साक्षी के जाने के बाद जब सोनू नीचे आया तो सब नॉर्मल सा था…
मॉम किचन में खाना बना रही थी और सोनिया टीवी देख रही थी.
सोनू उसके करीब जाकर बैठ गया..
सोनिया के चेहरे पर अर्थपूर्ण मुस्कान थी, सोनू के मन में भी कुलबुलाहट सी हो रही थी..
वो बोला : “दी, मॉम को कुछ शक तो नही हुआ ना…?”
सोनिया ने मन में सोचा, कहां तो माँ अपनी पोल् खुलने के डर से अपना मुँह छुपा रही है और कहां ये सोनू को अपनी पड़ी है..
सोनिया : “नही रे…वो तो शायद उन्होने पहली बार उसको देखा था, इसलिए ऐसा बिहेव कर रही थी…”
सोनू कुछ देर चुप रहा , फिर बोला : “ओके …और आप दोनो की शॉपिंग कैसी रही…मज़ा किया ना…”
सोनू के मुँह से मज़ा शब्द सुनते ही उसकी आँखो के सामने बाथरूम वाली मूवी दोबारा चलने लगी…
जिसमें वो और मॉम, पूरी नंगी होकर अपनी चूतें साक्षी से चुस्वा रही थी…
सोनिया : “या या…. आज बहुत दिनों के बाद ऐसा मज़ा मिला है…. मॉम भी बहुत खुश थी….”
सोनू मुस्कुरा दिया…
सोनिया ने मंद-2 मुस्कुराते हुए उसकी तरफ देखा और बोली : “मुझे पता है की तेरे माइंड में क्या चल रहा है…यही ना की मैने मॉम से तेरे बारे में कुछ बात की या नही….”’
सोनू का चेहरा लाल हो गया….
वो बोला : “अर्रे, नही दी…ऐसा कुछ नही है….”
सोनिया ने धीरे से कहा : “वैसे…एक प्लान है मेरे माइंड में …”
सोनू की आँखो की चमक बढ़ सी गयी
सोनिया : “पर इसके लिए तुझे आज रात का इंतजार करना पड़ेगा…”
सोनिया तो जैसे पहेलियां बुझा रही थी…
सोनू : “मतलब…सॉफ-2 बोलो ना दी….क्या प्लान है…”
सोनिया : “प्लान सिंपल है….तुम्हे सिर्फ़ सोने का नाटक करना है…बाकी मैं संभाल लूँगी…”
सोनू के दिमाग़ के घोड़े दौड़ने लगे…
आने वाली संभावनाओ को सोचकर.
सोनिया ने उसे छेड़ने के अंदाज में कहा : “और इसमें कुछ ग़लत भी नही होगा…क्योंकि तू तो नींद में होगा ना…”
सोनू ने आँखे गोल करके अपनी बहन को देखा और उसकी टी शर्ट में से झाँक रहे मोम्मे की गोलाई देखकर उसकी नज़रें वहीं जम कर रह गयी..
सोनिया ने जान बूझकर अपनी टी शर्ट को खींच कर नीचे किया था, ताकि उसकी क्लिवेज उसे दिखाकर वो उसे ये भी याद दिला सके की मैं भी इस खेल का हिस्सा हूँ , सिर्फ़ मॉम , साक्षी और तनवी में ही ना उलझे रहना..
सोनिया ने अपनी डेयरिंग दिखाते हुए कुछ करने की सोची…
मॉम तो किचन में थी जो ठीक सोफे के पीछे थी, सोनिया ने अपने आप को पूरा सोफे की ओट में छुपा लिया और अपनी टी शर्ट को उपर करके अपनी ब्रा के कप को नीचे कर दिया…
एक ही पल में सोनू की आँखो के सामने अपनी बहन के गोरे-2 मोम्मे छलांगे भर रहे थे…
सोनू की हवा फिर से टाइट हो गयी
मॉम ठीक उनके पीछे थी और सोनिया की ये हरकत उन्हे फंस्वा सकती थी
पर फिर उसे ऐसा करता देखकर मुझमे एक अलग ही रोमांच आ रहा था…
और शायद ये बात सोनिया दी को भी पता चल चुकी थी, इसलिए मेरी आँखो की चमक देखते हुए उन्होने मेरे हाथ को पकड़ कर अपनी छाती पर लगा लिया…
एकदम गरमा गर्म गुर्दे कपूरे जैसे बूब्स थे उसके…
मैने ज़ोर से पकड़ कर उन्हे दबा दिया…
”आआआआआआआआअहह सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स”
तभी मॉम की आवाज़ आई : “सोनी बेटा…मैं ज़रा क्लिनिक तक जा रही हूँ …शाम तक वापिस आ जाउंगी ..कुछ अपायंट्मेंट्स है, मैं बस नहाकर निकल रही हूँ …तुम दोनो के लिए लंच बना दिया है…खा लेना…”
वो तो अच्छा हुआ की उन्होने सीधा वहां आकर ये बात नही कही थी…
क्योंकि उनकी आवाज़ सुनते ही मैने अपना हाथ हटा लिया और सोनिया ने अपनी टी शर्ट नीचे कर ली वरना पकड़े जाते.
”आआआआआआअहह सोनू…….. मेरी ज़ाआाआआअन्न……आज तो तू गया …….. मॉम के जाने का भी वेट नही हो रहा अब तो….”
उसने मेरे हाथ को फिर से अपनी टी शर्ट में घुसा लिया और अपने बूब्स को मसलवाने लगी…
शायद कुछ अजीब तरह की खुजली होने लगी थी मेरी बहन की छातियों में आजकल , जो मेरे सहलाने से ही दूर होती थी…
मैने उसके निप्पल्स को अपनी उंगलियो में समेट कर उन्हे कुचल दिया….
सोनिया तो पागल ही हो गयी…
जैसे मैने उसकी उत्तेजना को भड़काने वाला को बटन दबा दिया हो.
उसने एक ही झटके में अपनी टी शर्ट उतार फेंकी ….
मेरी तो हालत खराब हो गयी ये देखकर की मॉम के घर में होते हुए वो मेरे सामने, और वो भी ड्रॉयिंग रूम में , सिर्फ़ ब्रा में बैठी है..
सोनिया मेरी गोद से उतरी और मेरे सामने आकर उसने वो ब्रा भी उतार दी….
सामने से खुलने वाली ब्रा के हुक्स जब खुले और उसका नंगा यौवन मेरी आँखो के सामने आया तो एक पल के लिए तो मैं भी भूल गया की माँ घर पर ही है…
जैसे ही उसके गोरे-2 बूब्स मेरे सामने आए मैने लपककर उन्हे पकड़ लिया और ज़ोर-2 से चूस्कर उसकी मदर डेरी का कच्चा दूध पीने लगा..
”आआआआआआआआआअहह यसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स… भाईईईईईईईईईईईईईई….. चूस ले इन्हे………. पी जा……. सुबह से खुजली हो रही है……अहह……..फककककककककककक…”
मेरे सिर को सहलाते-2 उसका हाथ मेरे लंड तक आ गया और एक ही झटके में उसने शॉर्ट्स को गिरा कर मेरे लंड को बाहर निकाल लिया…
एक बार फिर से मेरा ध्यान मॉम की तरफ चला गया…
सोनिया : “घबराओ मत…मॉम को अभी 10 मिनट और लगेंगे….नहाकर वो साड़ी पहनेगी, तभी बाहर निकलेगी…”
मैं : “पर दी….ये सब यहां ….थोड़ा वेट करते है ना…..मॉम के जाने का……प्लीज़….”
वेट तो मुझसे भी नही हो रहा था पर कहना तो मेरा फ़र्ज़ था ना..
सोनिया ने हिसहीसाती हुई आवाज़ में कहा : “वेट गया भाड़ में ….मुझे ये अभी के अभी लेना है बस….”
इतना कहते हुए उन्होने अपना चेहरा आगे किया और अपनी जीभ से मेरे लंड के छेद को कुतरने लगी…
उसमे से निकल रहा प्रीकम निकाल कर उन्होने निगल लिया…
और जैसे ही वो प्रीकम की बूँद उनके मुँह में गयी, वो बावली सी होकर मेरे लंड को ज़ोर-2 से चूसने लगी…
मेरे हाथ अपने आप सोनिया दी के रेशमी बालो में घूमने लगे…
उसपर दबाव डालकर मैं अपना लंड अंदर तक लेने के लिए उकसाने लगा…
अब वो सिर्फ़ एक नन्ही सी कच्छी में खड़ी थी…
अपनी कमर मटकाते हुए सोनिया दी ने जब अपनी वो एकमात्र कच्छी भी उतारी तो मुझे ऐसा लगा जैसे मैं कोई एरॉटिक मूवी देख रहा हूँ , जिसकी हेरोइन अपने हीरो को लुभाने के लिए अपना शरीर दिखा रही है…
पर यहाँ हीरो मैं था और हेरोइन मेरी बहन सोनिया…
कच्छी को भी उतार कर वो मेरी तरफ सैक्सी अंदाज में आने लगी..
पास आकर दी ने मेरी शॉर्टस को नीचे खींचा और उसे अंडरवीयर समेत निकाल फेंका..
मैने अपनी टी शर्ट भी उतार दी….
अब तो मुझे भी उत्तेजना ने घेर लिया था…
मेरा लंड अब किसी भी कीमत पर सोनिया दी की चूत में दाखिल होना चाहता था…
उससे पहले वो उसे फिर से गीला कर देना चाहती थी, मुंह में लेकर
फिर वो मेरी गोद में आकर बैठी…
अपनी चूत को मेरे गीले पर फिट किया और लंड को अंदर लेते हुए, चरमराती चूत के बल, नीचे फिसलने लगी…
”आआआआआआआआआआआआहह…… ओह यसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स…. बैबी……… उम्म्म्मममममममममममम….. ये है वो फीलिंग…..जो सुबह से मिस कर रही थी मैं …… अहह….”
मैने भी सोनिया दी की फेली हुई गांड पर अपने हाथ रखे और अपने लंड को उनकी चूत की टनल में दौड़ाने लगा…
सोनिया दी ने अपने आप को मेरे उपर बिछा सा दिया…
लॅंड को अपनी चूत में घुसाकर वो अपनी मोटी गांड को उपर नीचे करके खुद ही अपनी चूत मरवा रही थी…
”ओह एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स…… मज़ा आ रहा है दी……. बहुत टाइट है तुम्हारी चूत …… अहह………… कसम से……. ये काम तो मैं पूरी लाइफ कर सकता हूँ …..”
सिर्फ़ 2-3 बार चुदी चूत टाइट ही होगी ना…
पर फिर भी सोनिया की चूत की तारीफ करने का फायदा ही हुआ
वो और लगन से मेरे लंड को अपनी चूत पर खीरे की तरह घिसने लगी…
पर वो भी जानती थी और मैं भी की ये चुदाई पूरी होनी पॉसिबल नही है…
और वैसे भी, जल्दबाज़ी की चुदाई में वो मज़ा नही मिलता जो आराम से चोदने में मिलता है…
सोनिया दी ने अपना चेहरा ऊपर उठाया और बड़े प्यार से मेरे होंठो को चूसा और बोली : “उम्म्म्म…..मन तो नही कर रहा छोड़ने का, पर छोड़ना पड़ेगा अभी के लिए….पर ज़्यादा देर तक नही बचोगे तुम….आज मुझे जी भरकर चुदवाऊँगी तुमसे…समझे…”
उफफफफफफफफफफ्फ़….
ऐसी बात जब लड़की खुद बोले तो लाइफ का अपना ही मज़ा होता है…
उसके बाद वो जल्दी मे मेरे लंड के घोड़े से उतरी और अपने कपड़े उठा कर, नंगी ही उपर भागती चली गयी…
और पीछे मुड़कर बोली : “मॉम के जाते ही उपर आ जाना… और अंदर आने से पहले अपने स्टुपिड कपड़े उतार देना….समझे…लव यू …”
इतना कहकर वो नंगी हिरनी अपनी गांड की चर्बी को उछालती हुई उपर भाग गयी..
मैने भी अपने सारे कपड़े पहने और मॉम के आने से पहले एक अच्छे बच्चे की तरह टीवी देखने का नाटक करने लगा..
करीब 5 मिनट के बाद मॉम तैयार होकर बाहर निकली तो मैं उनके रसीले बदन और सैक्सी साड़ी को देखकर पलके झपकाना भी भूल गया..
हालाँकि, आज से पहले भी वो इसी तरह तैयार होकर क्लिनिक जाती थी, पर जब से सोनिया दी ने उनके बारे में , मेरे दिमाग़ में गंदे बीज बोए थे, उसके बाद उन्हे देखने के नज़रिए में अंतर आ चुका था…
अब मैं उन्हे एक सैक्स ऑब्जेक्ट की नज़र से देखता था…
उन्होने किस कलर की ब्रा पहनी होगी
किस डिसाइन की पेंटी होगी…
नंगी होने के बाद वो कैसी दिखेगी
ये सब सोचने लगा था अब मैं.
पर अभी तक हमारे बीच कुछ हुआ नही था इसलिए उन्होने भी अपनी भावनाओ पर काबू किया और बोली : “मैं जा रही हू, तुम दोनो खाना खा लेना….और ये सोनिया कहां गयी…?”
मैं : “वो शायद थक गयी थी…अपने रूम में सो रही है…”
पर अपनी बात पर मन ही मन मैं हंस भी दिया..
क्योंकि मॉम अगर इस वक़्त उपर चली जाए तो शर्तिया बात है, अपनी टांगे फेला कर, नंगी लेटी हुई सोनिया दी, मेरा ही इंतजार कर रही होगी…
पर मॉम को वैसे भी देर हो रही थी…
इसलिए ओके बोलकर वो बाहर निकल गयी.
उन्हे बाय बोलकर, और उनकी गाड़ी को दूर तक जाता देखने के बाद मैने जल्दी से दरवाजा बंद किया…
और लगभग भागता हुआ सा उपर आ गया…
पर मेरे से आगे मेरा लंड था, जो तीर की तरह मेरी शॉर्ट्स में तंबू बनाकर मेरे शरीर से 1 फुट आगे निकला हुआ था…
दरवाजा खुला ही हुआ था…
पर सोनिया दी की बात मुझे अच्छे से याद थी
इसलिए मैने अंदर जाने से पहले अपने सारे कपड़े निकाल कर वहीं छोड़ दिए.
और जब दरवाजा धकेल कर अंदर आया तो मेरी साँसे उपर की उपर और नीचे की नीचे रह गयी..









