वो भी उसके पीछे भागा पर उसने रूम में जाकर दरवाजा अंदर से लॉक कर लिया , वो बेचारा अपना सिर पकड़कर वही बैठ गया… उसकी समझ में नही आ रहा था की वो अब क्या करे… गुस्सा करे या शर्मिंदा होकर एक कोने में बैठ जाए…
लेकिन जो भी था, आज सोनिया ने वो सारे मैसेज देखकर उसकी प्राइवेट लाइफ को पूरा ख़त्म सा कर दिया था.
आगे चलकर वो ना जाने क्या-2 करेगी, ये सोचकर उसे डर लग रहा था.
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अब आगे
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वो ज़मीन पर बैठा सोच ही रहा था की उसकी मॉम वहां से निकलते हुए बोली : “अर्रे सोनू…. ऐसे नीचे क्यों बैठा है….अंदर जाओ… इट्स टाइम तो स्लीप ….”
सोनू : “मॉम …. वो ….. सोनिया….. अंदर….”
माँ : “ओफफो….. तुम दोनो ने पहले दिन ही लड़ाई शुरू कर दी….”
इतना कहकर वो आगे आई और दरवाजा खड़काकर बोली : “सोनिया…. सोनिया….. ओपन द डोर…..”
उन्हे ज़्यादा कहने की ज़रूरत नही पड़ी…. सोनिया ने तुरंत दरवाजा खोल दिया…और मॉम कुछ बोल पाती,उसने बड़ा ही भोला सा चेहरा बना लिया और बोली : “मॉम …. सोनू मुझे मार रहा था….इसलिए मैने डोर बंद कर लिया…”
सोनू तो उसकी चालाकी देखकर दंग सा रह गया….उसने तो सोचा भी नही था की उसकी बहन चालक भी बन चुकी है… पर वो बेचारा कुछ बोल ही नही पाया…उसे डर था की वो माँ को वो नॉटी बाय्स वाले मैसेज का सच ना बता दे…इसलिए मम्मी की फटकार सुनकर वो चुपचाप अंदर आ गया..
यहाँ मैं आपको बता दूँ की सोनू और सोनिया दोनो एक ही रूम में सोते थे…. ग्राउंड फ्लोर पर मॉम डेड का रूम था, ड्रॉयिंग और किचन भी…और एक गेस्ट रूम था जिसे मॉम ने क्लिनिक़ बना रखा था…अक्सर कई पेशेंट्स वो वहां देख लेती थी…वरना मार्केट में बने एक नर्सिंग होम में वो रैगुलर डॉक्टर थी…
सोनू चुपचाप अंदर आ गया और अपने बेड पर लेट गया…उसने अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया…सोनिया भी दरवाजा लॉक करके दूसरे बेड पर जाकर लेट गयी…
सोनू के मन में अपनी बहन का ज़्यादा डर नही था, डर था तो बस इस बात का की कल साक्षी क्या बात करेगी उससे, कैसे करेगी…. वो कैसे जवाब दे पाएगा… वगेरह-2..
वो ये सोच ही रहा था की पीछे से आकर सोनिया उसके बेड पर लेट गयी और उसकी पीठ से चिपक कर बड़े ही प्यार से बोली : “सॉरी भाई…. वो क्या था ना की मुझे पिछली बार वाली बात याद आई तो मैने सारे मैसेज देख डाले…”
उसके कहने का तरीका ही इतना मासूमियत से भरा था की सोनू का दिल पिघल गया..
पर साथ ही उसकी हालत भी खराब होने लगी… सोनिया जिस तरह उसकी पीठ पर अपना सीना दबा कर लेटी हुई थी उससे सोनू को ‘कुछ-कुछ’ हो रहा था..
क्योंकि गौरतलब बात ये थी की दोनो ने सिर्फ़ एक कॉटन की टी शर्ट ही पहनी हुई थी…इस वजह से उसके नन्हे उरोजों पर लगे भाले की नोक जैसे निप्पल उसे पीठ पर सॉफ महसूस हो रहे थे…उसका पूरा शरीर काँप सा गया..
वो शायद समझ चुकी थी, इसलिए शरारती टोन में उसने पूछा : “क्या हुआ… कुछ प्राब्लम है क्या…”
वो जान बूझकर अपनी दबिश उसकी पीठ पर ज़्यादा कर रही थी…. सोनू की तो समझ में नही आ रहा था की वो ऐसा क्यों कर रही है… क्या उसकी बहन उसे रिझाने की कोशिश कर रही है…. पर ये तो ग़लत है ना..
वो तुरंत बोला : “नही…कुछ भी तो नही… चल अब सो जा… गुड नाइट…. मुझे मॉर्निंग में जल्दी उठना है…”
सोनिया बेमन से उठी और जाते-2 बोली : “ठीक है ठीक है… लगता है साक्षी से मिलने की कुछ ज़्यादा ही जल्दी है…”
अब वो बेचारा उसे क्या बोलता…की साक्षी से मिलने की नही बल्कि अपना उभार छुपाने की उसे जल्दी है…
और जल्द ही उसे वो दिख भी गयी..
वो आज स्कूल ड्रेस में नही थी….आज उसकी बेडमींटन क्लास थी, इसलिए कैजुअल में आई थी वो.. दोनो की नज़रें मिली और दोनो ही मुस्कुरा दिए…
सोनू उसके पास पहुँचा और बड़े ही प्यार से उसे गुड मॉर्निंग कहा…. उसने भी मुस्कुरा कर अपना हाथ आगे करते हुए उसे विश किया..
सोनू वही बेंच पर उसके साथ बैठ गया… उसकी तो हिम्मत ही नही हो रही थी उससे कुछ कहने की…
साक्षी : “मुझे पता था,की तुम सामने आते ही ऐसे हो जाओगे…”
सोनू : “मैं…कैसा ??”
साक्षी ने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे दबाते हुए बोली : “अरे बुद्धू , कब सीखोगे….आजकल के लोग कितने फास्ट है…और तुम हो की कुछ समझते ही नही…”
बेचारे सोनू का बुरा हाल था…. साक्षी ने खुले आम उसका हाथ पकड़ा हुआ था… और बोले जा रही थी…उसे डर सा लग रहा था की स्कूल मे दूसरे लोग उसे देखेंगे तो क्या सोचेंगे…उसके दोस्त तो उसकी टाँग खींचना पूरे साल नही छोड़ेंगे…
पर वहां कोई नही था…और होता भी तो उनके स्कूल में तो ये आम बात थी…लगभग हर लड़की का कोई ना कोई बाय्फ्रेंड था…सिर्फ़ सोनू ही ऐसा था जिसकी कोई जी एफ नही थी..
अचानक साक्षी बोली : “वो देखो…..रेणु को….वो अभी हमसे एक क्लास पीछे है…लेकिन बाकी के हर मामले में आगे निकल चुकी है…”
रेणु काफ़ी एट्रेक्टिव थी…हर कोई उसे एक बार चलते हुए देख लेता तो आहें भरकर रह जाता…वो अपने छोटे-2 कूल्हे कुछ ज़्यादा ही मटका कर चलती थी…उन्होने देखा की वो अपने बी एफ के साथ जल्दी-2 चलती हुई स्कूल के पीछे वाले एरिया में जा रही है…ये एक ऐसा हिस्सा था जहाँ दो बिल्डिंगो के बीच काफ़ी पेड़ थे, और उनके बीच छुपकर अक्सर प्रेमी लड़के-लड़किया मज़े लिया करती थी…सोनू ने एक दो बार छुप कर वहां के नज़ारे देखे थे, पर बाद में कभी हिम्मत नही हुई उसकी…
साक्षी ने उसका हाथ पकड़ा और उसे लगभग घसीटती हुई उस तरफ ले गयी
”चलो ना…..देखते है,वो आख़िर रोज वहां क्या -2 करते है…”
सोनू का दिल भी धड़क रहा था, वो उसके पीछे चलता चला गया.
बिल्डिंग के पीछे जाकर उन्होने देखा की रेणु और उसका बी एफ एक दूसरे को चूम रहे है…
साक्षी की आँखे गुलाबी हो गयी वो देखकर….उसके हाथ का दबाव सोनू पर बढ़ सा गया…दोनो छुपकर उन्हे देखने लगे..
लड़के ने रेणु के बूब्स प्रेस करे..उसके उपर के 3 बटन खोलकर , उसकी ब्रा को नीचे करके उसने रेणु की नन्ही ब्रेस्ट को सक किया….वो सब देखकर सोनू का तो बुरा हाल था ही, साक्षी के दिल की धड़कने बुरी तहर से धड़क रही थी…
अचानक वो बोली : “तू….तुमने जो कल फोन पर कहा था…. उस…उसका जवाब सुनना चाहते हो….”
सोनू का दिल भी धड़क उठा….वो उसके थरथराते हुए होंठों को देखकर बोला : “हाँ …..बोलो…”
और उसने सोनू का हाथ पकड़कर खुद ही अपनी छाती पर रख दिया…और सिसक उठी
एक तो सोनू की जिंदगी का पहला चुम्मा और उपर से पहली बार वो किसी की ब्रेस्ट को पकड़ रहा था…
एक ही दिन में उसकी जवान होती जिंदगी में 2 झटके लग चुके थे…और वो भी उस लड़की के द्वारा जिसके बारे में सोच सोचकर उसने ना जाने कितनी बार मुठ मारी थी….आज वो खुद ही अपने आप को उसके उपर उड़ेल सी रही थी…साक्षी का मदमस्त शरीर अपनी बाहों में लेकर वो भी फूला नही समा रहा था…और ख़ासकर उसके मोटे-2 मुम्मों पर हाथ रखकर तो उसे मज़ा ही आ गया था….आज उसे पता चला था की ये मम्मे कितने मुलायम होते है…उन्हे दबाने में उसे सच में काफ़ी मज़ा आ रहा था…
अचानक स्कूल की घंटी बज गयी….पहला पीरियड स्टार्ट हो चुका था….रेणु और उसका बी एफ भी वापिस आने लगे…और ये दोनो भी अपनी क्लास में आ गये…
उसके बाद पूरा दिन दोनो एक दूसरे के साथ ही बैठे रहे…साक्षी तो उससे चिपक कर ऐसे बैठी थी जैसे उसके सिवा किसी और का हक ही नही रह गया सोनू पर…
इसी तरह पूरा टाइम बीत गया और स्कूल के बाद खुशी-2 सोनू वापिस घर आ गया…
इस वक़्त घर पर मॉम तो होती नही थी, पापा भी ऑफीस में थे….सोनू के पास शुरू से ही घर की चाबी रहती थी
वो बेग लेकर अपने रूम में आया तो उसके बाथरूम से शावर की आवाज़ आ रही थी…यानि उसकी बहन नहा रही थी
पर कमरे के फर्श पर बिखरे कपड़ों को देखकर उसका दिमाग़ भन्ने गया…
सोनिया के बिस्तर से लेकर बाथरूम तक उसके कपड़े बिखरे पड़े थे….उसकी शॉर्ट, टी शर्ट और लास्ट में उसकी पेंटी…
और उसके पहनने वाले कपड़े और टावल वहीं उसके बिस्तर पर पड़ा था….यानी वो अंदर नंगी गयी थी और उसे वो सब लेने के लिए बाहर ऐसे ही आना पड़ेगा…एक ही मिनट में सोनू के दिमाग़ में सब बातें घूम गयी…
एक तो वैसे ही साक्षी की वजह से उसका लंड सुबह से अब तक बैठने का नाम नही ले रहा था, उपर से ये सब देखकर उसके दिमाग़ में शैतान ने सिर उठाना शुरू कर दिया…
पर अगले ही पल उसने वो सब विचार अपने दिमाग़ से झटक डाले और कमरे से बाहर निकलता हुआ बोला : “नही…नही…ये ग़लत है…ये ग़लत है…”
वो दरवाजा बंद करके जैसे ही बाहर निकला तो उसे शावर बंद होने की आवाज़ आई…और साथ ही दरवाजा खुलने और सोनिया के गुनगुनाने की आवाज़ भी आई…
उसके पैर वहीँ जम कर रह गये…और वो जाते-2 वापिस पलट गया..




