वो अंदर ही अंदर खुश तो हुई पर उसने चोंकने का नाटक करते हुए कहा : “ये…ये कैसे….करू मैं ….तनवी…..ही … ही इस माय ब्रदर…. ये ग़लत है..”
तनवी : “ओ कोम ऑन ….. कुछ ग़लत नही है, अब इतना कुछ हो ही चुका है तो ये भी सही…आई मीन यू आर नोट फक्किंग युवर ब्रदर… इट्स ओन्ली ब्लो जॉब ….”
दोनो भाई बहनो की नज़रें मिली…
सोनू के चेहरे की खुशी छुपाए नही छुप रही थी…
पर वो कुछ बोला नही.
सोनिया ने थोड़ा और नाटक किया : “यार….आई नो की आज जो हम भाई बहन के बीच हुआ है ये हद से ज़्यादा था बट ये तो आउट ऑफ द लाइन हो जाएगा ना…”
तनवी ने इस बार उसकी एक ना सुनी और उसका हाथ पकड़कर ज़बरदस्ती सोनू के लंड पर रख दिया
और बोली : “मुझे कुछ नही सुनना, और वैसे भी, ये बात सिर्फ़ हम तीनो के बीच रहेगी… अब तूने मेरी इतनी हेल्प की है, ऐसे में तेरा भी तो मज़े लेना बनता ही है… तू बस आँखे बंद कर और अपने किसी भी पुराने बाय्फ्रेंड के बारे में सोचकर इसे सक्क कर ले… फिर देखियो, पता भी नही चलेगा…”
अब वो बेचारी ये नही जानती थी की उसका पुराना और नया, सिर्फ़ एक ही बाय्फ्रेंड है और वो है उसका खुद का भाई….सोनू.
सोनिया ने अपनी आँखे बंद कर ली, और अनमने मन से नीचे झुकने का नाटक करते हुए अपने रसीले होंठों को खोला…
ये वो पल था जब दोनो भाई बहन के दिलो की धड़कने रुक सी गयी थी…
बंद कमरे में अकेले वो सब करना उन्हे आसान लगा था पर इस तरह अपने रिश्तो की धज्जियाँ किसी और के सामने उड़ाते हुए उन दोनो का शरीर रोमांच से भरा हुआ था.

एक चिर-परिचित सी महक जैसे ही सोनिया के नथुनों से टकराई, वो नॉर्मल हो गयी और फिर उसी शिद्दत से अपने भाई के लंड को चूसने लगी जैसे कल रात को चूसा था…
जैसे अभी कुछ देर पहले तनवी चूस रही थी…
इन्फेक्ट सोनिया तो उससे भी ज़्यादा ज़ोर से चूस रही थी.
तनवी ने जब ये देखा तो उसे खुशी हुई…
उसे लगा की उसने अपनी फ्रेंड का वो क़र्ज़ अब उतार दिया है जो उसने अपने भाई की सेट्टिंग उसके साथ करने के लिए उसपर किया था.
सोनिया ने तनवी को देखा और सोनू का लंड मुँह से निकाल कर तनवी की तरफ लहरा दिया…
फिर तनवी उसे चूसने लगी..
और इस तरह, दोनो सहेलिया उस खिलोने से खेलती रही…
कभी सोनिया उसे चूसती कभी तनवी…
कभी एक लंड चूसती तो दूसरी उसकी बॉल्स… फिर वो बॉल्स उसे देकर वापिस लंड चूसने लगती
ऐसे करते-2 उन दोनो सहेलियों की प्यासी जीभों ने सोनू के लंड को ऐसी सिचुएशन में पहुँचा दिया जिसमें सोनू के लंड ने एक ज्वालामुखी का रूप ले लिया….
और जब वो फटा तो दोनो के चेहरों पर सोनू के लंड का लावा ऐसे गिरा की उसने दोनो के चेहरे को ढक सा दिया…
एक के बाद एक निकली पिचकारियों ने दोनो सहेलियों के चेहरे पर सफेद लावे की चादर सी बिछा दी..
और निगल कर उसे गले से नीचे उतार लिया .
और आख़िरी में, सोनिया ने एक बार फिर से लंड को अपने मुँह में लेकर, उसमे फंसी आख़िरी बूँदों को भी निचोड़ कर निगल लिया…
और फिर सोनू की आँखो मे देखते हुए मन ही मन बोली : ”देख लेना भाई, एक दिन इसे अपने अंदर भी लूँगी…”
सोनू बेचारा अभी भी अपने सुपर ऑर्गॅज़म से उभरने की कोशिश कर रहा था…
और सोच रहा था की जब लंड की चुसाई इन्होने ऐसी की है तो चूत की चुदाई कैसी होगी इनके साथ…
बस वो आने वाले टाइम को , बंद आँखो से देखते हुए, गहरी साँसे लेने लगा.
आज वो दोनो भाई बहन एक कदम और आगे बढ़ चुके थे.
अपनी चालाकी से उन्होने कैसे तनवी को भी अपने ग्रूप में शामिल कर लिया था,उसपर दोनो को काफ़ी खुशी हो रही थी..
कुछ देर बाद उनकी मॉम भी आ गयी…
शाम को सोनू अपने दोस्त के पास चला गया और डिन्नर के वक़्त ही लौटा..
आने के बाद उसके पापा ने नॉर्मल सी स्कूल की बातें पूछी और उसे मन लगाकर पढ़ने की नसीहत भी दी…
स्कूल के अलावा घर पर भी प्रैक्टिस करने को कहा.
उसने तिरछी नज़रों से सोनिया की तरफ देखते हुए कहा : “यू डोंट वरी पापा, जब से सोनिया दी आई है, मेरी प्रैक्टिस अच्छे से चल रही है…”
पापा ने ‘गुड’ कहा और सोनिया को ऐसे ही अपने भाई की मदद करते रहने के लिए प्रोत्साहित किया..
दोनो भाई बहन मन ही मन एक दूसरे को देखकर मुस्कुराए जा रहे थे और सोच रहे थे की इन्हे अगर पता चल जाए की वो कौन सी प्रैक्टिस की बात कर रहे है तो उनकी बुरी हालत कर देंगे.
रात को अपने बेडरूम में पहुँचकर सोनिया ने फिर से एक बार अपनी सैक्सी ड्रेस पहन ली और हमेशा की तरह वो एक बॉम्ब लग रही थी..
और बाथरूम से निकलकर वो सीधा सोनू के बेड पर ही आ गयी क्योंकि आज जो भी उनके बीच हुआ था उसके बाद तो अलग बेड पर सोना बिल्कुल ‘ग़लत’ था.
और आते ही वो अपनी नर्म छातियों को उसकी चेस्ट पर रखकर एक गहरी स्मूच में डूब गयी… शायद वो फेस वॉश लगाकर और ब्रश करके आई थी…इसलिए उसमें से बड़ी अच्छी वाली खुश्बू आ रही थी.
आज दिन में जो मेहनत उन्होने तनवी के साथ मिल कर की थी उसके बाद अभी किस्स के अलावा कुछ और करने का तो सवाल ही नही उठता था…
हालाँकि सोनिया के हाथ किस्स करते हुए सरक कर अपने भाई के लंड तक आए भी थे पर सोनू ने उसे बड़े प्यार से परे कर दिया…
बुरी तरह से सूजा हुआ था उसका लंड इस वक़्त. ऐसे में कुछ करना मुश्किल था …
सोनिया भी बस उपरी मन से वो चेक कर रही थी वरना कुछ करने का तो उसका भी मन नही था…
एक दिन में जितना सेटिसफेक्शन इंसानी जिस्म को चाहिए होता है, उससे ज़्यादा मिल चुका था आज के लिए.
इसलिए कुछ एक्सट्रा करने की इच्छा ही नही रह गयी थी उनमें.





