच हो रहा था , सोनिया दी ने बड़ी चालाकी से उसमें मुझे शामिल कर लिया था…
पर मुझे तो सोने का नाटक करना था…
और इस वक़्त मेरी सबसे कठिन परीक्षा चल रही थी..
मैने कुन्मूनाने का नाटक किया और अपनी गांड थोड़ी सी हवा में उठा दी…
उसी का फायदा उठा कर मॉम ने मेरी शॉर्ट पूरी नीचे खींच दी..
और फिर जो उनकी आँखो के सामने था, वो जैसे दुनिया का आठवा अजूबा था…
उनके बेटे का नंगा और जवान लंड.
एकदम कड़क…चमकता हुआ…मोटा लंड.
मॉम ने एक नज़र सोनिया दी को देखा, वो भी पलके झपकाए बिना मेरे लॅंड को देख रही थी..
हालाँकि आज से पहले वो कई बार इसे चूस चुकी थी…
अपनी चूत और गांड में ले चुकी थी
और आज एक बार फिर से उसे देखकर
और वो भी ऐसी सिचुएशन में, सोनिया दी की चूत में भी खुजली होने लगी..
सोनिया के मुँह से गुर्राती हुई सी आवाज़ निकली
”उम्म्म्मममम ओह माययययी गॉडsssssssss ……. इट्स टूऊssssssss सैक्सी …… मॉम …….”
मॉम बेचारी ये भी नही बोल पाई की ऐसा मत कह तू
ये तेरे भाई का लंड है…
ये ग़लत है….
पर वो ग़लत काम तो वो खुद भी कर रही थी…
इसलिए वो भला कैसे कहती…
सोनिया के उकसाने पर मॉम के हाथ एक बार फिर से मेरे नंगे लंड पर आ लगे…
मेरी तो धड़कने ही बेकाबू हो गयी….
मॉम ने एक बार फिर से सोनिया की तरफ देखा और कन्फर्म किया : “पक्का ना…ये जागेगा नही….”
सोनिया : “नही मॉम …नही जागेगा….कम ओंन …करलो अपने दिल की….. बोलो…क्या करना चाहते हो….”
मॉम के होंठ लरज गये कुछ बोलने से पहले….
अब वो अपनी बेटी से कैसे बोलती की उसे वो लंड चूसना है..
पर शायद सोनिया ने वो बात ताड़ ली थी…
क्योंकि मॉम जिस अंदाज से उसे देख कर अपने सूखे होंठो पर जीभ फिरा रही थी
उससे सॉफ पता चल रहा था की उनके मन में क्या चल रहा है…
इसलिए सोनिया ने उनके कान में धीरे से कहा
”मॉम … मैं अगर आपकी जगह होती ना…तो इसे चूम लेती…..चाट लेती और….और….”
बोलते-2 शायद सोनिया भी एक्साइटिड हो रही थी….
उसकी साँसे भी तेज हो गयी…
मॉम ने गहरी साँसे लेते हुए कहा : “और क्या सोनी…बोल ना….और क्या…”
सोनिया : “और चूस लेती इसे…..अपने मुँह में लेकर…अच्छी तरह से…और तब तक चूसती …जब तक ये झड़ नही जाता मेरे मुँह में ….”
सोनिया का इतना कहना था की मॉम की आँखे फैलती चली गयी….
जैसे उन्हे विश्वास ही नही हो रहा था की उनकी खुद की बेटी, अपने भाई का लंड चूसने के लिए उसे उकसा रही है…
पर वो कुछ बोली नही..
क्योंकि
वो भी यही सुनना चाहती थी…
शायद
इसलिए एक बार फिर से उनके नर्म हाथ मेरे लंड से खेलने लगे….
और फिर वही हुआ जो सोनिया ने उन्हे करने को कहा था…
वो धीरे-2 मेरे लंड पर झुकने लगी…
जैसे कोई सम्मोहन उन्हें मेरे लंड की तरफ खींच रहा हो
वो पास आती चली गयी
और मुझे एहसास तब हुआ जब उनकी गर्म साँसे मेरे लंड पर पड़कर उसे झुलसाने लगी….
मैने आधी आँख खोल कर देखा तो मॉम बड़े प्यार से मेरे लंड को देख रही थी…
उनकी आँखो में हवस सॉफ देखी जा सकती थी….
और फिर उन्होने अपनी गर्म जीभ निकाल कर मेरे लंड पर लगा दी…
मैं चाहकर भी सिसकारी नही ले पाया…
मेरा बदन अकड़ गया…
बेड की चादर को मैंने अपने हाथों से भींच लिया
सोनिया ने बात संभाली : “देखा मॉम , भाई को लग रहा है की सपने में उनके साथ ये सब कोई कर रहा है…आप कंटिन्यू रखो ….शाबाश….चाट लो इसे…”
जिस अंदाज से वो मॉम को मेरी तरफ आकर्षित कर रही थी वो काबिले तारीफ़ था….
एक चुदाई तो इस बात की पक्की थी मेरी तरफ से उसके लिए..
फिर मॉम ने अपनी जीभ से मेरे लंड को पूरा चाट लिया….
चाट क्या लिया उसे पूरा नाप लिया अपनी जीभ से…
और फिर जब उनसे सब्र नही हुआ तो एक ही झटके में उन्होने मेरे लंड को अपने मुँह में भरकर चूस लिया..
ओह यसस्सस्स…….
क्या पल था वो दोस्तो….
मेरा लंड मेरी माँ के गर्म मुँह में था…
और इसकी गवाह मेरी नंगी बहन थी…
जिसके चेहरे की चमक सॉफ बता रही थी की अपनी योजना को सफल होते देखकर उसे कितनी खुशी हो रही है…
मॉम ने मेरे लंड को नीचे से पकड़ा और पूरा अंदर निगल गयी…..
ओह यारो
क्या फीलिंग होती है ये भी…
अपनी ही माँ से अपने लंड को चुसवाना…
हालाँकि अपनी बहन से लंड चुसवाना भी सुपर वाली फीलिंग भरा पल था..
पर ये तो सुपर से भी उपर हो गया..
मेरे चेहरे के भाव बता रहे थे की मेरे अंदर क्या चल रहा है….
सोनिया शायद उन एक्सप्रेशन्स को देखकर समझ गयी थी की ये देखकर मॉम भी समझ जाएगी की मैं जाग रहा हूँ … इसलिए, वो मॉम के पीछे से घूमकर सामने की तरफ आ गयी…
और मेरी छाती की साइड में अपने नंगे कूल्हे सटाकर बैठ गयी…
अब उसका बदन मॉम के सामने था, फिर बड़ी चालाकी से वो थोड़ा सा झुकते हुए मेरे पेट पर अपनी छाती रखकर लेट सी गयी…और वो उसने इसलिए किया ताकि मॉम मेरा चेहरा ना देख पाए…
पर ऐसा करके सोनिया दी ने मेरे लंड की अकड़ में और इज़ाफा ही किया…
क्योंकि उनके नंगे बूब्स मेरे पेट पर बुरी तरह से चुभ रहे थे…
नीचे की तरफ मॉम के नंगे मोम्मे मेरी जाँघो पर चुभ रहे थे…
एक साथ 4 मोम्मे मेरे बदन की मालिश कर रहे थे…
मॉम के चेहरे के ठीक सामने सोनिया दी का चेहरा था…
वो उनकी तरफ भूखी नज़रों से देख रही थी…
और आँखो ही आँखो में कह रही थी की थोड़ा मुझे भी चूसने दो ना मॉम ..
पर मॉम थी की अपनी ही धुन में मेरे लंड को चूसती जा रही थी…
सोनिया दी के बीच मे आकर लेटने की वजह से मुझे आँखे बंद रखने की ज़रूरत नही थी…
मैं आँखे खोलकर सोनिया दी की नंगी और सैक्सी पीठ को देख रहा था…
वो पीछे से भी उतनी ही खूबसूरत थी जितनी की आगे से…
मन तो कर रहा था की उनकी नंगी पीठ को चूम लू..
मैं ऐसा नही सकता था…
पर उसे हाथ तो लगा ही सकता था…
वैसे भी ना तो मेरा चेहरा और ना ही मेरा हाथ मॉम को दिख रहा था…
इसका फायदा उठाकर मैने अपने हाथ से सोनिया दी की नंगी पीठ को छू लिया….
एक तरंग सी दौड़ गयी उनके बदन में …
उनकी छातियाँ थोड़ी और बाहर निकल आई…
एक लंबी सी सिसकारी निकल गयी उनके मुँह से…
”आआआआआआआआआअहह …… ओह यसस्स्स्स्स्स्सस्स….”
उन्होने आँखे खोल कर सोनिया को देखा, जो ठीक उनके सामने, प्यासी नज़रों से, अपने होंठों पर जीभ फेरती हुई पड़ी थी…
मॉम को उसपर दया आ गयी…
और उन्होने अपना मुँह मेरे लंड से निकाल लिया.
और उन्होने बड़े प्यार से वो लंड सोनिया दी की तरफ लहरा दिया…
फिर तो उन दोनो के लिए वो मेरा लंड खिलौना सा बन कर रह गया…
पर उनके इस खेल ने मेरी हालत खराब कर दी…
मॉम के गर्म मुँह से निकल कर जब सोनिया दी के तड़पते मुँह में मेरा लंड गया तो मैने पीछे से उनके बालो को कस के पकड़ लिया…
पर उनपर कोई असर नही पड़ा…
वो मेरे लंड को एक ही बार में अंदर तक घुसाकर चूसती चली गयी…
उफफफ्फ़……
मेरा मन तो कर रहा था की चीखे मारु….
गालियां दू उन दोनो माँ बेटियो को….
ठूस कर अपना लंड उनके मुँह में बारी-2 से घुसाऊ…
पर सोनिया दी की कसम ने मेरे मुँह और आँखो पर ताला लगा रखा था…
मैं वो सब सिर्फ़ महसूस कर सकता था..
अपने मज़े को बयान नही कर सकता था…
ये कैसा टॉर्चर भरा काम दे दिया था सोनिया दी ने मुझे…
पर जो प्रोमिस मैंने किया था, उसे बचाने के लिए मैं चुपचाप लेटा रहा…
पर मेरे लंड पर मेरा कोई कंट्रोल नही था…
वो तो बेकाबू सा होकर, जंगली घोड़े की तरह, हिनहिनाता हुआ..कभी मॉम के मुँह में तो कभी सोनिया दी के मुँह में जाकर मज़े ले रहा था…
और उसकी ये खुशी उसके चेहरे से टपक भी रही थी…
बूँद-2 करके…
और ये बूंदे उस आने वाले तूफान का संकेत थी, जो मेरी बॉल्स के अंदर उबाले खा रहा था…
और जल्द ही, उनके इस खेल की वज से , वो पल भी आ ही गया, जब मेरे लंड का वो चिपचिपा बरसाती पानी, अपने अंदर की सारी सीमाओं को तोड़कर , माँ -बेटी के रिश्तो की परवाह किए बिना, उन्हे अपने तूफ़ान में लेकर बहता चला गया….
एक के बाद एक कई पिचकारियां मेरे लंड से निकल कर हवा में उछलने लगी…
और उन दोनों के बीच जैसे होड़ सी लगी हुई थी की कौन कितना माल पी कर जाएगा…
सोनिया दी को तो पहले से ही मेरा मिल्कशेक पसंद था…
अब उस जूस की चाह रखने वालो में एक और नाम भी जुड़ चुका था…
मेरी मॉम का…
क्योंकि आज मेरे लंड से निकले माल की ज़्यादा बूंदे , मॉम ने ही अपनी जीभ से समेत कर अपने अंदर पहुँचाई थी…
सोनिया दी ने अपना ज़ोर लगाकर मुझे बेड पर बाँधकर नही रखा होता तो मेरी कमर का तीर कमान बन गया होता…
और उन्ही की वजह से मैं , आँखे खोलकर, अपने चेहरे के पूरे एक्सप्रेशन्स के साथ उस ऑर्गॅज़म को महसूस कर पाया था…
मेरे हाथ आख़िर तक उनके बालों को खींचते रहे और इस वजह से मुझे भी झड़ने में काफ़ी आनंद आया..
मुझे तो अभी भी विश्वास नही हो पा रहा था की मेरी बहन और माँ ने मिलकर, नींद ही नींद में , मेरे लॅंड के साथ बलात्कार कर दिया था..
पर जो भी हुआ था बहुत अच्छा हुआ था…
क्योंकि ये वो पहली सीढ़ी थी, जो बहुत उपर तक आकर, आनंद के वो दरवाजे खोलने वाली थी, जिसके बाद हर दिन और हर रात मस्ती से भरी होने वाली थी…
इसलिए मेरे लंड को अच्छे से चाटकर, सॉफ करके, उन्होने फिर से पैक कर दिया और मुझपर चादर डालकर मुझे सोने के लिए छोड़ दिया…
मॉम अपना चेहरा धोकर आई तो वो कुछ बोल ही नही पा रही थी..
सोनिया : “कुछ ना बोलो मॉम …आज रहने दो…जो भी हुआ है, उसके बारे में कल बात करेंगे…अभी आप जाकर सो जाओ…गुड नाइट..”
इतना कहकर उसने मॉम के होंठो को चूमा, उन्हे गले से लगाया और उन्हे नीचे भेज कर दरवाजा बंद करके मेरे पास आई…
मैं एक झटके से उठकर बैठ गया…
जैसे बरसों से मुर्दा बनकर लेटा हुआ था, और आज ही किसी शक्ति ने मुझे जगाया था….
बहुत सी बाते करनी थी अभी तो सोनिया दी से…
बहुत सी बातों का जवाब लेना था…
कुछ अधूरा बचा हुआ मज़ा पूरा करना था अभी तो..










