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सोनिया बड़े मज़े से मॉम के नंगे बदन से लिपट कर उन्हे सहला रही थी…
मुझे तो अब लग रहा था की वो ये बात भूल ही चुकी है की मैं अलमारी में बंद हूँ
मेरे लिए अब वहां खड़ा होना मुश्किल होता जा रहा था.

पहले तो लग रहा था की खेल ख़त्म होने के बाद मॉम नीचे चली जाएगी…
पर सोनिया ने उन्हे अपनी बातो में लगा लिया.

सोनिया : “मॉम..अगर आप बुरा ना मानो तो एक बात पूछु…”

मॉम : “ह्म्*म्म्म”

सोनिया : “आपको प्रोपर सैक्स ना किए हुए कितना टाइम हो गया…”

सोनिया की बात सुनकर मॉम ने चोंकते हुए उसे देखा.

सोनिया : “मॉम , हैरान मत होइए…मुझे पता है की आपके और पापा के बीच काफ़ी टाइम से कुछ हुआ नही है… तभी तो आप आज इतनी आसानी से अपनी बेटी के साथ ये सब करने के लिए तैयार हो गयी…”

सोनिया की बात सही थी…
मैने भी मन में सोचा की क्यो मॉम ने एक बार भी गुस्सा नही किया
माना नही किया…
अपनी ही बेटी के साथ इस तरह के रिलेशन एक माँ को शोभा नही देते.

पर वो माँ भी क्या करे जब उसे अपने पति से कोई अटेन्षन ना मिले…
और एक सभ्य परिवार की बहू होने के नाते वो बाहर किसी और के साथ संबंध भी नही बना सकती थी…
ऐसे में एक आशा की किरण उसे सोनिया ने दिखाई और वो उसकी रोशनी में पूरी नहा गयी.

मॉम : “हां …सही कहा तुमने…. तेरे पापा को मेरी फ़िक्र ही कहा है… ऑफीस के काम के बाद वो इतना थक जाते है की इन सब बातो के लिए एनर्जी ही नही बचती…और वैसे भी, इस उम्र में आकर कुछ प्राब्लम भी हो ही जाती है, इसमें उनका भी कोई कसूर नही है…”

फिर कुछ देर रुककर वो बोली : “हम औरतों को उपर वाले ने इस तरह का बनाया है की हमारे अंदर की प्यास किसी भी उम्र में आकर भी बुझती नही है…पर हमारे समाज में इसे गंदी नज़रों से देखा जाता है…समाज के लोग लड़कियो और औरतों पर इतनी पाबंदी लगा देते है की वो अपने मन की बात ना तो किसी से कर सकती है और ना ही खुलकर जी सकती है… ऐसे में अंदर ही अंदर घुटकर जीने के सिवा कोई और चारा ही नही है..”

मॉम सही कह रही थी…
लड़को के तो मज़े होते है
वो तो कहीं भी मुँह मार लेते हैं
पर लड़कियो की चूत में अगर खुजली हो तो वो कहाँ जाए…

मॉम : “और ऐसे में अगर माँ को अपने बच्चो से वो प्यार मिले तो इसमें क्या बुरा है..”

सोनिया : “मॉम , फिर तो आप ये काम सोनू के साथ भी कर सकते हो…”

सोनिया ने बड़ी बेबाकी से अपने मन की बात मॉम को कह तो दी
पर उसके बाद मॉम के चेहरे का एक्सप्रेशन देखने लायक था…

मेरी भी हालत पतली हो गयी…
मुझे तो लग रहा था जैसे मैं भी उन्ही के सामने बैठा हूँ
और सोनिया ने मेरी सिफारिश कर दी है जिसे सुनकर मॉम गुस्सा हो गयी.

मेरी तो आँखो के सामने वो मंज़र नाचने लगा जिसमे मैं मॉम की चूत में लंड पेलकर उन्हे बुरी तरह से चोद रहा हूँ .

अब वो गुस्सा हुई या नही ये तो नही पता…
पर सोनिया की बात सुनकर वो जल्दी से उठी और उन्होने कपड़े पहनना शुरू कर दिया…
और एक मिनट में ही कपड़े पहन कर बाहर निकल गयी.

और जाते -2 वो बोली : “तुम्हे मेरे बारे में ज़्यादा सोचने की जरूरत नही है…”

और पीछे सोनिया अपने बेड पर नंगी लेटी हुई उन्हे जाते हुए देखती रह गयी.

मैं झट्ट से कूदकर अलमारी से बाहर निकला…
और भागकर सबसे पहले कमरे का दरवाजा बंद किया…
मेरा पूरा शरीर पसीने से नहा चुका था…

और फिर पलटकर मैने सोनिया दी को जैसे डांटना शुरू कर दिया

”दी, आप पागल हो गये हो क्या….ये क्या कर लिया आपने मॉम के साथ…और मेरे बारे में बोलने की क्या ज़रूरत थी…आपने ये ठीक नही किया दी, ये बिल्कुल ग़लत है…”

सोनिया ने अभी भी अपने नंगे शरीर को ढकने का कोई प्रयत्न नही किया…
वो बड़े आराम से तकिया लगाकर मेरी बातें सुनती रही.

और बाद में बोली : “ये ग़लत है वाली बात तो तुम करो ही मत…मेरे साथ जो कर रहे थे वो भी उतना ही ग़लत था और जब वो बाद में सही हो सकता है तो अब जो मैं मॉम के साथ जो कर रही हूँ , वो भी उसी हिसाब से सही है…और रही बात तुम्हारे बारे में बात करने की तो ये मैं तुम्हारे लिए ही कर रही हूँ और सच कहूँ तो मॉम के लिए भी…क्योंकि एक औरत की प्यास सिर्फ़ एक मर्द ही बुझा सकता है…उनके साथ ये हल्का फूला प्यार करके मैने उन्हे अभी के लिए तो शांत कर दिया है पर अंदर तक बुझने वाली प्यास तो तुम्हारा ये हथियार ही बुझा सकता है…”

उसने मेरे लंड की तरफ इशारा किया जो अभी तक उसी अंदाज में खड़ा था जैसा अलमारी में उनकी बाते सुनकर खड़ा था.

सोनिया : “और वैसे भी, अपनी मॉम के दूध का क़र्ज़ उतारना तुम्हारा भी फ़र्ज़ है… और इस वक़्त मॉम को..उनके जिस्म को…उनकी पुस्सी को तुम्हारी और तुम्हारे इस लंड की बहुत ज़रूरत है…”

वो तो जैसे मुझे हिप्टोनाईस कर रही थी…

और मैं हो भी रहा था.

उसकी बाते मेरे दिल के अंदर तक उतर रही थी…
मैं इस वक़्त अपने आपको उस मसीहा की तरह समझ रहा था जो पूरी दुनिया की अबला औरतों को बचाने निकल पड़ा है…
और सबसे पहले मैं अपनी माँ की सहायता करके उन्हे इस आग से बचाऊंगा..

पर फिर कुछ सोचकर मैने कहा : “पर…पर दी…ये सब मुझे सही नही लग रहा …मुझे लगता है की ये सब हमारे बीच ही रहना चाहिए, मॉम को इसमे इन्वॉल्व नही करना चाहिए…”

सोनिया : “मॉम इसमे इन्वॉल्व हो चुकी है…और मुझसे मॉम का ये दर्द अब और नही देखा जाएगा… तुमने शायद देखा नही, मॉम को जब मैने तुम्हारा नाम सजेस्ट किया तो उन्होने कुछ नही कहा…इसका मतलब वो भी शायद अंदर से यही चाहती है…”

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मैं चुप हो गया…
ये बात तो मैं भी समझ चुका था…
जब मॉम एक बच्चे के साथ संबंध बना सकती है तो दूसरे के साथ बनाने मे भला क्या प्राब्लम होनी थी उन्हे…

और मेरे पास तो लंड भी है.

उसी लंड की चाह में शायद वो मान जाए…
ऐसी उम्र में आकर एक कड़क लंड अगर उन्हे मिल जाए तो और क्या चाहिए उन्हे..

मुझे सोचते हुए देखकर वो उठकर मेरे पास आई और नंगी ही मुझसे लिपट गयी…

और बड़े प्यार से बोली : “मान जाओ भाई….मॉम को तुम्हारी मदद की ज़रूरत है…प्लीज़…”

उसने जब ये बात कही तो मेरा दिल एकदम पसीज गया…
आपको तो पता है लड़के इस मामले में कितने भावुक होते हैं,उनसे किसी का दर्द और परेशानी नहीं देखि जाती ।

और मैने उसे ज़ोर से हग करते हुए कहा : ”ओक…दी….जैसा आप कहे….”

मेरी बात सुनते ही वो पागलों की तरह मुझे चूमने लगी…
मेरी गोद में उछलकर चड गयी और नीचे मुँह करके मेरे होंठो को चूसने लगी.

उसके मुँह से मुझे वही पुरानी शराब की खुश्बू आ रही थी जो मॉम की कच्छी में से आ रही थी…
मैं भी दुगने जोश के साथ उसके रसीले होंठो पर लगे मॉम की चूत के रस को चाटने लग गया.

अब कुछ और करने की हालत नही थी…
थोड़ी देर पहले जिस अंदाज में मैने सोनिया दी को चोदा था उसके बाद वो पर्फॉर्मेन्स दोबारा लाने के लिए कम से कम 2-3 घंटे का गेप चाहिए था..

और मॉम भी नीचे ही थी…
इसलिए मैने ज़्यादा रिस्क लेना सही नही समझा..
सोनिया दी ने भी अपने कपड़े पहने लिए और मैं पीछे वाली बाल्कनी से घर के पीछे वाली सुनसान गली में कूद कर सामने के दरवाजे के सामने आ गया..

मैने इस वक़्त ट्रैक्क सूट पहना हुआ था…
क्योंकि सोनिया दी के अनुसार तो मैं फुटबाल्ल खेलने गया हुआ था..

दरवाजा मॉम ने ही खोला…
और इस वक़्त मैं मॉम को और मॉम मुझे एक अलग ही नज़रिए से देख रहे थे…

मेरी नज़रें मॉम के उन मोटे-2 मुम्मो पर थी, जिन्हे कुछ देर पहले मैने नंगा देखा था..
नेहा द्वारा चूसते हुए देखा था…

और मॉम की नज़रें मेरी शॉर्ट्स के उपर थी, जिसमें मेरे उभरे हुए लंड की लाइन ऐसा फील करा रही थी जैसे मैने कोई खीरा छुपा रखा है अपनी टाँगो के बीच.

मैं अंदर आकर सोफे पर बैठ गया..
और मॉम मेरे लिए पानी लेकर आई…

पता नही क्यों पर मुझे लग रहा था की अंदर ही अंदर मॉम मुझे कुछ कहना चाहती है…

मैने मॉम से पूछा : “मॉम .आप अभी तक घर ही हो..क्लिनिक नही गये..”

मों : “हाँ बस..कुछ काम था…आज सोच रही हूँ की सोनिया के साथ कुछ देर मार्केट हो आऊँ..”

सोनिया ने जो प्यार दिया था शायद उसी का फल मिल रहा था उसे…
मॉम उसे शॉपिंग करवाने बाहर ले जा रही थी..

मैं : “ओक … गुड…एंजाय करना…”

मॉम ने मुझे देखा, जैसे कहना चाहती हो की वो तो कर ही चुके है.

और तभी सोनिया दी तैयार होकर नीचे आ गयी…

और मुझे देखकर उसने हाय बोला जैसे आज की तारीख में पहली बार मिल रही हो मुझसे..

कुछ ही देर में वो लोग मार्केट के लिए निकल गये और मैं घर में अकेला रह गया..
वो शाम से पहले आने वाले नही थे…
मैं मॉम के बारे मे सोचता हुआ सोफे पर लेट गया और टीवी देखने लगा..
मेरे मन में बस यही चल रहा था की मॉम के साथ कुछ करते हुए कैसा फील होगा.

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